परिचय: उभरते हवाई खतरों और भारत की वायु रक्षा की जरूरत
2020 से भारत की सीमाओं पर 300 से अधिक ड्रोन घुसपैठें दर्ज की गई हैं, जो वायु रक्षा तंत्र में गंभीर कमियों को दर्शाती हैं (Indian Express, 2024)। कम रडार क्रॉस सेक्शन (RCS) वाले ड्रोन, जिनमें निगरानी और सशस्त्र दोनों प्रकार शामिल हैं, की बढ़ती संख्या से निपटने के लिए रणनीतिक बदलाव जरूरी है, जिसमें खोज, निष्क्रियकरण और नीति सुधार शामिल हों। रक्षा मंत्रालय (MoD) और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने कदम उठाए हैं, लेकिन समर्पित काउंटर-ड्रोन ढांचे की कमी के कारण खतरे का समय पर मुकाबला करना मुश्किल हो रहा है। इस बदलते खतरे के मद्देनजर भारत की वायु रक्षा रणनीति को फिर से परखना आवश्यक है ताकि सैन्य और नागरिक महत्वपूर्ण संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
UPSC से प्रासंगिकता
- GS पेपर 3: रक्षा, सुरक्षा और आपदा प्रबंधन – वायु रक्षा आधुनिकीकरण, ड्रोन युद्ध, स्वदेशी रक्षा उत्पादन
- GS पेपर 2: राजनीति और शासन – अनुच्छेद 246 के तहत रक्षा विधायी ढांचा, रक्षा भारत अधिनियम
- निबंध: युद्ध में उभरती तकनीकें, भारत की रणनीतिक रक्षा तैयारी
वायु रक्षा और ड्रोन मुकाबले के लिए कानूनी एवं संवैधानिक ढांचा
संविधान के अनुच्छेद 246 के तहत रक्षा केंद्र सूची में शामिल है, जिससे संसद को वायु रक्षा और संबंधित सुरक्षा उपायों पर विधायी अधिकार प्राप्त होता है। रक्षा भारत अधिनियम, 1962 (संशोधित) युद्धकालीन रक्षा कार्यों के लिए कानूनी अधिकार प्रदान करता है, जिसमें हवाई क्षेत्र की सुरक्षा शामिल है। भारतीय हथियार अधिनियम, 1959 हथियारों को नियंत्रित करता है, जो गतिज इंटरसेप्टर्स जैसे ड्रोन मुकाबले के उपकरणों पर अप्रत्यक्ष प्रभाव डालता है। रक्षा मंत्रालय रक्षा खरीद प्रक्रिया (DPP) 2020 के तहत नीतियां बनाता है, जो वायु रक्षा प्रणालियों की खरीद और स्वदेशी विकास का मार्गदर्शन करता है। इस क्षेत्र में अभी कोई विशिष्ट न्यायिक मिसाल नहीं बनी है, जो कानूनी क्षेत्र के विकास की शुरुआत को दर्शाता है।
- अनुच्छेद 246: रक्षा और हवाई क्षेत्र सुरक्षा पर केंद्रीय विधायी अधिकार
- रक्षा भारत अधिनियम, 1962: युद्धकालीन हवाई क्षेत्र नियंत्रण के नियम
- भारतीय हथियार अधिनियम, 1959: वायु रक्षा और ड्रोन मुकाबले में उपयोग होने वाले हथियारों का नियंत्रण
- रक्षा खरीद प्रक्रिया 2020: स्वदेशी उत्पादन और उन्नत तकनीक पर जोर के साथ खरीद का ढांचा
आर्थिक पहलू: बजट आवंटन और स्वदेशी उत्पादन
संघीय बजट 2023-24 में रक्षा के लिए 5.94 लाख करोड़ रुपये (~72 अरब डॉलर) आवंटित किए गए हैं, जिसमें लगभग 15% पूंजीगत व्यय वायु रक्षा आधुनिकीकरण के लिए रखा गया है (संघीय बजट 2023-24)। भारत का ड्रोन बाजार 15% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़कर 2025 तक 885 मिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है (ResearchAndMarkets.com), जो ड्रोन के द्वि-उपयोगी स्वरूप को दर्शाता है। मेक इन इंडिया पहल और रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की मंजूरी से वर्तमान 60% आयात निर्भरता कम करने का लक्ष्य है। DRDO द्वारा विकसित आकाश मिसाइल प्रणाली और एंटी-ड्रोन तकनीकें स्वावलंबन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
- 89,100 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय वायु रक्षा समेत आधुनिकीकरण के लिए (2023-24)
- 2025 तक 15% CAGR से बढ़ने वाला ड्रोन बाजार, 885 मिलियन डॉलर तक
