भारत में आवासीय पृथक्करण और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच
भारत में आवासीय पृथक्करण मुख्य रूप से सामाजिक-आर्थिक स्थिति और जातिगत विभाजन के कारण होता है, जिसके चलते शहरी और ग्रामीण इलाकों में भौगोलिक रूप से अलग-अलग क्षेत्र बन जाते हैं जहाँ सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच असमान होती है। यह स्थिति स्वास्थ्य असमानताओं को बढ़ावा देती है और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में शामिल स्वास्थ्य के संवैधानिक गारंटी को कमजोर करती है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में समान स्वास्थ्य सेवा पर जोर दिया गया है, लेकिन विशेषकर शहरी झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों में रहने वाले पृथक समुदायों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच में गंभीर बाधाओं का सामना करना पड़ता है। यह भौगोलिक विभाजन भारत के सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज और स्वास्थ्य समानता के लक्ष्य की राह में बड़ी चुनौती है।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 2: स्वास्थ्य शासन, सामाजिक न्याय, शहरी विकास
- निबंध: स्वास्थ्य के सामाजिक निर्धारक और सार्वजनिक नीति
- मुख्य परीक्षा: सामाजिक और भौगोलिक असमानताओं का स्वास्थ्य सेवा पर प्रभाव
स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच के लिए कानूनी और संवैधानिक ढांचा
स्वास्थ्य का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में निहित है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 सामाजिक-आर्थिक वर्गों और भौगोलिक क्षेत्रों में समान स्वास्थ्य सेवा की गारंटी देती है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (धारा 3) अप्रत्यक्ष रूप से ऐसे भेदभाव को रोकता है जो स्वास्थ्य जैसी आवश्यक सेवाओं तक पहुंच में बाधक होते हैं। हालांकि, महामारी रोग अधिनियम, 1897 और आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 जैसी कानूनें केवल आपातकालीन स्थिति पर ध्यान केंद्रित करती हैं और भौगोलिक पृथक्करण से उत्पन्न स्वास्थ्य असमानताओं को संबोधित नहीं करतीं। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल खेत मजदूर समिति बनाम राज्य पश्चिम बंगाल (1996) में राज्य की जिम्मेदारी को रेखांकित किया कि जाति या सामाजिक स्थिति की परवाह किए बिना स्वास्थ्य अधिकार सुनिश्चित किए जाएं, लेकिन क्रियान्वयन में अभी भी खामियां हैं।
आर्थिक असमानताएं और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय
भारत का सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय लगभग 1.3% GDP (आर्थिक सर्वे 2023-24) है, जो WHO के 5% के सुझाव से काफी कम है। शहरी गरीबों के पृथक इलाकों, खासकर झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय केवल समृद्ध शहरी इलाकों के लगभग 30% के बराबर है (नीति आयोग रिपोर्ट 2023)। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के 2023-24 के लिए ₹3,500 करोड़ के शहरी स्वास्थ्य बजट का 40% से भी कम हिस्सा पृथक इलाकों में उपयोग होता है, जो अवसंरचनात्मक और प्रशासनिक अड़चनों को दर्शाता है। निजी स्वास्थ्य क्षेत्र, जिसका मूल्य $100 बिलियन से अधिक है (IBEF 2023), आर्थिक और भौगोलिक पृथक्करण के कारण वंचित वर्गों के लिए पहुंच से बाहर है। भारत में स्वास्थ्य पर कुल खर्च में से 62.6% खर्च सीधे जेब से होता है (राष्ट्रीय स्वास्थ्य खाते 2019-20), जो पृथक समुदायों पर भारी बोझ डालता है। राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य बीमा कवरेज केवल 37% है, और शहरी झुग्गी इलाकों में यह इससे भी कम है (NHSRC 2022)।
स्वास्थ्य सेवा असमानताओं को दूर करने में संस्थागत भूमिका
- स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW): स्वास्थ्य नीतियों का निर्माण और क्रियान्वयन करता है।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM): ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य कार्यक्रमों का संचालन करता है, विशेषकर वंचित इलाकों में लक्षित योजनाएं लागू करता है।
- राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (NSSO): सामाजिक-आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी आंकड़े एकत्र करता है, जो नीति निर्माण के लिए जरूरी हैं।
- राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS): स्वास्थ्य संकेतकों पर विस्तृत आंकड़े प्रदान करता है, जो असमानताओं को उजागर करते हैं।
- नीति आयोग: स्वास्थ्य समानता की निगरानी करता है और नीति सुधारों के लिए सुझाव देता है।
- शहरी स्थानीय निकाय (ULBs): शहरी स्वास्थ्य अवसंरचना और सेवा वितरण के लिए जिम्मेदार हैं, लेकिन पृथक इलाकों में अक्सर संसाधन और क्षमता की कमी होती है।
पृथक इलाकों में स्वास्थ्य असमानताओं के प्रमाण
NFHS-5 (2019-21) के आंकड़ों के अनुसार, केवल 45% शहरी झुग्गी परिवारों को बेहतर स्वच्छता सुविधा मिलती है, जबकि गैर-झुग्गी शहरी क्षेत्रों में यह 85% है। ICMR 2022 के अध्ययन में पृथक शहरी गरीब इलाकों में शिशु मृत्यु दर 35 प्रति 1000 जीवित जन्म है, जो समृद्ध पड़ोस के 18 प्रति 1000 से दोगुनी है। नीति आयोग 2023 की रिपोर्ट बताती है कि 60% पृथक शहरी आबादी अनियंत्रित निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं पर निर्भर है। Urban Health Resource Centre (UHRC) के आंकड़े बताते हैं कि पृथक इलाकों में प्रति व्यक्ति प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या 50% कम है। आर्थिक सर्वे 2023 में कहा गया है कि पृथक शहरी बस्तियों में तपेदिक का प्रसार 1.8 गुना अधिक है। आवास और शहरी मामलों का मंत्रालय (MoHUA) 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, 65% झुग्गी परिवारों को आयुष्मान भारत जैसे सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं का लाभ नहीं मिलता।
तुलनात्मक अध्ययन: ब्राजील का फैमिली हेल्थ स्ट्रेटेजी (FHS)
ब्राजील ने अपने पृथक फावेलास में फैमिली हेल्थ स्ट्रेटेजी के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा कवरेज को 1998 में 20% से बढ़ाकर 2018 तक 80% से ऊपर कर दिया। इससे शिशु मृत्यु दर में 40% की कमी आई (WHO ब्राजील रिपोर्ट 2019)। FHS मॉडल में समुदाय स्वास्थ्य कार्यकर्ता और स्थानीय क्लीनिक शामिल हैं, जो भौगोलिक बाधाओं और सामाजिक-आर्थिक बहिष्कार को दूर करते हैं। यह भारत के खंडित शहरी स्वास्थ्य शासन और लक्षित नीतियों की कमी से अलग है।
| पहलू | भारत (पृथक शहरी गरीब) | ब्राजील (FHS के तहत फावेलास) |
|---|---|---|
| प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा कवरेज | पृथक इलाकों में 40% से कम उपयोग | 2018 तक 80% से अधिक कवरेज |
| शिशु मृत्यु दर | 35 प्रति 1000 जीवित जन्म | FHS के बाद 40% कमी |
| प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य अवसंरचना | पृथक इलाकों में 50% कम PHC | फावेलास में समुदाय क्लीनिक शामिल |
| स्वास्थ्य बीमा पहुंच | झुग्गी में केवल 35% कवरेज | सार्वजनिक योजनाओं के माध्यम से सार्वभौमिक कवरेज |
नीतिगत खामियां और संरचनात्मक चुनौतियां
भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियां भौगोलिक पृथक्करण के आयाम को ठीक से संबोधित नहीं करतीं और शहरी गरीबों को एक समान वर्ग मानती हैं। इससे पृथक इलाकों के लिए पर्याप्त अवसंरचनात्मक निवेश और सेवा सुधार नहीं हो पाते। शहरी स्थानीय निकायों के पास झुग्गी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रबंधन के लिए संसाधन और क्षमता की कमी है। स्वास्थ्य पहुंच में भौगोलिक पृथक्करण को लक्षित करने वाले कानूनी प्रावधानों का अभाव असमानताओं को बढ़ावा देता है। साथ ही जाति और आर्थिक स्थिति से जुड़े सामाजिक-सांस्कृतिक कारण सरकारी योजनाओं तक पहुंच में बाधक बनते हैं।
आगे का रास्ता: स्वास्थ्य असमानताओं को दूर करना
- स्वास्थ्य नीति निर्माण और संसाधन आवंटन में भौगोलिक पृथक्करण के मापदंड शामिल करें।
- पृथक इलाकों में स्वास्थ्य अवसंरचना के लिए शहरी स्थानीय निकायों को विशेष फंड और क्षमता विकास प्रदान करें।
