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सऊदी अरब के भूमि पुनरुद्धार प्रयासों का परिचय

सऊदी अरब ने लगभग एक मिलियन हेक्टेयर खराब हुई भूमि को पुनर्जीवित किया है, जैसा कि संयुक्त राष्ट्र रेगिस्तान विरोधी सम्मेलन (UNCCD) ने 2023 में बताया। इस देश का मॉडल तकनीकी नवाचारों जैसे क्लाउड सीडिंग और पूर्व चेतावनी प्रणाली को बड़े पैमाने पर वनीकरण के साथ जोड़ता है, जो अत्यंत शुष्क परिस्थितियों में रेगिस्तान बनने की प्रक्रिया को रोकने में मदद करता है। ये प्रयास सऊदी विजन 2030 के अनुरूप हैं, जिसका उद्देश्य आर्थिक विविधता लाना और पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटना है। यह मॉडल विश्व के शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां पानी की कमी और भूमि खराबी खाद्य सुरक्षा और जीवनयापन को खतरे में डालती है।

UPSC से प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: पर्यावरण और पारिस्थितिकी – रेगिस्तान बनने की प्रक्रिया, भूमि क्षरण, और वनीकरण
  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – UNCCD और बहुपक्षीय पर्यावरण समझौते
  • निबंध: शुष्क क्षेत्रों में सतत विकास; तकनीक और पर्यावरण

भूमि क्षरण का वैश्विक और भारतीय परिप्रेक्ष्य

लगभग 40% वैश्विक भूमि क्षेत्र भूमि क्षरण की समस्या से प्रभावित है, जो लगभग 3 अरब लोगों के जीवन को प्रभावित करता है, खासकर शुष्क इलाकों में (UNCCD, 2023)। इसके कारणों में मृदा कटाव, लवणता, वनों की कटाई और अस्थिर भूमि उपयोग शामिल हैं, जो भूमि की उत्पादकता और जैव विविधता को कम करते हैं। भारत का रेगिस्तान विरोधी और भूमि क्षरण एटलस 2021 बताता है कि 2018-19 के दौरान लगभग 97.85 मिलियन हेक्टेयर (29.77% भौगोलिक क्षेत्र) भूमि क्षतिग्रस्त हुई है। यह कृषि उत्पादकता और जल उपलब्धता पर नकारात्मक असर डालता है, जिसके लिए समग्र पुनरुद्धार रणनीतियों की जरूरत है।

  • वैश्विक आर्थिक नुकसान: भूमि क्षरण की वार्षिक लागत लगभग $490 बिलियन है (वर्ल्ड बैंक, 2021)।
  • भारत का वनीकरण बजट: 2023-24 में राष्ट्रीय वनीकरण कार्यक्रम के तहत खराब वन भूमि के पुनरुद्धार के लिए INR 500 करोड़ आवंटित किए गए।
  • भारत का वनीकरण कवरेज: लगभग 2.5 मिलियन हेक्टेयर खराब वन भूमि पुनर्जीवित की जा रही है (MoEFCC वार्षिक रिपोर्ट, 2023)।

सऊदी अरब के भूमि पुनरुद्धार मॉडल के घटक

सऊदी अरब का तरीका वैज्ञानिक नवाचारों और पारिस्थितिक हस्तक्षेपों को जोड़ता है, जिससे पानी की कमी और भूमि क्षरण दोनों से निपटा जा सके।

  • क्लाउड सीडिंग: किंग अब्दुलअजीज साइंस एंड टेक्नोलॉजी सिटी (KACST) द्वारा लागू की गई क्लाउड सीडिंग लक्षित शुष्क क्षेत्रों में वर्षा को 20% तक बढ़ाती है, जिससे मिट्टी की नमी बढ़ती है और वनस्पति विकास को बढ़ावा मिलता है (KACST, 2022)।
  • पूर्व चेतावनी प्रणाली: सैटेलाइट-आधारित पूर्वानुमान प्रणाली से रेत और धूल भरे तूफानों की चेतावनी मिलती है, जिससे पर्यावरणीय और आर्थिक नुकसान कम होता है।
  • बड़े पैमाने पर वनीकरण: संरक्षित क्षेत्रों का विस्तार और सूखा प्रतिरोधी प्रजातियों के पौधे लगाना मिट्टी की उर्वरता और जैव विविधता बढ़ाता है, जिससे रेगिस्तान बनने की प्रक्रिया उलटती है।

