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नवीन न्यूरोमॉर्फिक सेंसर का परिचय

न्यूरोमॉर्फिक सेंसर ऐसे उपकरण हैं जो मानव मस्तिष्क की तंत्रिका संरचना की नकल करते हुए संवेदी डेटा को अत्यंत कुशलता और न्यूनतम विलंबता के साथ संसाधित करते हैं। यह अवधारणा पिछले दशक में प्रमुखता से उभरी है, जिसमें न्यूरोमॉर्फिक कंप्यूटिंग के सिद्धांतों को सेंसर तकनीक के साथ मिलाकर जैविक संवेदी अनुभूति की नकल की जाती है। विश्व स्तर पर, 2011 में DARPA के SyNAPSE कार्यक्रम के बाद शोध में तेजी आई, जिसने IBM के TrueNorth चिप जैसे विकासों को प्रेरित किया। भारत में इस क्षेत्र की भागीदारी अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन संस्थागत शोध और नीतिगत पहलों के माध्यम से गति मिल रही है।

ये सेंसर स्थानीय स्तर पर स्पाइकिंग न्यूरल नेटवर्क का उपयोग कर डेटा को संसाधित करते हैं, जिससे ऊर्जा की खपत में भारी कमी आती है और रियल-टाइम एज कंप्यूटिंग संभव होती है। इनकी अहमियत पारंपरिक सेंसरों की सीमाओं को पार करके एआई हार्डवेयर में बदलाव लाने में निहित है, जो क्लाउड प्रोसेसिंग और उच्च ऊर्जा खपत पर निर्भर करते हैं।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी – उभरती तकनीकें, AI हार्डवेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण
  • GS पेपर 2: शासन – तकनीकी नीति, डेटा सुरक्षा कानून
  • निबंध: तकनीक और भारत की स्वावलंबन

न्यूरोमॉर्फिक सेंसर की तकनीकी आधार और फायदे

न्यूरोमॉर्फिक सेंसर स्पाइकिंग न्यूरल नेटवर्क (SNN) का उपयोग करते हैं, जो जानकारी को डिस्क्रीट स्पाइक्स के रूप में एन्कोड करते हैं, जो जैविक न्यूरॉन्स के समान होती है। इससे इवेंट-ड्रिवन डेटा प्रोसेसिंग संभव होती है, जो फ्रेम-आधारित सेंसरों की तुलना में अनावश्यक गणनाओं को काफी कम करती है। रियल-टाइम प्रोसेसिंग की विलंबता 1 मिलीसेकंड से भी कम हो सकती है, जो पारंपरिक सेंसरों की तुलना में लगभग 60% बेहतर है (IEEE Sensors Journal, 2023)।

  • पारंपरिक AI सेंसरों की तुलना में ऊर्जा खपत में 90% तक कमी (Nature Electronics, 2022)।
  • ऑन-चिप प्रोसेसिंग की सुविधा, जिससे क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर और उससे जुड़ी विलंबता पर निर्भरता कम होती है।
  • रक्षा अनुप्रयोगों में बेहतर सटीकता, DRDO के प्रोटोटाइप में लक्ष्य पहचान में 30% अधिक सटीकता (DRDO वार्षिक रिपोर्ट, 2023)।

भारत में न्यूरोमॉर्फिक सेंसर विकास के लिए नीति और कानूनी ढांचा

हालांकि न्यूरोमॉर्फिक सेंसर के लिए कोई विशेष संवैधानिक प्रावधान नहीं है, परन्तु इसके विकास और उपयोग को कई कानूनी और नीतिगत ढांचे नियंत्रित करते हैं। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (संशोधित 2008) डेटा सुरक्षा को नियंत्रित करता है, जो सेंसर डेटा की संवेदनशीलता के कारण महत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स नीति 2019 में स्वदेशी सेंसर तकनीक, जिसमें न्यूरोमॉर्फिक सेंसर भी शामिल हैं, के विकास को स्पष्ट रूप से बढ़ावा दिया गया है।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी नीति 2020 में न्यूरोमॉर्फिक कंप्यूटिंग को प्राथमिक उभरती तकनीक के रूप में चिन्हित किया गया है, जो शोध एवं विकास और वाणिज्यीकरण को प्रोत्साहित करती है। हालांकि, भारत में न्यूरोमॉर्फिक सेंसर शोध के लिए कोई समर्पित राष्ट्रीय मिशन या केंद्रीकृत वित्तपोषण तंत्र नहीं है, जिससे मंत्रालयों और संस्थानों के बीच प्रयास बिखरे हुए हैं।

