रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का SCO में आतंकवाद विरोधी एकजुट रणनीति का आह्वान
अप्रैल 2024 में, भारत के गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सदस्य देशों से आतंकवाद को खत्म करने के लिए एक समन्वित और साझा रणनीति अपनाने की जरूरत पर जोर दिया। ताजिकिस्तान के दुशांबे में आयोजित SCO शिखर सम्मेलन में उन्होंने आतंकवाद को एक अंतरराष्ट्रीय खतरा बताया जो क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक विकास को कमजोर करता है। सिंह ने सदस्य देशों से खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान, कानूनी सहयोग और संयुक्त संचालन तंत्र को मजबूत करने की अपील की ताकि सीमा पार आतंकवाद से प्रभावी मुकाबला किया जा सके।
यह आह्वान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि SCO में आठ सदस्य देश और चार पर्यवेक्षक शामिल हैं, जिनकी जनसंख्या तीन अरब से अधिक है और जो विश्व के 40% से अधिक GDP का प्रतिनिधित्व करते हैं। आतंकवाद सुरक्षा और आर्थिक गलियारों जैसे अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) को प्रभावित करता है, इसलिए यूरैशियाई क्षेत्र की स्थिरता के लिए सामूहिक प्रयास बेहद जरूरी हैं।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – SCO की क्षेत्रीय सुरक्षा में भूमिका, भारत की आतंकवाद विरोधी कूटनीति
- GS पेपर 3: आंतरिक सुरक्षा – आतंकवाद विरोधी कानूनी प्रावधान, खुफिया सहयोग
- निबंध: दक्षिण और मध्य एशिया में क्षेत्रीय सहयोग और आतंकवाद विरोधी रणनीतियाँ
भारत और SCO में आतंकवाद विरोधी कानूनी एवं संस्थागत ढांचा
भारत में आतंकवाद विरोधी कानूनी आधार Unlawful Activities (Prevention) Act, 1967 (UAPA) है, खासकर धारा 15-35 जो आतंकवादी संगठनों को घोषित करने और आतंकवादी अपराधों का मुकदमा चलाने की शक्ति देती हैं। भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 121A (राज्य के खिलाफ साजिश) और 153A (द्वेष फैलाना) भी इस ढांचे को पूरा करती हैं। National Investigation Agency Act, 2008 के तहत राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) केंद्रीय आतंकवाद विरोधी जांच संस्था के रूप में स्थापित की गई है।
बहुपक्षीय स्तर पर, SCO का Regional Anti-Terrorist Structure (RATS) ताशकंद में स्थित है, जो सदस्य देशों के बीच खुफिया साझेदारी, संयुक्त अभ्यास और कानूनी सहयोग का समन्वय करता है। हालांकि, SCO के पास आतंकवादियों की प्रत्यर्पण और अभियोजन के लिए कोई बाध्यकारी संधि नहीं है, जिससे पश्चिमी गठबंधनों की तुलना में संचालन में सीमाएं हैं।
आर्थिक प्रभाव और SCO की भूमिका
भारत ने 2023-24 के केंद्रीय बजट में आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी कार्यों के लिए लगभग ₹2,23,846 करोड़ (लगभग 30 अरब USD) आवंटित किए हैं। आतंकवाद व्यापार, निवेश और पर्यटन में बाधा डालकर भारत की GDP वृद्धि को प्रति वर्ष 0.5-1% तक प्रभावित करता है (Institute for Economics & Peace, Global Terrorism Index 2023)।
SCO के सदस्य देशों की संयुक्त आर्थिक ताकत, जो विश्व GDP का 40% से अधिक है, क्षेत्रीय सुरक्षा को आर्थिक सहयोग के लिए अनिवार्य बनाती है। आतंकवाद से उत्पन्न अस्थिरता INSTC जैसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं को खतरे में डालती है, जो भारत को मध्य एशिया और रूस से जोड़ती है और व्यापार व ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देती है।
