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परिचय: राजनाथ सिंह के नेतृत्व में रणनीतिक पहल

2019 से, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत की रक्षा क्षेत्र में उन्नत तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग और हाइपरसोनिक प्रणालियों को शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। यह पहल वैश्विक युद्ध के बदलते स्वरूप के अनुरूप है, जहां तकनीकी श्रेष्ठता रणनीतिक निवारक क्षमता और ऑपरेशनल दक्षता तय करती है। रक्षा मंत्रालय ने स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास (R&D), खरीद प्रक्रिया में सुधार और निजी उद्योग के साथ सहयोग पर विशेष ध्यान दिया है ताकि आयात पर निर्भरता कम हो और भारत की रक्षा क्षमता मजबूत हो सके।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: रक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सुरक्षा चुनौतियाँ
  • GS पेपर 2: राजनीति (रक्षा-संबंधी संवैधानिक प्रावधान)
  • निबंध: तकनीक और राष्ट्रीय सुरक्षा

रक्षा आधुनिकीकरण के संवैधानिक और कानूनी आधार

भारतीय संविधान के Article 246(1) के तहत संसद को रक्षा मामलों में कानून बनाने का विशेष अधिकार प्राप्त है, जो केंद्रीकृत रक्षा नीति और खरीद का कानूनी आधार प्रदान करता है। Defence Procurement Procedure (DPP) 2020 खरीद प्रक्रिया को नियंत्रित करता है, जिसमें पारदर्शिता, स्वदेशीकरण और तेज निर्णय लेने पर जोर दिया गया है। Defence Production Act, 1950 सरकार को घरेलू उत्पादन बढ़ावा देने का अधिकार देता है, जबकि Official Secrets Act, 1923 की धारा 3 रक्षा से संबंधित गोपनीय जानकारी की सुरक्षा करती है। Defence Research and Development Organisation (DRDO) Act, 1958 DRDO को रक्षा अनुसंधान और विकास का मुख्य संगठन बनाता है, जो अत्याधुनिक तकनीकों के विकास के लिए जिम्मेदार है।

आर्थिक पहलू: बजट और स्वदेशी उत्पादन

वित्त वर्ष 2023-24 के लिए भारत का रक्षा बजट ₹5.94 लाख करोड़ (~USD 78 बिलियन) है, जिसमें लगभग 25% पूंजीगत व्यय आधुनिककरण और तकनीक अधिग्रहण पर केंद्रित है (संघीय बजट 2023-24)। 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन में वित्त वर्ष 2022-23 में 15% की वृद्धि हुई है (रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट)। वैश्विक रक्षा AI बाजार 2027 तक USD 18.82 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जो 24.6% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है (MarketsandMarkets 2023), जो भारत के लिए रणनीतिक समानता बनाए रखने हेतु बड़े निवेश की आवश्यकता को दर्शाता है।

  • वित्त वर्ष 2023-24 में रक्षा R&D बजट 20% बढ़कर ₹15,000 करोड़ हुआ (MoD वार्षिक रिपोर्ट 2023)।
  • DRDO ने पिछले पांच वर्षों में 75 से अधिक स्वदेशी AI और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तकनीक विकसित की हैं (DRDO वार्षिक रिपोर्ट 2023)।
  • भारत रक्षा AI अनुसंधान प्रकाशनों में विश्व में तीसरे स्थान पर है (Global AI Index 2023, Tortoise Intelligence)।
  • स्वदेशी उत्पादन बढ़ने से 2022-23 में उच्च तकनीक रक्षा उपकरणों के आयात में 10% की कमी आई (SIPRI Arms Transfers Report 2023)।
  • Defence Innovation Organisation (DIO) ने क्वांटम कंप्यूटिंग और साइबर युद्ध में 50 से अधिक स्टार्टअप्स को समर्थन दिया है (DIO वार्षिक समीक्षा 2023)।
  • DRDO का हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर व्हीकल (HSTDV) 2025 तक परिचालन होने की उम्मीद है (PIB 2023)।

उच्च तकनीक रक्षा क्षमताओं को बढ़ावा देने वाले प्रमुख संस्थान

DRDO AI, हाइपरसोनिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध में अनुसंधान एवं विकास का नेतृत्व करता है। Defence Public Sector Undertakings (DPSUs) घरेलू स्तर पर उपकरण बनाते हैं, जो 'मेक इन इंडिया' के ढांचे का समर्थन करते हैं। भारतीय वायु सेना (IAF) UAVs और उन्नत एवियोनिक्स को नेटवर्क-केंद्रित युद्ध के लिए शामिल कर रही है। भारतीय सेना इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और संचार प्रणालियों को अपनाकर युद्धक्षेत्र में प्रभुत्व स्थापित कर रही है। रक्षा मंत्री नीतियां बनाते हैं और खरीद प्रक्रिया की निगरानी करते हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) रणनीतिक तकनीक विकास और तैनाती का समन्वय करता है।

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत बनाम चीन उच्च तकनीक युद्ध में

पहलूभारतचीन (PLA)
2018 से AI-समर्थित युद्ध में निवेशलगभग USD 2-3 बिलियन (अनुमानित)USD 30 बिलियन से अधिक
स्वायत्त ड्रोन तैनातीसीमित, विकासाधीनव्यापक रूप से तैनात
हाइपरसोनिक मिसाइल प्रणालीHSTDV कार्यक्रम 2025 तक परिचालनपरिचालित हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन तैनात
R&D पारिस्थितिकी तंत्रप्रारंभिक लेकिन तेजी से बढ़ रहा, सार्वजनिक-निजी साझेदारी के साथपरिपक्व, राज्य संचालित, सैन्य-नागरिक समेकन
रक्षा AI अनुसंधान प्रकाशन रैंकिंगविश्व में तीसराविश्व में पहला

