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परिचय: झारखंड की नवीकरणीय ऊर्जा की तस्वीर

झारखंड में सौर और पवन ऊर्जा के महत्वपूर्ण संसाधन मौजूद हैं, लेकिन इनका उपयोग अभी तक अपेक्षित स्तर पर नहीं हो पाया है। मार्च 2024 तक, राज्य में 150 MW की सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित है, जबकि पवन ऊर्जा की क्षमता 50 MW से कम है, जबकि संभावित क्षमता लगभग 300 MW आंकी गई है (JREDA वार्षिक रिपोर्ट 2023; CEA रिपोर्ट 2022)। राज्य की ऊर्जा खपत में कोयले का हिस्सा 70% है (झारखंड ऊर्जा रिपोर्ट 2023), जो नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ने की तत्काल जरूरत को दर्शाता है ताकि सतत विकास और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

झारखंड नवीकरणीय ऊर्जा नीति 2017 राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC) के तहत राष्ट्रीय सौर मिशन के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य 2030 तक 500 MW सौर और 100 MW पवन ऊर्जा क्षमता हासिल करना है। इस दिशा में झारखंड नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (JREDA), झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग (JSERC) और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) जैसे संस्थागत निकाय संसाधन आकलन, नीति क्रियान्वयन और नियामक निगरानी की भूमिका निभा रहे हैं।

JPSC परीक्षा से संबंध

  • पर्यावरण पेपर: नवीकरणीय ऊर्जा नीति और पर्यावरण संरक्षण
  • आर्थिक विकास: झारखंड में ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास
  • पिछले प्रश्न: JPSC 2021 में नवीकरणीय ऊर्जा ढांचे और पारिस्थितिक चुनौतियां

झारखंड में सौर ऊर्जा की संभावनाएं और विकास

झारखंड में औसत सौर विकिरण 5.5 kWh/m2/दिन है, जो राष्ट्रीय औसत 4.5 kWh/m2/दिन से अधिक है (IMD 2023)। यह उच्च सौर विकिरण बड़े पैमाने पर और विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए अनुकूल माहौल प्रदान करता है।

  • स्थापित सौर क्षमता: 150 MW (मार्च 2024), जिसमें 40 MW छत पर सौर ऊर्जा शामिल है (JREDA वार्षिक रिपोर्ट 2023)।
  • राज्य का लक्ष्य: झारखंड नवीकरणीय ऊर्जा नीति 2017 के तहत 2030 तक 500 MW सौर क्षमता हासिल करना।
  • बजट आवंटन: 2023-24 में ₹150 करोड़ नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए, खासकर सौर छत और मिनी-ग्रिड सिस्टम पर जोर (झारखंड बजट 2023-24)।
  • चुनौतियां: सीमित ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर और वित्तीय प्रोत्साहन सौर परियोजनाओं के विस्तार में बाधक।

पवन ऊर्जा की संभावनाएं और बाधाएं

झारखंड में पवन ऊर्जा की संभावित क्षमता लगभग 300 MW है, जो मुख्य रूप से पश्चिमी जिलों जैसे पलामू और लातेहार में केंद्रित है (CEA रिपोर्ट 2022)। हालांकि, स्थापित क्षमता 50 MW से कम है, जिसके पीछे कई संरचनात्मक बाधाएं हैं।

  • पवन ऊर्जा की भौगोलिक सीमितता व्यापक विस्तार में बाधा।
  • ग्रिड कनेक्टिविटी की कमी और पवन ऊर्जा के लिए विशेष नीति प्रोत्साहनों का अभाव निजी निवेश को रोकता है।
  • स्थानीय सरकारी स्तर पर तकनीकी क्षमता की कमी परियोजनाओं के क्रियान्वयन और रखरखाव में बाधक।

नवीकरणीय ऊर्जा के लिए कानूनी और संस्थागत ढांचा

झारखंड में नवीकरणीय ऊर्जा विकास एक संवैधानिक और विधायी ढांचे के तहत संचालित होता है, जो पर्यावरण संरक्षण और नवीकरणीय ऊर्जा के प्रचार-प्रसार का निर्देश देता है।

  • संविधान का अनुच्छेद 48A राज्य को पर्यावरण की रक्षा और सुधार के लिए बाध्य करता है।
  • इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 (धारा 86(1)(e)) राज्य विद्युत नियामक आयोगों को नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने और रिन्यूएबल परचेज ऑब्लिगेशन (RPO) लागू करने का अधिकार देता है।
  • झारखंड नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (JREDA) राज्य की नोडल एजेंसी के रूप में झारखंड नवीकरणीय ऊर्जा नीति 2017 को लागू करती है।
  • पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 और वायु (प्रदूषण नियंत्रण) अधिनियम, 1981 प्रदूषण नियंत्रण के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा को अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन देते हैं।
  • झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग (JSERC) टैरिफ निर्धारण और नवीकरणीय ऊर्जा के समावेशन को नियंत्रित करता है।

