स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 का परिचय
स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 (FoF 2.0) एक सरकारी समर्थित निवेश योजना है, जिसे 2024 में स्टार्टअप इंडिया एक्शन प्लान (2016) के तहत Department for Promotion of Industry and Internal Trade (DPIIT), वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया है। इस फंड का कुल आकार ₹10,000 करोड़ है, जिसे 16वीं और 17वीं वित्त आयोग की अवधि में खर्च किया जाएगा। यह फंड सीधे स्टार्टअप्स में निवेश नहीं करता, बल्कि SEBI-रजिस्टर्ड Alternative Investment Funds (AIFs) के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से निवेश करता है। इसका कार्यान्वयन Small Industries Development Bank of India (SIDBI) के द्वारा किया जाता है।
FoF 2.0 का मकसद नवाचार-आधारित विनिर्माण और लंबी अवधि वाली तकनीक वाले स्टार्टअप्स को वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना है, जो पारंपरिक रूप से वेंचर कैपिटल की कमी से जूझते हैं। यह रणनीतिक पहल सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था — स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र, वेंचर कैपिटल, सरकारी योजनाएं।
- GS पेपर 2: शासन — SEBI, SIDBI और DPIIT जैसे नियामक संस्थाओं की भूमिका।
- निबंध: आर्थिक सुधार और नवाचार-आधारित विकास।
FoF 2.0 का कानूनी और संस्थागत ढांचा
FoF 2.0, स्टार्टअप इंडिया एक्शन प्लान के तहत संचालित होता है, जो स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए बनाया गया था। यह Securities and Exchange Board of India (Alternative Investment Funds) Regulations, 2012 के अनुरूप है, जो भारत में AIFs के पंजीकरण और संचालन को नियंत्रित करता है। इससे फंड के पारदर्शिता और सुशासन की गारंटी मिलती है।
- DPIIT: योजना की नीति निर्धारण और निगरानी करता है।
- SIDBI: कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में फंड को पात्र AIFs तक पहुंचाने का जिम्मा।
- SEBI: AIFs के नियामक के रूप में नियमों का पालन सुनिश्चित करता है।
- Venture Capital Investment Committee (VCIC): निवेश के लिए योग्य AIFs का मूल्यांकन और सिफारिश करता है।
- Empowered Committee (EC): DPIIT सचिव की अध्यक्षता में योजना की निगरानी और समीक्षा करता है।
FoF 2.0 का आर्थिक तर्क और प्रभाव
₹10,000 करोड़ के इस फंड का उद्देश्य नवाचार-आधारित विनिर्माण और लंबी अवधि वाली तकनीकों वाले स्टार्टअप्स के लिए वेंचर कैपिटल की कमी को पूरा करना है। 2016 में शुरू हुआ FoF 1.0 इसी आकार का था, जिसने 2023 तक ₹35,000 करोड़ से अधिक निजी निवेश जुटाए, जो इसके प्रभाव और सफलता को दर्शाता है (DPIIT वार्षिक रिपोर्ट 2023)।
भारत का स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र विश्व में तीसरा सबसे बड़ा है, जो GDP में लगभग 3% का योगदान देता है और 45 लाख से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करता है (NASSCOM 2023)। नवाचार-आधारित विनिर्माण स्टार्टअप्स में वार्षिक 12% की वृद्धि दर दर्ज की गई है, जो आर्थिक बदलाव की संभावनाओं को उजागर करता है (आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24)।
