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भारत में आवासीय पृथक्करण और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच पर इसका प्रभाव

भारत में आवासीय पृथक्करण मुख्य रूप से जाति, वर्ग और आर्थिक असमानताओं से प्रभावित होता है, जिसके कारण शहरी झुग्गी-झोपड़ी और ग्रामीण इलाकों में वंचित आबादी एकत्रित हो जाती है। यह पृथक्करण सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुंच में बड़ी बाधाएं पैदा करता है, क्योंकि पृथक समुदायों में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता दोनों कम होती है। NFHS-5 (2019-21) के अनुसार, शहरी झुग्गी-झोपड़ी परिवारों का 65% से अधिक हिस्सा सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी की शिकायत करता है, जबकि Rural Health Statistics (2022) बताता है कि केवल 40% पृथक ग्रामीण आबादी के पास 5 किलोमीटर के दायरे में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है। ये भौगोलिक असमानताएं स्वास्थ्य असमानताओं को बढ़ावा देती हैं, जो शहरी गरीब इलाकों में प्रति 1000 जीवित जन्मों पर 35 की शिशु मृत्यु दर के रूप में दिखती हैं, जबकि संपन्न इलाकों में यह 20 है (SRS 2022)।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: स्वास्थ्य और शासन, सामाजिक न्याय, शहरी विकास
  • निबंध: स्वास्थ्य समानता, शहरीकरण और सार्वजनिक नीति
  • मेन्स: स्वास्थ्य के अधिकार पर संवैधानिक प्रावधान, NHM की भूमिका, स्वास्थ्य के सामाजिक-आर्थिक निर्धारक

स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को नियंत्रित करने वाला संवैधानिक और कानूनी ढांचा

संविधान का अनुच्छेद 21 जीवन के अधिकार की गारंटी देता है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वास्थ्य के अधिकार के रूप में भी व्याख्यायित किया है। Epidemic Diseases Act, 1897 सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों में कानूनी उपाय प्रदान करता है, लेकिन नियमित स्वास्थ्य सेवाओं की व्यापक कवरेज नहीं देता। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) के तहत, विशेष रूप से ग्रामीण और शहरी गरीब क्षेत्रों में स्वास्थ्य अवसंरचना का विस्तार करता है। विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में पहुंच सुनिश्चित करने का प्रावधान करता है (धारा 20)। सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णय जैसे पश्चिम बंगाल खेत मजदूर समिति बनाम राज्य पश्चिम बंगाल (1996) राज्य की जिम्मेदारी को मजबूत करते हैं कि वह समान स्वास्थ्य पहुंच सुनिश्चित करे।

स्वास्थ्य पहुंच की असमानता के आर्थिक आयाम

भारत का सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय लगभग 1.3% GDP है (Economic Survey 2023-24), जो WHO द्वारा सुझाए गए 5% से काफी कम है। इस अपर्याप्त निवेश का सबसे ज्यादा असर पृथक समुदायों पर पड़ता है। शहरी गरीब आबादी के लिए स्वास्थ्य पर अपनी जेब से खर्च 60% से अधिक है (National Health Accounts 2019-20), जिससे कई लोग गरीबी में धकेल दिए जाते हैं। 2023-24 में NHM के बजट आवंटन में वृद्धि के बावजूद (INR 39,000 करोड़), संसाधनों का वितरण असमान बना हुआ है, शहरी झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य अवसंरचना की घनत्व संपन्न इलाकों की तुलना में 30% कम है (MoHFW 2022)। निजी स्वास्थ्य क्षेत्र, जिसकी कीमत USD 100 बिलियन है, इन कमियों को पूरा करता है, लेकिन यह वंचित समूहों के लिए महंगा है। पृथक समुदायों में खराब स्वास्थ्य पहुंच के कारण उत्पादकता हानि GDP का 2.5% मानी जाती है (World Bank 2023)।

स्वास्थ्य असमानताओं को दूर करने में संस्थागत भूमिकाएं

  • MoHFW: नीतियां बनाता है और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम लागू करता है।
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM): ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य अवसंरचना सुधारने वाला मुख्य कार्यक्रम।
  • नीति आयोग: स्वास्थ्य समानता और संसाधन आवंटन पर नीति सुझाव देता है।
  • National Health Systems Resource Centre (NHSRC): स्वास्थ्य प्रणाली सुदृढ़ीकरण के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करता है।
  • WHO India: अंतरराष्ट्रीय मानक और महामारी विज्ञान डेटा उपलब्ध कराता है।

