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राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM) का परिचय

राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM) अप्रैल 2016 में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (MoA&FW) द्वारा शुरू किया गया एक देशव्यापी इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग पोर्टल है, जिसका उद्देश्य विभिन्न कृषि उपज मंडी समिति (APMC) मंडियों को एकीकृत राष्ट्रीय बाजार में बदलना है। मार्च 2024 तक यह 21 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों की 1,200 से अधिक मंडियों को जोड़ चुका है, जिससे मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता और सीधे किसान-व्यापारी लेनदेन की सुविधा मिलती है। इस मंच का लक्ष्य मध्यस्थता कम करना, किसानों की आय बढ़ाना और पूरे देश में कृषि वस्तुओं के लिए एक सहज बाजार स्थापित करना है।

UPSC से जुड़ाव

  • GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था – कृषि विपणन सुधार, कृषि में डिजिटल पहल, मूल्य खोज के तरीके
  • GS पेपर 2: शासन – संस्थानों की भूमिका, कृषि नियमन में केंद्र बनाम राज्य
  • निबंध: डिजिटल प्लेटफॉर्म का ग्रामीण आजीविका और कृषि सुधारों पर प्रभाव

e-NAM का कानूनी और संवैधानिक ढांचा

कृषि विषय भारतीय संविधान के धारा 246(3) के तहत राज्य का विषय है, जिसके चलते कृषि विपणन पर राज्य सरकारों को कानून बनाने का अधिकार है। e-NAM इसी संदर्भ में संबंधित राज्यों के APMC अधिनियमों में संशोधन के माध्यम से संचालित होता है, जो मॉडल APMC अधिनियम 2003 के तहत इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग और बाजार सुधारों के प्रावधानों से प्रेरित है।

आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (धारा 3) के तहत कुछ वस्तुओं के स्टॉक नियंत्रण और व्यापार पर नियंत्रण से बाजार नियम प्रभावित होते हैं, जो e-NAM की कार्यप्रणाली में भी असर डालते हैं। किसान उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (प्रोत्साहन और सुविधा) अधिनियम, 2020 e-NAM के पूरक के रूप में कार्य करता है, जो APMC मंडियों के बाहर व्यापार को कानूनी मान्यता देता है और किसानों के लिए बाजार पहुंच को बढ़ाता है।

सुप्रीम कोर्ट के 2021 के फैसले सहित विभिन्न न्यायिक निर्णयों ने इन सुधारों को वैधता दी है, जिससे e-NAM जैसे वैकल्पिक विपणन चैनलों को बढ़ावा मिला है।

e-NAM का आर्थिक प्रभाव और विस्तार

मार्च 2024 तक e-NAM पर 2.5 करोड़ से अधिक किसान और 1.5 लाख व्यापारी पंजीकृत हैं, और लगभग ₹1.5 लाख करोड़ के लेनदेन हो चुके हैं (PIB 2024)। नीति आयोग 2023 के अनुसार, यह मंच किसानों को स्थानीय मंडी की तुलना में 5-7% अधिक कीमत दिलाने में मदद करता है, जो बढ़ती प्रतिस्पर्धा और पारदर्शी बोली प्रक्रिया का परिणाम है।

मध्यस्थता लागत में 15% तक की कमी (आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24) से किसानों की आय और बाजार की दक्षता में सुधार हुआ है। सरकार ने वित्त वर्ष 2023-24 के बजट में e-NAM के विस्तार और तकनीकी उन्नयन के लिए ₹200 करोड़ आवंटित किए हैं, जिससे 22,000 APMC मंडियों को जोड़ने और 15 करोड़ से अधिक किसानों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है।

  • 1,200+ मंडियां जुड़ीं (PIB 2024)
  • 2.5 करोड़ किसान पंजीकृत (MoA&FW वार्षिक रिपोर्ट 2023)
  • ₹1.5 लाख करोड़ के लेनदेन (PIB 2024)
  • 5-7% अधिक मूल्य प्राप्ति (नीति आयोग 2023)
  • 15% मध्यस्थता लागत में कमी (आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24)
  • ₹200 करोड़ विस्तार हेतु बजट (संघीय बजट 2023-24)
  • 21 राज्य और 3 केंद्रशासित प्रदेश सहभागी (MoA&FW 2024)

e-NAM की संस्थागत संरचना

स्मॉल फार्मर्स एग्रीबिजनेस कंसोर्टियम (SFAC) e-NAM के क्रियान्वयन और राज्यों के साथ समन्वय के लिए प्रमुख संस्था है। MoA&FW नीति निर्धारण करता है और मंच की रणनीतिक दिशा देखता है।

