परिचय: नियुक्ति की प्रक्रिया और संस्थागत भूमिका
संयुक्त राष्ट्र महासचिव (UNSG) की नियुक्ति पांच वर्ष के कार्यकाल के लिए होती है, जिसे एक बार फिर बढ़ाया जा सकता है, यह व्यवस्था Article 97 के तहत UN चार्टर (1945) में निहित है। नियुक्ति दो चरणों में होती है: सबसे पहले सुरक्षा परिषद एक उम्मीदवार की सिफारिश करती है, फिर महासभा औपचारिक रूप से उसे नियुक्त करती है। सुरक्षा परिषद में कम से कम पंद्रह सदस्यों में से नौ सकारात्मक वोट जरूरी होते हैं, साथ ही पांच स्थायी सदस्यों (P5) — अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन — में से किसी का वीटो नहीं होना चाहिए। यह प्रक्रिया सुरक्षा परिषद के भीतर चयन को केंद्रीत करती है, जो स्थायी सदस्यों के भू-राजनीतिक हितों को प्राथमिकता देती है, न कि पारदर्शी या योग्यता आधारित चुनाव को।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध — संयुक्त राष्ट्र की संरचना और कार्यप्रणाली, UNSC और UNGA की भूमिका
- GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संगठन — नियुक्ति प्रक्रिया, वीटो शक्ति का प्रभाव
- निबंध: वैश्विक शासन और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार
नियुक्ति के लिए कानूनी और संस्थागत ढांचा
Article 97 स्पष्ट करता है कि महासचिव की नियुक्ति सुरक्षा परिषद की सिफारिश पर महासभा द्वारा की जाती है। सुरक्षा परिषद के मतदान नियम Article 27 के तहत नौ सकारात्मक वोट और P5 सदस्यों के वीटो की अनुपस्थिति की मांग करते हैं। इसका मतलब है कि P5 सदस्यों को चयन प्रक्रिया में वीटो का अधिकार प्राप्त है, जिससे वे अपने भू-राजनीतिक हितों के अनुरूप उम्मीदवार को ही मंजूरी देते हैं।
महासभा की भूमिका औपचारिक और मुख्यतः प्रतीकात्मक है, क्योंकि वह बिना सुरक्षा परिषद की सिफारिश के किसी उम्मीदवार को नियुक्त नहीं कर सकती। सचिवालय, जिसके प्रमुख महासचिव होते हैं, संयुक्त राष्ट्र के दैनिक कामकाज का संचालन करता है और सुरक्षा परिषद तथा महासभा द्वारा बनाए गए नीतिगत निर्देशों को लागू करता है।
- सुरक्षा परिषद अनौपचारिक स्ट्रॉ पोल आयोजित करती है ताकि सदस्य देशों का समर्थन मापा जा सके, यह प्रथा 1980 के दशक से चली आ रही है और 2021 के चयन चक्र में भी इसका इस्तेमाल हुआ।
- संयुक्त राष्ट्र के स्थापना से लेकर अब तक कोई महिला महासचिव नहीं बनी है, जो लैंगिक प्रतिनिधित्व की कमी को दर्शाता है।
- क्षेत्रीय रोटेशन, हालांकि अनौपचारिक है, उम्मीदवारों को प्रभावित करता है; वर्तमान महासचिव एंटोनियो गुटेरेस पूर्वी यूरोप (पुर्तगाल) से हैं।
महासचिव का आर्थिक और वैश्विक विकास पर प्रभाव
महासचिव संयुक्त राष्ट्र सचिवालय का नेतृत्व करते हैं और वैश्विक विकास एजेंडों की दिशा निर्धारित करते हैं। संयुक्त राष्ट्र का 2023-24 का द्विवार्षिक बजट लगभग 7.1 अरब डॉलर है, जिसमें नियमित बजट ($3.12 अरब) और शांति स्थापना ऑपरेशन्स ($3.98 अरब) शामिल हैं, जो UN General Assembly Resolution A/RES/77/244 के अनुसार है। महासचिव की नेतृत्व क्षमता अंतरराष्ट्रीय सहायता, सतत विकास लक्ष्यों और शांति स्थापना प्राथमिकताओं को प्रभावित करती है, जो वैश्विक निवेश और सहायता प्रवाहों में ट्रिलियनों डॉलर के प्रभाव से जुड़ी हैं।
