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परिचय: भारत में उर्वरक नीति और वर्तमान चुनौतियां

भारत विश्व में दूसरा सबसे बड़ा उर्वरक उपभोक्ता है, जो 2023 तक लगभग 63 मिलियन टन उर्वरक का वार्षिक उपयोग करता है (रसायन और उर्वरक मंत्रालय)। वित्त वर्ष 2023 में उर्वरक सब्सिडी का बिल ₹1.05 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष से 30% अधिक है (आर्थिक सर्वेक्षण, 2023)। यह क्षेत्र Essential Commodities Act, 1955 और Fertiliser Control Order, 1985 के तहत संचालित होता है, तथा रसायन और उर्वरक मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले Department of Fertilizers (DoF) नीति निर्धारण और सब्सिडी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालता है। यूक्रेन युद्ध जैसे भू-राजनीतिक संघर्षों के कारण वैश्विक उर्वरक कीमतों में 40-50% की वृद्धि हुई है (विश्व बैंक कमोडिटी मार्केट्स आउटलुक, 2023), जिससे भारत की आयात निर्भरता और वित्तीय दबाव और बढ़ गया है तथा नीति सुधार की तत्काल आवश्यकता सामने आई है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था (सब्सिडी, कृषि इनपुट, बाहरी क्षेत्र)
  • GS पेपर 3: कृषि (इनपुट लागत, उर्वरक उपयोग दक्षता)
  • निबंध: वैश्विक संघर्षों का भारतीय अर्थव्यवस्था और कृषि पर प्रभाव

उर्वरक नीति का कानूनी एवं नियामक ढांचा

Essential Commodities Act, 1955 सरकार को उर्वरक उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित करने का अधिकार देता है, खासकर Section 3 के तहत उपलब्धता और मूल्य नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए। Fertiliser Control Order (FCO), 1985 को Fertiliser (Control) Order, 2020 द्वारा संशोधित किया गया है, जो गुणवत्ता मानक, मूल्य निर्धारण और स्टॉक सीमा तय करता है। ये कानून सरकार को उर्वरक वितरण पर नियंत्रण रखने, जमाखोरी रोकने और आयात को विनियमित करने में सक्षम बनाते हैं। Fertiliser Subsidy Scheme, जिसे DoF संचालित करता है, यूरिया और गैर-यूरिया उर्वरकों पर सब्सिडी प्रदान कर किसानों के लिए कीमतें किफायती बनाए रखता है, लेकिन इससे वित्तीय दबाव और बाजार विकृतियां भी उत्पन्न हुई हैं।

  • Essential Commodities Act की Section 3 उत्पादन और वितरण को कमी के समय नियंत्रित करने का प्रावधान देती है।
  • FCO उर्वरकों के लिए गुणवत्ता मानक और मूल्य सीमा निर्धारित करता है।
  • सब्सिडी योजना मुख्य रूप से यूरिया पर केंद्रित है, जबकि फॉस्फेटिक और पोटाशिक उर्वरकों के लिए पोषक तत्व आधारित निश्चित सब्सिडी दरें हैं।

आर्थिक पहलू: सब्सिडी बोझ और आयात निर्भरता

वित्त वर्ष 2023 में भारत का उर्वरक सब्सिडी बिल ₹1.05 लाख करोड़ रहा, जो वित्त वर्ष 2022 की तुलना में 30% अधिक है, यह वैश्विक कीमतों में वृद्धि और उपभोग बढ़ने के कारण हुआ (आर्थिक सर्वेक्षण, 2023)। यूरिया कुल उर्वरक खपत का लगभग 70% है और इसे लगभग ₹7,000 प्रति टन की भारी सब्सिडी मिलती है (Department of Fertilizers, 2023)। भारत अपने फॉस्फेटिक और पोटाशिक उर्वरकों का लगभग 85% आयात करता है, जो मुख्य रूप से रूस, चीन और मोरक्को से आता है, जिससे देश वैश्विक आपूर्ति संकट और मूल्य अस्थिरता के प्रति संवेदनशील हो जाता है (वाणिज्य मंत्रालय, 2023)। घरेलू उत्पादन कुल मांग का केवल 60% पूरा करता है, और वार्षिक लगभग 10 अरब डॉलर के आयात की आवश्यकता होती है, जो वित्त वर्ष 2022 से 2023 के बीच 25% बढ़ा है (वाणिज्य मंत्रालय, 2023)।

  • यूरिया उत्पादन 90% घरेलू है, लेकिन गैर-यूरिया उर्वरकों में आयात पर भारी निर्भरता है।
  • यूक्रेन संघर्ष के कारण वैश्विक उर्वरक कीमतों में 2021 से 2023 के बीच 45% की वृद्धि हुई है (विश्व बैंक, 2023)।
  • यूरिया पर सब्सिडी का झुकाव पोषक तत्वों के असंतुलित उपयोग और अतिप्रयोग को बढ़ावा देता है।

