अपडेट

SMOPS-2026 का परिचय

SMOPS-2026 (Space-based Maritime Observation and Positioning System) भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसे चौथी तिमाही 2026 तक लागू करने की योजना है। इसके तहत लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में तीन समर्पित समुद्री निगरानी उपग्रह लॉन्च किए जाएंगे, ताकि भारत के लगभग 23 लाख वर्ग किलोमीटर के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में समुद्री क्षेत्र की जागरूकता (MDA) को बेहतर बनाया जा सके। इस परियोजना का नेतृत्व भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) कर रहा है, जिसमें भारतीय नौसेना, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की रणनीतिक भागीदारी और IN-SPACe की नियामक निगरानी शामिल है। SMOPS-2026 का उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलती सुरक्षा चुनौतियों का सामना करते हुए वास्तविक समय में Automatic Identification System (AIS) ट्रैकिंग और Synthetic Aperture Radar (SAR) डेटा फ्यूजन के जरिए समुद्री अंधे क्षेत्रों को कम करना और जहाजों की पहचान की सटीकता बढ़ाना है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: सुरक्षा चुनौतियां, रक्षा में विज्ञान और प्रौद्योगिकी, भारतीय अंतरिक्ष नीति
  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध, हिंद-प्रशांत में समुद्री सुरक्षा
  • निबंध: देशीय अंतरिक्ष क्षमताओं के माध्यम से भारत की रणनीतिक स्वायत्तता

SMOPS-2026 के लिए कानूनी और संवैधानिक ढांचा

Space Activities Act, 2023 भारत में सभी अंतरिक्ष गतिविधियों को नियंत्रित करता है, जिसमें उपग्रह लॉन्च और संचालन शामिल हैं। इस अधिनियम की Section 4 (Licensing) उपग्रह लाइसेंसिंग और Section 9 डेटा सुरक्षा प्रावधानों के तहत SMOPS-2026 उपग्रह राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा गोपनीयता मानकों का पालन सुनिश्चित करते हैं। SMOPS से संबंधित उपग्रह संचार लाइसेंसिंग Indian Telegraph Act, 1885 की धारा 4 के अंतर्गत आती है। इसके अलावा, भारतीय संविधान के Article 51A(g) के तहत नागरिकों और राज्य की पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी है, जो बाहरी अंतरिक्ष संसाधनों के सतत उपयोग को भी कवर करता है, जिससे SMOPS-2026 पर्यावरणीय सुरक्षा से मेल खाता है।

  • Space Activities Act, 2023: अंतरिक्ष संपत्तियों के लिए लाइसेंसिंग और डेटा सुरक्षा का प्रबंधन।
  • Indian Telegraph Act, 1885: उपग्रह संचार लाइसेंसिंग का नियमन।
  • Article 51A(g): पर्यावरण संरक्षण की संवैधानिक जिम्मेदारी, जिसमें अंतरिक्ष की स्थिरता शामिल है।

SMOPS-2026 के आर्थिक पहलू

वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र का बजट ₹14,000 करोड़ तक बढ़ाया गया है, जिसमें SMOPS-2026 के लिए ₹1,200 करोड़ विशेष रूप से आवंटित किए गए हैं। यह दर्शाता है कि सरकार समुद्री निगरानी को प्राथमिकता दे रही है। वैश्विक समुद्री उपग्रह सेवा बाजार 2026 तक USD 5.2 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है, जिसमें भारत देशी तकनीक के जरिए 10% हिस्सेदारी हासिल करने का लक्ष्य रखता है। बेहतर समुद्री जागरूकता से शिपिंग बीमा लागत में सालाना 5-7% की कमी आने की संभावना है, जो भारत के $160 बिलियन के समुद्री व्यापार को सकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा।

  • बजट आवंटन: ₹14,000 करोड़ के अंतरिक्ष बजट में से ₹1,200 करोड़ SMOPS-2026 के लिए।
  • बाजार अनुमान: 2026 तक USD 5.2 बिलियन का वैश्विक समुद्री उपग्रह बाजार।
  • आर्थिक लाभ: शिपिंग बीमा लागत में 5-7% की कमी।
  • व्यापार प्रभाव: बेहतर निगरानी से $160 बिलियन के समुद्री व्यापार का संरक्षण।

संस्थागत भूमिका और सहयोग

ISRO SMOPS-2026 के तहत उपग्रहों के डिजाइन, लॉन्च और संचालन का नेतृत्व करता है। भारतीय नौसेना इसका मुख्य उपयोगकर्ता है, जो रणनीतिक समुद्री सुरक्षा और सामरिक संचालन के लिए वास्तविक समय डेटा का इस्तेमाल करती है। DRDO SAR और AIS सहित उन्नत सेंसर एकीकरण और डेटा फ्यूजन तकनीक विकसित करता है। IN-SPACe निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देता है, जिसे नई लाइसेंसिंग व्यवस्था के तहत 30% तक बढ़ने की उम्मीद है। रक्षा मंत्रालय (MoD) SMOPS डेटा के रणनीतिक तैनाती और सुरक्षा प्रोटोकॉल की निगरानी करता है, जिससे राष्ट्रीय रक्षा लक्ष्यों के साथ तालमेल बना रहता है।

