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पंचायत उन्नयन सूचकांक 2.0 का परिचय

पंचायती राज मंत्रालय (MoPR) ने 2024 में पंचायत उन्नयन सूचकांक (PAI) 2.0 जारी किया, जो PAI 1.0 के आधार मूल्यांकन को अपडेट करता है। यह सूचकांक भारत के 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों के प्रदर्शन को 33 संकेतकों के आधार पर आंकता है, जिनमें शासन, सेवा वितरण, वित्तीय प्रबंधन, योजना और डिजिटल पहल शामिल हैं। PAI 2.0 का डेटा 2023 में एकत्रित किया गया है और इसका मकसद पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) के बेहतर विकेंद्रीकृत शासन और ग्रामीण विकास के लिए एक डेटा-आधारित रूपरेखा तैयार करना है।

PAI 2.0 में आधार रेखा के मुकाबले 12% की राष्ट्रीय सुधार दर दर्ज की गई है, जो प्रगति दर्शाती है, लेकिन वित्तीय स्वायत्तता और क्षमता निर्माण में मौजूद खामियों को भी उजागर करती है। यह रिपोर्ट संवैधानिक प्रावधानों, विशेषकर अनुच्छेद 243G के अनुरूप है और मॉडल पंचायत अधिनियम, 2019 के कार्यान्वयन में सहायक है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: शासन – पंचायती राज संस्थाएं, विकेंद्रीकरण, ग्रामीण शासन सुधार
  • GS पेपर 3: आर्थिक विकास – ग्रामीण विकास योजनाएं, पंचायती राज का वित्तीय प्रबंधन
  • निबंध: भारत में विकेंद्रीकरण और जमीनी लोकतंत्र

पंचायती राज संस्थाओं का संवैधानिक और कानूनी ढांचा

पंचायती राज प्रणाली को संविधान में 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के तहत विशेष रूप से अनुच्छेद 243G में स्थापित किया गया है, जो पंचायतों की स्थापना, शक्तियां और जिम्मेदारियां निर्धारित करता है। पंचायती राज (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम, 1996 (PESA) जनजातीय क्षेत्रों में शासन को बेहतर बनाने के लिए ग्राम सभा को सशक्त बनाने पर जोर देता है।

मॉडल पंचायत अधिनियम, 2019 ने पंचायतों को मजबूत करने के लिए वित्तीय स्वायत्तता, पारदर्शिता और क्षमता निर्माण के प्रावधान दिए हैं। राज्यों के पंचायती राज अधिनियम ग्राम सभा की भूमिका को योजना और निर्णय प्रक्रिया में अनिवार्य बनाते हैं, जिनका आकलन PAI 2.0 में सहभागिता संकेतकों के माध्यम से किया जाता है।

पंचायतों के आर्थिक पहलू और वित्तीय प्रबंधन

संसद के बजट 2024 में पंचायती राज मंत्रालय को लगभग ₹5,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जो क्षमता निर्माण और शासन सुधारों के लिए उपयोग किए जाएंगे। पंचायती राज संस्थाएं हर साल ₹2 लाख करोड़ से अधिक राशि का प्रबंधन करती हैं, जिसमें प्रमुख योजनाएं जैसे MGNREGA और PMAY-G शामिल हैं, जो ग्रामीण विकास के खर्च का बड़ा हिस्सा हैं।

नीति आयोग का अनुमान है कि प्रभावी पंचायत शासन ग्रामीण सेवा वितरण को बेहतर बनाकर ग्रामीण GDP में 15-20% तक सुधार ला सकता है। PAI 2.0 कुशल धन उपयोग और पारदर्शिता को प्रोत्साहित करता है, जिससे वित्तीय रिसाव में 10-15% की कमी संभव है। हालांकि, वित्तीय स्वायत्तता सूचकांक बताता है कि सिर्फ 30% से कम पंचायतों के पास स्थानीय राजस्व पर सीधा नियंत्रण है, जो राज्य अनुदानों पर निर्भरता को दर्शाता है।

PAI 2.0 के संकेतक और संस्थागत भूमिकाएं

PAI 2.0 ग्राम पंचायतों का मूल्यांकन 33 संकेतकों पर करता है, जिन्हें पांच श्रेणियों में बांटा गया है:

