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मार्च 2024 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भारतीय मुद्रा डेरिवेटिव्स बाजार में Non-Deliverable Derivatives (NDD) ट्रेडिंग पर प्रतिबंध लगाने वाला मास्टर डायरेक्शन जारी किया। यह कदम मुख्य रूप से ऑफशोर सट्टेबाजी के उस हिस्से को निशाना बनाता है जो प्रतिबंध से पहले कुल मुद्रा डेरिवेटिव्स वॉल्यूम का लगभग 15-20% था। इस प्रतिबंध का मकसद रुपये में सट्टेबाजी के कारण होने वाली अस्थिरता को कम करना है, क्योंकि SEBI की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार मुद्रा डेरिवेटिव्स में लगभग 40% ओपन इंटरेस्ट सट्टेबाजी से जुड़ी ऑफशोर पोजीशन्स की होती हैं। यह फैसला 2023 में डॉलर के मुकाबले रुपये के लगभग 6.5% के लगातार अवमूल्यन और पूरे साल 12.5 के औसत इंडिया VIX में बढ़ी अस्थिरता के बीच आया है।

UPSC से प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था — विदेशी मुद्रा बाजार, मुद्रा डेरिवेटिव्स, RBI के नियामक अधिकार
  • GS पेपर 2: भारतीय राजनीति — मुद्रा नियमन का कानूनी ढांचा (FEMA, RBI अधिनियम)
  • निबंध: वित्तीय बाजार नियमों का मैक्रोइकोनॉमिक स्थिरता पर प्रभाव

मुद्रा डेरिवेटिव्स को नियंत्रित करने वाला कानूनी और नियामक ढांचा

RBI को विदेशी मुद्रा लेनदेन नियंत्रित करने का अधिकार विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA), 1999 की धारा 3 से प्राप्त है, जो केंद्र सरकार और RBI को विदेशी मुद्रा के लेनदेन को नियंत्रित कर बाहरी स्थिरता बनाए रखने का अधिकार देता है। इसके अलावा, भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45W RBI को विदेशी मुद्रा से जुड़े डेरिवेटिव्स को नियंत्रित करने का स्पष्ट अधिकार देती है। मार्च 2024 के मास्टर डायरेक्शन में मौजूदा RBI मास्टर डायरेक्शन ऑन फॉरेन एक्सचेंज डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स में संशोधन करते हुए NDD कॉन्ट्रैक्ट्स पर प्रतिबंध लगाया गया है, जो बिना भौतिक डिलीवरी के विदेशी मुद्रा में निपटान करते हैं।

सुप्रीम कोर्ट के किरित प्रेमजीभाई शेलत बनाम भारत संघ (1996) के फैसले में केंद्र सरकार और RBI को विदेशी मुद्रा लेनदेन नियंत्रित करने का अधिकार आर्थिक संप्रभुता बनाए रखने के लिए मान्यता मिली है। यह कानूनी आधार RBI को NDD जैसे ऑफशोर सट्टेबाजी उपकरणों पर प्रतिबंध लगाकर अस्थिर पूंजी प्रवाह को रोकने में हस्तक्षेप करने का अधिकार देता है।

आर्थिक संदर्भ: रुपये की अस्थिरता और विदेशी मुद्रा बाजार की गतिशीलता

बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) के त्रैमासिक सर्वेक्षण के अनुसार, भारत का विदेशी मुद्रा बाजार 2022 में अनुमानित USD 640 बिलियन दैनिक कारोबार करता है। मुद्रा डेरिवेटिव्स खंड में 2023 में लगभग USD 50 बिलियन का दैनिक कारोबार हुआ, जिसमें NDDs का हिस्सा 15-20% था। NDDs में सट्टेबाजी वाली ओपन इंटरेस्ट कुल मुद्रा डेरिवेटिव्स की लगभग 40% थी, जो ऑफशोर सट्टेबाजी की तीव्रता दर्शाती है।

2023 में डॉलर के मुकाबले रुपये का 6.5% अवमूल्यन और वैश्विक झटकों के दौरान इंडिया VIX का 18 तक पहुंचना मुद्रा बाजार में तनाव को दर्शाता है। मई 2024 तक RBI के विदेशी मुद्रा भंडार USD 570 बिलियन थे, जिनमें से वित्तीय वर्ष 2023-24 में रुपये को स्थिर करने के लिए लगभग USD 30 बिलियन खर्च किए गए। इसके बावजूद, करेंट अकाउंट घाटा GDP का 2.4% तक बढ़ गया, जिससे बाहरी कमजोरियां बढ़ीं।