  • ISRO: उपग्रह डिजाइन, लॉन्च और संचालन।
  • भारतीय नौसेना: समुद्री क्षेत्र जागरूकता के लिए अंतिम उपयोगकर्ता।
  • DRDO: सेंसर और डेटा फ्यूजन तकनीक विकास।
  • IN-SPACe: निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए नियामक सुविधा।
  • MoD: रणनीतिक निगरानी और सुरक्षा प्रबंधन।

तकनीकी विवरण और डेटा क्षमताएं

SMOPS-2026 के तहत तीन LEO उपग्रह लॉन्च किए जाएंगे, जो भारत के EEZ के 90% हिस्से को कवर करेंगे। यह प्रणाली AIS ट्रैकिंग के साथ समुद्री अंधे क्षेत्रों को वर्तमान स्तर से 60% कम कर देगी। SAR और AIS डेटा फ्यूजन के जरिए जहाजों की पहचान 95% तक सटीक होगी। यह बहु-सेंसर प्रणाली गैर-सहयोगी जहाजों की पहचान को बेहतर बनाएगी और समुद्री स्थिति की जानकारी को नागरिक और सैन्य दोनों ऑपरेशनों के लिए अधिक प्रभावी बनाएगी।

  • उपग्रह: चौथी तिमाही 2026 तक 3 समुद्री निगरानी उपग्रह।
  • कवरेज: भारत के EEZ का 90% (~2.3 मिलियन वर्ग किलोमीटर)।
  • अंधे क्षेत्र में कमी: मौजूदा सिस्टम की तुलना में 60% सुधार।
  • डेटा फ्यूजन: SAR और AIS का संयोजन, 95% जहाज पहचान सटीकता।

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत का SMOPS-2026 बनाम चीन के समुद्री निगरानी उपग्रह

पैरामीटरभारत (SMOPS-2026)चीन (समुद्री निगरानी उपग्रह समूह)
संचालन की शुरुआतयोजना अनुसार Q4 20262022
उपग्रहों की संख्या35
समुद्री क्षेत्र कवरेजEEZ का 90%समुद्री क्षेत्र का 95%
प्रयुक्त तकनीकSAR + AIS डेटा फ्यूजनSAR + AIS + ऑप्टिकल इमेजिंग
अंधे क्षेत्र में कमी60%स्पष्ट रूप से मापा नहीं गया
रणनीतिक फोकसदेशी तकनीक, बहु-एजेंसी डेटा समाकलनसंचालन दक्षता, अवैध मछली पकड़ने में 40% कमी
निजी क्षेत्र की भागीदारीIN-SPACe लाइसेंसिंग के तहत 30% वृद्धिसीमित, राज्य नियंत्रित

भारत के समुद्री निगरानी ढांचे में महत्वपूर्ण कमियां

हालांकि भारत के उपग्रह तकनीक उन्नत हैं, लेकिन देश में अभी तक एक पूर्ण रूप से एकीकृत समुद्री डेटा फ्यूजन सेंटर नहीं बना है जो नागरिक और सैन्य दोनों स्रोतों से वास्तविक समय में डेटा एकत्र कर सके। इससे त्वरित निर्णय लेने और समन्वित प्रतिक्रिया में बाधा आती है, जबकि चीन के समुद्री निगरानी कमांड सेंटर ने इस कमी को प्रभावी ढंग से पूरा कर लिया है। इस अंतर को पाटना SMOPS-2026 की कार्यक्षमता को अधिकतम करने और व्यापक समुद्री जागरूकता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