आर्थिक पहलू और विकास संभावनाएं

झारखंड का नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र तेजी से बढ़ने की स्थिति में है, जिसका अनुमानित वार्षिक वृद्धि दर 2030 तक 12% है। यह विस्तार राज्य की कोयले पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने के लिए आवश्यक है, क्योंकि कोयला ऊर्जा खपत का 70% हिस्सा है (झारखंड ऊर्जा रिपोर्ट 2023)।

  • नवीकरणीय ऊर्जा झारखंड की कुल ऊर्जा मिश्रण में लगभग 4% योगदान देती है, जो राष्ट्रीय औसत 12% से काफी कम है (CEA 2024)।
  • राज्य का 2023-24 का बजट ₹150 करोड़ सौर छत और मिनी-ग्रिड सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए आवंटित किया गया है, जिससे विकेंद्रीकृत ऊर्जा पहुंच बढ़ेगी।
  • नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में वृद्धि स्थानीय रोजगार सृजन में सहायक होगी, खासकर स्थापना, रखरखाव और निर्माण क्षेत्र में।
  • कोयला पर निर्भरता सामाजिक-आर्थिक चुनौतियां पैदा करती है, जिनमें पर्यावरणीय क्षरण और स्वास्थ्य प्रभाव शामिल हैं, जिन्हें नवीकरणीय ऊर्जा कम कर सकती है।

तुलनात्मक विश्लेषण: झारखंड बनाम जर्मनी नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने में

मापदंडझारखंडजर्मनी
सौर विकिरण (kWh/m2/दिन)5.53.5
विद्युत में नवीकरणीय ऊर्जा का हिस्सा4%40%+
स्थापित सौर क्षमता (MW)150~60,000
पवन ऊर्जा क्षमता (MW)300~60,000
नीति प्रोत्साहनसीमित फीड-इन टैरिफ, छत पर सौर पर ध्यानआक्रामक फीड-इन टैरिफ, सामुदायिक सौर परियोजनाएं
ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चरबड़े पैमाने पर समाकलन के लिए अपर्याप्तमजबूत स्मार्ट ग्रिड और स्टोरेज सिस्टम

सौर विकिरण में श्रेष्ठता के बावजूद, झारखंड में नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग जर्मनी के व्यापक नीति प्रोत्साहनों और ग्रिड आधुनिकीकरण की तुलना में बहुत कम है। यह अंतर झारखंड में बेहतर वित्तीय साधनों और बुनियादी ढांचे के विकास की जरूरत को दर्शाता है।

झारखंड में नवीकरणीय ऊर्जा विकास की चुनौतियां

  • ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर: सीमित ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क सौर और पवन ऊर्जा के अस्थायी उत्पादन के समाकलन में बाधा।
  • वित्तीय प्रोत्साहन: निजी निवेशकों के लिए आकर्षक सब्सिडी, कर लाभ और जोखिम कम करने वाले उपायों का अभाव।
  • क्षमता विकास: स्थानीय सरकारी स्तर पर तकनीकी विशेषज्ञता और संस्थागत क्षमता की कमी परियोजनाओं के क्रियान्वयन और स्थिरता में बाधक।
  • भूमि अधिग्रहण: भूमि उपयोग और पारिस्थितिक संवेदनशीलताओं को लेकर विवाद परियोजना अनुमोदन में देरी।
  • नीति क्रियान्वयन: रिन्यूएबल परचेज ऑब्लिगेशन के अपर्याप्त पालन और राज्य-विशिष्ट फीड-इन टैरिफ की कमी से बाजार में अनिश्चितता।

आगे का रास्ता: झारखंड की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का दोहन