  • शासन: ग्राम सभा की भागीदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही तंत्र
  • सेवा वितरण: जल, स्वच्छता और स्वास्थ्य जैसी ग्रामीण सेवाओं की गुणवत्ता और समयबद्धता
  • वित्तीय प्रबंधन: बजट निर्माण, धन का उपयोग और ऑडिट अनुपालन
  • योजना एवं क्रियान्वयन: ग्राम पंचायत विकास योजनाओं की तैयारी और उनका क्रियान्वयन
  • डिजिटल पहल: ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म और डिजिटल रिकॉर्ड कीपिंग का अपनाना

पंचायती राज मंत्रालय PAI फ्रेमवर्क का नेतृत्व करता है, जो डेटा विश्लेषण और सुधार के लिए नीति आयोग के साथ सहयोग करता है। राज्य पंचायती राज विभाग PAI के परिणामों के आधार पर सुधार लागू करते हैं। सेंट्रल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (CSO) डेटा प्रदान करता है, जबकि ग्राम पंचायत मूल्यांकन की मुख्य इकाई हैं।

प्रदर्शन की मुख्य बातें और चुनौतियां

PAI 2.0 में शीर्ष पांच राज्यों के रूप में केरल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक हैं, जो मजबूत शासन और डिजिटल अपनाने को दर्शाते हैं (PIB, 2024)। राष्ट्रीय स्तर पर औसत PAI स्कोर में आधार रेखा रिपोर्ट के बाद 12% की वृद्धि हुई है।

प्रगति के बावजूद, केवल 40% ग्राम पंचायतों में पूर्ण ई-गवर्नेंस प्रणाली कार्यरत है। जिन राज्यों के PAI स्कोर उच्च हैं, वहां ग्राम सभा की भागीदारी दर में 8% की वृद्धि देखी गई है, जो संस्थागत सहभागिता और प्रदर्शन के बीच संबंध को दर्शाता है। वित्तीय स्वायत्तता का अंतर गंभीर बना हुआ है, क्योंकि अधिकांश पंचायतों के पास स्वतंत्र राजस्व स्रोत नहीं हैं और योजना तथा क्रियान्वयन के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी भी कम हैं।

तुलनात्मक दृष्टिकोण: भारत बनाम इंडोनेशिया के ग्रामीण शासन

पहलूभारत (पंचायती राज)इंडोनेशिया (डेसा सिस्टम)
कानूनी ढांचा73वां संशोधन, PESA, मॉडल पंचायत अधिनियमविलेज लॉ 2014, विकेंद्रीकृत वित्तीय स्वायत्तता
वित्तीय स्वायत्तता30% से कम पंचायतों के पास स्थानीय राजस्व नियंत्रणडेसा के पास सीधा वित्तीय नियंत्रण, जिससे 25% अधिक इन्फ्रास्ट्रक्चर खर्च कुशलता
डिजिटल पहल40% पंचायतों में ई-गवर्नेंस प्रणालीव्यापक डिजिटल पारदर्शिता उपकरण, जवाबदेही बढ़ाना
सामुदायिक सहभागिताग्राम सभा की भागीदारी में 8% सुधारमजबूत सामुदायिक जुड़ाव, योजना में संस्थागत सहभागिता

इंडोनेशिया के डेसा सुधार दिखाते हैं कि कैसे वित्तीय विकेंद्रीकरण और डिजिटल उपकरण स्थानीय शासन के नतीजों में सुधार ला सकते हैं, जो भारत की पंचायती राज सुधारों के लिए महत्वपूर्ण सबक है।

आगे का रास्ता: वित्तीय स्वायत्तता और क्षमता निर्माण की चुनौतियों का समाधान

  • पंचायतों की राजस्व जुटाने की शक्तियों को बढ़ाएं ताकि राज्य अनुदानों पर निर्भरता कम हो, जो अनुच्छेद 243G के प्रावधानों के अनुरूप हो।
  • पंचायत अधिकारियों के लिए वित्तीय प्रबंधन और डिजिटल साक्षरता पर केंद्रित क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को व्यापक बनाएं।
  • सभी ग्राम पंचायतों में ई-गवर्नेंस इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करें, जिससे पारदर्शिता और सेवा वितरण में सुधार हो।
  • ग्राम सभा की भागीदारी को कानूनी रूप से मजबूत करें और जागरूकता अभियानों के जरिए सुनिश्चित करें कि योजना प्रक्रिया में सभी शामिल हों।
  • राज्य और स्थानीय स्तर पर प्रगति को ट्रैक करने और सर्वोत्तम प्रथाओं को प्रोत्साहित करने के लिए नियमित PAI मूल्यांकन को संस्थागत बनाएं।