भारत की उच्च तकनीक रक्षा पहल में चुनौतियां और महत्वपूर्ण अंतर

भारत को AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और साइबर युद्ध में कुशल कर्मियों की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे तकनीक के तेजी से अपनाने में बाधा आती है। नौकरशाही खरीद प्रक्रियाओं में देरी नवाचारों के त्वरित तैनाती में रुकावट डालती है। स्टार्टअप से DPSUs तक सीमित तकनीक हस्तांतरण स्वदेशी समाधानों के पैमाने को रोकता है। ये कमियां भारत की उच्च तकनीक युद्धक्षमता में चीन जैसे प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले तैयारियों को धीमा कर सकती हैं।

महत्व और आगे का रास्ता

  • रक्षा कर्मियों के लिए उभरती तकनीकों में कौशल विकास कार्यक्रमों को तेज करें।
  • DPP 2020 के तहत खरीद प्रक्रियाओं को सरल बनाकर देरी कम करें।
  • स्टार्टअप और DPSUs के बीच तकनीक हस्तांतरण के तंत्र मजबूत करें।
  • सार्वजनिक-निजी साझेदारी बढ़ाएं और R&D निवेश को प्रोत्साहित करें।
  • 2025 तक हाइपरसोनिक और AI-सक्षम प्रणालियों के परिचालन को प्राथमिकता दें।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत के रक्षा खरीद और उत्पादन ढांचे के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. Defence Procurement Procedure (DPP) 2020 रक्षा उपकरणों की खरीद को नियंत्रित करता है।
  2. Defence Production Act, 1950 रक्षा तकनीकों के आयात को नियंत्रित करता है।
  3. संविधान के Article 246(1) के तहत संसद को रक्षा पर कानून बनाने का अधिकार है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (c)
कथन 2 गलत है क्योंकि Defence Production Act, 1950 आयात नहीं बल्कि स्वदेशी रक्षा उत्पादन को नियंत्रित करता है। कथन 1 और 3 सही हैं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत के रक्षा क्षेत्र में AI के उपयोग के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. भारत रक्षा AI अनुसंधान प्रकाशनों में विश्व में तीसरे स्थान पर है।
  2. Defence Innovation Organisation ने क्वांटम कंप्यूटिंग पर काम करने वाले स्टार्टअप्स को समर्थन दिया है।
  3. सिविल क्षेत्र में AI के उपयोग को Defence Procurement Procedure नियंत्रित करता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (a)
कथन 3 गलत है क्योंकि सिविल क्षेत्र में AI के उपयोग को Defence Procurement Procedure नियंत्रित नहीं करता। कथन 1 और 2 सही हैं।

मेन प्रश्न

भारत की रक्षा व्यवस्था में AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और हाइपरसोनिक्स जैसी उभरती तकनीकों के समावेश का रणनीतिक महत्व बताएं। इस प्रयास में भारत को जिन संस्थागत और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है उनका विश्लेषण करें और इन चुनौतियों को दूर करने के लिए उपाय सुझाएं। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (विज्ञान और प्रौद्योगिकी), पेपर 3 (रक्षा और सुरक्षा)
  • झारखंड दृष्टिकोण: झारखंड में कई रक्षा निर्माण इकाइयां और DRDO प्रयोगशालाएं हैं जो स्वदेशी तकनीक विकास में योगदान देती हैं।
  • मेन प्वाइंटर: स्थानीय रक्षा DPSUs और DRDO सुविधाओं की भूमिका को उजागर करते हुए राष्ट्रीय रक्षा आधुनिकीकरण को राज्य स्तर के औद्योगिक विकास से जोड़कर उत्तर तैयार करें।
भारत की उच्च तकनीक रक्षा रणनीति में DRDO की भूमिका क्या है?

DRDO उन्नत रक्षा तकनीकों जैसे AI, हाइपरसोनिक्स और क्वांटम कंप्यूटिंग के अनुसंधान और विकास का मुख्य संगठन है। पिछले पांच वर्षों में इसने AI और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध में 75 से अधिक स्वदेशी तकनीकें विकसित की हैं, जो भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।

Defence Procurement Procedure 2020 स्वदेशी रक्षा उत्पादन को कैसे समर्थन देता है?

DPP 2020 'मेक इन इंडिया' पर जोर देता है, घरेलू निर्माताओं से खरीद को प्राथमिकता देता है, खरीद प्रक्रिया को सरल बनाता है और सार्वजनिक-निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करता है ताकि आयात निर्भरता कम हो और स्वदेशी क्षमता बढ़े।

भारत को उच्च तकनीक युद्ध तकनीकों को अपनाने में कौन-कौन सी चुनौतियां हैं?

भारत को AI और क्वांटम कंप्यूटिंग में कुशल कर्मियों की कमी, नौकरशाही खरीद में देरी और स्टार्टअप से DPSUs तक सीमित तकनीक हस्तांतरण जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जो उन्नत प्रणालियों की त्वरित तैनाती में बाधक हैं।

भारत की रक्षा AI अनुसंधान वैश्विक स्तर पर कैसी है?

भारत रक्षा AI अनुसंधान प्रकाशनों में विश्व में तीसरे स्थान पर है, जो बढ़ते हुए लेकिन अभी भी विकासशील पारिस्थितिकी तंत्र को दर्शाता है, जबकि चीन और अमेरिका जैसे देश अग्रणी हैं।

भारत के लिए हाइपरसोनिक मिसाइल विकास का क्या महत्व है?

DRDO का हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर व्हीकल (HSTDV), जो 2025 तक परिचालन होने वाला है, भारत को तेज़ी से हमला करने की क्षमता देगा, जिससे क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ निवारक शक्ति और रणनीतिक पहुंच बढ़ेगी।

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