  • स्मार्ट तकनीकों के साथ ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर को उन्नत करना ताकि बड़े पैमाने पर सौर और पवन ऊर्जा का समाकलन हो सके।
  • राज्य स्तर पर फीड-इन टैरिफ और वित्तीय प्रोत्साहन लागू कर निजी क्षेत्र के निवेश को आकर्षित करना।
  • JREDA और केंद्रीय योजनाओं के माध्यम से स्थानीय अधिकारियों और तकनीशियनों के लिए क्षमता विकास कार्यक्रम मजबूत करना।
  • गांवों में सौर मिनी-ग्रिड का उपयोग बढ़ाकर ग्रामीण विद्युतीकरण और कोयले पर निर्भरता कम करना।
  • पर्यावरणीय सुरक्षा के कड़े निगरानी तंत्र लागू कर पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
झारखंड की नवीकरणीय ऊर्जा संभावनाओं के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. झारखंड का औसत सौर विकिरण राष्ट्रीय औसत से अधिक है।
  2. झारखंड में पवन ऊर्जा की क्षमता 1000 MW से अधिक है।
  3. 2024 तक नवीकरणीय ऊर्जा झारखंड की कुल ऊर्जा मिश्रण में 5% से कम योगदान देती है।
  • aकेवल 1 और 3
  • bकेवल 2
  • cकेवल 1 और 2
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि झारखंड का सौर विकिरण 5.5 kWh/m2/दिन है, जो राष्ट्रीय औसत 4.5 से अधिक है। कथन 2 गलत है; पवन ऊर्जा क्षमता लगभग 300 MW है। कथन 3 सही है क्योंकि नवीकरणीय ऊर्जा का योगदान लगभग 4% है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
झारखंड की नवीकरणीय ऊर्जा नीति ढांचे के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. झारखंड नवीकरणीय ऊर्जा नीति 2017 का लक्ष्य 2030 तक 500 MW सौर क्षमता हासिल करना है।
  2. इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003, JREDA को टैरिफ निर्धारण का अधिकार देता है।
  3. संविधान का अनुच्छेद 48A राज्य को पर्यावरण संरक्षण का दायित्व देता है।
  • aकेवल 1 और 3
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है; नीति 2030 तक 500 MW सौर ऊर्जा का लक्ष्य रखती है। कथन 2 गलत है; टैरिफ निर्धारण JSERC के अधिकार क्षेत्र में है, JREDA का नहीं। कथन 3 सही है क्योंकि अनुच्छेद 48A पर्यावरण संरक्षण का दायित्व देता है।

झारखंड और JPSC से संबंध

  • JPSC पेपर: पेपर 2 - पर्यावरण और पारिस्थितिकी; पेपर 3 - आर्थिक विकास
  • झारखंड का नजरिया: राज्य-विशिष्ट नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य, कोयला निर्भरता, और संस्थागत ढांचे
  • मुख्य बिंदु: झारखंड की सौर और पवन क्षमता, नीति पहल, ग्रिड समाकलन की चुनौतियां, और नवीकरणीय ऊर्जा संक्रमण के सामाजिक-आर्थिक लाभों पर आधारित उत्तर तैयार करें।
झारखंड में औसत सौर विकिरण कितना है और यह राष्ट्रीय स्तर से कैसा है?

झारखंड में औसत सौर विकिरण 5.5 kWh/m2/दिन है, जो राष्ट्रीय औसत 4.5 kWh/m2/दिन से अधिक है, जिससे यह सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए उपयुक्त है (IMD 2023)।

झारखंड में नवीकरणीय ऊर्जा के लिए मुख्य संस्थागत निकाय कौन-कौन से हैं?

झारखंड नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (JREDA) नीति क्रियान्वयन की नोडल एजेंसी है, जबकि झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग (JSERC) टैरिफ नियमन करता है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) तकनीकी आकलन प्रदान करता है।

झारखंड की ऊर्जा मिश्रण में नवीकरणीय ऊर्जा का वर्तमान योगदान कितना है?

2024 तक नवीकरणीय ऊर्जा झारखंड की कुल ऊर्जा खपत का लगभग 4% हिस्सा है, जो राष्ट्रीय औसत 12% से कम है (CEA 2024)।

झारखंड में पवन ऊर्जा विस्तार की मुख्य चुनौतियां क्या हैं?

चुनौतियों में सीमित ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर, वित्तीय प्रोत्साहनों का अभाव, पवन क्षमता का कुछ जिलों तक सीमित होना, और स्थानीय तकनीकी क्षमता की कमी शामिल हैं (CEA रिपोर्ट 2022)।

झारखंड की नवीकरणीय ऊर्जा नीति राष्ट्रीय लक्ष्यों से कैसे मेल खाती है?

यह नीति राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना के तहत राष्ट्रीय सौर मिशन से मेल खाती है, जिसका लक्ष्य 2030 तक 500 MW सौर और 100 MW पवन ऊर्जा क्षमता हासिल करना है, जो भारत के व्यापक नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों का समर्थन करता है।

प्रैक्टिस मेन प्रश्न

झारखंड की नवीकरणीय ऊर्जा संभावनाओं पर चर्चा करें, खासकर सौर और पवन संसाधनों पर ध्यान देते हुए। उपलब्ध संस्थागत और नीतिगत ढांचे का विश्लेषण करें, इन संसाधनों के दोहन में आने वाली चुनौतियों को उजागर करें, और राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार के लिए सुझाव दें। (250 शब्द)

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