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भारत में लू: हाल के रुझान और महत्व

2023 में भारत में भीषण लू की घटनाएँ देखी गईं, जब 15 राज्यों ने अलर्ट जारी किया और राजस्थान तथा मध्य प्रदेश में अधिकतम तापमान 45°C से ऊपर पहुंच गया (भारतीय मौसम विभाग, IMD वार्षिक रिपोर्ट 2023)। मार्च से जून तक चलने वाली लू का मौसम जलवायु परिवर्तन और तेज़ी से हो रहे शहरीकरण के कारण अधिक बार और तीव्र हो गया है। 2023 में लू से संबंधित मौतों की संख्या 2,500 से अधिक रही, जो 2022 की तुलना में 12% अधिक है (स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, MoHFW 2024)। ये घटनाएँ सार्वजनिक स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा मांग और आर्थिक उत्पादकता पर गंभीर प्रभाव डालती हैं।

UPSC से जुड़ाव

  • GS पेपर 3: पर्यावरण और पारिस्थितिकी (जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, आपदा प्रबंधन)
  • GS पेपर 2: राजनीति और शासन (आपदा प्रबंधन अधिनियम, अनुच्छेद 21 के तहत जीवन का अधिकार)
  • निबंध: जलवायु परिवर्तन और सतत विकास

लू प्रबंधन के लिए कानूनी और संवैधानिक ढांचा

लू को आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (धारा 2(d)) के तहत आपदा माना गया है, जो राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) को लू से निपटने के लिए समन्वय करने का अधिकार देता है (धारा 6)। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 (धारा 3) केंद्र सरकार को लू को बढ़ाने वाले प्रदूषण जैसे कारकों से पर्यावरण की रक्षा करने का अधिकार देता है। वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 शहरी गर्मी द्वीप प्रभाव को कम करने के लिए उत्सर्जन नियंत्रण में मदद करता है। सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) की व्याख्या करते हुए स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार को भी शामिल किया है, जिससे राज्य की जिम्मेदारी मजबूत होती है कि वह लू के जोखिमों से निपटे।

  • अनुच्छेद 21: जीवन का अधिकार पर्यावरणीय स्वास्थ्य को भी शामिल करता है (MC Mehta बनाम भारत संघ, 1987)
  • आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005: लू को आपदा के रूप में वर्गीकृत किया गया; NDMA को कार्रवाई योजनाएँ बनाने का दायित्व
  • पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986: केंद्र सरकार को पर्यावरण संबंधी खतरों को नियंत्रित करने का अधिकार
  • वायु अधिनियम, 1981: शहरी गर्मी द्वीप प्रभाव को कम करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण

लू के आर्थिक और क्षेत्रीय प्रभाव

भारत में लू से अनुमानित वार्षिक आर्थिक नुकसान 30 अरब डॉलर है (वर्ल्ड बैंक, 2023)। गंभीर लू के दौरान कृषि उत्पादन में 5-10% की गिरावट आती है, खासकर गेहूं और चावल की पैदावार पर (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, ICAR 2023)। 2023 में लू से जुड़ी बीमारियों के कारण स्वास्थ्य क्षेत्र के खर्च में 15% की बढ़ोतरी हुई (MoHFW डेटा)। शहरी ठंडा करने वाले ढांचे में 2025 तक 6,000 करोड़ रुपये का निवेश होने का अनुमान है (नीति आयोग, 2024)। लू के दौरान बिजली की मांग में 20-25% की वृद्धि होती है, जिससे ग्रिड पर दबाव बढ़ता है और लागत बढ़ती है (सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी, 2023)। चरम लू के दिनों में श्रम उत्पादकता में 10-15% की गिरावट आती है (इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन, 2023)।

  • 2023 में लू के कारण गेहूं उत्पादन में 8% की गिरावट (ICAR फसल रिपोर्ट 2023)
  • शहरी गर्मी द्वीप प्रभाव से शहरों का तापमान 2-3.6°C तक बढ़ता है, जिससे लू की شدت बढ़ती है (CPCB शहरी वायु गुणवत्ता रिपोर्ट 2023)
  • 36 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में से केवल 12 ने NDMA द्वारा सुझाए गए लू कार्रवाई योजनाएँ लागू की हैं (NDMA वार्षिक समीक्षा 2023)

