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रोहिंग्या शरणार्थी संकट का परिचय

रोहिंग्या मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय है, जो म्यांमार के राखीन राज्य से आता है। 2017 से सैन्य कार्रवाई तेज होने के कारण 7 लाख से अधिक रोहिंग्या बांग्लादेश भाग गए, जिससे यह विश्व का सबसे बड़ा शरणार्थी संकट बन गया। UNHCR 2023 रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश में 1.2 मिलियन से अधिक रोहिंग्या शरणार्थी हैं, जबकि भारत में लगभग 25,000, मुख्य रूप से जम्मू और पश्चिम बंगाल में (गृह मंत्रालय, 2023)। खतरनाक समुद्री मार्गों से गुजरते समय और असुरक्षित जीवनयापन के कारण बार-बार मौतें होती हैं, जो संरक्षण और मानवीय मदद में प्रणालीगत विफलताओं को दर्शाती हैं।

UPSC से प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – शरणार्थी संकट और अंतरराष्ट्रीय कानून
  • GS पेपर 2: राजव्यवस्था – नागरिकता अधिनियम, विदेशी अधिनियम, अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार)
  • GS पेपर 3: आंतरिक सुरक्षा – सीमा प्रबंधन और अवैध प्रवासन
  • निबंध: दक्षिण एशिया में मानवाधिकार चुनौतियां

भारत में रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए कानूनी ढांचा

भारत के घरेलू कानून के तहत, नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 2(b) के अनुसार रोहिंग्या नागरिकता के दायरे से बाहर हैं। विदेशी अधिनियम, 1946 (धारा 3 और 9) अधिकारियों को अवैध प्रवासियों को हिरासत में लेने और देश निकाला करने का अधिकार देता है, जिसमें रोहिंग्या अक्सर आते हैं। भारत ने 1951 शरणार्थी कन्वेंशन या उसके 1967 प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, जिससे औपचारिक शरणार्थी सुरक्षा सीमित रहती है। हालांकि, भारत के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग बनाम भारत संघ (1997) के फैसले में कहा है कि शरणार्थियों को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार की सुरक्षा मिलनी चाहिए, जो उनके बुनियादी अधिकारों की रक्षा का संवैधानिक दायित्व बनाता है।

  • नागरिकता अधिनियम, 1955: धारा 2(b) के तहत रोहिंग्यों को नागरिकता से बाहर रखा गया है।
  • विदेशी अधिनियम, 1946: धारा 3 और 9 के तहत अवैध प्रवासियों को हिरासत में लेने और देश निकाला करने का प्रावधान है।
  • अंतरराष्ट्रीय नागरिक और राजनीतिक अधिकार संधि (ICCPR, 1966): भारत इसका हिस्सा है, जो गैर-वापसी (non-refoulement) की जिम्मेदारी लगाती है।
  • 1951 शरणार्थी कन्वेंशन: भारत इसके पक्ष में नहीं है, जिससे औपचारिक संरक्षण सीमित है।
  • सुप्रीम कोर्ट का 1997 का फैसला: अनुच्छेद 21 का अधिकार शरणार्थियों तक भी लागू होता है, जिससे उनका मानवीय व्यवहार सुनिश्चित होता है।

रोहिंग्या शरणार्थियों का आर्थिक प्रभाव

भारत ने 2023-24 में गृह मंत्रालय के तहत शरणार्थी कल्याण के लिए लगभग 100 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। जम्मू और पश्चिम बंगाल जैसे सीमावर्ती राज्यों में रोहिंग्या की उपस्थिति स्थानीय संसाधनों और अनौपचारिक श्रम बाजारों पर दबाव डालती है, जहां शरणार्थी सहायता पर स्थानीय खर्च सालाना 50 करोड़ रुपये से अधिक है (गृह मंत्रालय वार्षिक रिपोर्ट 2023)। वैश्विक स्तर पर, 2023 में रोहिंग्या संकट से निपटने की लागत 1 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक रही (UNHCR ग्लोबल ट्रेंड्स रिपोर्ट 2023), जो मानवीय सहायता की विशाल मांग को दर्शाता है।

