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परिचय: संवैधानिक ढांचा और वर्तमान स्थिति

लोकसभा, भारत की निचली सदन, वर्तमान में 543 निर्वाचित सदस्यों की प्रभावी संख्या के साथ कार्यरत है—जिसमें से 530 सदस्य राज्यों से और 13 सदस्य केंद्र शासित प्रदेशों से आते हैं, यह व्यवस्था भारतीय संविधान के अनुच्छेद 81 के तहत है। अधिकतम स्वीकृत सदस्य संख्या 550 है (530 राज्य + 20 केंद्र शासित प्रदेश)। सीटों का वितरण राज्यों के बीच 1971 की जनगणना के आधार पर अनुच्छेद 334 के तहत स्थगित है, जिसे 84वें संशोधन अधिनियम, 2001 और 101वें संशोधन अधिनियम, 2014 द्वारा 2026 के बाद की पहली जनगणना तक बढ़ाया गया है। राज्यों के भीतर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का निर्धारण 2001 की जनगणना के आधार पर होता है।

केंद्र सरकार ने इस स्थगन को हटाने और 2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों का पुनर्वितरण करने के लिए संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2023 और संबंधित सीमांकन विधेयक पेश किया है। प्रस्तावित संशोधन के अनुसार लोकसभा की अधिकतम संख्या को 850 सीटों तक बढ़ाने का लक्ष्य है, जिसमें 815 सीटें राज्यों को और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों को आवंटित की जाएंगी।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: भारतीय संविधान—अनुच्छेद 81, 82, 334; सीमांकन और प्रतिनिधित्व
  • GS पेपर 2: संघवाद और केंद्र-राज्य संबंध
  • निबंध: चुनाव सुधार और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व

सीट पुनर्वितरण के संवैधानिक और कानूनी प्रावधान

अनुच्छेद 81 लोकसभा की संरचना निर्धारित करता है, जिसमें राज्यों को आबादी के अनुपात में सीटें देने का प्रावधान है। अनुच्छेद 82 संसद को हर जनगणना के बाद सीमांकन अधिनियम पारित करने का निर्देश देता है ताकि निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं पुनः निर्धारित की जा सकें। हालांकि, राज्यों के बीच सीट आवंटन पर 42वें संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा फ्रीज लगाया गया, जिसे बाद के संशोधनों के माध्यम से परिवार नियोजन को प्रोत्साहित करने और राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने के लिए बढ़ाया गया।

सीमांकन अधिनियम, 2002 सीमांकन आयोग को जनगणना के आंकड़ों के आधार पर सीमाओं को पुनः निर्धारित करने का अधिकार देता है। प्रस्तावित सीमांकन विधेयक आयोग को 2011 की जनगणना के अनुसार सीटें पुनः आवंटित करने का अधिकार देना चाहता है। सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप नायर बनाम भारत संघ (2006) मामले में इस फ्रीज को सही ठहराया था, जिसमें जनसंख्या नियंत्रण प्रोत्साहनों और प्रतिनिधित्व के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत बताई गई।

  • फ्रीज का कारण: अधिक जनसंख्या वृद्धि वाले राज्यों को असमान राजनीतिक शक्ति से रोकना, ताकि परिवार नियोजन में सफल राज्यों की स्थिति सुरक्षित रहे।
  • प्रस्तावित बदलाव: फ्रीज हटाकर जनसांख्यिकीय वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करना और समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना।
  • सीमांकन आयोग: स्वतंत्र संस्था जो सीट आवंटन और सीमांकन का काम करती है।

लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के आर्थिक प्रभाव

लोकसभा की सदस्य संख्या 550 से बढ़ाकर 850 करने से संसद का खर्च अनुमानित रूप से 30-40% बढ़ जाएगा, जो कि 2023-24 के ₹1,200 करोड़ के संसद सचिवालय बजट से आंका गया है। अधिक सांसदों के कारण वेतन, भत्ते, कर्मचारी और बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ेगा।

हालांकि, बढ़ी हुई प्रतिनिधित्व से क्षेत्रीय विकास पर बेहतर ध्यान दिया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर, सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) का बजट 2022-23 में ₹5,000 करोड़ था। अधिक सांसद होने से धन आवंटन और निगरानी बेहतर हो सकती है, जिससे क्षेत्रीय असमानताएं कम हो सकती हैं।