मुख्य संस्थान और उनकी भूमिका

भारतीय मौसम विभाग (IMD) लू की भविष्यवाणी और चेतावनी जारी करता है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) लू कार्रवाई योजनाएँ बनाता है और बहु-क्षेत्रीय प्रतिक्रिया का समन्वय करता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) शहरी प्रदूषण की निगरानी करता है जो गर्मी द्वीप प्रभाव बढ़ाता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) फसलों की गर्मी सहनशीलता और अनुकूलन रणनीतियों पर शोध करता है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रिया और रोग डेटा एकत्र करता है। नीति आयोग जलवायु अनुकूलन और शहरी लचीलापन पर नीति सलाह देता है।

  • IMD: लू की भविष्यवाणी और सूचना प्रसार
  • NDMA: लू कार्रवाई योजनाएँ, आपदा समन्वय
  • CPCB: प्रदूषण निगरानी, शहरी गर्मी कम करना
  • ICAR: लू तनाव पर कृषि शोध
  • MoHFW: स्वास्थ्य प्रतिक्रिया और डेटा संग्रह
  • नीति आयोग: जलवायु लचीलापन पर नीति सलाह

तुलनात्मक अध्ययन: भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया की लू रणनीतियाँ

पहलूभारतऑस्ट्रेलिया
राष्ट्रीय रणनीतिNDMA की लू कार्रवाई योजनाएँ (असमान लागू)राष्ट्रीय लू रणनीति (2019), केंद्रीकृत और समेकित
स्वास्थ्य निगरानीसीमित वास्तविक समय स्वास्थ्य डेटा समाकलनलू चेतावनियों से जुड़ी वास्तविक समय स्वास्थ्य निगरानी
सामुदायिक समर्थनकुछ ठंडा केंद्र, सीमित जनसंपर्कसामुदायिक ठंडा केंद्र और लक्षित जनसंपर्क
शहरी योजनाअनियमित शहरी गर्मी द्वीप कम करनाशहरी योजना सुधार जो गर्मी द्वीप प्रभाव घटाते हैं
परिणाम12 राज्यों में लू योजना; 2023 में 12% मृत्यु बढ़ोतरी4 वर्षों में लू से मौतों में 30% कमी

भारत की लू प्रतिक्रिया में प्रणालीगत कमियाँ और चुनौतियाँ

NDMA के दिशानिर्देशों के बावजूद, केवल एक तिहाई राज्य ही व्यापक लू कार्रवाई योजनाएँ लागू कर पाए हैं। शहरी योजना में गर्मी द्वीप प्रभाव को पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है, जो प्रदूषण और अव्यवस्थित विकास से और बढ़ता है। लू के खतरों और बचाव के तरीकों पर जन जागरूकता अभियान भी कमज़ोर हैं। स्वास्थ्य सुविधाएँ लू से होने वाली बीमारियों के बढ़ते मामलों के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं। मौसम विभाग, स्वास्थ्य, कृषि और शहरी प्रशासन के बीच समन्वय भी असंगठित है, जिससे एकीकृत प्रतिक्रिया में बाधा आती है।

  • राज्य स्तर पर लू कार्रवाई योजनाओं का असमान क्रियान्वयन
  • अपर्याप्त शहरी ठंडा करने वाले ढांचे और हरित आवरण
  • कम जन जागरूकता और व्यवहार में बदलाव की कमी
  • विभाजित अंतर-एजेंसी समन्वय
  • स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन के लिए वास्तविक समय डेटा समाकलन सीमित

आगे का रास्ता: नीति और शासन सुधार

  • सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लू कार्रवाई योजनाओं को अनिवार्य और नियमित अपडेट करना
  • IMD की लू चेतावनियों के साथ वास्तविक समय स्वास्थ्य निगरानी को जोड़कर लक्षित हस्तक्षेप करना
  • शहरी हरित ढांचे और प्रदूषण नियंत्रण में निवेश बढ़ाना ताकि गर्मी द्वीप प्रभाव कम किया जा सके
  • सामुदायिक ठंडा केंद्रों का विस्तार और कमजोर वर्गों पर केंद्रित जागरूकता अभियान चलाना
  • गर्मी सहनशील फसल किस्मों के लिए कृषि शोध और विस्तार सेवाओं को मजबूत करना
  • NDMA, IMD, MoHFW, ICAR, CPCB और शहरी स्थानीय निकायों के बीच अंतर-मंत्रालय समन्वय को बढ़ावा देना
  • नीति आयोग की नीति सलाह भूमिका का उपयोग कर लू लचीलापन को जलवायु अनुकूलन फ्रेमवर्क में मुख्यधारा में लाना
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत में लू के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. लू को आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत आपदा के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
  2. वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 सीधे लू की भविष्यवाणी का प्रावधान करता है।
  3. सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार को मान्यता दी है।