NDD प्रतिबंध की कार्यप्रणाली और प्रभाव

NDDs वे ऑफशोर डेरिवेटिव्स हैं जो बिना भौतिक रुपये की डिलीवरी के विदेशी मुद्रा में निपटान करते हैं, जिससे ऑनशोर पूंजी नियंत्रणों के बिना रुपये की चाल पर सट्टेबाजी संभव होती है। RBI का NDD ट्रेडिंग पर प्रतिबंध इस ऑफशोर सट्टेबाजी चैनल को बंद करने और तेजी से पूंजी के आवागमन से होने वाली रुपये की अस्थिरता को कम करने का प्रयास है।

हालांकि, यह प्रतिबंध ऑनशोर OTC डेरिवेटिव्स पर पूरी तरह लागू नहीं होता, जो एक्सचेंज-ट्रेडेड उपकरणों की तुलना में कम पारदर्शी और कमजोर नियमन वाले हैं। यह नियामक खामी सट्टेबाजों को ऑनशोर फॉरवर्ड्स या अन्य डेरिवेटिव्स की ओर मोड़ सकती है, जिससे प्रतिबंध की प्रभावशीलता कम हो सकती है।

तुलनात्मक दृष्टिकोण: भारत बनाम चीन की मुद्रा डेरिवेटिव्स नियमन

पहलूभारतचीन
नियामक प्राधिकरणRBI, SEBI, FEDAIपीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC)
NDD/NDF बाजार की स्थितिमार्च 2024 से प्रतिबंधितRMB के लिए ऑफशोर NDF प्रतिबंधित
मुद्रा अस्थिरता (2023)लगभग 12% (इंडिया VIX औसत)लगभग 5% (RMB अस्थिरता)
बाजार की तरलता और हेजिंगउच्च तरलता; कुछ नियामक छूटकम तरलता; सीमित हेजिंग विकल्प
पूंजी नियंत्रणमध्यम; नियंत्रित लेकिन खुला बाजारकड़े पूंजी नियंत्रण

नियामक खामियां और चुनौतियां

  • ऑनशोर OTC डेरिवेटिव्स: पारदर्शिता की कमी और कमजोर नियामक निगरानी से सट्टेबाजी की संभावना बढ़ती है, जो NDD प्रतिबंध को दरकिनार कर सकती है।
  • नियामक छूट: सट्टेबाज ऑनशोर डिलीवरी वाले फॉरवर्ड्स या फ्यूचर्स की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे प्रतिबंध का असर कम हो जाता है।
  • बाजार तरलता की चिंता: अत्यधिक प्रतिबंधित करने से कॉरपोरेट्स के लिए हेजिंग विकल्प कम हो सकते हैं, जो व्यापार और निवेश पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
  • प्रवर्तन की जटिलता: सीमा पार डेरिवेटिव लेनदेन की निगरानी के लिए बेहतर डेटा साझा करना और वैश्विक नियामकों के साथ समन्वय जरूरी है।