प्रमुख संस्थाएं और उनकी भूमिका
- शंघाई सहयोग संगठन (SCO): क्षेत्रीय स्थिरता और आतंकवाद विरोधी प्रयासों पर केंद्रित यूरैशियाई राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा गठबंधन।
- Regional Anti-Terrorist Structure (RATS): SCO की आतंकवाद विरोधी खुफिया साझेदारी और समन्वय संस्था।
- राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA): भारत की केंद्रीय आतंकवाद जांच और अभियोजन एजेंसी।
- गृह मंत्रालय (MHA): आंतरिक सुरक्षा नीति और आतंकवाद विरोधी कार्यान्वयन की जिम्मेदारी।
- इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB): घरेलू खुफिया एजेंसी, आतंकवाद निगरानी और विश्लेषण में सक्रिय।
- रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW): सीमा पार आतंकवाद खतरों पर केंद्रित बाहरी खुफिया एजेंसी।
आतंकवाद और SCO सहयोग के आंकड़े
- SCO में 8 सदस्य और 4 पर्यवेक्षक देश हैं, जिनकी कुल जनसंख्या 3 अरब से अधिक है (SCO आधिकारिक वेबसाइट, 2024)।
- भारत का आतंकवाद विरोधी बजट 2023-24 में 2022-23 की तुलना में 12% बढ़ा (संघीय बजट 2023-24)।
- Global Terrorism Index 2023 के अनुसार SCO देशों में पांच वर्षों में आतंकवादी घटनाओं में 15% वृद्धि हुई।
- RATS ने 2002 से अब तक 50 से अधिक संयुक्त आतंकवाद विरोधी अभ्यास और खुफिया आदान-प्रदान किए हैं (SCO वार्षिक रिपोर्ट 2023)।
- जम्मू-कश्मीर में लगभग 70% आतंकवादी घटनाएं सीमा पार आतंकवाद से जुड़ी हैं (MHA वार्षिक रिपोर्ट 2023)।
- 2018 से भारत ने SCO की पहलों के तहत 100 से अधिक आतंकवादी साजिशों को नाकाम किया है (NIA वार्षिक रिपोर्ट 2023)।
SCO और NATO के आतंकवाद विरोधी दृष्टिकोण की तुलना
| पहलू | SCO | NATO |
|---|---|---|
| सदस्यता | 8 सदस्य + 4 पर्यवेक्षक (यूरैशिया) | 30+ सदस्य (उत्तर अमेरिका और यूरोप) |
| कानूनी ढांचा | गैर-बाध्यकारी सहयोग; प्रत्यर्पण संधि नहीं | धारा 5 के तहत बाध्यकारी सामूहिक रक्षा |
| संचालन तंत्र | खुफिया साझेदारी, संयुक्त अभ्यास, कानूनी सहयोग | सैन्य हस्तक्षेप और सामूहिक रक्षा |
| आतंकवाद प्रतिक्रिया | सहमति आधारित, गैर-सैन्य केंद्रित | तेज सैन्य प्रतिक्रिया (जैसे अफगानिस्तान 2001) |
| भू-राजनीतिक संदर्भ | बहुध्रुवीय यूरैशियाई सुरक्षा माहौल | पश्चिमी गठबंधन, वैश्विक पहुंच के साथ |
SCO के आतंकवाद विरोधी ढांचे की चुनौतियां
SCO सदस्य देशों के बीच बाध्यकारी प्रत्यर्पण और अभियोजन संधि न होने के कारण आतंकवाद विरोधी प्रयासों की प्रभावशीलता सीमित रहती है। विभिन्न राष्ट्रीय हित और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धाएं कठोर कदमों पर सहमति बनाने में बाधा डालती हैं। इसके अलावा, खुफिया साझेदारी में भरोसे की कमी और संप्रभुता संबंधी चिंताएं संयुक्त कार्रवाइयों की क्षमता को घटाती हैं।
साथ ही, SCO देशों में आतंकवादी घटनाओं में 15% की वृद्धि यह दर्शाती है कि समन्वय को और मजबूत करने की जरूरत है। जम्मू-कश्मीर में सीमा पार आतंकवाद की बड़ी हिस्सेदारी (लगभग 70%) क्षेत्रीय सहयोग की अहमियत को रेखांकित करती है ताकि सीमा पार आतंकवादी नेटवर्क को कमजोर किया जा सके।
महत्व और आगे की राह
- SCO के भीतर प्रत्यर्पण, अभियोजन और कानूनी सहायता के लिए बाध्यकारी कानूनी दस्तावेज तैयार करें ताकि संचालन सशक्त हो सके।