राज्य स्तर पर APMC मंडियों के संचालन और e-NAM में उनका समावेशन सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार हैं, वे संबंधित कानूनों में संशोधन और बुनियादी ढांचे के उन्नयन के लिए कार्य करते हैं। राज्य सरकारें सुधारों को लागू करने और डिजिटल अपनाने को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (NCDEX) मूल्य खोज के डेटा उपलब्ध कराता है, जिससे e-NAM में पारदर्शिता और बाजार की समझ बढ़ती है।

तुलनात्मक अध्ययन: भारत का e-NAM और अमेरिका के इलेक्ट्रॉनिक कृषि बाजार

विशेषता भारत का e-NAM अमेरिका के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म (जैसे CBOT)
बाजार एकीकरण 21 राज्यों में 1,200+ मंडियों का एकीकरण; मुख्यतः स्पॉट मार्केट पूरे देश में एकीकृत, फ्यूचर्स और स्पॉट मार्केट दोनों
ट्रेडिंग प्रणाली इलेक्ट्रॉनिक स्पॉट ट्रेडिंग, बोली आधारित; सीमित फ्यूचर्स समाकलन व्यापक फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट, ऑप्शन और हेजिंग के साधन
मूल्य खोज पारदर्शी बोली से बेहतर मूल्य निर्धारण; किसानों को 5-7% अधिक लाभ फ्यूचर्स मार्केट के जरिए कुशल मूल्य खोज; जोखिम प्रबंधन
जोखिम प्रबंधन कम जोखिम प्रबंधन उपकरण; किसानों को मूल्य अस्थिरता का सामना विस्तृत हेजिंग विकल्प, मूल्य जोखिम कम करते हैं
नियामक माहौल राज्य स्तर के APMC कानून, साथ ही नई कृषि कानून मंडी के बाहर व्यापार को प्रोत्साहित करते हैं संघीय स्तर पर एकीकृत वस्तु बाजार कानून
किसानों पर प्रभाव मूल्य पारदर्शिता से बेहतर आय; जोखिम प्रबंधन सीमित फ्यूचर्स मार्केट के माध्यम से स्थिर आय सुनिश्चित

e-NAM के सामने संरचनात्मक और परिचालन चुनौतियाँ

e-NAM की पूरी क्षमता का उपयोग अभी भी राज्यों में डिजिटल और बुनियादी ढांचे की असमानता के कारण बाधित है। कई मंडियों में विश्वसनीय इंटरनेट कनेक्टिविटी, आधुनिक परीक्षण प्रयोगशालाएँ और गोदाम सुविधाओं का अभाव है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग और गुणवत्ता जांच में दिक्कत होती है।

राज्यों के APMC नियम अभी भी प्रचलित हैं, और कुछ राज्य कानूनों में संशोधन या मंडियों के पूर्ण समाकलन में धीमे हैं, जिससे बाजार का खंडित स्वरूप बना रहता है। इसके अतिरिक्त, छोटे और सीमांत किसानों में जागरूकता और डिजिटल साक्षरता की कमी प्लेटफॉर्म के उपयोग और प्रतिस्पर्धी बोली को सीमित करती है।

  • ग्रामीण मंडियों में अपर्याप्त इंटरनेट और डिजिटल बुनियादी ढांचा
  • गुणवत्ता प्रमाणन के लिए सीमित परीक्षण और गोदाम सुविधाएँ
  • राज्य APMC अधिनियमों में e-NAM के लिए समान संशोधन का अभाव
  • किसानों में कम जागरूकता और डिजिटल साक्षरता
  • पारंपरिक दलालों और स्थानीय व्यापारियों का विरोध

महत्त्व और आगे का रास्ता

  • सभी मंडियों को e-NAM में जोड़ने के लिए राज्य APMC अधिनियमों में समान संशोधन की प्रक्रिया तेज करें।
  • ग्रामीण इलाकों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी, परीक्षण प्रयोगशालाओं सहित डिजिटल बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाएं ताकि इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग सहज हो सके।
  • अंतरराष्ट्रीय मॉडलों जैसे CBOT से सीख लेकर e-NAM में फ्यूचर्स ट्रेडिंग और जोखिम प्रबंधन के उपकरण शामिल करें।
  • किसानों तक पहुंच बढ़ाएं और क्षमता निर्माण करें ताकि डिजिटल अपनाने और बाजार के लाभों की समझ बढ़े।
  • SFAC, MoA&FW और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय कर तेजी से क्रियान्वयन और शिकायत निवारण सुनिश्चित करें।