इनमें से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि लू को आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत आपदा माना गया है। कथन 2 गलत है; वायु अधिनियम प्रदूषण नियंत्रण करता है लेकिन लू की भविष्यवाणी का प्रावधान नहीं करता। कथन 3 सही है; सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 21 को स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार के रूप में व्याख्यायित किया है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत में लू के आर्थिक प्रभावों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. लू से भारत को वार्षिक 30 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान होता है।
  2. मशीनीकरण के कारण लू के दौरान श्रम उत्पादकता का नुकसान नगण्य होता है।
  3. 2025 तक शहरी ठंडा करने वाले ढांचे में 6,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश होने का अनुमान है।

इनमें से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है, जैसा कि वर्ल्ड बैंक 2023 के आंकड़ों से पता चलता है। कथन 2 गलत है; चरम लू के दिनों में श्रम उत्पादकता में 10-15% की गिरावट होती है (ILO 2023)। कथन 3 सही है, नीति आयोग 2024 के अनुमानों के अनुसार।

मुख्य प्रश्न

भारत में बार-बार आने वाली लू की चुनौतियों का विश्लेषण करें और मौजूदा नीति ढांचे की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करें। भारत की लू सहनशीलता बढ़ाने के लिए सुझाव दें।

झारखंड और JPSC से जुड़ाव

  • JPSC पेपर: पेपर 3 (पर्यावरण और आपदा प्रबंधन)
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड में गर्मियों के तापमान में वृद्धि और रांची जैसे शहरों में शहरी गर्मी द्वीप प्रभाव से लू से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएँ बढ़ रही हैं।
  • मुख्य बिंदु: झारखंड में NDMA की लू कार्रवाई योजनाओं का राज्य स्तर पर क्रियान्वयन, शहरी हरित क्षेत्र विकास और सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारी पर चर्चा करें।
भारतीय आपदा प्रबंधन कानूनों के तहत लू की परिभाषा क्या है?

आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 2(d) के तहत लू को आपदा के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जिससे NDMA को प्रतिक्रिया और निवारण के लिए समन्वय करने का अधिकार मिलता है।

भारत में लू की भविष्यवाणी के लिए कौन सा संस्थान जिम्मेदार है?

भारतीय मौसम विभाग (IMD) देशभर में लू की भविष्यवाणी और पूर्व चेतावनी जारी करने वाला मुख्य एजेंसी है।

शहरीकरण लू के प्रभाव को कैसे बढ़ाता है?

शहरीकरण में पेड़-पौधों की जगह कंक्रीट और पक्की सतहें बनने से शहरी गर्मी द्वीप प्रभाव बढ़ता है, जिससे शहरों का तापमान 2-3.6°C तक बढ़ जाता है, जो लू की तीव्रता को बढ़ाता है (CPCB 2023)।

भारत में लू से होने वाले आर्थिक नुकसान क्या हैं?

लू से भारत को वार्षिक 30 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान होता है, जिसमें कृषि उत्पादन में गिरावट, स्वास्थ्य सेवा खर्च में वृद्धि और श्रम उत्पादकता में कमी शामिल है (वर्ल्ड बैंक 2023; ICAR 2023; ILO 2023)।

भारत की लू प्रबंधन में कौन-कौन सी कमियाँ हैं?

मुख्य कमियों में राज्य स्तर पर लू कार्रवाई योजनाओं का असमान क्रियान्वयन, अपर्याप्त शहरी ठंडा करने वाले ढांचे, कम जन जागरूकता, और एजेंसियों के बीच असंगठित समन्वय शामिल हैं (NDMA वार्षिक समीक्षा 2023)।

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