2024 की शुरुआत में निकोबार द्वीप समूह की ग्राम सभाओं ने 500 करोड़ रुपये की जनजातीय विकास योजना के तहत एक बड़ा इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट मंजूर किया, जबकि अनिवार्य 50% कोरम यानी उपस्थित सदस्यों की न्यूनतम संख्या पूरी नहीं हुई। रिपोर्टों के अनुसार, पात्र जनजातीय सदस्यों में से केवल 30% से भी कम लोग इन बैठकों में शामिल हुए, जो पंचायती राज (अनुसूचित क्षेत्र का विस्तार) अधिनियम, 1996 (PESA) की धारा 4 के तहत निर्धारित कोरम नियम का उल्लंघन है। इस प्रक्रिया की अनदेखी से परियोजना की लोकतांत्रिक वैधता और कानूनी मान्यता पर सवाल उठते हैं, जो क्षेत्र में जनजातीय स्वशासन, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए गंभीर खतरा है।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 2: शासन — जनजातीय कल्याण, पंचायती राज संस्थान, अनुसूचित क्षेत्रों के लिए संवैधानिक प्रावधान
- GS पेपर 3: अर्थव्यवस्था — जनजातीय क्षेत्रों में अवसंरचना विकास, जनजातीय परियोजनाओं का आर्थिक प्रभाव
- निबंध: जनजातीय अधिकार और विकास, अनुसूचित क्षेत्रों में शासन की चुनौतियां
ग्राम सभा अनुमोदन के लिए संवैधानिक और कानूनी ढांचा
संविधान के अनुच्छेद 244(2) और पंचम अनुसूची अनुसूचित क्षेत्रों और जनजातीय समुदायों के लिए विशेष प्रशासनिक प्रावधान देते हैं, जो ग्राम सभाओं को स्वशासी संस्थान के रूप में सशक्त बनाते हैं। PESA अधिनियम, 1996 की धारा 4 के तहत ग्राम सभाओं को सभी विकास परियोजनाओं को मंजूरी देना अनिवार्य है, जिनका अनुसूचित क्षेत्रों पर प्रभाव पड़ता है, और इसके लिए न्यूनतम 50% कोरम की आवश्यकता होती है। अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 (FRA) भी ग्राम सभाओं को वन शासन और भूमि अधिकारों पर अधिकार प्रदान करता है (धारा 3 और 5)। सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले जैसे समथा बनाम आंध्र प्रदेश राज्य (1997) ने स्पष्ट किया कि जनजातीय भूमि का हस्तांतरण ग्राम सभा की सहमति के बिना नहीं हो सकता, जो इन संस्थाओं की कानूनी पवित्रता को मजबूत करता है। जनजातीय मामलों के मंत्रालय (MoTA) की गाइडलाइंस में भी ग्राम सभा बैठकों में कम से कम 50% उपस्थिति को अनिवार्य किया गया है, जिसे निकोबार में उल्लंघन किया गया है।
निकोबार में अवसंरचना विकास के आर्थिक पहलू
निकोबार का यह इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट जनजातीय मामलों के मंत्रालय के 2023-24 के 500 करोड़ रुपये के विकास बजट के अंतर्गत आता है, जिसका उद्देश्य कनेक्टिविटी और सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार करना है। जनजातीय क्षेत्र भारत की GDP में लगभग 8% योगदान देते हैं, जबकि कुल अवसंरचना निवेश में इनका हिस्सा 4% से भी कम है, जो वित्तीय असंतुलन को दर्शाता है (Economic Survey 2023-24)। बेहतर अवसंरचना से जनजातीय आय में 15-20% तक वृद्धि संभव है, जैसा कि 2022 की NITI आयोग की रिपोर्ट बताती है, क्योंकि इससे बाजार तक पहुंच और रोजगार के अवसर बढ़ते हैं। हालांकि, बिना उचित कोरम के मंजूर परियोजनाएं सामाजिक अशांति, मुकदमों और देरी का खतरा बढ़ाती हैं, जो विश्व बैंक के अनुसार परियोजना लागत में 12% तक वृद्धि और 25% तक देरी का कारण बन सकती हैं।
संस्थागत भूमिकाएं और जिम्मेदारियां
- ग्राम सभा: जनजातीय भूमि और संसाधनों को प्रभावित करने वाली विकास परियोजनाओं को मंजूरी देने वाली ग्राम स्तर की लोकतांत्रिक संस्था।
- जनजातीय मामलों का मंत्रालय (MoTA): नीति निर्माण, फंड आवंटन और जनजातीय कल्याण तथा अवसंरचना पहलों की निगरानी।
- अंडमान और निकोबार प्रशासन: परियोजना कार्यान्वयन और समन्वय की स्थानीय शासन संस्था।
- राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST): जनजातीय अधिकारों की सुरक्षा की निगरानी और भूमि तथा विकास से जुड़े शिकायतों का निवारण।
- पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC): जनजातीय भूमि से जुड़े पर्यावरणीय मंजूरी और वन तथा पर्यावरण कानूनों का पालन सुनिश्चित करना।
निकोबार ग्राम सभाओं में कोरम और भागीदारी का डेटा
| परिमाण | कानूनी आवश्यकता | निकोबार ग्राम सभा वास्तविकता | स्रोत |
|---|---|---|---|
| ग्राम सभा निर्णयों के लिए न्यूनतम कोरम | 50% उपस्थिति (धारा 4, PESA) | 30% से कम उपस्थिति | The Hindu, 2024 |
| निकोबार द्वीपों की जनजातीय आबादी | — | लगभग 36,000 (जनगणना 2011) | जनगणना 2011 |
| जनजातीय क्षेत्रों के लिए अवसंरचना बजट आवंटन (2023-24) | — | 500 करोड़ रुपये | MoTA वार्षिक रिपोर्ट 2023 |
| जनजातीय क्षेत्रों में अवसंरचना निवेश का हिस्सा | — | कुल निवेश का 3.9% बनाम 8% GDP योगदान | Economic Survey 2023-24 |
| ग्राम सभा सहमति के बिना परियोजना में देरी का जोखिम | — | 25% अधिक देरी का खतरा | World Bank रिपोर्ट, 2021 |
तुलनात्मक अध्ययन: भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया - स्वदेशी परियोजना अनुमोदन
| पहलू | भारत (निकोबार ग्राम सभाएं) | ऑस्ट्रेलिया (स्वदेशी भूमि परिषद) |
|---|---|---|
| कानूनी ढांचा | PESA अधिनियम, 1996; FRA 2006; अनुच्छेद 244(2) | Aboriginal Land Rights Act, 1976 |
| कोरम आवश्यकता | न्यूनतम 50% उपस्थिति (अक्सर लागू नहीं) | न्यूनतम 50% उपस्थिति कड़ाई से लागू |
| निर्णय की वैधता | कोरम या सहमति की स्वतंत्र जांच नहीं | स्वतंत्र निगरानी और ऑडिट तंत्र |
| परियोजना पूर्णता पर प्रभाव | प्रक्रियात्मक चूक के कारण अधिक देरी और विवाद | 30% अधिक परियोजना पूर्णता, कम विवाद |
| सामाजिक-आर्थिक परिणाम | शासन की कमियों के कारण सीमित | समुदाय की सहमति से बेहतर परिणाम |
ग्राम सभा अधिकारों को कमजोर करने वाले संरचनात्मक खामियां
निकोबार की स्थिति से पता चलता है कि ग्राम सभा बैठकों में कोरम और वास्तविक सहमति की जांच के लिए प्रभावी और लागू होने वाले तंत्र की कमी एक गंभीर शासन कमजोरी है। ऑस्ट्रेलिया के स्वदेशी भूमि परिषदों के विपरीत, भारत में ऐसी कोई स्वतंत्र निगरानी या ऑडिट संस्था नहीं है जो परियोजना मंजूरी से पहले ग्राम सभा के निर्णयों की वैधता की पुष्टि करे। यह कमी प्रक्रियागत उल्लंघन को बढ़ावा देती है, जनजातीय स्वायत्तता को कमजोर करती है और कानूनी विवादों का जोखिम बढ़ाती है। पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करती है और जनजातीय क्षेत्रों में पर्यावरणीय नुकसान तथा सामाजिक संघर्ष को बढ़ा सकती है।
महत्व और आगे का रास्ता
- PESA के तहत 50% कोरम नियम का सख्ती से पालन आवश्यक है ताकि ग्राम सभा निर्णयों की कानूनी पवित्रता बनी रहे।
- राज्य या केंद्र स्तर पर स्वतंत्र निगरानी तंत्र स्थापित करें जो ग्राम सभा बैठकों का ऑडिट कर सहमति की पुष्टि करे।
- जनजातीय समुदायों की क्षमता बढ़ाएं ताकि वे PESA और FRA के तहत अपने अधिकारों के प्रति जागरूक और सक्रिय भागीदार बन सकें।
- MoEFCC की पर्यावरण मंजूरियों को ग्राम सभा अनुमोदनों से जोड़कर पर्यावरणीय और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करें।
- ग्राम सभा कार्यवाहियों और परियोजना अनुमोदनों के डेटा में पारदर्शिता बढ़ाएं ताकि प्रक्रियागत देरी और मुकदमों को कम किया जा सके।
- अधिनियम ग्राम सभा बैठकों में निर्णयों की मान्यता के लिए न्यूनतम 50% कोरम अनिवार्य करता है।
- राज्य सरकार असाधारण परिस्थितियों में कोरम आवश्यकता को माफ कर सकती है।
- कोरम नियम केवल FRA के तहत वन संबंधित निर्णयों पर लागू होता है, इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर नहीं।