  • भारत का शरणार्थी कल्याण बजट (2023-24): लगभग 100 करोड़ रुपये (गृह मंत्रालय)।
  • जम्मू और पश्चिम बंगाल में स्थानीय खर्च: सालाना 50 करोड़ रुपये से अधिक।
  • वैश्विक रोहिंग्या संकट प्रतिक्रिया लागत (2023): 1 अरब डॉलर से अधिक (UNHCR)।
  • आर्थिक दबाव में आवास, स्वास्थ्य सेवा और अनौपचारिक रोजगार की बढ़ती मांग शामिल है।

रोहिंग्या शरणार्थी संरक्षण में प्रमुख संस्थानों की भूमिका

संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त शरणार्थी (UNHCR) अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शरणार्थी संरक्षण और सहायता का समन्वय करता है, जिसमें बांग्लादेश और भारत भी शामिल हैं। गृह मंत्रालय भारत में आंतरिक सुरक्षा और शरणार्थी मामलों का प्रबंधन करता है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) शरणार्थियों के खिलाफ मानवाधिकार उल्लंघनों की निगरानी करता है। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) शरणार्थी संरक्षण से जुड़े अंतरराष्ट्रीय विवादों का निपटारा करता है। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) मानवीय सहायता और प्रवासन प्रबंधन में मदद करता है, साथ ही समुद्री मार्गों पर होने वाली मौतों का डेटा भी प्रदान करता है।

  • UNHCR: अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी संरक्षण और शिविर प्रबंधन का नेतृत्व करता है।
  • गृह मंत्रालय: भारत में शरणार्थी नीति और सीमा सुरक्षा का संचालन करता है।
  • NHRC: शरणार्थियों के अधिकारों की घरेलू रक्षा करता है।
  • ICJ: शरणार्थी मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय कानूनी विवादों का समाधान करता है।
  • IOM: प्रवासन प्रवाह और मृत्यु दर पर निगरानी रखता है।

रोहिंग्या शरणार्थी वितरण और मृत्यु दर के आंकड़े

परिमाणबांग्लादेशभारतवैश्विक
रोहिंग्या शरणार्थी संख्यालगभग 1.2 मिलियन (UNHCR 2023)लगभग 25,000 (गृह मंत्रालय 2023)लगभग 1.4 मिलियन कुल
सबसे बड़ा शरणार्थी शिविरकॉक्स बाज़ार (~900,000 निवासी)कोई औपचारिक नहींकॉक्स बाज़ार सबसे बड़ा
समुद्री मार्गों पर मृत्यु दर (2017 से)डेटा उपलब्ध नहीं700 से अधिक मौतें (IOM 2023)700+ मौतें (IOM 2023)
रोहिंग्या शरणार्थी मान्यता देने वाले देशसीमित औपचारिक मान्यताकोई औपचारिक मान्यता नहींवैश्विक स्तर पर 8 देश

बांग्लादेश और भारत की शरणार्थी नीतियों की तुलना

बांग्लादेश में कॉक्स बाज़ार जैसे बड़े शिविरों में सबसे अधिक रोहिंग्या शरणार्थी रहते हैं, जहां UNHCR और अंतरराष्ट्रीय दाताओं के सहयोग से बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। संसाधनों की कमी के बावजूद, बांग्लादेश खुला लेकिन अस्थायी शरण नीति अपनाए हुए है। इसके विपरीत, भारत ने औपचारिक शरणार्थी मान्यता और कानूनी ढांचा नहीं बनाया है, जिससे रोहिंग्या अक्सर हिरासत, देश निकाला करने की धमकी और असुरक्षित जीवनशैली का सामना करते हैं। यह अंतर भारत में रोहिंग्या की अधिक मृत्यु दर का कारण बनता है।

पहलूबांग्लादेशभारत
शरणार्थी संख्यालगभग 1.2 मिलियनलगभग 25,000
कानूनी मान्यताकोई औपचारिक शरणार्थी कानून नहीं, लेकिन व्यवहारिक संरक्षणकोई शरणार्थी कानून नहीं; रोहिंग्यों को अवैध प्रवासी माना जाता है
अंतरराष्ट्रीय सहयोगUNHCR और दाताओं के साथ सक्रिय सहयोगसीमित सहयोग; कोई औपचारिक शरणार्थी स्थिति नहीं
जीवनयापन की स्थितिबड़े शिविरों में बुनियादी सेवाएंअसुरक्षित, अनौपचारिक बस्तियां
मृत्यु दरशिविर प्रबंधन के कारण कमहिरासत, देश निकाला और असुरक्षित प्रवासन के कारण अधिक