  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम डेटा गोपनीयता और साइबर सुरक्षा के लिए कानूनी आधार प्रदान करता है।
  • राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स नीति 2019 PLI योजनाओं के तहत घरेलू निर्माण को बढ़ावा देती है, जिसका लक्ष्य 2025 तक 520 बिलियन USD के इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार को हासिल करना है (MeitY, 2023)।
  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी नीति 2020 के तहत DST के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड को उभरती तकनीकों के लिए 1,500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिनमें न्यूरोमॉर्फिक सेंसर भी शामिल हैं (संघीय बजट 2023-24)।

आर्थिक पहलू और बाजार क्षमता

वैश्विक न्यूरोमॉर्फिक कंप्यूटिंग बाजार 2027 तक 1.5 बिलियन USD तक पहुंचने का अनुमान है, जो 2022 से 2027 के बीच 25% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ेगा (MarketsandMarkets, 2023)। भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षेत्र वित्तीय वर्ष 2023 में 15% बढ़कर 75 बिलियन USD तक पहुंच गया है (MeitY वार्षिक रिपोर्ट 2023), जो PLI योजना जैसे सरकारी प्रोत्साहनों से प्रेरित है।

न्यूरोमॉर्फिक सेंसर AI की ऊर्जा खपत को 90% तक कम कर सकते हैं, जिससे लागत-कुशल एज डिवाइस बनते हैं, जो IoT, स्वायत्त प्रणालियों और रक्षा अनुप्रयोगों के लिए बेहद जरूरी हैं। यह भारत की तकनीकी स्वावलंबन और डिजिटल आधारभूत संरचना के विस्तार के प्रयासों के अनुकूल है।

  • वैश्विक 25% CAGR तेजी से बाजार अपनाने और निवेश क्षमता दर्शाता है।
  • PLI योजना के तहत भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की वृद्धि उन्नत सेंसर निर्माण की तैयारी को दर्शाती है।
  • ऊर्जा दक्षता से परिचालन लागत कम होती है और सीमित ऊर्जा वाले वातावरण में उपयोग संभव होता है।

भारत के प्रमुख संस्थान जो न्यूरोमॉर्फिक सेंसर R&D में सक्रिय हैं

भारत में कई संस्थान न्यूरोमॉर्फिक सेंसर विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं:

  • MeitY: इलेक्ट्रॉनिक्स और AI हार्डवेयर से जुड़ी नीतियां बनाता है और प्रोजेक्ट्स को फंड करता है।
  • DST: शोध एवं विकास के लिए अनुदान और नवाचार समर्थन प्रदान करता है, जिसमें उभरती तकनीकों के लिए 1,500 करोड़ रुपये शामिल हैं।
  • IITs: न्यूरोमॉर्फिक इंजीनियरिंग और सेंसर डिजाइन में अकादमिक शोध का नेतृत्व करते हैं।
  • CSIR: अनुप्रयुक्त शोध और औद्योगिक सेंसर अनुप्रयोगों पर ध्यान केंद्रित करता है।
  • DRDO: रक्षा के लिए न्यूरोमॉर्फिक सेंसर विकसित करता है, जिनके प्रोटोटाइप में बेहतर सटीकता देखी गई है।
  • ISRO: उपग्रह और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के लिए न्यूरोमॉर्फिक सेंसर की खोज करता है।