अभ्यास प्रश्न

📝 प्रारंभिक अभ्यास
पंचायत उन्नयन सूचकांक (PAI) 2.0 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. PAI 2.0 ग्राम पंचायतों का मूल्यांकन शासन, वित्तीय प्रबंधन और डिजिटल पहलों के 30 से अधिक संकेतकों पर करता है।
  2. PAI 2.0 के तहत 70% से अधिक ग्राम पंचायतों के पास पूर्ण वित्तीय स्वायत्तता और स्थानीय राजस्व पर नियंत्रण है।
  3. PAI 2.0 केवल पंचायती राज मंत्रालय द्वारा विकसित किया गया है, बिना किसी अन्य संस्था के सहयोग के।

इनमें से कौन सा/से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1
  • bकेवल 2
  • c1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि PAI 2.0 33 संकेतकों पर मूल्यांकन करता है। कथन 2 गलत है क्योंकि 30% से कम पंचायतों के पास वित्तीय स्वायत्तता है। कथन 3 गलत है क्योंकि नीति आयोग भी MoPR के साथ सहयोग करता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
पंचायती राज व्यवस्था में ग्राम सभा और ग्राम पंचायत के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. ग्राम सभा उस क्षेत्र के सभी पंजीकृत मतदाताओं का समूह होती है।
  2. ग्राम पंचायत ग्राम सभा द्वारा स्वीकृत विकास योजनाओं को लागू करने की जिम्मेदार होती है।
  3. पंचायती राज (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम, 1996 (PESA) जनजातीय क्षेत्रों में ग्राम सभा की भूमिका को अनिवार्य करता है।

इनमें से कौन सा/से कथन सही हैं?

  • a1 और 2
  • b2 और 3
  • c1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (d)
सभी कथन सही हैं। ग्राम सभा में सभी पंजीकृत मतदाता शामिल होते हैं; ग्राम पंचायत योजनाओं को लागू करती है; PESA अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा को सशक्त बनाता है।

मेन्स प्रश्न

भारत में विकेंद्रीकृत शासन को मजबूत करने में पंचायत उन्नयन सूचकांक (PAI) 2.0 के महत्व की समीक्षा करें। इसके द्वारा उजागर मुख्य चुनौतियों पर चर्चा करें और पंचायती राज संस्थाओं की प्रभावशीलता बढ़ाने के उपाय सुझाएं।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – शासन और ग्रामीण विकास
  • झारखंड का नजरिया: झारखंड, जहां जनजातीय आबादी अधिक है, PESA प्रावधानों को लागू करता है; PAI 2.0 के आंकड़े राज्य की पंचायतों में वित्तीय स्वायत्तता और ई-गवर्नेंस अपनाने में कमियों को उजागर करते हैं।
  • मेन्स पॉइंटर: PESA के संवैधानिक सुरक्षा प्रावधानों को PAI के ग्राम सभा सहभागिता और वित्तीय प्रबंधन के आंकड़ों से जोड़कर उत्तर तैयार करें।
पंचायत उन्नयन सूचकांक (PAI) 2.0 क्या है?

PAI 2.0 एक समग्र मूल्यांकन फ्रेमवर्क है, जिसे पंचायती राज मंत्रालय ने 2024 में जारी किया है। यह देश के 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों का शासन, सेवा वितरण, वित्तीय प्रबंधन, योजना और डिजिटल पहल के 33 संकेतकों के आधार पर आंकलन करता है।

पंचायतों के अधिकारों का संवैधानिक प्रावधान कौन सा है?

अनुच्छेद 243G संविधान में 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के तहत जोड़ा गया है, जो पंचायतों की स्थापना, शक्तियां और जिम्मेदारियां तय करता है।

PAI 2.0 के तहत किन प्रमुख श्रेणियों का मूल्यांकन किया जाता है?

PAI 2.0 पंचायतों का मूल्यांकन शासन, सेवा, वित्तीय प्रबंधन, योजना एवं क्रियान्वयन, और डिजिटल पहलों की श्रेणियों में करता है।

PAI 2.0 पंचायतों की वित्तीय स्वायत्तता को कैसे दर्शाता है?

PAI 2.0 में वित्तीय स्वायत्तता सूचकांक शामिल है, जो दिखाता है कि 30% से कम पंचायतों के पास स्थानीय राजस्व पर सीधा नियंत्रण है, जो राज्य अनुदानों पर निर्भरता को दर्शाता है और राजस्व सशक्तिकरण की जरूरत बताता है।

PAI 2.0 में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्य कौन से हैं?

केरल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक PAI 2.0 के शीर्ष पांच राज्य हैं, जैसा कि 2024 के MoPR रिपोर्ट में बताया गया है।

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