पोषक तत्व उपयोग दक्षता और मिट्टी की सेहत पर प्रभाव

भारत की पोषक तत्व उपयोग दक्षता (NUE) 30% से कम है, जो विकसित देशों के 50-60% स्तर से काफी नीचे है (ICAR, 2023)। नीति में यूरिया पर भारी सब्सिडी अधिक नाइट्रोजन के अत्यधिक उपयोग को प्रोत्साहित करती है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता खराब होती है, भूजल प्रदूषण होता है और दीर्घकालिक फसल उपज घटती है। फॉस्फेटिक और पोटाशिक पोषक तत्वों पर कम प्रोत्साहन के कारण पोषक तत्व असंतुलन बढ़ता है। यह संरचनात्मक कमजोरी सतत कृषि उत्पादनशीलता को कमजोर करती है और लंबे समय में इनपुट लागत बढ़ाती है।

  • अत्यधिक यूरिया उपयोग से मिट्टी अम्लीकरण और पोषक तत्वों की कमी होती है।
  • कम NUE से उर्वरक का अप्रभावी उपयोग और बर्बादी होती है।
  • जैव उर्वरकों और प्रिसिजन खेती पर नीति का न्यूनतम ध्यान दक्षता सुधार को सीमित करता है।

तुलनात्मक दृष्टिकोण: चीन की उर्वरक नीति सुधार

चीन ने संतुलित पोषक तत्व उपयोग, जैव उर्वरकों और प्रिसिजन खेती तकनीकों को बढ़ावा देते हुए सुधार लागू किए हैं। 2015 से 2022 के बीच चीन ने अपनी NUE में 20% सुधार किया और उर्वरक सब्सिडी खर्च में 15% कटौती की (चीन कृषि मंत्रालय, 2023)। चीन की नीति ने सब्सिडी को एकसार देने के बजाय पोषक तत्व संतुलन और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए लक्षित प्रोत्साहन पर जोर दिया है, जो भारत के यूरिया-केंद्रित मॉडल से भिन्न है।

पहलूभारतचीन
वार्षिक उर्वरक खपतलगभग 63 मिलियन टन (2023)लगभग 60 मिलियन टन (2023)
सब्सिडी का केंद्रयूरिया पर भारी (~70% खपत)संतुलित पोषक तत्व सब्सिडी, जैव उर्वरकों को बढ़ावा
आयात निर्भरताफॉस्फेटिक और पोटाशिक उर्वरकों के लिए 85%घरेलू उत्पादन और विकल्पों के कारण कम निर्भरता
पोषक तत्व उपयोग दक्षता (NUE)<30%2015-2022 में 20% सुधार, अब लगभग 50%
सब्सिडी खर्च का रुझानFY2022-23 में 30% वृद्धि2015-2022 में 15% कमी

भारत की उर्वरक नीति में प्रमुख कमियां

भारत की उर्वरक नीति यूरिया सब्सिडी पर अत्यधिक निर्भर है, जिससे पोषक तत्वों का संतुलित उपयोग दरकिनार हो गया है। इससे मिट्टी में पोषक तत्व असंतुलन, पर्यावरणीय क्षरण और वित्तीय दबाव बढ़ा है। जबकि सब्सिडी में सुधार पर चर्चा हुई है, परंतु पोषक तत्व उपयोग दक्षता और घरेलू उत्पादन क्षमता को बढ़ावा देने वाले पर्याप्त प्रोत्साहन नहीं मिले हैं। नीति में भू-राजनीतिक संकट के दौरान आयात निर्भरता के जोखिम को कम करने के लिए मजबूत उपाय भी नहीं हैं।

  • यूरिया सब्सिडी पर अधिक जोर संतुलित पोषण को हतोत्साहित करता है।
  • जैव उर्वरकों और प्रिसिजन खेती को बढ़ावा देने में कमी।
  • फॉस्फेटिक और पोटाशिक उर्वरकों के घरेलू उत्पादन विस्तार में कमी।
  • पर्यावरणीय और स्थिरता मानदंडों का अपर्याप्त समावेश।