| पैरामीटर | FoF 1.0 (2016-2023) | FoF 2.0 (2024-2030) |
|---|---|---|
| कोरपस | ₹10,000 करोड़ | ₹10,000 करोड़ |
| पूंजी जुटाई गई | ₹35,000 करोड़+ | लक्ष्य: ₹40,000 करोड़+ |
| कार्यान्वयन एजेंसी | SIDBI | SIDBI |
| फोकस क्षेत्र | व्यापक स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र | नवाचार-आधारित विनिर्माण, लंबी अवधि वाली तकनीक |
| नियामक ढांचा | SEBI AIF नियमावली, 2012 | SEBI AIF नियमावली, 2012 |
तुलनात्मक अध्ययन: भारत का FoF 2.0 और इज़राइल का योज़्मा प्रोग्राम
भारत का FoF 2.0 और इज़राइल का योज़्मा प्रोग्राम (1990 के दशक) दोनों का उद्देश्य सरकारी फंड के जरिए निजी निवेश को बढ़ावा देना है, लेकिन इनके संचालन के तरीके अलग हैं।
- भारत का FoF 2.0: SEBI-रजिस्टर्ड AIFs के माध्यम से अप्रत्यक्ष निवेश करता है, निजी फंड मैनेजरों की मदद से पूंजी लगाता है।
- इज़राइल का योज़्मा: निजी वेंचर कैपिटलिस्ट के साथ सीधे सह-निवेश करता है, निजी निवेशकों के साथ इक्विटी शेयर करता है।
- प्रभाव: योज़्मा ने एक दशक में वेंचर कैपिटल फंडिंग में 30 गुना वृद्धि की, जिससे इज़राइल को 'स्टार्टअप नेशन' के रूप में स्थापित किया गया (OECD रिपोर्ट 2020)।
- शासन: भारत का मॉडल VCIC और EC के माध्यम से नियामक निगरानी और जोखिम प्रबंधन पर जोर देता है, जबकि योज़्मा ने सरकार-निजी साझेदारी को सीधे लागू किया।
FoF 2.0 के क्रियान्वयन में चुनौतियां
FoF 2.0 पूंजी उपलब्धता बढ़ाता है, लेकिन शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स, खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में, तक इसका प्रभाव सीमित रह सकता है। स्थापित AIFs और जोखिम से बचने वाली निवेश समितियों पर निर्भरता से जमीनी स्तर के नवाचारों तक पहुंच कम हो रही है। इससे नए स्टार्टअप्स को फंडिंग में बाधा मिल सकती है।
- अधिकांश AIFs मेट्रो शहरों में केंद्रित हैं, जिससे गैर-मेट्रो क्षेत्रों में पहुंच सीमित।
- VCIC के सदस्यों में जोखिम से बचाव की प्रवृत्ति, जो उच्च जोखिम वाले शुरुआती स्टार्टअप्स को बाहर कर सकती है।
- अप्रत्यक्ष निवेश मॉडल के कारण पूंजी प्रवाह में देरी, जो सीधे अनुदान या बीज फंडिंग योजनाओं की तुलना में धीमा है।
महत्त्व और आगे की राह
- FoF 2.0 रणनीतिक रूप से ₹10,000 करोड़ जुटाकर ₹40,000 करोड़ से अधिक निजी निवेश को प्रोत्साहित करता है, जिससे भारत के स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलती है।
- नवाचार-आधारित विनिर्माण को समर्थन देना, आत्मनिर्भर भारत के तहत तकनीकी स्वावलंबन के लक्ष्य से मेल खाता है।
- कमजोरियों को दूर करने के लिए शुरुआती स्टार्टअप्स और क्षेत्रीय पहुंच के लिए पूरक योजनाएं मजबूत करनी होंगी।
- टियर-2 और टियर-3 शहरों में AIFs की क्षमता बढ़ाकर वेंचर कैपिटल की पहुंच को लोकतांत्रिक बनाया जा सकता है।
- VCIC के जोखिम मापदंडों की समय-समय पर समीक्षा से संतुलित जोखिम लेने को प्रोत्साहन मिल सकता है, जो नवाचार को बढ़ावा देगा।
- FoF 2.0 सीधे स्टार्टअप्स में सरकारी फंड निवेश करता है।
- SIDBI FoF 2.0 की कार्यान्वयन एजेंसी है।
