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भारत में स्वास्थ्य सेवा की पहुंच का अवलोकन

National Statistical Office (NSO) के 80वें राउंड सर्वे (2022-23) ने भारत में स्वास्थ्य सेवा की पहुंच के ताजा और व्यापक आंकड़े पेश किए हैं। यह सर्वे स्वास्थ्य बीमा कवरेज में बढ़ोतरी और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का उपयोग करने वाले मरीजों के आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च (OOPE) में कमी को दर्शाता है। आयुष्मान भारत - प्रधान मंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) जैसी सरकारी पहलों और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय में वृद्धि ने इस सुधार में अहम भूमिका निभाई है। फिर भी, राज्यों के बीच और ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों में गुणवत्ता और बुनियादी ढांचे की असमानताएं बनी हुई हैं।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: स्वास्थ्य क्षेत्र की नीतियां, संवैधानिक प्रावधान (Article 21), आयुष्मान भारत जैसी सरकारी योजनाएं
  • GS पेपर 3: स्वास्थ्य व्यय का आर्थिक प्रभाव, बीमा कवरेज
  • निबंध: भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय

स्वास्थ्य सेवा पहुंच को नियंत्रित करने वाला कानूनी और संवैधानिक ढांचा

संविधान के Article 21 को सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के अनुसार जीवन के अधिकार में स्वास्थ्य का अधिकार शामिल किया गया है। National Health Policy 2017 और Clinical Establishments (Registration and Regulation) Act, 2010 जैसे कानून स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता और पहुंच को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए हैं। National Medical Commission Act, 2019 ने भारतीय मेडिकल काउंसिल एक्ट को बदलकर चिकित्सा शिक्षा और पेशेवर मानकों में सुधार किया है। Epidemic Diseases Act, 1897 महामारी नियंत्रण के लिए आज भी एक महत्वपूर्ण उपकरण है। MoHFWPM-JAY, जिसे National Health Authority (NHA) द्वारा लागू किया जाता है, गरीब और कमजोर वर्गों के लिए बीमा कवरेज बढ़ाने वाली प्रमुख योजना है।

  • Article 21: सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के अनुसार जीवन के अधिकार में स्वास्थ्य का अधिकार शामिल
  • National Health Policy 2017: सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज और सार्वजनिक व्यय बढ़ाने पर जोर
  • Clinical Establishments Act 2010: स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए पंजीकरण और गुणवत्ता मानक
  • National Medical Commission Act 2019: चिकित्सा शिक्षा और अभ्यास का नियमन
  • आयुष्मान भारत PM-JAY: प्रति परिवार वार्षिक ₹5 लाख तक स्वास्थ्य बीमा कवरेज प्रदान करता है

आर्थिक संकेतक और स्वास्थ्य पर सरकारी खर्च

भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय GDP का लगभग 2.5% हो गया है, जैसा कि Economic Survey 2023-24 में दिखाया गया है। 2023-24 के बजट में PM-JAY को ₹6,400 करोड़ आवंटित किए गए, जो वित्तीय बाधाओं को कम करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। NSO के 80वें राउंड सर्वे के अनुसार, सरकारी अस्पतालों में 50% से अधिक मरीजों का OOPE ₹1,100 से कम रहा, जो बेहतर किफायती स्वास्थ्य सेवा का संकेत है। ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य बीमा कवरेज 12.9% से बढ़कर 45.5% हो गया है, जो सरकारी बीमा योजनाओं के प्रभाव को दर्शाता है।

  • सरकारी स्वास्थ्य व्यय: GDP का 2.5% (Economic Survey 2023-24)
  • PM-JAY बजट आवंटन: ₹6,400 करोड़ (2023-24)
  • सरकारी अस्पतालों में OOPE: 50% से अधिक मरीजों ने ₹1,100 से कम खर्च किया (NSO 2022-23)
  • ग्रामीण स्वास्थ्य बीमा कवरेज: 12.9% से 45.5% (NSO 2022-23)
  • शहरी स्वास्थ्य बीमा कवरेज: 8.9% से 31.8% (NSO 2022-23)