  • खर्च में वृद्धि: संसद का बजट 40% तक बढ़ सकता है।
  • विकास प्रभाव: अधिक सांसद MPLADS के तहत स्थानीय स्तर पर बेहतर काम कर सकते हैं।
  • प्रशासनिक जटिलता: बड़ी विधानसभा से विधायी प्रक्रियाएं धीमी हो सकती हैं और समन्वय में दिक्कतें आ सकती हैं।

सीट पुनर्वितरण में प्रमुख संस्थानों की भूमिका

  • सीमांकन आयोग: संवैधानिक प्राधिकरण जो जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं तय करता है और सीटें आवंटित करता है।
  • भारत निर्वाचन आयोग (ECI): चुनावों की निगरानी करता है, सीमांकन आदेशों का पालन सुनिश्चित करता है और चुनावी ईमानदारी बनाए रखता है।
  • केंद्र सरकार का विधि और न्याय मंत्रालय: सीमांकन से जुड़े संवैधानिक संशोधन विधेयक तैयार करता है और संसद में पेश करता है।
  • भारतीय संसद: सीट पुनर्वितरण से संबंधित संशोधन और कानून बनाता है।
  • भारत की जनगणना: सीमांकन के लिए आवश्यक जनसांख्यिकीय आंकड़े प्रदान करती है।

भारत का फ्रीज बनाम अमेरिका का पुनर्वितरण मॉडल

पहलूभारतसंयुक्त राज्य अमेरिका
सीट पुनर्वितरण की आवृत्ति1976 से फ्रीज; अगली बार 2026 के बादहर 10 साल, जनगणना के बाद
आवंटन का आधारजनसंख्या के आधार पर; कम वृद्धि वाले राज्यों की सुरक्षाजनसंख्या में बदलाव के अनुसार सीटें बढ़ती या घटती हैं
अधिकतम सदन आकार550 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव1911 से 435 सीटें स्थिर
राजनीतिक प्रभावफ्रीज ने क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखा; प्रस्तावित बदलाव से सत्ता में बदलाव संभवगतिशील बदलावों से राजनीतिक गेरिमैंडरिंग और क्षेत्रीय सत्ता परिवर्तन
संस्थागत व्यवस्थास्वतंत्र सीमांकन आयोगसंसदीय पुनर्वितरण और राज्य विधानसभाएं सीमाएं तय करती हैं

प्रस्तावित पुनर्वितरण में चुनौतियां और महत्वपूर्ण अंतराल

पुनर्वितरण से क्षेत्रीय संतुलन और संघवाद को लेकर चिंता पैदा होती है। अधिक जनसंख्या वृद्धि वाले राज्य जैसे उत्तर प्रदेश और बिहार को अधिक सीटें मिलेंगी, जिससे छोटे राज्यों का प्रभाव कम हो सकता है। यह सहयोगात्मक संघवाद पर दबाव डाल सकता है यदि राज्यसभा और वित्तीय संघवाद में सुधार साथ-साथ न हों।

राजनीतिक स्थिरता पर जोखिम भी है क्योंकि सांसदों की संख्या में अचानक वृद्धि और सत्ता के समीकरण बदलने से विधायी कामकाज और गठबंधन राजनीति प्रभावित हो सकती है। प्रस्ताव मानता है कि प्रत्येक राज्य की सीटों में समान 50% वृद्धि होगी, बिना किसी राज्य के अनुपात को घटाए, लेकिन जनसांख्यिकीय वास्तविकताएं इसे चुनौती दे सकती हैं।

  • क्षेत्रीय असंतुलन: बड़े राज्यों को अधिक सीटें, छोटे राज्यों का प्रतिनिधित्व कमजोर हो सकता है।
  • संघवाद पर प्रभाव: द्विसदनीय संतुलन बनाए रखने के लिए राज्यसभा सुधार जरूरी।
  • राजनीतिक स्थिरता: सांसदों की संख्या बढ़ने से विधायी प्रक्रिया और गठबंधन राजनीति जटिल हो सकती है।