महत्त्व और आगे की राह

  • SMOPS-2026 देशी उपग्रह तकनीक और बहु-एजेंसी सहयोग के जरिये भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करता है।
  • बेहतर समुद्री जागरूकता राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक हितों और पर्यावरण निगरानी का समर्थन करती है।
  • एक वास्तविक समय समुद्री डेटा फ्यूजन सेंटर की स्थापना से निर्णय लेने और संचालन समन्वय में सुधार होगा।
  • IN-SPACe के नियामक ढांचे के तहत निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने से नवाचार तेज होगा और लागत कम होगी।
  • सेंसर तकनीक में निरंतर उन्नयन और उपग्रह समूह का विस्तार क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों से मुकाबला करने के लिए जरूरी होगा।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
SMOPS-2026 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. SMOPS-2026 उपग्रह जहाजों की ट्रैकिंग के लिए Synthetic Aperture Radar (SAR) और Automatic Identification System (AIS) डेटा फ्यूजन का उपयोग करेंगे।
  2. Space Activities Act, 2023 के तहत सभी समुद्री निगरानी डेटा अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ साझा करना अनिवार्य है।
  3. SMOPS-2026 भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के 90% हिस्से को कवर करने का लक्ष्य रखता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि SMOPS-2026 SAR और AIS डेटा फ्यूजन का उपयोग करता है। कथन 2 गलत है; Space Activities Act, 2023 में समुद्री निगरानी डेटा का अनिवार्य अंतरराष्ट्रीय साझाकरण नहीं है। कथन 3 सही है क्योंकि SMOPS-2026 90% EEZ कवर करने का लक्ष्य रखता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
SMOPS-2026 में संस्थागत भूमिकाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. ISRO SMOPS-2026 के तहत उपग्रह डिजाइन, लॉन्च और संचालन के लिए जिम्मेदार है।
  2. IN-SPACe SMOPS-2026 से जुड़ी अंतरिक्ष गतिविधियों में निजी क्षेत्र की भागीदारी को नियंत्रित और बढ़ावा देता है।
  3. SMOPS-2026 डेटा के रणनीतिक तैनाती और सुरक्षा प्रोटोकॉल की निगरानी पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय करता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि ISRO उपग्रह डिजाइन और संचालन का नेतृत्व करता है। कथन 2 भी सही है; IN-SPACe निजी क्षेत्र की भागीदारी को नियंत्रित करता है। कथन 3 गलत है; रणनीतिक तैनाती और सुरक्षा प्रोटोकॉल की निगरानी रक्षा मंत्रालय करता है, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय नहीं।

मुख्य प्रश्न

SMOPS-2026 के माध्यम से भारत की समुद्री क्षेत्र जागरूकता को बढ़ाने की रणनीतिक महत्ता का मूल्यांकन करें और इसके हिंद-प्रशांत क्षेत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा तथा आर्थिक हितों पर प्रभाव पर चर्चा करें। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 - विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पेपर 3 - सुरक्षा और रक्षा
  • झारखंड का नजरिया: झारखंड के बढ़ते IT और एयरोस्पेस सेक्टर को IN-SPACe के ढांचे के तहत निजी क्षेत्र की भागीदारी से लाभ होगा, जो SMOPS-2026 का समर्थन करता है।
  • मेन पॉइंटर्स: भारत की रणनीतिक स्वायत्तता, देशी तकनीक की भूमिका और आर्थिक लाभों को उजागर करते हुए उत्तर तैयार करें, और झारखंड के उभरते एयरोस्पेस और तकनीकी क्षेत्र से जोड़ें।
SMOPS-2026 का मुख्य उद्देश्य क्या है?

SMOPS-2026 का उद्देश्य तीन समुद्री निगरानी उपग्रहों को तैनात कर भारत के EEZ के 90% हिस्से में जहाजों की वास्तविक समय पहचान और ट्रैकिंग प्रदान करना है, जिससे रणनीतिक और आर्थिक सुरक्षा बेहतर हो।

SMOPS-2026 में जहाज पहचान के लिए कौन-कौन सी तकनीकें शामिल हैं?

SMOPS-2026 में Synthetic Aperture Radar (SAR) और Automatic Identification System (AIS) डेटा फ्यूजन शामिल है, जो 95% सटीकता के साथ जहाजों की पहचान सुनिश्चित करता है, जिसमें गैर-सहयोगी जहाज भी शामिल हैं।

SMOPS-2026 उपग्रहों के संचालन को कौन-कौन से कानूनी प्रावधान नियंत्रित करते हैं?

Space Activities Act, 2023 SMOPS-2026 के लिए लाइसेंसिंग और डेटा सुरक्षा को नियंत्रित करता है, जबकि Indian Telegraph Act, 1885 उपग्रह संचार लाइसेंसिंग के लिए लागू होता है। Article 51A(g) पर्यावरण संरक्षण और अंतरिक्ष संसाधनों के सतत उपयोग की जिम्मेदारी तय करता है।

SMOPS-2026 भारत के आर्थिक हितों में कैसे योगदान देता है?

बेहतर समुद्री क्षेत्र जागरूकता से SMOPS-2026 शिपिंग बीमा लागत में 5-7% की वार्षिक कमी लाने की उम्मीद है, जो $160 बिलियन के भारत के समुद्री व्यापार को सुरक्षित करने और भारतीय शिपिंग की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में मदद करेगा।

SMOPS-2026 से जुड़ी भारत की समुद्री निगरानी प्रणाली में सबसे बड़ी कमी क्या है?

भारत में अभी तक एक ऐसा पूर्ण एकीकृत समुद्री डेटा फ्यूजन सेंटर नहीं है जो नागरिक और सैन्य दोनों स्रोतों से वास्तविक समय में डेटा एकत्रित करके तेजी से निर्णय लेने और समन्वित प्रतिक्रिया को सक्षम कर सके, जो चीन के समुद्री निगरानी कमांड सेंटर में उपलब्ध है।

हमारे कोर्स

72+ बैच

हमारे कोर्स
Contact Us