- ब्राजील के FHS से प्रेरित समुदाय आधारित प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा मॉडल को बढ़ावा दें, जिसमें स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को शामिल किया जाए।
- झुग्गी इलाकों में स्वास्थ्य बीमा कवरेज बढ़ाने के लिए जागरूकता और नामांकन अभियान चलाएं।
- मौजूदा स्वास्थ्य कानूनों में भेदभाव और भौगोलिक बाधाओं को स्पष्ट रूप से संबोधित करने के लिए संशोधन करें।
- नीति निर्माण और निगरानी के लिए NFHS, NSSO और UHRC के आंकड़ों का व्यापक उपयोग करें।
- भारत में आवासीय पृथक्करण मुख्य रूप से क्षेत्रीय भाषा भिन्नताओं के कारण होता है।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 स्वास्थ्य सेवा तक समान पहुंच सुनिश्चित करती है।
- भारत में स्वास्थ्य व्यय का 60% से अधिक हिस्सा सीधे जेब से खर्च होता है।
- पृथक शहरी गरीब इलाकों में शिशु मृत्यु दर समृद्ध शहरी इलाकों की तुलना में लगभग दोगुनी है।
- शहरी स्थानीय निकायों के पास सभी शहरी इलाकों में स्वास्थ्य सेवा प्रबंधन के लिए पर्याप्त अवसंरचना है।
- स्वास्थ्य बीमा कवरेज शहरी झुग्गी इलाकों में गैर-झुग्गी इलाकों की तुलना में अधिक है।
मुख्य प्रश्न
सामाजिक-आर्थिक और जातिगत कारणों से उत्पन्न आवासीय पृथक्करण भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को कैसे प्रभावित करता है? नीतिगत खामियों पर चर्चा करें और पृथक शहरी इलाकों में स्वास्थ्य समानता सुधारने के लिए सुझाव दें। (250 शब्द)
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 – सामाजिक न्याय और स्वास्थ्य शासन
- झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड के आदिवासी और आर्थिक रूप से पिछड़े क्षेत्र स्वास्थ्य पहुंच में भौगोलिक पृथक्करण दिखाते हैं; रांची के झुग्गी इलाकों में भी ऐसी असमानताएं हैं।
- मुख्य परीक्षा संकेत: राज्य स्तर के आदिवासी स्वास्थ्य संकेतक, रांची के शहरी झुग्गी इलाकों की चुनौतियां और राज्य स्वास्थ्य मिशनों की भूमिका पर प्रकाश डालें।
भारत में स्वास्थ्य का अधिकार कौन सा संवैधानिक प्रावधान गारंटी करता है?
स्वास्थ्य का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से व्युत्पन्न है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच के अधिकार के रूप में व्याख्यायित किया है।
भारत के शहरी इलाकों में आवासीय पृथक्करण शिशु मृत्यु दर को कैसे प्रभावित करता है?
ICMR 2022 के अध्ययन के अनुसार, पृथक शहरी गरीब इलाकों में शिशु मृत्यु दर 35 प्रति 1000 जीवित जन्म है, जो समृद्ध शहरी इलाकों के 18 प्रति 1000 से लगभग दोगुनी है। यह स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच और जीवन स्तर में असमानताओं को दर्शाता है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन शहरी स्वास्थ्य में क्या भूमिका निभाता है?
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लक्षित स्वास्थ्य कार्यक्रम लागू करता है, जिनमें शहरी झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्र भी शामिल हैं। इसका उद्देश्य अवसंरचना और सेवा वितरण सुधारना है, हालांकि पृथक इलाकों में इसका उपयोग 40% से कम है।
पृथक समुदायों के लिए सीधे जेब से होने वाला खर्च क्यों चिंता का विषय है?
भारत में स्वास्थ्य व्यय का 62.6% हिस्सा सीधे जेब से खर्च होता है, जो आर्थिक रूप से कमजोर और पृथक समुदायों पर असमान रूप से भारी बोझ डालता है क्योंकि उनके पास किफायती सार्वजनिक या बीमित स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सीमित है।
ब्राजील की फैमिली हेल्थ स्ट्रेटेजी से भारत क्या सीख सकता है?
ब्राजील की फैमिली हेल्थ स्ट्रेटेजी ने पृथक फावेलास में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा कवरेज को 20% से बढ़ाकर 80% से ऊपर किया और शिशु मृत्यु दर में 40% की कमी लाई, जो समुदाय आधारित और भौगोलिक रूप से लक्षित स्वास्थ्य हस्तक्षेपों की सफलता को दर्शाता है।
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