- वायु रक्षा प्रणालियों में लगभग 60% आयात निर्भरता; मेक इन इंडिया से कमी का प्रयास
- DRDO का आकाश मिसाइल: 25 किमी रेंज, बहु-लक्ष्य क्षमता
संस्थागत भूमिकाएँ: वायु रक्षा और ड्रोन मुकाबला
डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) वायु रक्षा और एंटी-ड्रोन तकनीकों के स्वदेशी विकास में अग्रणी है, जिसमें हाल ही में परीक्षण किया गया एंटी-ड्रोन सिस्टम 90% निष्क्रियकरण सफलता दर दिखा चुका है (DRDO प्रेस विज्ञप्ति, 2023)। भारतीय वायु सेना (IAF) उन्नत सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियों का संचालन करती है और 2030 तक 21 स्क्वाड्रन बनाने की योजना है (MoD वार्षिक रिपोर्ट, 2023)। भारतीय सेना (IA) ज़मीनी वायु रक्षा संभालती है और ड्रोन मुकाबले की रणनीतियाँ लागू करती है। रक्षा मंत्रालय नीतियां बनाता है और खरीद प्रक्रिया देखता है, जबकि डायरेक्टरेट जनरल ऑफ एयरोनॉटिकल क्वालिटी एश्योरेंस (DGAQA) उपकरणों के मानक सुनिश्चित करता है। नागरिक ड्रोन संचालन को नियंत्रित करने का काम डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) का है, जो वायु क्षेत्र सुरक्षा के लिए अहम है।
- DRDO: वायु रक्षा और एंटी-ड्रोन प्रणालियों का स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास
- IAF: SAM और हवाई काउंटर-ड्रोन प्लेटफॉर्म का प्रमुख संचालक
- भारतीय सेना: ज़मीनी वायु रक्षा और ड्रोन मुकाबला रणनीतियों का कार्यान्वयन
- MoD: नीति निर्धारण और खरीद प्राधिकरण
- DGAQA: रक्षा उपकरणों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना
- DGCA: नागरिक ड्रोन संचालन का नियमन
ड्रोन खतरों से निपटने में तकनीकी और रणनीतिक चुनौतियाँ
भारत की मौजूदा वायु रक्षा नीति में इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (EW), गतिज इंटरसेप्टर्स और एआई आधारित खतरा मूल्यांकन को जोड़ने वाला समेकित काउंटर-ड्रोन ढांचा नहीं है। इसका परिणाम यह होता है कि कम RCS वाले ड्रोन, जो पारंपरिक रडार और मिसाइल सिस्टम से बच जाते हैं, की पहचान और निष्क्रियकरण में देरी होती है। पाकिस्तान द्वारा चीनी CH-4 ड्रोन की तैनाती से पश्चिमी सीमा पर ड्रोन खतरों में 35% की वृद्धि हुई है (SIPRI Arms Transfers Database), जिससे त्वरित समायोजन जरूरी हो गया है। DRDO का एंटी-ड्रोन सिस्टम और आकाश मिसाइल आंशिक समाधान प्रदान करते हैं, लेकिन बहु-स्तरीय पहचान और निष्क्रियकरण क्षमताएं अभी अधूरी हैं।
- कम RCS वाले ड्रोन पारंपरिक रडार और SAM से बच निकलते हैं
- नीति में इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और गतिज प्रणालियों का सीमित समन्वय
- एआई आधारित खतरा मूल्यांकन उपकरणों का अपर्याप्त उपयोग
- विरोधी देशों द्वारा उन्नत UAV की तैनाती से खतरे में वृद्धि
तुलनात्मक अध्ययन: भारत बनाम इज़राइल की एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली
| पहलू | भारत | इज़राइल |
|---|---|---|
| नीति | असंगठित, समर्पित काउंटर-ड्रोन ढांचे की कमी | बहु-स्तरीय, एकीकृत काउंटर-ड्रोन और मिसाइल रक्षा |
| प्रणालियाँ | आकाश मिसाइल, DRDO एंटी-ड्रोन सिस्टम (परीक्षण में) | आयरन डोम, डेविड का स्लिंग, पैट्रियट बैटरियां |
| इंटरसेप्शन सफलता | आधिकारिक आंकड़े नहीं; परीक्षणों में आंशिक सफलता | ड्रोन झुंड पर लगभग 90% सफलता (2023 गाजा संघर्ष) |
| तकनीकी एकीकरण | सीमित एआई और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध समाकलन | एआई सक्षम खतरा मूल्यांकन और उन्नत EW क्षमताएं |