भारत की रोहिंग्या शरणार्थी नीति में महत्वपूर्ण कमियां

भारत ने 1951 शरणार्थी कन्वेंशन पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और कोई राष्ट्रीय शरणार्थी कानून भी नहीं है, जिससे कानूनी खाई बनी हुई है। इस वजह से अक्सर विदेशी अधिनियम के तहत हिरासत और देश निकाला जैसे कठोर उपाय अपनाए जाते हैं। शरणार्थी की औपचारिक मान्यता न होने से रोहिंग्या की संवेदनशीलता बढ़ती है, जिससे खतरनाक प्रवासन प्रयासों और खराब जीवन परिस्थितियों में मौतें बढ़ती हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुच्छेद 21 के तहत दी गई सुरक्षा का प्रभावी उपयोग नहीं हो पा रहा है।

  • राष्ट्रीय शरणार्थी सुरक्षा ढांचे का अभाव।
  • विदेशी अधिनियम के तहत हिरासत और देश निकाला।
  • 1951 कन्वेंशन पर गैर-हस्ताक्षरकर्ता होने से अंतरराष्ट्रीय दायित्व सीमित।
  • अनुच्छेद 21 की सुरक्षा का अपर्याप्त प्रवर्तन।
  • जिससे मृत्यु दर और मानवाधिकार उल्लंघन बढ़ते हैं।

आगे का रास्ता: समन्वित मानवीय और कानूनी कदम

बार-बार हो रही रोहिंग्या मौतों को रोकने के लिए भारत को बहुआयामी रणनीति अपनानी होगी। पहला, 1951 शरणार्थी कन्वेंशन के अनुरूप कानूनी मानकों को अपनाना या घरेलू स्तर पर लागू करना आवश्यक है, जिससे कानूनी स्पष्टता आएगी। दूसरा, UNHCR और अंतरराष्ट्रीय दाताओं के साथ सहयोग बढ़ाकर मानवीय सहायता और शिविर प्रबंधन बेहतर किया जा सकता है। तीसरा, अनुच्छेद 21 के अधिकारों का न्यायिक प्रवर्तन मजबूत कर मनमानी हिरासत और देश निकाला रोका जाना चाहिए। चौथा, म्यांमार और बांग्लादेश के साथ क्षेत्रीय कूटनीतिक संवाद से मूल कारणों का समाधान और सुरक्षित पुनर्वास संभव होगा। अंत में, शरणार्थी कल्याण और स्थानीय एकीकरण के लिए बजट बढ़ाना आर्थिक दबाव कम करेगा और जीवन स्तर सुधार करेगा।

  • अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप औपचारिक शरणार्थी कानून पर विचार करें।
  • UNHCR और IOM के साथ सहयोग बढ़ाएं।
  • सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार शरणार्थियों के मानवीय व्यवहार को लागू करें।
  • मूल कारणों और पुनर्वास के लिए क्षेत्रीय संवाद करें।
  • शरणार्थी कल्याण के लिए बजट और संसाधन बढ़ाएं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत के रोहिंग्या शरणार्थियों से जुड़े कानूनी ढांचे के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. नागरिकता अधिनियम, 1955 रोहिंग्यों को नागरिकता से बाहर करता है।
  2. भारत 1951 शरणार्थी कन्वेंशन का पक्षकार है।
  3. विदेशी अधिनियम, 1946 अवैध प्रवासियों की हिरासत का प्रावधान देता है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि धारा 2(b) के तहत रोहिंग्या नागरिकता से बाहर हैं। कथन 2 गलत है; भारत ने 1951 कन्वेंशन पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। कथन 3 सही है; विदेशी अधिनियम अवैध प्रवासियों की हिरासत की अनुमति देता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
वैश्विक स्तर पर रोहिंग्या शरणार्थी मान्यता के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. केवल आठ देश रोहिंग्या शरणार्थियों को औपचारिक रूप से मान्यता देते हैं।
  2. बांग्लादेश के पास रोहिंग्यों के लिए औपचारिक शरणार्थी कानून है।
  3. भारत घरेलू कानून के तहत रोहिंग्यों को औपचारिक शरणार्थी स्थिति देता है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1
  • bऔर (c) केवल
  • aऔर (b) केवल
  • a, (b) और (c) सभी
उत्तर: (a)
केवल कथन 1 सही है; आठ देशों ने रोहिंग्या शरणार्थियों को औपचारिक रूप से मान्यता दी है। बांग्लादेश के पास कोई औपचारिक शरणार्थी कानून नहीं है, और भारत भी रोहिंग्यों को औपचारिक शरणार्थी स्थिति नहीं देता।