भूमि पुनरुद्धार से जुड़े कानूनी और संस्थागत ढांचे

हालांकि सऊदी अरब के पुनरुद्धार प्रयास भारतीय कानून के अंतर्गत नहीं आते, भारत के कानूनी ढांचे में भूमि क्षरण से निपटने के लिए समान प्रावधान मौजूद हैं।

  • वन संरक्षण अधिनियम, 1980: इसके सेक्शन 2 और 3 गैर-वन उपयोग के लिए वन भूमि के हस्तांतरण को नियंत्रित करते हैं, जिससे वन संरक्षण सुनिश्चित होता है।
  • पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986: सेक्शन 3 पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों को लागू करने का अधिकार देता है, जिसमें भूमि पुनरुद्धार भी शामिल है।
  • रेगिस्तान विरोधी राष्ट्रीय कार्य योजना (NAP): भारत ने 1996 में UNCCD को मंजूरी देते हुए सतत भूमि प्रबंधन पर केंद्रित यह योजना लागू की है।
  • मुख्य संस्थाएं: MoEFCC नीति कार्यान्वयन का नेतृत्व करता है; ICAR सतत भूमि प्रबंधन तकनीकें विकसित करता है।

सऊदी अरब और भारत की तुलना

पहलूसऊदी अरबभारत
जलवायुअत्यंत शुष्क मरुस्थलीयविविध, जिसमें शुष्क, अर्ध-शुष्क और आर्द्र क्षेत्र शामिल हैं
तकनीकी हस्तक्षेपक्लाउड सीडिंग, सैटेलाइट आधारित पूर्व चेतावनी प्रणालीतकनीक का सीमित उपयोग; प्राकृतिक पुनरुत्थान और सामुदायिक वनीकरण पर जोर
वनीकरण का तरीकासरकारी नेतृत्व में बड़े पैमाने पर, संरक्षित क्षेत्र विस्तार के साथसामुदायिक आधारित, CAMPA द्वारा वित्तपोषित वनीकरण
जल संसाधन प्रबंधनपुनरुद्धार के साथ कृत्रिम वर्षा वृद्धिजल प्रबंधन अक्सर असंगठित, वनीकरण से कम जुड़ा
पुनरुद्धार का पैमानालगभग 1 मिलियन हेक्टेयर पुनर्जीवितलगभग 2.5 मिलियन हेक्टेयर वनीकरण योजनाओं के तहत

नीतिगत अंतर और चुनौतियां

भारत और कई अन्य देशों को जल प्रबंधन तकनीकों को भूमि पुनरुद्धार के साथ जोड़ने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। सऊदी अरब का मॉडल क्लाउड सीडिंग और नमी संरक्षण के जरिए पानी की कमी को सीधे संबोधित करता है, जिससे शुष्क क्षेत्रों में वनस्पति विकास संभव होता है। भारत में प्राकृतिक पुनरुत्थान और सीमित तकनीकी उपयोग के कारण गंभीर रूप से खराब क्षेत्रों में पुनरुद्धार धीमा है। साथ ही, भारत में रेगिस्तान से जुड़ी आपदाओं के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली का उपयोग अभी भी कम है।

महत्व और आगे का रास्ता

  • सऊदी अरब का मॉडल दिखाता है कि तकनीकी नवाचार और पारिस्थितिक पुनरुद्धार मिलकर शुष्क क्षेत्रों में पानी की कमी की बाधाओं को पार कर सकते हैं।
  • भारत अपने राष्ट्रीय कार्य योजना को कृत्रिम वर्षा तकनीकों और सैटेलाइट आधारित निगरानी से सशक्त कर सकता है ताकि भूमि प्रबंधन अधिक सक्रिय और प्रभावी हो।
  • जल संसाधन और वन विभागों के बीच संस्थागत समन्वय मजबूत करना समग्र पुनरुद्धार के लिए जरूरी है।
  • UNCCD के तहत अंतरराष्ट्रीय सहयोग तकनीक हस्तांतरण और क्षमता निर्माण में मदद कर सकता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
सऊदी अरब के भूमि पुनरुद्धार मॉडल के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. यह मुख्य रूप से प्राकृतिक पुनरुत्थान पर निर्भर है और तकनीकी हस्तक्षेप नहीं करता।
  2. क्लाउड सीडिंग ने लक्षित क्षेत्रों में वर्षा को 20% तक बढ़ाया है।
  3. पूर्व चेतावनी प्रणाली रेत और धूल भरे तूफानों से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद करती है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि सऊदी अरब का मॉडल तकनीकी हस्तक्षेपों जैसे क्लाउड सीडिंग पर आधारित है। कथन 2 और 3 KACST और UNCCD की रिपोर्ट के अनुसार सही हैं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत के भूमि पुनरुद्धार से जुड़े कानूनी ढांचे के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. वन संरक्षण अधिनियम, 1980, विकास के लिए वन भूमि के असीमित हस्तांतरण की अनुमति देता है।
  2. पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986, भूमि पुनरुद्धार सहित पर्यावरणीय सुरक्षा प्रदान करता है।
  3. भारत ने 1996 में UNCCD को मंजूरी दी और रेगिस्तान विरोधी राष्ट्रीय कार्य योजना लागू की।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि वन संरक्षण अधिनियम वन भूमि के हस्तांतरण को सीमित करता है। कथन 2 और 3 सही हैं।