- FoF 2.0 SEBI Alternative Investment Funds Regulations, 2012 के तहत संचालित होता है।
- योज़्मा प्रोग्राम में निजी वेंचर कैपिटलिस्ट के साथ सीधे सह-निवेश किया गया।
- भारत का FoF 2.0 बिना मध्यस्थों के सीधे स्टार्टअप्स में निवेश करता है।
- योज़्मा ने एक दशक में इज़राइल में वेंचर कैपिटल फंडिंग में 30 गुना वृद्धि की।
मुख्य प्रश्न
स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 नवाचार-आधारित विनिर्माण स्टार्टअप्स को मिलने वाली वित्तीय चुनौतियों को कैसे दूर करता है, इसका आलोचनात्मक विश्लेषण करें। इसमें शामिल संस्थागत तंत्रों पर चर्चा करें और योजना में मौजूद कमियों को दूर करने के उपाय सुझाएं।
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 3 – आर्थिक विकास और औद्योगिक नीति।
- झारखंड का नजरिया: रांची और जमशेदपुर जैसे झारखंड के उभरते स्टार्टअप हब FoF 2.0 के नवाचार-आधारित विनिर्माण पर ध्यान केंद्रित करने से लाभान्वित हो सकते हैं, खासकर खनन और धातु उद्योग में।
- मेन प्वाइंटर: FoF 2.0 की भूमिका को झारखंड के स्थानीय उद्यमिता और तकनीकी अपनाने को बढ़ावा देने में उजागर करें।
स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य ₹10,000 करोड़ को SEBI-रजिस्टर्ड Alternative Investment Funds के माध्यम से जुटाकर नवाचार-आधारित विनिर्माण और लंबी अवधि वाली तकनीक वाले स्टार्टअप्स में अप्रत्यक्ष निवेश करना है।
FoF 2.0 योजना को लागू करने की जिम्मेदारी किसके पास है?
Small Industries Development Bank of India (SIDBI) FoF 2.0 की कार्यान्वयन एजेंसी है, जो पात्र AIFs को फंड वितरित करता है।
FoF 2.0 सीधे सरकारी अनुदान से कैसे अलग है?
FoF 2.0 सीधे स्टार्टअप्स को अनुदान नहीं देता, बल्कि SEBI-रजिस्टर्ड AIFs के माध्यम से अप्रत्यक्ष निवेश करता है, जबकि सीधे अनुदान सीधे स्टार्टअप्स को दिया जाता है।
FoF 2.0 के संचालन के लिए कौन सा नियामक ढांचा है?
FoF 2.0, Securities and Exchange Board of India (Alternative Investment Funds) Regulations, 2012 के तहत संचालित होता है, जो AIFs के पंजीकरण और प्रबंधन को नियंत्रित करता है।
FoF 2.0 के क्रियान्वयन में मुख्य कमियां क्या हैं?
मुख्य कमियों में टियर-2 और टियर-3 शहरों में शुरुआती स्टार्टअप्स तक सीमित पहुंच, जोखिम से बचने वाली निवेश समितियां, और स्थापित AIFs पर निर्भरता शामिल हैं, जो जमीनी नवाचारों को बाहर कर सकती हैं।
आधिकारिक स्रोत और आगे पढ़ाई के लिए
स्रोत: LearnPro Editorial | सामान्य अध्ययन | प्रकाशित: 14 April 2026 | अंतिम अपडेट: 26 April 2026
लर्नप्रो संपादकीय मानकों के बारे में
लर्नप्रो की संपादकीय सामग्री सिविल सेवा तैयारी में अनुभवी विषय विशेषज्ञों द्वारा शोधित और समीक्षित है। हमारे लेख सरकारी स्रोतों, NCERT पाठ्यपुस्तकों, मानक संदर्भ सामग्री और प्रतिष्ठित प्रकाशनों जैसे द हिंदू, इंडियन एक्सप्रेस और PIB से लिए गए हैं।
सामग्री को नवीनतम पाठ्यक्रम परिवर्तनों, परीक्षा पैटर्न और वर्तमान घटनाक्रमों के अनुसार नियमित रूप से अपडेट किया जाता है। सुधार या प्रतिक्रिया के लिए admin@learnpro.in पर संपर्क करें।