- महासचिव की नीतिगत प्राथमिकताएं दाता देशों की सहायता प्रतिबद्धताओं और बहुपक्षीय विकास वित्तपोषण को आकार दे सकती हैं।
- महासचिव की प्रशासनिक दक्षता और कूटनीतिक भागीदारी संयुक्त राष्ट्र की संघर्ष समाधान और मानवीय सहायता में प्रभावशीलता को प्रभावित करती है।
भू-राजनीतिक पहलू और P5 वीटो की भूमिका
सुरक्षा परिषद में P5 सदस्यों की वीटो शक्ति चयन प्रक्रिया में एक संरचनात्मक बाधा पैदा करती है, जो केवल उन्हीं उम्मीदवारों को प्राथमिकता देती है जिन्हें ये सदस्य स्वीकार करते हैं। इससे गैर-स्थायी सदस्यों या कम प्रतिनिधित्व वाले क्षेत्रों के योग्य उम्मीदवारों को बाहर रखा जाता है। यह समावेशिता और पारदर्शिता के सिद्धांतों के खिलाफ जाता है।
वीटो शक्ति सुनिश्चित करती है कि महासचिव P5 के रणनीतिक हितों के अनुरूप हो, जिससे स्वतंत्र या सुधारवादी नेतृत्व की संभावना सीमित हो जाती है। क्षेत्रीय रोटेशन की अनौपचारिक प्रथा प्रतिनिधित्व को संतुलित करने का प्रयास करती है, लेकिन यह P5 की मंजूरी के अधीन रहती है।
- 1946 से अब तक नौ व्यक्ति महासचिव रहे हैं, सभी पुरुष, जो भू-राजनीतिक और लैंगिक पक्षपात को दर्शाता है।
- सुरक्षा परिषद के अनौपचारिक स्ट्रॉ पोल के जरिए पर्दे के पीछे चलने वाली बातचीत और वीटो की धमकियों का पता चलता है जो अंतिम सूची को आकार देती हैं।
- P5 के वीटो ने ऐतिहासिक रूप से कुछ उम्मीदवारों को रोक दिया है, जैसे कि बुट्रोस बुट्रोस-घाली का दूसरा कार्यकाल अमेरिकी वीटो के कारण विफल रहा।
तुलना: संयुक्त राष्ट्र महासचिव चयन बनाम यूरोपीय संघ आयोग अध्यक्ष नियुक्ति
| पहलू | संयुक्त राष्ट्र महासचिव | EU आयोग अध्यक्ष |
|---|---|---|
| चयन निकाय | सुरक्षा परिषद की सिफारिश; महासभा द्वारा नियुक्ति | यूरोपीय परिषद प्रस्तावित करती है; यूरोपीय संसद मंजूरी देती है |
| पारदर्शिता | गुप्त, अनौपचारिक बातचीत, P5 वीटो शक्ति | पारदर्शी बहसें और संसदीय सुनवाई |
| सदस्य राज्यों का प्रभाव | P5 स्थायी सदस्य चयन में प्रभुत्व रखते हैं | सभी EU सदस्य राज्यों का प्रतिनिधित्व; संसद EU नागरिकों का प्रतिनिधि है |
| कार्यकाल | 5 वर्ष, एक बार नवीनीकरण योग्य | 5 वर्ष, नवीनीकरण योग्य |
| समावेशिता | कोई औपचारिक लिंग या क्षेत्रीय कोटा नहीं; अनौपचारिक क्षेत्रीय रोटेशन | लिंग और क्षेत्रीय संतुलन को बढ़ावा दिया जाता है |
संयुक्त राष्ट्र महासचिव चयन प्रक्रिया में प्रमुख कमियां
P5 वीटो शक्ति भू-राजनीतिक प्रभुत्व को मजबूत करती है, जिससे उम्मीदवारों की संख्या सीमित हो जाती है और छोटे या कम प्रभावशाली सदस्य देशों की आवाज़ें बाहर रह जाती हैं। पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी से सार्वजनिक विश्वास कमजोर होता है।
- लैंगिक असंतुलन बना हुआ है क्योंकि अब तक कोई महिला महासचिव नहीं बनी।
- क्षेत्रीय रोटेशन अनौपचारिक है और बाध्यकारी नहीं, जिससे P5 की प्राथमिकताएं इसे प्रभावित करती हैं।
- महासभा की भूमिका मुख्यतः प्रतीकात्मक है, जो लोकतांत्रिक वैधता को कमजोर करती है।
आगे का रास्ता: पारदर्शिता और समावेशिता बढ़ाना
- सभी सदस्य देशों को शामिल करते हुए पारदर्शी मानदंड और खुली सलाह-मशविरा प्रक्रियाएं लागू की जानी चाहिए ताकि प्रक्रिया लोकतांत्रिक बने।