आगे का रास्ता: नीति सिफारिशें

  • यूरिया सब्सिडी का धीरे-धीरे पुनर्संतुलन करते हुए फॉस्फेटिक और पोटाशिक उर्वरकों के लिए बढ़ी हुई सब्सिडी देकर संतुलित पोषक तत्व उपयोग को प्रोत्साहित करना।
  • जैव उर्वरकों और प्रिसिजन खेती को लक्षित प्रोत्साहन और विस्तार सेवाओं के माध्यम से बढ़ावा देना ताकि NUE में सुधार हो।
  • फॉस्फेटिक और पोटाशिक उर्वरकों के घरेलू उत्पादन क्षमता को मजबूत कर आयात निर्भरता कम करना।
  • नियामक ढांचे में सुधार कर पोषक तत्व सामग्री और पर्यावरणीय प्रभाव पर आधारित गतिशील मूल्य निर्धारण लागू करना।
  • DoF, ICAR और FAI के बीच बेहतर समन्वय से शोध आधारित नीति समायोजन को सशक्त बनाना।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत की उर्वरक सब्सिडी योजना के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. सब्सिडी मुख्य रूप से यूरिया उर्वरकों पर केंद्रित है।
  2. यह योजना Essential Commodities Act, 1955 के तहत संचालित होती है।
  3. सब्सिडी सीधे फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को निर्धारित करती है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि यूरिया कुल उर्वरक खपत का लगभग 70% है और इसे अधिकतर सब्सिडी मिलती है। कथन 2 भी सही है क्योंकि सब्सिडी योजना Essential Commodities Act के अंतर्गत संचालित होती है। कथन 3 गलत है क्योंकि MSP सरकार द्वारा स्वतंत्र रूप से निर्धारित किया जाता है और यह सीधे उर्वरक सब्सिडी से जुड़ा नहीं है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत में पोषक तत्व उपयोग दक्षता (NUE) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. भारत में NUE 50% से अधिक है, जो विकसित देशों के बराबर है।
  2. यूरिया पर अत्यधिक सब्सिडी कम NUE का कारण है।
  3. जैव उर्वरकों को बढ़ावा देने से NUE में सुधार हो सकता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि भारत की NUE 30% से कम है, जो विकसित देशों से काफी कम है। कथन 2 सही है क्योंकि यूरिया पर सब्सिडी अतिप्रयोग को प्रोत्साहित करती है, जिससे NUE कम होती है। कथन 3 भी सही है क्योंकि जैव उर्वरक पोषक तत्व उपलब्धता और दक्षता बढ़ाते हैं।

मुख्य प्रश्न

वैश्विक उर्वरक कीमतों में वृद्धि और सब्सिडी बोझ के संदर्भ में भारत की उर्वरक नीति को जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, उनका आलोचनात्मक विश्लेषण करें। ऐसे सुधार सुझाएं जो पोषक तत्व उपयोग दक्षता बढ़ा सकें और आयात निर्भरता कम कर सकें।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (अर्थव्यवस्था और कृषि) – उर्वरक सब्सिडी और कृषि इनपुट
  • झारखंड दृष्टिकोण: झारखंड की कृषि मुख्यतः वर्षा आधारित है और उर्वरक उपयोग कम है; सब्सिडी सुधार इनपुट की किफायती और मिट्टी की सेहत पर प्रभाव डालते हैं।
  • मुख्य बिंदु: चर्चा करें कि कैसे उर्वरक सब्सिडी सुधार झारखंड के किसानों के लिए पोषक तत्व दक्षता बढ़ाकर लागत बोझ कम कर सकते हैं, साथ ही राज्य की मिट्टी क्षरण की समस्याओं से जोड़कर।
Essential Commodities Act, 1955 का उर्वरक नीति में क्या रोल है?

Essential Commodities Act, 1955 सरकार को Section 3 के तहत उर्वरक उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित करने का अधिकार देता है, जिसमें स्टॉक सीमा तय करना और मूल्य नियंत्रण शामिल है ताकि उपलब्धता सुनिश्चित हो और जमाखोरी रोकी जा सके।

भारत फॉस्फेटिक और पोटाशिक उर्वरकों के लिए आयात पर इतना निर्भर क्यों है?

भारत का घरेलू उत्पादन कुल उर्वरक मांग का केवल 60% पूरा करता है, और फॉस्फेटिक व पोटाशिक उर्वरकों का 85% आयात मुख्यतः रूस, चीन और मोरक्को से होता है क्योंकि घरेलू भंडार और उत्पादन क्षमता सीमित है।

यूक्रेन युद्ध ने भारत के उर्वरक क्षेत्र को कैसे प्रभावित किया?

यूक्रेन युद्ध ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित किया, जिससे 2021 से 2023 के बीच उर्वरक कीमतों में 40-50% की वृद्धि हुई, भारत के आयात बिल में 25% की बढ़ोतरी हुई और सब्सिडी खर्च बढ़ गया।

पोषक तत्व उपयोग दक्षता (NUE) क्या है, और भारत वैश्विक स्तर पर कहां खड़ा है?

NUE उस अनुपात को दर्शाता है जो फसलों द्वारा लगाए गए पोषक तत्वों को अवशोषित किया जाता है। भारत की NUE 30% से कम है, जो विकसित देशों के 50-60% स्तर से काफी कम है, यह उर्वरक के अप्रभावी उपयोग और बर्बादी को दर्शाता है।

चीन ने अपनी उर्वरक नीति में कौन से सुधार किए हैं जिनसे भारत सीख सकता है?

चीन ने संतुलित पोषक तत्व उपयोग, जैव उर्वरकों और प्रिसिजन खेती को बढ़ावा दिया है, जिससे 2015-2022 के बीच NUE में 20% सुधार और सब्सिडी खर्च में 15% कमी आई है।

आधिकारिक स्रोत और आगे पढ़ाई के लिए

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