मुख्य प्रश्न

चर्चा करें कि कैसे सऊदी अरब का समग्र भूमि पुनरुद्धार मॉडल, जो तकनीकी नवाचारों और वनीकरण को जोड़ता है, भारत के रेगिस्तान बनने की प्रक्रिया से लड़ने के प्रयासों के लिए सीख प्रदान कर सकता है। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC से प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: GS पेपर 3 – पर्यावरण और पारिस्थितिकी: भूमि क्षरण और वनीकरण
  • झारखंड का नजरिया: झारखंड को खनन और वनों की कटाई के कारण गंभीर भूमि क्षरण का सामना है; सऊदी अरब के जल प्रबंधन से स्थानीय पुनरुद्धार रणनीतियों को लाभ मिल सकता है।
  • मुख्य बिंदु: झारखंड के पुनरुद्धार कार्यक्रमों में जल संरक्षण तकनीकों को वनीकरण के साथ जोड़ने पर जोर दें।
क्लाउड सीडिंग क्या है और यह भूमि पुनरुद्धार में कैसे मदद करती है?

क्लाउड सीडिंग एक कृत्रिम वर्षा बढ़ाने की तकनीक है, जिसमें चांदी आयोडाइड जैसे पदार्थ बादलों में छिड़काव कर वर्षा को प्रेरित किया जाता है। सऊदी अरब जैसे शुष्क क्षेत्रों में यह मिट्टी की नमी बढ़ाकर वनस्पति विकास को बढ़ावा देता है और रेगिस्तान बनने की प्रक्रिया को रोकता है।

भारत में भूमि पुनरुद्धार से जुड़े कानूनी प्रावधान कौन-कौन से हैं?

वन संरक्षण अधिनियम, 1980 वन भूमि के हस्तांतरण को नियंत्रित करता है; पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 पर्यावरणीय सुरक्षा उपाय प्रदान करता है; और रेगिस्तान विरोधी राष्ट्रीय कार्य योजना UNCCD के तहत सतत भूमि प्रबंधन लागू करती है।

सऊदी अरब की पूर्व चेतावनी प्रणाली भूमि पुनरुद्धार में कैसे मदद करती है?

सऊदी अरब सैटेलाइट आधारित पूर्व चेतावनी प्रणाली का उपयोग करके रेत और धूल भरे तूफानों की भविष्यवाणी करता है, जिससे समय रहते बचाव के उपाय किए जा सकते हैं, जो मिट्टी के कटाव को कम करते हैं और पुनर्जीवित वनस्पति की रक्षा करते हैं।

भारत में भूमि क्षरण का पैमाना कितना है?

रेगिस्तान विरोधी और भूमि क्षरण एटलस 2021 के अनुसार, 2018-19 में लगभग 97.85 मिलियन हेक्टेयर (भारत के भूभाग का 29.77%) भूमि क्षतिग्रस्त हुई, जिससे कृषि और आजीविका प्रभावित हुई।

सऊदी अरब का विजन 2030 भूमि पुनरुद्धार से कैसे जुड़ा है?

विजन 2030 में वनीकरण और जल प्रबंधन परियोजनाओं में अरबों डॉलर का निवेश शामिल है, जिसका उद्देश्य आर्थिक विविधता लाना और रेगिस्तान बनने जैसी पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटना है।

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