प्रश्न अभ्यास

📝 प्रारंभिक अभ्यास
राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. e-NAM भारतीय संविधान की धारा 246(1) के तहत केवल केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में संचालित होता है।
  2. किसान उत्पाद व्यापार और वाणिज्य अधिनियम, 2020, APMC मंडियों के बाहर व्यापार की अनुमति देकर e-NAM का पूरक है।
  3. e-NAM वर्तमान में जोखिम प्रबंधन के लिए फ्यूचर्स ट्रेडिंग और हेजिंग तंत्र को समेकित करता है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2
  • cकेवल 2 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि कृषि राज्य सूची के तहत है (धारा 246(3)) और केंद्र का विशेष अधिकार क्षेत्र नहीं है। कथन 2 सही है, क्योंकि 2020 का अधिनियम APMC मंडियों के बाहर व्यापार को वैध बनाता है और e-NAM का समर्थन करता है। कथन 3 गलत है क्योंकि e-NAM अभी केवल स्पॉट ट्रेडिंग पर केंद्रित है और फ्यूचर्स या हेजिंग को शामिल नहीं करता।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
e-NAM के आर्थिक प्रभाव के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. e-NAM ने किसानों को स्थानीय मंडी की तुलना में 5-7% अधिक मूल्य प्राप्ति दिलाई है।
  2. कृषि विपणन में मध्यस्थता लागत e-NAM के कारण बढ़ गई है।
  3. मार्च 2024 तक इस प्लेटफॉर्म ने भारत की 22,000 से अधिक मंडियों को सफलतापूर्वक जोड़ा है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1
  • bऔर 3
  • cकेवल 2
  • d1 और 3
उत्तर: (a)
कथन 1 नीति आयोग 2023 के अनुसार सही है। कथन 2 गलत है क्योंकि e-NAM से मध्यस्थता लागत में लगभग 15% कमी आई है। कथन 3 गलत है क्योंकि मार्च 2024 तक लगभग 1,200 मंडियां जुड़ी हैं, 22,000 मंडियों का लक्ष्य भविष्य का है।

मुख्य प्रश्न

भारत में कृषि विपणन सुधारों में राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM) की भूमिका का आलोचनात्मक विश्लेषण करें। संस्थागत चुनौतियों पर चर्चा करें और इसकी प्रभावशीलता बढ़ाने के उपाय सुझाएं। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC से जुड़ाव

  • JPSC पेपर: पेपर II – कृषि और ग्रामीण विकास
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड ने कई मंडियों को e-NAM से जोड़ा है, लेकिन ग्रामीण कनेक्टिविटी और गोदाम सुविधाओं की कमी से आदिवासी और छोटे किसानों को पूरा लाभ नहीं मिल पाया है।
  • मुख्य बिंदु: डिजिटल बुनियादी ढांचे में राज्य-विशेष चुनौतियों को उजागर करें और आदिवासी किसानों के लिए लक्षित क्षमता निर्माण की सलाह दें ताकि e-NAM का उपयोग बढ़े।
भारत में कृषि बाजारों के नियमन का संवैधानिक आधार क्या है?

कृषि और कृषि विपणन राज्य सूची के अंतर्गत आते हैं, जैसा कि भारतीय संविधान की धारा 246(3) में निर्धारित है, जो राज्यों को APMC मंडियों और कृषि व्यापार के लिए कानून बनाने का अधिकार देता है।

किसान उत्पाद व्यापार और वाणिज्य अधिनियम, 2020 का e-NAM से क्या संबंध है?

यह अधिनियम किसानों को APMC मंडियों के बाहर भी उपज बेचने की अनुमति देता है, जिससे e-NAM का बाजार विस्तार होता है और व्यापार के अवसर बढ़ते हैं।

e-NAM से किसानों को मुख्य आर्थिक लाभ क्या मिलते हैं?

e-NAM से किसानों को स्थानीय मंडियों की तुलना में 5-7% अधिक मूल्य प्राप्त होता है, मध्यस्थता लागत में 15% तक कमी आती है और पारदर्शी बोली प्रक्रिया के कारण आय में वृद्धि होती है।

e-NAM की प्रभावशीलता को सीमित करने वाली बुनियादी ढांचे की चुनौतियाँ क्या हैं?

कई मंडियों में इंटरनेट कनेक्टिविटी, परीक्षण प्रयोगशालाओं और गोदाम की कमी है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग और गुणवत्ता प्रमाणीकरण में बाधा आती है।

e-NAM और अमेरिका के कृषि वस्तु फ्यूचर्स बाजार में क्या अंतर है?

e-NAM मुख्यतः स्पॉट मार्केट ट्रेडिंग पर केंद्रित है और सीमित फ्यूचर्स समाकलन है, जबकि अमेरिका के प्लेटफॉर्म जैसे CBOT व्यापक फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट और हेजिंग उपकरण प्रदान करते हैं, जो बेहतर जोखिम प्रबंधन और मूल्य स्थिरता देते हैं।

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