पृथक्करण के स्वास्थ्य पहुंच पर प्रभाव के आंकड़े

  • 65% से अधिक शहरी झुग्गी-झोपड़ी परिवारों को सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी (NFHS-5, 2019-21)।
  • पृथक शहरी गरीब इलाकों में शिशु मृत्यु दर 35 प्रति 1000 जीवित जन्म, जबकि संपन्न शहरी इलाकों में 20 (SRS 2022)।
  • पृथक ग्रामीण आबादी के केवल 40% के पास 5 किलोमीटर के भीतर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (Rural Health Statistics 2022)।
  • 60% पृथक समुदाय अनौपचारिक या अप्रशासित स्वास्थ्य प्रदाताओं पर निर्भर (NSSO 75th Round, 2017-18)।
  • COVID-19 टीकाकरण कवरेज पृथक शहरी झुग्गियों में सामान्य शहरी आबादी से 15% कम (MoHFW 2022)।
  • पृथक क्षेत्रों में स्वच्छता पहुंच 25% कम, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणाम बिगड़ते हैं (स्वच्छ भारत मिशन रिपोर्ट 2023)।

तुलनात्मक अध्ययन: भारत और ब्राजील में पृथक समुदायों के लिए दृष्टिकोण

पहलूभारतब्राजील
प्राथमिक देखभाल मॉडलNHM के तहत असमान शहरी झुग्गी कवरेजपरिवार स्वास्थ्य रणनीति, जिसमें सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता शामिल
पृथक क्षेत्रों में स्वास्थ्य अवसंरचना की घनत्वसंपन्न इलाकों से 30% कमफावेलास में एक दशक में 40% वृद्धि
शिशु मृत्यु दर में कमीमामूली सुधार; 35 बनाम 20 प्रति 1000 जीवित जन्म का अंतर बना हुआपृथक फावेलास में 30% कमी (PAHO 2022)
सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता की भागीदारीसीमित और खंडितव्यापक, बेहतर कवरेज और विश्वास के लिए महत्वपूर्ण

नीति और कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण कमियां

वर्तमान भारतीय स्वास्थ्य नीतियां जाति, वर्ग और भौगोलिक पृथक्करण के जटिल मेल को ठीक से संबोधित नहीं करतीं। खंडित योजना के कारण संसाधनों का गलत आवंटन होता है और वंचित आवासीय इलाकों को पर्याप्त लक्ष्य नहीं मिल पाता। NHM के तहत शहरी स्वास्थ्य कार्यक्रम अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों पर केंद्रित हैं, जिससे शहरी झुग्गी-झोपड़ी उपेक्षित रहती है। पृथक क्षेत्रों में अनौपचारिक स्वास्थ्य सेवा पर निर्भरता प्रणालीगत विफलता को दर्शाती है। स्वच्छता और टीकाकरण असमानताएं स्वास्थ्य असमानताओं को और बढ़ाती हैं।