स्वास्थ्य सेवा उपयोग और स्वास्थ्य जागरूकता के रुझान

NSO सर्वे में Projected Population Reporting Ailments (PPRA) में वृद्धि देखी गई है, जो स्वास्थ्य जागरूकता और सेवा उपयोग में बढ़ोतरी को दर्शाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में PPRA 6.8% (2017-18) से बढ़कर 12.2% (2025 अनुमानित) हो गया है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 9.1% से बढ़कर 14.9% हो गया है। संस्थागत प्रसव, जो मातृ स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण संकेतक है, ग्रामीण क्षेत्रों में 95.6% और शहरी क्षेत्रों में 97.8% तक पहुंच चुका है, जो बेहतर स्वास्थ्य सेवा पहुंच का परिचायक है।

  • ग्रामीण PPRA: 6.8% (2017-18) से 12.2% (2025 अनुमानित)
  • शहरी PPRA: 9.1% से 14.9% (उसी अवधि)
  • ग्रामीण संस्थागत प्रसव: 95.6%
  • शहरी संस्थागत प्रसव: 97.8%

भारत और थाईलैंड के स्वास्थ्य सेवा पहुंच की तुलना

सूचकांक भारत (2022-23) थाईलैंड (2015) स्रोत
स्वास्थ्य बीमा कवरेज (जनसंख्या %) ग्रामीण: 45.5%, शहरी: 31.8% 99% से अधिक (Universal Coverage Scheme) NSO सर्वे; WHO Global Health Expenditure Database
कुल स्वास्थ्य व्यय में OOPE का प्रतिशत सरकारी अस्पतालों में 50% मरीजों का खर्च ₹1,100 से कम; निजी क्षेत्र में OOPE अधिक 15% से कम NSO सर्वे; WHO Database
सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय (% GDP) 2.5% लगभग 3.8% Economic Survey 2023-24; WHO Database
सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की स्थिति आंशिक, PM-JAY के माध्यम से कमजोर वर्गों पर केंद्रित UCS के जरिए लगभग सार्वभौमिक कवरेज प्राप्त MoHFW; WHO

स्वास्थ्य सेवा पहुंच में बनी चुनौतियां

सुधारों के बावजूद भारत को कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। राज्यों और ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों के बीच स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता में व्यापक अंतर है। कई इलाकों में बुनियादी ढांचे की कमी और प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की कमी गंभीर समस्या बनी हुई है। निजी क्षेत्र पर निर्भरता के कारण OOPE अधिक रहता है, जो वित्तीय सुरक्षा को कमजोर करता है। साथ ही, बीमा कवरेज बढ़ने के बावजूद, सेवा की उपलब्धता और गुणवत्ता में अंतर के कारण सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज हासिल नहीं हो पाई है।

  • राज्यों और ग्रामीण-शहरी अंतर में गुणवत्ता और बुनियादी ढांचे की असमानताएं
  • निजी स्वास्थ्य क्षेत्र में उच्च OOPE
  • प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की कमी से सेवा वितरण प्रभावित
  • बीमा कवरेज बढ़ना सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की गारंटी नहीं

महत्व और आगे का रास्ता

  • बीमा कवरेज में वृद्धि और सार्वजनिक सुविधाओं में OOPE में कमी वित्तीय जोखिम सुरक्षा की दिशा में प्रगति दर्शाती है।
  • प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा को मजबूत करना और अविकसित क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा बढ़ाना असमानताओं को दूर करने के लिए जरूरी है।
  • Clinical Establishments Act और NMC सुधारों के तहत गुणवत्ता आश्वासन तंत्र का कड़ाई से पालन आवश्यक है।
  • सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों का समन्वय और नियामक नियंत्रण OOPE कम करने और सेवा मानकों को बेहतर करने में मदद करेगा।
  • सतत विकास लक्ष्यों को पूरा करने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय को 2.5% से अधिक बढ़ाना आवश्यक है।