| खरीद | 60% आयात निर्भरता; मेक इन इंडिया प्रयास जारी | अधिकांश स्वदेशी, चुनिंदा आयात |
आगे का रास्ता: रणनीतिक और परिचालन आवश्यकताएं
- इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, गतिज और एआई आधारित पहचान प्रणालियों को जोड़ते हुए एकीकृत काउंटर-ड्रोन नीति विकसित करें
- DRDO और निजी उद्योग के सहयोग से स्वदेशी अनुसंधान, विकास और उत्पादन तेज करें
- IAF, IA और खुफिया एजेंसियों के बीच वास्तविक समय डेटा साझा करने और संयुक्त ऑपरेशन बढ़ाएं
- DGCA के माध्यम से नागरिक ड्रोन संचालन के नियम कड़े करें ताकि दुरुपयोग रोका जा सके
- इज़राइल के मॉडल से प्रेरित बहु-स्तरीय वायु रक्षा संरचना में निवेश करें
- कम RCS और ड्रोन झुंड की पहचान के लिए रडार और सेंसर नेटवर्क उन्नत करें
अभ्यास प्रश्न
- अनुच्छेद 246 केंद्र सरकार को रक्षा सहित हवाई क्षेत्र सुरक्षा पर विधायी अधिकार देता है।
- रक्षा भारत अधिनियम, 1962 में ड्रोन मुकाबले के लिए विशेष प्रावधान शामिल हैं।
- DRDO का एंटी-ड्रोन सिस्टम परीक्षणों में 90% से अधिक लक्ष्य निष्क्रिय करने में सफल रहा है।
- 2023-24 के रक्षा बजट में लगभग 15% पूंजीगत व्यय वायु रक्षा समेत रखा गया है।
- भारत वर्तमान में अपनी वायु रक्षा प्रणालियों का 60% से अधिक आयात करता है।
- भारतीय वायु सेना 2030 तक 21 उन्नत सतह-से-हवा मिसाइल स्क्वाड्रन स्थापित करने की योजना बना रही है।
मुख्य प्रश्न
ड्रोन युद्ध से भारत की वायु रक्षा क्षमताओं को होने वाली चुनौतियों का विश्लेषण करें। एकीकृत काउंटर-ड्रोन ढांचा बनाने के लिए आवश्यक संस्थागत और तकनीकी सुधारों पर चर्चा करें। (250 शब्द)
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत की वायु रक्षा और ड्रोन मुकाबले को कौन से कानूनी प्रावधान नियंत्रित करते हैं?
अनुच्छेद 246 संसद को रक्षा और हवाई क्षेत्र सुरक्षा पर विधायी अधिकार देता है। रक्षा भारत अधिनियम, 1962 युद्धकालीन रक्षा अधिकार प्रदान करता है। भारतीय हथियार अधिनियम, 1959 वायु रक्षा में उपयोग होने वाले हथियारों को नियंत्रित करता है। रक्षा खरीद प्रक्रिया 2020 वायु रक्षा प्रणालियों की खरीद का मार्गदर्शन करती है।
भारत की सीमाओं पर ड्रोन खतरा कितना गंभीर है?
2020 से भारत की सीमाओं पर 300 से अधिक ड्रोन घुसपैठें हुई हैं (Indian Express, 2024)। पाकिस्तान द्वारा चीनी CH-4 ड्रोन तैनाती से पश्चिमी सीमा पर हवाई खतरे में 35% की वृद्धि हुई है (SIPRI, 2023)।
भारत द्वारा विकसित प्रमुख स्वदेशी वायु रक्षा प्रणालियाँ कौन-कौन सी हैं?
DRDO द्वारा विकसित आकाश मिसाइल प्रणाली 25 किमी तक मार करने में सक्षम है और एक साथ कई लक्ष्यों को निशाना बना सकती है। DRDO का एंटी-ड्रोन सिस्टम 2023 के परीक्षणों में 90% लक्ष्य निष्क्रिय करने में सफल रहा है।
भारत की वायु रक्षा इज़राइल की प्रणाली से कैसे तुलना करती है?
भारत की वायु रक्षा असंगठित है और काउंटर-ड्रोन तकनीकों का सीमित समाकलन है, जबकि इज़राइल बहु-स्तरीय प्रणाली (आयरन डोम, डेविड का स्लिंग) का उपयोग करता है, जिसकी ड्रोन झुंडों के खिलाफ लगभग 90% इंटरसेप्शन सफलता है (इज़राइली MoD, 2023)।
DGCA ड्रोन नियमन में क्या भूमिका निभाता है?
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन नागरिक ड्रोन उपयोग को नियंत्रित करता है, जिससे हवाई क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित होती है और राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर डालने वाले दुरुपयोग को रोका जाता है।
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