महत्व और आगे का रास्ता

  • फ्रीज हटाने से राजनीतिक प्रतिनिधित्व जनसांख्यिकीय वास्तविकताओं के अनुरूप होगा, जिससे लोकतांत्रिक वैधता मजबूत होगी।
  • लोकसभा आकार में क्रमिक वृद्धि से जन-स्तर पर बेहतर प्रतिनिधित्व मिलेगा, लेकिन इसके लिए बजट और प्रशासनिक तैयारियां आवश्यक हैं।
  • राज्यसभा सीट आवंटन और वित्तीय संघवाद में समकालीन सुधार संघीय संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी हैं।
  • सीमांकन पारदर्शी, आंकड़ों पर आधारित और राजनीतिक प्रभाव से मुक्त होना चाहिए ताकि गेरिमैंडरिंग रोकी जा सके।
  • जनता में जागरूकता और हितधारकों की सलाह से विरोध कम होगा और व्यापक स्वीकृति सुनिश्चित होगी।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
लोकसभा सीट आवंटन पर लगे फ्रीज के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. फ्रीज 42वें संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा लागू किया गया था।
  2. फ्रीज अधिक जनसंख्या वृद्धि वाले राज्यों को अतिरिक्त सीटें पाने से रोकता है।
  3. फ्रीज 2021 की जनगणना के बाद हटाया जाएगा।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि फ्रीज 42वें संशोधन द्वारा लगाया गया था। कथन 2 भी सही है क्योंकि फ्रीज अधिक वृद्धि वाले राज्यों को सीटें बढ़ाने से रोकता है। कथन 3 गलत है क्योंकि फ्रीज 2026 के बाद की पहली जनगणना के बाद हटाया जाएगा, न कि 2021 के बाद।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत में सीमांकन आयोग के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. यह एक स्थायी संवैधानिक संस्था है।
  2. यह नवीनतम जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं पुनः निर्धारित करता है।
  3. इसके आदेश कानून के समान होते हैं और अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • dकेवल 2
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि सीमांकन आयोग अस्थायी होता है और हर जनगणना के बाद गठित किया जाता है। कथन 2 और 3 सही हैं; यह जनगणना के आधार पर सीमाएं तय करता है और इसके आदेश अंतिम होते हैं।

मेन प्रश्न

2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों के पुनर्वितरण से जुड़ी संवैधानिक और राजनीतिक चुनौतियों पर चर्चा करें। प्रस्तावित लोकसभा सदस्य संख्या वृद्धि के संघवाद और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व पर प्रभावों का विश्लेषण करें।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – भारतीय राजनीति और शासन; सीमांकन और प्रतिनिधित्व
  • झारखंड का नजरिया: पुनर्वितरण से झारखंड की लोकसभा सीटों पर असर पड़ सकता है, जो संसद में उसकी राजनीतिक ताकत को प्रभावित करेगा।
  • मेन पॉइंटर: झारखंड के जनसांख्यिकीय रुझान, संभावित सीटों में बदलाव और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के साथ राष्ट्रीय संघवाद के संतुलन की जरूरत को उजागर करें।
लोकसभा सीट आवंटन पर फ्रीज क्यों लगाया गया था?

42वें संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा फ्रीज लगाया गया था ताकि परिवार नियोजन को प्रोत्साहित किया जा सके। इससे अधिक जनसंख्या वृद्धि वाले राज्यों को अतिरिक्त सीटें मिलने से रोका गया, जिससे परिवार नियोजन में सफल राज्यों की स्थिति बनी रहे।

सीमांकन आयोग की क्या भूमिका है?

सीमांकन आयोग नवीनतम जनगणना के आंकड़ों के आधार पर संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं पुनः निर्धारित करता है। इसके आदेश कानून के समान होते हैं और न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।

लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने से संसद का खर्च कैसे प्रभावित होगा?

550 से 850 सीटों तक वृद्धि से संसद का खर्च 30-40% तक बढ़ सकता है, जिसमें सांसदों के वेतन, भत्ते और प्रशासनिक खर्च शामिल हैं।

प्रस्तावित पुनर्वितरण में 2011 की जनगणना का क्या महत्व है?

2011 की जनगणना से प्राप्त ताजा जनसांख्यिकीय आंकड़ों के आधार पर लोकसभा सीटों का पुनर्वितरण होगा, जिससे 1971 के बाद हुए जनसंख्या बदलावों को सही रूप में दर्शाया जा सकेगा और समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा।

भारत का सीट पुनर्वितरण अमेरिका की प्रणाली से कैसे अलग है?

भारत में 1976 से सीट पुनर्वितरण स्थगित है ताकि क्षेत्रीय संतुलन बना रहे, जबकि अमेरिका में हर 10 साल जनगणना के बाद सीटें पुनः आवंटित होती हैं, जिससे राजनीतिक प्रतिनिधित्व में लगातार बदलाव होते रहते हैं।

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