- सदस्य देशों के बीच भरोसे के उपाय बढ़ाएं ताकि खुफिया साझेदारी और संयुक्त आतंकवाद विरोधी अभियान बेहतर हों।
- भारत की कानूनी और संस्थागत विशेषज्ञता, जैसे UAPA और NIA की क्षमता, SCO सदस्यों की क्षमता निर्माण में उपयोग करें।
- आर्थिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए INSTC जैसे महत्वपूर्ण व्यापार गलियारों को आतंकवाद से सुरक्षित रखें।
- बहुपक्षीय संवाद को बढ़ावा दें ताकि आतंकवाद विरोधी नीतियों को समन्वित किया जा सके और क्षेत्र में आतंकवाद के सामाजिक-राजनीतिक कारणों से निपटा जा सके।
- SCO के सदस्य देशों के बीच आतंकवादियों के प्रत्यर्पण के लिए बाध्यकारी कानूनी ढांचा है।
- RATS SCO की आतंकवाद विरोधी समन्वय संस्था है।
- भारत SCO के संस्थापक सदस्य देशों में से एक है।
- Unlawful Activities (Prevention) Act (UAPA) आतंकवादी संगठनों को घोषित करने की अनुमति देता है।
- भारतीय दंड संहिता की धारा 153A राज्य के खिलाफ साजिश से संबंधित है।
- National Investigation Agency Act, 2008 ने आतंकवाद जांच के लिए NIA की स्थापना की।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
मुख्य प्रश्न
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के ढांचे में आतंकवाद विरोधी एकजुट रणनीति की भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए क्या अहमियत है? भारत अपने कानूनी और संस्थागत संसाधनों का उपयोग करके SCO के आतंकवाद विरोधी प्रयासों को कैसे मजबूत कर सकता है?
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 – आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी
- झारखंड का नजरिया: झारखंड में वामपंथी उग्रवाद की समस्या है; SCO के आतंकवाद विरोधी सहयोग से मिली सीखों से सशस्त्र विद्रोह के खिलाफ रणनीतियाँ विकसित की जा सकती हैं।
- मुख्य बिंदु: क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को झारखंड की आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों से जोड़कर जवाब तैयार करें, खासकर खुफिया साझेदारी और कानूनी फ्रेमवर्क पर जोर देते हुए।
SCO के Regional Anti-Terrorist Structure (RATS) का मुख्य कार्य क्या है?
RATS सदस्य देशों के बीच खुफिया साझा करने, संयुक्त आतंकवाद विरोधी अभ्यास करने और कानूनी सहयोग को समन्वित करता है।
क्या SCO के पास आतंकवादियों के प्रत्यर्पण के लिए बाध्यकारी संधि है?
नहीं, SCO के सदस्य देशों के बीच आतंकवादियों के प्रत्यर्पण और अभियोजन के लिए कोई बाध्यकारी कानूनी ढांचा नहीं है, जिससे संचालन की क्षमता सीमित है।
भारत का UAPA आतंकवाद विरोधी प्रयासों का समर्थन कैसे करता है?
UAPA सरकार को आतंकवादी संगठनों को घोषित करने, उनकी संपत्तियों को फ्रीज करने और आतंकवाद से जुड़े अपराधों का मुकदमा चलाने की शक्ति देता है।
आतंकवाद का भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ता है?
आतंकवाद व्यापार, निवेश और सुरक्षा खर्च में बाधा डालकर भारत की GDP वृद्धि को प्रति वर्ष लगभग 0.5-1% तक कम करता है।
2018 से भारत ने SCO की पहलों के तहत कितनी आतंकवादी साजिशें नाकाम की हैं?
भारत ने SCO के नेतृत्व में आतंकवाद विरोधी पहलों के जरिए 2018 से अब तक 100 से अधिक आतंकवादी साजिशों को विफल किया है।
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