- FRA ग्राम सभाओं को सभी वन भूमि विचलन परियोजनाओं को मंजूरी देने का विशेष अधिकार देता है।
- FRA व्यक्तिगत और सामुदायिक दोनों वन अधिकारों को मान्यता देता है।
- FRA के प्रावधान पंचायती राज (अनुसूचित क्षेत्र का विस्तार) अधिनियम, 1996 से ऊपर हैं।
मुख्य प्रश्न
निकोबार में ग्राम सभाओं द्वारा अनिवार्य 50% कोरम पूरा किए बिना इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को मंजूरी देने के निहितार्थों पर चर्चा करें। संवैधानिक प्रावधानों, आर्थिक परिणामों और संस्थागत चुनौतियों का विश्लेषण करें। अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा शासन को मजबूत करने के उपाय सुझाएं।
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 — अनुसूचित क्षेत्रों में जनजातीय कल्याण और शासन
- झारखंड कोण: झारखंड में भी महत्वपूर्ण अनुसूचित क्षेत्र हैं जहां PESA और FRA लागू हैं; कोरम और ग्राम सभा भागीदारी की चुनौतियां निकोबार जैसी ही हैं।
- मुख्य बिंदु: झारखंड के जनजातीय शासन की चुनौतियों की तुलना निकोबार से कर उत्तर तैयार करें, जिसमें कोरम तंत्र और समुदाय सशक्तिकरण की आवश्यकता पर जोर हो।
PESA के तहत ग्राम सभा बैठकों के लिए कोरम की क्या आवश्यकता है?
पंचायती राज (अनुसूचित क्षेत्र का विस्तार) अधिनियम, 1996 की धारा 4 के अनुसार, ग्राम सभा बैठकों में निर्णयों को मान्यता देने के लिए पात्र सदस्यों में से कम से कम 50% की उपस्थिति आवश्यक है, खासकर विकास परियोजनाओं और शासन से जुड़े मामलों में।
क्या FRA वन शासन के मामलों में PESA से ऊपर है?
नहीं। अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 और PESA दोनों साथ-साथ लागू होते हैं। FRA वन अधिकारों और ग्राम सभाओं की भूमिका को मान्यता देता है, लेकिन PESA के शासन और परियोजना अनुमोदन के प्रावधानों को अधिलेखित नहीं करता।
कोरम पूरा किए बिना परियोजनाओं को मंजूरी देने के क्या परिणाम होते हैं?
कोरम पूरी किए बिना परियोजनाओं की मंजूरी कानूनी वैधता को कमजोर करती है, सामाजिक अशांति का खतरा बढ़ाती है, परियोजना कार्यान्वयन में देरी करती है और लागत में 12% तक वृद्धि कर सकती है। इससे जनजातीय स्वशासन कमजोर होता है और समुदाय की सहमति के बिना पर्यावरणीय नुकसान की संभावना बढ़ती है।
कौन सा सुप्रीम कोर्ट का फैसला जनजातीय भूमि के हस्तांतरण में ग्राम सभा की सहमति की आवश्यकता को मान्यता देता है?
सुप्रीम कोर्ट ने समथा बनाम आंध्र प्रदेश राज्य (1997) मामले में निर्णय दिया कि जनजातीय भूमि के हस्तांतरण के लिए ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य है, जिससे संवैधानिक और वैधानिक प्रावधानों के तहत जनजातीय भूमि अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
ऑस्ट्रेलिया में स्वदेशी परियोजना अनुमोदन के लिए कोरम लागू करने का तरीका भारत से कैसे अलग है?
ऑस्ट्रेलिया का Aboriginal Land Rights Act, 1976 कड़ाई से 50% कोरम लागू करता है और स्वदेशी भूमि परिषदों के निर्णयों के लिए स्वतंत्र निगरानी तंत्र रखता है, जिससे परियोजनाओं की पूर्णता दर बढ़ती है और सामाजिक-आर्थिक परिणाम बेहतर होते हैं। भारत में ग्राम सभा निर्णयों के लिए ऐसी स्वतंत्र जांच और कड़ाई नहीं है।
आधिकारिक स्रोत और आगे पढ़ाई
लर्नप्रो संपादकीय मानकों के बारे में
लर्नप्रो की संपादकीय सामग्री सिविल सेवा तैयारी में अनुभवी विषय विशेषज्ञों द्वारा शोधित और समीक्षित है। हमारे लेख सरकारी स्रोतों, NCERT पाठ्यपुस्तकों, मानक संदर्भ सामग्री और प्रतिष्ठित प्रकाशनों जैसे द हिंदू, इंडियन एक्सप्रेस और PIB से लिए गए हैं।
सामग्री को नवीनतम पाठ्यक्रम परिवर्तनों, परीक्षा पैटर्न और वर्तमान घटनाक्रमों के अनुसार नियमित रूप से अपडेट किया जाता है। सुधार या प्रतिक्रिया के लिए admin@learnpro.in पर संपर्क करें।