अंतरराष्ट्रीय तुलना: भारत बनाम संयुक्त राज्य अमेरिका

पहलू संयुक्त राज्य अमेरिका भारत
मुख्य कार्यक्रम DARPA SyNAPSE (2011 से 100 मिलियन USD से अधिक) कोई समर्पित राष्ट्रीय मिशन नहीं; बिखरे हुए प्रयास
प्रमुख उपलब्धियां IBM TrueNorth चिप जिसमें 1 मिलियन न्यूरॉन्स, अल्ट्रा-लो पावर AI DRDO प्रोटोटाइप में 30% अधिक सटीकता; IIT शोध जारी
वित्तपोषण तंत्र केंद्रीकृत, बड़े पैमाने पर संघीय वित्तपोषण कई मंत्रालयों के बीच सीमित समन्वित वित्तपोषण
वाणिज्यीकरण वाणिज्यिक और रक्षा क्षेत्रों में उन्नत न्यूरोमॉर्फिक चिप्स प्रारंभिक चरण का वाणिज्यीकरण; शोध और विकास पर ध्यान

भारत के न्यूरोमॉर्फिक सेंसर पारिस्थितिकी तंत्र में रणनीतिक खामियां

भारत की वर्तमान चुनौतियों में न्यूरोमॉर्फिक सेंसर R&D के लिए एकीकृत राष्ट्रीय मिशन का अभाव और समर्पित केंद्रीकृत वित्तपोषण की कमी शामिल है। इससे अकादमिक और औद्योगिक प्रयास बिखर जाते हैं, वाणिज्यीकरण धीमा होता है और वैश्विक प्रतिस्पर्धा सीमित रहती है। इसके अलावा, कुशल मानव संसाधन, उद्योग-शिक्षा सहयोग और बड़े पैमाने पर प्रोटोटाइप और परीक्षण के लिए आधारभूत संरचना में भी कमी है।

  • DARPA के SyNAPSE जैसे समर्पित राष्ट्रीय मिशन का अभाव।
  • MeitY, DST, DRDO के बीच बिखरे हुए वित्तपोषण, बिना तालमेल के।
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी और वेंचर कैपिटल निवेश सीमित।
  • न्यूरोमॉर्फिक इंजीनियरिंग में कौशल विकास की आवश्यकता।

आगे का रास्ता: भारत के लिए न्यूरोमॉर्फिक सेंसर की संभावनाओं का दोहन

  • MeitY, DST, DRDO और उद्योग हितधारकों को जोड़ते हुए न्यूरोमॉर्फिक सेंसर पर केंद्रित एक केंद्रीकृत राष्ट्रीय मिशन स्थापित करें।
  • PLI योजनाओं के तहत लक्षित R&D और पायलट निर्माण के लिए बजट आवंटन बढ़ाएं।
  • वाणिज्यीकरण और कौशल विकास को तेज करने के लिए उद्योग-अकादमी साझेदारी को प्रोत्साहित करें।
  • रक्षा, अंतरिक्ष और IoT जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में स्वदेशी क्षमताएं बनाने के लिए न्यूरोमॉर्फिक सेंसर का उपयोग करें।
  • सेंसर डेटा की गोपनीयता और साइबर सुरक्षा के लिए IT Act के तहत डेटा सुरक्षा ढांचे को मजबूत करें।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
नवीन न्यूरोमॉर्फिक सेंसरों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. न्यूरोमॉर्फिक सेंसर मुख्य रूप से पारंपरिक कैमरों की तरह फ्रेम-आधारित डेटा प्रोसेसिंग पर निर्भर करते हैं।
  2. ये 1 मिलीसेकंड से कम विलंबता के साथ रियल-टाइम प्रोसेसिंग सक्षम करते हैं।
  3. न्यूरोमॉर्फिक सेंसर पारंपरिक सेंसरों की तुलना में AI उपकरणों की ऊर्जा खपत को 90% तक कम कर सकते हैं।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि न्यूरोमॉर्फिक सेंसर फ्रेम-आधारित प्रोसेसिंग की बजाय इवेंट-ड्रिवन स्पाइकिंग न्यूरल नेटवर्क का उपयोग करते हैं। कथन 2 और 3 IEEE Sensors Journal (2023) और Nature Electronics (2022) के अनुसार सही हैं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत के न्यूरोमॉर्फिक सेंसर पारिस्थितिकी तंत्र के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. भारत के पास न्यूरोमॉर्फिक सेंसर R&D के लिए समर्पित राष्ट्रीय मिशन है।
  2. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 सेंसर डेटा से संबंधित डेटा सुरक्षा पहलुओं को नियंत्रित करता है।
  3. DRDO ने बेहतर सटीकता वाले न्यूरोमॉर्फिक सेंसर प्रोटोटाइप विकसित किए हैं।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि भारत के पास न्यूरोमॉर्फिक सेंसर के लिए कोई समर्पित राष्ट्रीय मिशन नहीं है। कथन 2 और 3 सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और DRDO वार्षिक रिपोर्ट 2023 के अनुसार सही हैं।