महत्व और आगे का रास्ता

  • स्वास्थ्य अवसंरचना की योजना में आवासीय पृथक्करण के भौगोलिक डेटा को शामिल कर लक्षित संसाधन आवंटन करें।
  • ब्राजील के परिवार स्वास्थ्य रणनीति के मॉडल पर आधारित सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता कार्यक्रम का विस्तार करें ताकि पृथक शहरी और ग्रामीण इलाकों में विश्वास और कवरेज बढ़े।
  • WHO की सिफारिश के अनुसार सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय बढ़ाएं ताकि जेब से खर्च कम हो और अवसंरचना घनत्व सुधरे।
  • विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत पहुंच सुनिश्चित करने वाले कानूनी ढांचे को मजबूत करें।
  • पृथक समुदायों में स्वच्छता और टीकाकरण अभियान को बढ़ावा दें ताकि स्वास्थ्य के सामाजिक निर्धारकों को संबोधित किया जा सके।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत में आवासीय पृथक्करण और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. आवासीय पृथक्करण मुख्य रूप से निजी स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच को प्रभावित करता है।
  2. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य अवसंरचना में सुधार करना है।
  3. पृथक शहरी गरीब इलाकों में शिशु मृत्यु दर संपन्न शहरी इलाकों की तुलना में काफी अधिक है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि आवासीय पृथक्करण मुख्य रूप से सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को सीमित करता है, निजी सुविधाओं को नहीं। कथन 2 सही है क्योंकि NHM ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य अवसंरचना को कवर करता है। कथन 3 सही है, जैसा कि SRS 2022 के आंकड़े दर्शाते हैं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय और पृथक समुदायों पर इसके प्रभाव के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार भारत का सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय लगभग GDP का 5% है।
  2. शहरी गरीब आबादी के लिए जेब से स्वास्थ्य खर्च 60% से अधिक है।
  3. पृथक शहरी झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य अवसंरचना की घनत्व संपन्न इलाकों की तुलना में 30% कम है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है; सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय लगभग 1.3% GDP है न कि 5%। कथन 2 और 3 सही हैं, जैसा कि National Health Accounts 2019-20 और MoHFW 2022 के आंकड़े दर्शाते हैं।

मेन्स प्रश्न

सामाजिक-आर्थिक और जातिगत कारकों के आधार पर आवासीय पृथक्करण भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को कैसे प्रभावित करता है, इस पर चर्चा करें। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन जैसे वर्तमान नीतिगत उपायों की इन भौगोलिक असमानताओं को दूर करने में प्रभावशीलता का मूल्यांकन करें और स्वास्थ्य समानता सुधारने के लिए सुझाव दें।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 - सामाजिक न्याय और स्वास्थ्य अवसंरचना
  • झारखंड परिप्रेक्ष्य: झारखंड में आदिवासी और वंचित आबादी उच्च स्तर पर आवासीय पृथक्करण का सामना करती है, जहां ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में PHC और स्वच्छता की कमी स्वास्थ्य परिणामों को प्रभावित करती है।
  • मेन्स के लिए सुझाव: आदिवासी इलाकों में भौगोलिक असमानताओं, झारखंड में NHM के कार्यान्वयन की कमियों, लक्षित संसाधन आवंटन और सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता की भूमिका पर जोर दें।
भारत में स्वास्थ्य के अधिकार की संवैधानिक गारंटी कौन-सा प्रावधान देता है?

संविधान का अनुच्छेद 21 जीवन के अधिकार की गारंटी देता है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वास्थ्य और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच के अधिकार के रूप में व्याख्यायित किया है।

आवासीय पृथक्करण भारत में शिशु मृत्यु दर को कैसे प्रभावित करता है?

पृथक शहरी गरीब इलाकों में शिशु मृत्यु दर 35 प्रति 1000 जीवित जन्म है, जो संपन्न शहरी इलाकों के 20 प्रति 1000 की तुलना में काफी अधिक है (SRS 2022), जिसका कारण गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं और स्वच्छता की कमी है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की स्वास्थ्य असमानताओं को दूर करने में क्या भूमिका है?

NHM का उद्देश्य विशेष रूप से वंचित आबादी वाले ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य अवसंरचना और सेवा वितरण में सुधार करना है, लेकिन पृथक शहरी झुग्गी क्षेत्रों में इसकी पहुंच अभी भी चुनौतीपूर्ण है।

स्वास्थ्य असमानताओं को कम करने में सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत का सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय 1.3% GDP है, जो WHO की सिफारिश से कम है, जिससे अवसंरचना सीमित होती है और जेब से खर्च बढ़ता है, जो पृथक और गरीब समुदायों को disproportionately प्रभावित करता है।

ब्राजील की परिवार स्वास्थ्य रणनीति भारत के लिए कैसे मॉडल प्रस्तुत करती है?

ब्राजील की परिवार स्वास्थ्य रणनीति में सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को फावेलास जैसे पृथक इलाकों में शामिल किया गया है, जिससे प्राथमिक देखभाल कवरेज में 40% वृद्धि और शिशु मृत्यु दर में 30% कमी आई है, जो भारत में भी प्रभावी सामुदायिक स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के लिए मार्गदर्शक हो सकती है।

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