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परिचय: झारखंड का अक्षय ऊर्जा परिदृश्य

झारखंड में औसत सौर इनसुलेशन 5.5 kWh/m2/दिन है, जो देश के औसत 4.5 kWh/m2/दिन से बेहतर है, जिससे यह सौर ऊर्जा विकास के लिए एक उपयुक्त प्रदेश बनता है (MNRE, 2023)। 50 मीटर ऊंचाई पर पवन की गति 4.5 से 5.5 मीटर/सेकंड के बीच है, जो छोटे और मध्यम स्तर के पवन ऊर्जा प्रोजेक्ट के लिए अनुकूल है (CEA Wind Resource Atlas, 2022)। बावजूद इसके, झारखंड में अक्षय ऊर्जा का कुल ऊर्जा मिश्रण में हिस्सा केवल 8.5% है, जो राष्ट्रीय औसत 12.5% से कम है (CEA रिपोर्ट, 2023)। यह अंतर बुनियादी ढांचे की कमी और नीति के क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं को दर्शाता है।

JPSC परीक्षा से संबंधित

  • सामान्य अध्ययन पेपर 3: ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण
  • झारखंड की अक्षय ऊर्जा नीतियां और चुनौतियां
  • पिछले वर्ष का प्रश्न (JPSC 2022): झारखंड में अक्षय ऊर्जा अपनाने की चुनौतियां

झारखंड में अक्षय ऊर्जा से जुड़ा कानूनी और नीति ढांचा

इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 की धारा 86(1)(e) के तहत झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग (JSERC) को राज्य में अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने का अधिकार दिया गया है। JSERC ने इस दिशा में Renewable Energy Purchase Obligations (REPO) Regulations, 2021 लागू किए हैं, जिनके तहत बाध्यकारी संस्थाओं को अक्षय ऊर्जा खरीदनी होती है। झारखंड की अपनी Renewable Energy Policy, 2018 के तहत 2025 तक 500 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है, जो राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC), 2008 के तहत राष्ट्रीय सौर मिशन से मेल खाता है।

  • पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 और झारखंड वन संरक्षण अधिनियम, 1975 के तहत पर्यावरणीय मंजूरी दी जाती है ताकि परियोजनाओं के दौरान पारिस्थितिक सुरक्षा बनी रहे।
  • राज्य की नोडल एजेंसी झारखंड अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (JREDA) नीति क्रियान्वयन और परियोजना सुविधा प्रदान करने की जिम्मेदार है।
  • नई एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) राष्ट्रीय स्तर पर नीति मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

झारखंड में अक्षय ऊर्जा का आर्थिक और बुनियादी ढांचा स्थिति

राज्य बजट 2023-24 में अक्षय ऊर्जा के बुनियादी ढांचे के लिए 150 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं (झारखंड बजट 2023-24)। मार्च 2024 तक सौर ऊर्जा की स्थापित क्षमता 200 मेगावाट पहुंच चुकी है, जबकि पवन ऊर्जा में केवल 15 मेगावाट स्थापित है, जबकि संभावित क्षमता 500 मेगावाट है (MNRE; JREDA)। राज्य का अक्षय ऊर्जा बाजार 2030 तक 18% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ने का अनुमान है (CRISIL रिपोर्ट 2023), जिससे लगभग 12,000 रोजगार सृजित होने की संभावना है (NITI आयोग रिपोर्ट 2022)।

  • ग्रिड इंटीग्रेशन बड़ी चुनौती है, जहां अपर्याप्त ट्रांसमिशन और स्टोरेज के कारण सौर ऊर्जा का 12% हिस्सा कट जाता है (JREDA रिपोर्ट 2023)।
  • राज्य में 29.6% वन क्षेत्र (वन सर्वेक्षण भारत, 2023) होने के कारण परियोजना स्थल सीमित हैं, जो पर्यावरणीय जांच की मांग करता है।
  • ऊर्जा भंडारण और स्मार्ट ग्रिड तकनीकें अभी विकसित नहीं हुई हैं, जिससे अक्षय ऊर्जा की अनियमित आपूर्ति प्रबंधन में दिक्कत होती है।

संस्थागत भूमिकाएं और समन्वय की चुनौतियां

झारखंड के अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में कई संस्थाएं शामिल हैं जिनकी जिम्मेदारियां आंशिक रूप से ओवरलैप करती हैं:

  • JREDA परियोजना प्रचार और कार्यान्वयन में नेतृत्व करता है, लेकिन बड़े पैमाने पर ग्रिड आधुनिकीकरण के लिए संसाधन सीमित हैं।
  • JSERC टैरिफ निर्धारण और REPO लागू करने का काम करता है, लेकिन निगरानी तंत्र कमजोर होने से प्रवर्तन में दिक्कतें आती हैं।
  • JSPCB पर्यावरण अनुपालन की देखरेख करता है, जिससे अक्षय ऊर्जा विस्तार के साथ वन और जैव विविधता संरक्षण संतुलित रहता है।
  • MNRE और National Institute of Solar Energy (NISE) तकनीकी सहायता और नीति ढांचे प्रदान करते हैं, लेकिन राज्य स्तर पर बेहतर समन्वय की जरूरत है।

तुलनात्मक अध्ययन: झारखंड बनाम जर्मनी में अक्षय ऊर्जा विस्तार

मापदंड झारखंड जर्मनी
कुल विद्युत मिश्रण में अक्षय ऊर्जा का हिस्सा 8.5% (2023) 40% से अधिक (2023)
सौर इनसुलेशन 5.5 kWh/m2/दिन लगभग 3.5 kWh/m2/दिन
स्थापित पवन क्षमता 15 MW (500 MW संभावित) 60 GW से अधिक
नीति उपकरण REPO, राज्य अक्षय ऊर्जा नीति 2018 Renewable Energy Sources Act (EEG) 2000 के तहत फीड-इन टैरिफ
ग्रिड बुनियादी ढांचा सीमित, 12% सौर कटौती आधुनिक ग्रिड और स्टोरेज इंटीग्रेशन

झारखंड की अक्षय ऊर्जा क्षमता के समुचित उपयोग में मुख्य चुनौतियां

  • बुनियादी ढांचा की कमी: अपर्याप्त ट्रांसमिशन लाइनें और ऊर्जा भंडारण की कमी के कारण सौर ऊर्जा का बार-बार कटाव होता है।
  • नीति क्रियान्वयन में कमियां: REPO के प्रवर्तन और प्रोत्साहन तंत्र कमजोर हैं, जिससे निजी क्षेत्र की भागीदारी सीमित रहती है।
  • पारिस्थितिक प्रतिबंध: वन क्षेत्र और जैव विविधता के कारण परियोजना स्थलों पर पाबंदी है, जिससे सख्त पर्यावरण मंजूरी की जरूरत होती है।
  • वित्तीय बाधाएं: राज्य के बजट सीमित हैं और वित्तीय प्रोत्साहन कम होने से बड़े निवेश में कमी आती है।
  • तकनीकी क्षमता की कमी: कुशल कार्यबल और तकनीकी विशेषज्ञता की कमी से परियोजना क्रियान्वयन और ग्रिड इंटीग्रेशन प्रभावित होता है।

आगे का रास्ता: झारखंड की अक्षय ऊर्जा रणनीति को राष्ट्रीय लक्ष्यों के साथ जोड़ना

  • ग्रिड आधुनिकीकरण को तेज करें और ऊर्जा भंडारण समाधान लागू करें ताकि कटौती कम हो और विश्वसनीयता बढ़े।
  • JSERC के माध्यम से REPO के प्रवर्तन को मजबूत करें और छत पर सौर जैसे वितरित उत्पादन मॉडल को प्रोत्साहित करें।
  • वन संरक्षण अधिनियम, 1975 के आधार पर पारिस्थितिक जोनिंग अपनाएं ताकि अक्षय ऊर्जा विस्तार और पर्यावरण संरक्षण संतुलित रहे।
  • बजट आवंटन बढ़ाएं और MNRE की केंद्रीय योजनाओं का लाभ उठाकर निजी निवेश आकर्षित करें।
  • JREDA, JSERC, JSPCB और MNRE के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करें ताकि योजना और निगरानी एकीकृत रूप से हो।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
झारखंड की अक्षय ऊर्जा क्षमता के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. झारखंड का औसत सौर इनसुलेशन राष्ट्रीय औसत से अधिक है।
  2. झारखंड में 50 मीटर ऊंचाई पर पवन गति बड़े पैमाने के पवन फार्म के लिए समुद्री राज्यों के समान उपयुक्त है।
  3. झारखंड में अक्षय ऊर्जा का कुल ऊर्जा मिश्रण में हिस्सा राष्ट्रीय औसत से कम है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि झारखंड का सौर इनसुलेशन 5.5 kWh/m²/दिन है, जो राष्ट्रीय औसत 4.5 kWh/m²/दिन से अधिक है। कथन 2 गलत है क्योंकि झारखंड की पवन गति (4.5-5.5 मीटर/सेकंड) मध्यम है और यह समुद्री राज्यों के बड़े पैमाने के पवन फार्म के लिए उपयुक्त नहीं है। कथन 3 सही है क्योंकि झारखंड का अक्षय ऊर्जा हिस्सा 8.5% है, जो राष्ट्रीय औसत 12.5% से कम है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
झारखंड की अक्षय ऊर्जा नीति ढांचे के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 JSERC को अक्षय ऊर्जा बढ़ावा देने का अधिकार देता है।
  2. झारखंड अक्षय ऊर्जा नीति 2018 का लक्ष्य 2025 तक 500 मेगावाट पवन ऊर्जा क्षमता जोड़ना है।
  3. REPO नियम बाध्यकारी संस्थाओं के लिए अक्षय ऊर्जा खरीदने का आदेश देते हैं।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 3
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 2
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 की धारा 86(1)(e) के तहत JSERC सहित सभी SERCs को अक्षय ऊर्जा बढ़ावा देने का अधिकार है। कथन 2 गलत है क्योंकि 2018 की नीति 2025 तक 500 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ने का लक्ष्य रखती है, पवन ऊर्जा का नहीं। कथन 3 सही है क्योंकि REPO नियम बाध्यकारी संस्थाओं को अक्षय ऊर्जा खरीदने का आदेश देते हैं।