मुख्य प्रश्न

नवीन न्यूरोमॉर्फिक सेंसर भारत की AI और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षमताओं को बढ़ाने में कितने महत्वपूर्ण हैं, इस पर चर्चा करें। भारत के न्यूरोमॉर्फिक सेंसर पारिस्थितिकी तंत्र में वर्तमान चुनौतियों का विश्लेषण करें और स्वदेशी विकास एवं वाणिज्यीकरण को बढ़ावा देने के लिए नीति सुझाव दें। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 3 – विज्ञान और प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और उभरती तकनीकें
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड के बढ़ते IT और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण हब स्थानीय उद्योगों और रक्षा परियोजनाओं के लिए न्यूरोमॉर्फिक सेंसर तकनीक से लाभान्वित हो सकते हैं।
  • मुख्य बिंदु: स्मार्ट सिटी पहलों और रक्षा निर्माण क्लस्टरों में उभरती सेंसर तकनीक को शामिल करने के लिए उत्तर तैयार करें।
न्यूरोमॉर्फिक सेंसर पारंपरिक सेंसरों से कैसे अलग हैं?

न्यूरोमॉर्फिक सेंसर स्पाइकिंग न्यूरल नेटवर्क का उपयोग करते हैं जो जैविक न्यूरॉन्स की तरह इवेंट-ड्रिवन तरीके से संवेदी डेटा को प्रोसेस करते हैं। ये पारंपरिक फ्रेम-आधारित सेंसरों की तुलना में कम विलंबता और बहुत कम ऊर्जा खपत प्रदान करते हैं।

भारत में न्यूरोमॉर्फिक सेंसर विकास को कौन-कौन सी नीतियां समर्थन देती हैं?

राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स नीति 2019 स्वदेशी सेंसर तकनीक को बढ़ावा देती है, जबकि विज्ञान और प्रौद्योगिकी नीति 2020 उभरती तकनीकों में न्यूरोमॉर्फिक कंप्यूटिंग को प्राथमिकता देती है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 डेटा सुरक्षा पहलुओं को नियंत्रित करता है।

भारत में न्यूरोमॉर्फिक सेंसर R&D में मुख्य संस्थान कौन से हैं?

MeitY और DST नीति और वित्तपोषण समर्थन देते हैं; IITs अकादमिक शोध में नेतृत्व करते हैं; CSIR अनुप्रयुक्त सेंसर शोध करता है; DRDO रक्षा अनुप्रयोगों के लिए विकास करता है; ISRO अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के लिए खोज करता है।

भारत का न्यूरोमॉर्फिक सेंसर निवेश वैश्विक स्तर पर कैसा है?

भारत का निवेश अमेरिका की तुलना में बिखरा हुआ और कम केंद्रीकृत है, जहां DARPA के SyNAPSE कार्यक्रम के तहत 100 मिलियन USD से अधिक निवेश हुआ है। भारत में समर्पित राष्ट्रीय मिशन का अभाव वाणिज्यीकरण को धीमा कर रहा है।

न्यूरोमॉर्फिक सेंसर आर्थिक रूप से क्या लाभ देते हैं?

ये AI उपकरणों की ऊर्जा खपत को 90% तक कम करते हैं, जिससे लागत-कुशल एज कंप्यूटिंग संभव होती है और भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण विकास जैसे PLI योजनाओं को समर्थन मिलता है।

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