मुख्य प्रश्न

रोहिंग्या शरणार्थियों की बार-बार हो रही मौतों के कारणों का आलोचनात्मक विश्लेषण करें और इस मानवीय संकट से निपटने में भारत को जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, उनका वर्णन करें। रोहिंग्या शरणार्थियों की सुरक्षा बेहतर बनाने के लिए भारत को किन कानूनी और नीतिगत उपायों को अपनाना चाहिए, इस पर सुझाव दें। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC से प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – अंतरराष्ट्रीय संबंध और मानवाधिकार
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड में आंतरिक विस्थापन और शरणार्थी आगमन के अनुभव संसाधन दबाव और अधिकार संरक्षण के लिए तुलनात्मक दृष्टिकोण प्रदान करते हैं।
  • मुख्य बिंदु: कानूनी सुरक्षा, आर्थिक प्रभाव और मानवाधिकार दायित्वों पर आधारित उत्तर तैयार करें, स्थानीय विस्थापन की समस्याओं से तुलना करें।
नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत रोहिंग्यों को भारतीय नागरिकता से क्यों बाहर रखा गया है?

नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 2(b) के अनुसार रोहिंग्या को नागरिकता से बाहर रखा गया है क्योंकि वे किसी भी देश के नागरिक नहीं हैं और भारतीय कानून के तहत अवैध प्रवासी माने जाते हैं। उनकी राज्यहीनता और अधिनियम की नागरिकता प्राप्ति की शर्तों के कारण यह निर्णय लिया गया है।

भारत ने 1951 शरणार्थी कन्वेंशन पर हस्ताक्षर नहीं किए होने के बावजूद रोहिंग्या शरणार्थियों के प्रति कौन-कौन से अंतरराष्ट्रीय कानूनी दायित्व निभाए हैं?

भारत अंतरराष्ट्रीय नागरिक और राजनीतिक अधिकार संधि (ICCPR, 1966) का सदस्य है, जिसमें गैर-वापसी (non-refoulement) और जीवन के अधिकार की रक्षा शामिल है। इसलिए भारत को मनमानी निर्वासन रोकने और अनुच्छेद 21 के तहत शरणार्थियों के मानवीय व्यवहार का पालन करने का दायित्व है।

रोहिंग्या शरणार्थियों में बार-बार मौतों के मुख्य कारण क्या हैं?

बार-बार मौतें खतरनाक समुद्री मार्गों से गुजरने, औपचारिक शरणार्थी संरक्षण की कमी, भारत जैसे देशों में हिरासत और निर्वासन की धमकियों, तथा भीड़-भाड़ वाले शिविरों या अनौपचारिक बस्तियों में खराब जीवन परिस्थितियों के कारण होती हैं।

बांग्लादेश और भारत की रोहिंग्या शरणार्थी नीति में क्या अंतर है?

बांग्लादेश में कॉक्स बाज़ार जैसे बड़े शिविरों में UNHCR के सहयोग से बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, जबकि भारत में औपचारिक शरणार्थी मान्यता नहीं है, जिससे हिरासत, निर्वासन की धमकी और असुरक्षित जीवनशैली होती है, जो संवेदनशीलता और मृत्यु दर बढ़ाती है।

रोहिंग्या शरणार्थियों के संरक्षण में भारत के सुप्रीम कोर्ट की क्या भूमिका है?

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग बनाम भारत संघ (1997) के फैसले में अनुच्छेद 21 के तहत शरणार्थियों को जीवन के अधिकार की सुरक्षा दी है, जिससे उनका मानवीय व्यवहार और सुरक्षा सुनिश्चित होती है, हालांकि इसका प्रवर्तन अभी भी असंगत है।

आधिकारिक स्रोत और आगे पढ़ाई के लिए

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