मुख्य प्रश्न

झारखंड में सौर और पवन ऊर्जा की संभावनाओं के समुचित उपयोग में आ रही प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा करें। राज्य सरकार को इन चुनौतियों से निपटने और राष्ट्रीय अक्षय ऊर्जा लक्ष्यों के अनुरूप रणनीतियां अपनाने के लिए कौन-कौन से नीति और बुनियादी ढांचा उपाय करने चाहिए, सुझाव दें।

झारखंड और JPSC से जुड़ाव

  • JPSC पेपर: GS पेपर 3 – पर्यावरण, ऊर्जा और बुनियादी ढांचा
  • झारखंड का दृष्टिकोण: सौर इनसुलेशन, पवन गति, स्थापित क्षमता और नीति लक्ष्यों का राज्य-विशिष्ट डेटा
  • मुख्य बिंदु: बुनियादी ढांचे की कमियां, पारिस्थितिक प्रतिबंध, नीति प्रवर्तन और संस्थागत समन्वय पर आधारित उत्तर तैयार करें।
झारखंड का औसत सौर इनसुलेशन कितना है और यह राष्ट्रीय स्तर पर कैसा है?

झारखंड का औसत सौर इनसुलेशन 5.5 kWh/m2/दिन है, जो राष्ट्रीय औसत 4.5 kWh/m2/दिन से अधिक है, जिससे यह सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए अनुकूल प्रदेश बनता है (MNRE, 2023)।

झारखंड को अक्षय ऊर्जा बढ़ावा देने के लिए कौन-कौन से कानूनी प्रावधान हैं?

इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 (धारा 86(1)(e)) झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग को अक्षय ऊर्जा बढ़ावा देने का अधिकार देता है। झारखंड अक्षय ऊर्जा नीति 2018 और JSERC के REPO नियम 2021 इन प्रावधानों को लागू करते हैं।

झारखंड में पवन ऊर्जा की स्थापित क्षमता और संभावित क्षमता क्या है?

झारखंड में पवन ऊर्जा की अनुमानित क्षमता 500 मेगावाट है, लेकिन मार्च 2024 तक केवल 15 मेगावाट स्थापित है, जो इसकी कम उपयोगिता को दर्शाता है (JREDA)।

झारखंड में अक्षय ऊर्जा के बुनियादी ढांचे की मुख्य चुनौतियां क्या हैं?

मुख्य चुनौतियों में अपर्याप्त ग्रिड बुनियादी ढांचा, ऊर्जा भंडारण की कमी और इससे होने वाली 12% सौर ऊर्जा कटौती शामिल हैं, जो अक्षय ऊर्जा के उपयोग को सीमित करते हैं (JREDA रिपोर्ट 2023)।

झारखंड में अक्षय ऊर्जा का हिस्सा राष्ट्रीय औसत से कैसे तुलना करता है?

झारखंड में अक्षय ऊर्जा का हिस्सा कुल ऊर्जा मिश्रण में 8.5% है, जो 2023 के आंकड़ों के अनुसार राष्ट्रीय औसत 12.5% से कम है (CEA रिपोर्ट)।

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