- नियुक्ति प्रक्रिया में P5 वीटो को सीमित या सुधारना भू-राजनीतिक हस्तक्षेप को कम कर सकता है।
- क्षेत्रीय रोटेशन को औपचारिक रूप देना और लिंग संतुलन को बढ़ावा देना प्रतिनिधित्व और वैधता सुधारेंगे।
- महासभा की भूमिका को केवल औपचारिक नियुक्ति से आगे बढ़ाकर उम्मीदवारों के मूल्यांकन में सार्थक बनाया जाना चाहिए।
- सुरक्षा परिषद की सिफारिश के लिए कम से कम नौ सकारात्मक वोट और P5 का कोई वीटो नहीं होना आवश्यक है।
- महासभा सभी सदस्य देशों के बीच गुप्त मतदान के जरिए सीधे महासचिव का चुनाव करती है।
- महासचिव का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है और वह नवीनीकरण योग्य नहीं है।
- P5 के पास महासचिव के लिए सुरक्षा परिषद की सिफारिश पर वीटो शक्ति है।
- महासभा सुरक्षा परिषद के वीटो को दरकिनार कर महासचिव नियुक्त कर सकती है।
- P5 का वीटो शक्ति ऐतिहासिक रूप से कम प्रतिनिधित्व वाले क्षेत्रों के उम्मीदवारों को महासचिव बनने से रोकती आई है।
मुख्य प्रश्न
संयुक्त राष्ट्र महासचिव के चयन में सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों की भूमिका की समीक्षा करें। इस प्रक्रिया के पारदर्शिता, समावेशिता और वैश्विक शासन सुधार पर प्रभावों पर चर्चा करें। (250 शब्द)
झारखंड एवं JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 — अंतरराष्ट्रीय संगठन और वैश्विक शासन
- झारखंड दृष्टिकोण: झारखंड के सिविल सेवा अधिकारी UNDP और अन्य UN एजेंसियों के साथ काम कर सकते हैं, जिन पर महासचिव की सतत विकास और शांति स्थापना नीतियों का प्रभाव होता है।
- मुख्य बिंदु: जवाबों में संयुक्त राष्ट्र नेतृत्व पर भू-राजनीतिक नियंत्रण और इसके भारत की कूटनीतिक भागीदारी तथा विकास सहयोग पर प्रभाव को रेखांकित करें, साथ ही झारखंड की अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के निहितार्थ।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव की औपचारिक नियुक्ति कौन करता है?
संयुक्त राष्ट्र महासभा सुरक्षा परिषद की सिफारिश के आधार पर महासचिव की औपचारिक नियुक्ति करती है, जैसा कि UN चार्टर के Article 97 में उल्लेखित है।
महासचिव चयन में सुरक्षा परिषद की क्या भूमिका होती है?
सुरक्षा परिषद महासचिव के लिए एक उम्मीदवार की सिफारिश करती है, जिसके लिए कम से कम नौ सकारात्मक वोट और पांच स्थायी सदस्यों में से किसी का वीटो नहीं होना जरूरी है, जिससे चयन प्रक्रिया पर उनकी पकड़ रहती है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव का कार्यकाल कितना होता है?
महासचिव का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है, जिसे एक बार फिर बढ़ाया जा सकता है, जैसा कि UN चार्टर के Article 97 में निर्धारित है।
क्या अब तक कोई महिला महासचिव बनी है?
संयुक्त राष्ट्र की स्थापना से लेकर अब तक कोई महिला महासचिव नहीं बनी है, जो लैंगिक प्रतिनिधित्व की कमी को दर्शाता है।
महासचिव चयन में कौन-सी अनौपचारिक प्रथाएं प्रभाव डालती हैं?
अनौपचारिक प्रथाओं में क्षेत्रीय रोटेशन और सुरक्षा परिषद के भीतर स्ट्रॉ पोल शामिल हैं, जो उम्मीदवारों के समर्थन का आकलन करते हैं।
आधिकारिक स्रोत एवं आगे पढ़ाई
लर्नप्रो संपादकीय मानकों के बारे में
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