अभ्यास प्रश्न

📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत में स्वास्थ्य बीमा कवरेज से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. ग्रामीण भारत में स्वास्थ्य बीमा कवरेज 2017 से 2023 के बीच लगभग 13% से बढ़कर 45% से अधिक हो गया है।
  2. आयुष्मान भारत PM-JAY प्रति परिवार वार्षिक ₹5 लाख तक कवरेज प्रदान करता है।
  3. स्वास्थ्य बीमा कवरेज बढ़ना अपने आप में सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज सुनिश्चित करता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (a)
कथन 1 NSO के आंकड़ों के अनुसार सही है; कथन 2 PM-JAY दिशानिर्देशों के अनुसार सही है; कथन 3 गलत है क्योंकि केवल बीमा कवरेज से गुणवत्ता और पहुंच में अंतर के कारण सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज सुनिश्चित नहीं होती।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत में आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च (OOPE) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. सरकारी अस्पतालों में 50% से अधिक मरीजों का OOPE ₹1,100 से कम है।
  2. NSO 2022-23 सर्वे के अनुसार, सार्वजनिक सुविधाओं में आउटपेशेंट देखभाल का OOPE लगभग शून्य है।
  3. निजी अस्पतालों में OOPE आमतौर पर सरकारी अस्पतालों से कम होता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (a)
कथन 1 और 2 NSO 80वें राउंड के आंकड़ों से समर्थित हैं; कथन 3 गलत है क्योंकि निजी अस्पतालों में OOPE आमतौर पर सरकारी अस्पतालों की तुलना में अधिक होता है।

मुख्य प्रश्न

हाल के वर्षों में भारत में स्वास्थ्य सेवा की पहुंच बढ़ने के कारणों पर चर्चा करें। समान और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने में आने वाली चुनौतियों का आलोचनात्मक विश्लेषण करें। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण), पेपर 3 (आर्थिक विकास)
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड में ग्रामीण स्वास्थ्य बीमा कवरेज राष्ट्रीय औसत से कम है; संस्थागत प्रसव में सुधार हुआ है लेकिन आदिवासी और दूरदराज के इलाकों में गुणवत्ता की खामियां बनी हुई हैं।
  • मुख्य बिंदु: राज्य विशेष स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे की चुनौतियां, सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन और आदिवासी स्वास्थ्य संकेतकों पर प्रकाश डालें।
भारत में स्वास्थ्य का अधिकार किस संवैधानिक प्रावधान के तहत आता है?

संविधान के Article 21 को सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के अनुसार जीवन के अधिकार में स्वास्थ्य का अधिकार शामिल किया गया है।

Clinical Establishments Act, 2010 का महत्व क्या है?

यह अधिनियम स्वास्थ्य सुविधाओं के पंजीकरण और गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित करता है, जिससे स्वास्थ्य सेवा की पारदर्शिता और गुणवत्ता बनी रहती है।

आयुष्मान भारत PM-JAY ने स्वास्थ्य बीमा कवरेज पर क्या प्रभाव डाला है?

PM-JAY ने विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य बीमा कवरेज को बढ़ाया है, जो 2017 से 2023 के बीच 12.9% से 45.5% तक पहुंच गया, जिससे कमजोर वर्गों को वित्तीय सुरक्षा मिली है।

स्वास्थ्य बीमा कवरेज बढ़ने के बावजूद सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज क्यों संभव नहीं हो पाती?

बीमा कवरेज बढ़ना जरूरी है लेकिन इससे गुणवत्ता और सेवा उपलब्धता की असमानताएं दूर नहीं होतीं, जो सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज में बाधा हैं।

भारत में आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च कम करने में प्रमुख चुनौतियां क्या हैं?

निजी स्वास्थ्य क्षेत्र पर अधिक निर्भरता, महंगे इलाज, सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की कमी और स्वास्थ्य सेवा की लागतों का अपर्याप्त नियमन प्रमुख चुनौतियां हैं।

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