महत्व और आगे का रास्ता

  • RBI का NDD प्रतिबंध ऑफशोर सट्टेबाजी से जुड़ी अस्थिरता को कम करने की दिशा में एक लक्षित प्रयास है, लेकिन रुपये की सट्टेबाजी को पूरी तरह खत्म करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
  • ऑनशोर OTC डेरिवेटिव्स की पारदर्शिता और नियमन बढ़ाना जरूरी है ताकि नियामक छूट को बंद किया जा सके और प्रतिबंध की प्रभावशीलता बढ़े।
  • RBI, SEBI और FEDAI के बीच समन्वय मजबूत करने से मुद्रा डेरिवेटिव्स के नियमों की निगरानी और प्रवर्तन बेहतर होगा।
  • बाजार की तरलता और स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए ऐसे नियम अपनाने होंगे जो कॉरपोरेट्स की वैध हेजिंग गतिविधियों को प्रभावित न करें।
  • उन्नत डेटा एनालिटिक्स और वास्तविक समय निगरानी से RBI सट्टेबाजी के उछाल को पूर्वानुमानित कर प्रभावी हस्तक्षेप कर सकता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
Non-Deliverable Derivatives (NDDs) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. NDDs में अंत समय पर आधारभूत मुद्रा की भौतिक डिलीवरी होती है।
  2. RBI ने मार्च 2024 में ऑफशोर रुपये की सट्टेबाजी रोकने के लिए NDD ट्रेडिंग पर प्रतिबंध लगाया।
  3. प्रतिबंध से पहले NDD ट्रेडिंग मुद्रा डेरिवेटिव्स में लगभग 40% ओपन इंटरेस्ट थी।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि NDDs नकद निपटान वाले होते हैं, भौतिक डिलीवरी नहीं। कथन 2 और 3 RBI के मार्च 2024 मास्टर डायरेक्शन और SEBI 2023 डेटा के अनुसार सही हैं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
RBI के मुद्रा डेरिवेटिव्स पर नियामक अधिकारों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. FEMA, 1999 की धारा 3 RBI को विदेशी मुद्रा लेनदेन नियंत्रित करने का अधिकार देती है।
  2. RBI अधिनियम, 1934 की धारा 45W RBI को विदेशी मुद्रा से जुड़े डेरिवेटिव्स नियंत्रित करने का अधिकार देती है।
  3. सुप्रीम कोर्ट ने किरीट प्रेमजीभाई शेलत मामले में कहा कि RBI ऑफशोर डेरिवेटिव्स को नियंत्रित नहीं कर सकता।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (a)
कथन 1 और 2 FEMA और RBI अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार सही हैं। कथन 3 गलत है; सुप्रीम कोर्ट ने RBI को विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव्स सहित ऑफशोर लेनदेन नियंत्रित करने का अधिकार दिया है।

मुख्य प्रश्न

RBI के Non-Deliverable Derivatives (NDDs) पर प्रतिबंध के रुपये की अस्थिरता और व्यापक विदेशी मुद्रा बाजार पर प्रभाव का समालोचनात्मक विश्लेषण करें। नियामक चुनौतियों पर चर्चा करें और भारत में मुद्रा डेरिवेटिव्स के नियमन की प्रभावशीलता बढ़ाने के उपाय सुझाएं। (250 शब्द)

मुद्रा बाजार के संदर्भ में Non-Deliverable Derivatives (NDDs) क्या हैं?

NDDs ऐसे ऑफशोर विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स होते हैं जिनका निपटान नकद में होता है और आधारभूत मुद्रा की भौतिक डिलीवरी नहीं होती। ये पूंजी नियंत्रण वाले उभरते बाजारों में मुद्रा की चाल पर सट्टेबाजी की सुविधा देते हैं।

RBI मुद्रा डेरिवेटिव्स को किस कानूनी प्रावधान के तहत नियंत्रित करता है?

RBI मुद्रा डेरिवेटिव्स को FEMA, 1999 की धारा 3 (विदेशी मुद्रा लेनदेन का नियंत्रण) और RBI अधिनियम, 1934 की धारा 45W (विदेशी मुद्रा से जुड़े डेरिवेटिव्स का नियंत्रण) के तहत नियंत्रित करता है।

RBI ने मार्च 2024 में NDD ट्रेडिंग पर प्रतिबंध क्यों लगाया?

RBI ने NDD ट्रेडिंग पर प्रतिबंध इसलिए लगाया ताकि ऑफशोर सट्टेबाजी से होने वाली अत्यधिक रुपये की अस्थिरता और पूंजी प्रवाह के उतार-चढ़ाव को रोका जा सके, क्योंकि NDDs ऑनशोर नियामक नियंत्रण के बिना सट्टेबाजी की अनुमति देते थे।

रुपये की सट्टेबाजी को नियंत्रित करने में NDD प्रतिबंध की क्या सीमाएं हैं?

यह प्रतिबंध ऑनशोर OTC डेरिवेटिव्स पर लागू नहीं होता, जो कम नियमन और पारदर्शिता के कारण सट्टेबाजों को वहां शिफ्ट होने का मौका देते हैं। इस नियामक खामी की वजह से प्रतिबंध पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पाता।

भारत का मुद्रा डेरिवेटिव्स नियमन चीन से कैसे अलग है?

चीन का PBOC कड़े पूंजी नियंत्रण और RMB के लिए ऑफशोर NDFs पर प्रतिबंध लगाता है, जिससे मुद्रा अस्थिरता कम (~5%) लेकिन बाजार तरलता सीमित होती है। भारत मध्यम नियंत्रण अपनाता है, हाल ही में NDDs पर प्रतिबंध लगाया है लेकिन बाजार को अधिक खुला रखता है, जिससे अस्थिरता अधिक (~12%) लेकिन तरलता बेहतर रहती है।

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