मौद्रिक नीति समिति का अप्रैल 2024 का फैसला
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अप्रैल 2024 में बैठक कर रेपो रेट को 6.5% पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया। यह फैसला मौद्रिक कड़ाई में एक रणनीतिक विराम का संकेत देता है, जो घरेलू और वैश्विक आर्थिक हालात के बदलते परिदृश्य का प्रतिबिंब है। RBI अधिनियम, 1934 की धारा 45ZB के तहत MPC का दायित्व होता है कि वह मूल्य स्थिरता और विकास दोनों को ध्यान में रखते हुए नीतिगत दर निर्धारित करे। अप्रैल 2024 की यह बैठक भू-राजनीतिक घटनाओं, खासकर संघर्ष क्षेत्रों में शांति संकेतों के बीच हुई, जिसने MPC की सतर्क नीति को प्रभावित किया।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था – मौद्रिक नीति, मुद्रास्फीति, वित्तीय संस्थान
- GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – भू-राजनीति का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
- निबंध: वैश्विक दुनिया में आर्थिक विकास और स्थिरता
MPC का कानूनी और संस्थागत ढांचा
MPC की स्थापना RBI अधिनियम, 1934 की धारा 45ZB के तहत की गई है, जिसमें छह सदस्यों की समिति होती है, जिसमें RBI के अधिकारी और सरकार के नामांकित सदस्य शामिल होते हैं। समिति का मुख्य कार्य रेपो रेट तय करना है ताकि मुद्रास्फीति को 4% ± 2% के लक्ष्य के भीतर रखा जा सके। इसके अलावा, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 292 के तहत केंद्र सरकार को भारत की ओर से उधार लेने का अधिकार प्राप्त है, जो राजकोषीय नीति को मौद्रिक नीति से जोड़ता है। MPC स्वतंत्र रूप से काम करता है, लेकिन नीति समन्वय के लिए वित्त मंत्रालय के साथ तालमेल बनाता है।
- MPC का गठन: 3 RBI अधिकारी, 3 सरकारी नामांकित सदस्य
- मंडेट: मूल्य स्थिरता के साथ विकास को प्रोत्साहन
- नीतिगत उपकरण: रेपो रेट (RBI द्वारा बैंकों को ऋण देने की दर)
- राजकोषीय नीति का प्रभाव: अनुच्छेद 292 के तहत सरकार के उधार निर्णय
आर्थिक परिप्रेक्ष्य: मुद्रास्फीति, विकास और बाहरी क्षेत्र
अप्रैल 2024 में भारत की उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मुद्रास्फीति 5.7% दर्ज की गई, जो RBI के लक्ष्य सीमा से थोड़ी अधिक है। मुद्रास्फीति की यह स्थिति आपूर्ति पक्ष की बाधाओं और वैश्विक वस्तु मूल्य अस्थिरता के कारण बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर 6.1% अनुमानित की है, जो मध्यम सुधार का संकेत है। हालांकि, मार्च 2024 में कोर सेक्टर की वृद्धि दर 3.4% पर धीमी हुई, जो औद्योगिक गतिविधि में सुस्ती को दर्शाती है। राजकोषीय घाटा GDP का 5.9% लक्ष्य रखा गया है, जो विकास समर्थन के लिए सरकारी खर्च जारी रहने को दर्शाता है। विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 580 बिलियन अमेरिकी डॉलर के स्तर पर मजबूत बने हुए हैं, जो बाहरी झटकों से बचाव करते हैं।
- CPI मुद्रास्फीति: 5.7% (अप्रैल 2024, MoSPI)
- GDP विकास अनुमान: 6.1% (IMF, अप्रैल 2024)
- रेपो रेट: 6.5% (RBI, अप्रैल 2024)
- राजकोषीय घाटा लक्ष्य: GDP का 5.9% (संघीय बजट 2024-25)
- विदेशी मुद्रा भंडार: USD 580 बिलियन (RBI, मई 2024)
- कोर सेक्टर की वृद्धि: 3.4% (मार्च 2024, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय)
भू-राजनीतिक शांति और मौद्रिक नीति पर प्रभाव
हाल ही में प्रमुख भू-राजनीतिक तनाव क्षेत्रों में शांति प्रयासों के कारण वैश्विक अनिश्चितता कम हुई है, जिससे वस्तु मूल्य दबाव और आपूर्ति श्रृंखलाओं में स्थिरता आई है। MPC ने इन संकेतों को ध्यान में रखते हुए नीति निर्धारण में सतर्कता बरती, जिससे आयातित मुद्रास्फीति और बाहरी झटकों का खतरा घटा। इस भू-राजनीतिक शांति ने MPC को मुद्रास्फीति नियंत्रण और विकास के बीच संतुलन बनाने के लिए प्रतीक्षा की नीति अपनाने की सुविधा दी। यह फैसला अन्य देशों, जैसे अमेरिका के कड़े दर वृद्धि रुख से अलग है, जो भारत की वैश्विक जोखिमों के प्रति संतुलित प्रतिक्रिया को दर्शाता है।
तुलनात्मक विश्लेषण: भारत बनाम अमेरिका की मौद्रिक नीति
| पहलू | भारत (अप्रैल 2024) | संयुक्त राज्य अमेरिका (मई 2024) |
|---|---|---|
| रेपो/नीतिगत दर | 6.5% (अपरिवर्तित) | 5.25% (25 बेसिस पॉइंट वृद्धि) |
| मुद्रास्फीति दर | 5.7% CPI (लक्ष्य से ऊपर) | 4.9% CPI (स्थिर) |
| मौद्रिक नीति रुख | विराम, सतर्क | सख्त, कड़ाई |
| भू-राजनीतिक प्रभाव | शांति से जोखिम कम | भू-राजनीतिक तनाव बढ़े |
| विकास का दृष्टिकोण | 6.1% GDP वृद्धि अनुमान | 2.0% GDP वृद्धि अनुमान |
MPC की नीति दृष्टिकोण का समालोचन
MPC की पारंपरिक मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारण प्रणाली में आपूर्ति श्रृंखला बाधाओं और भू-राजनीतिक अस्थिरता जैसे नए जोखिमों के बीच सीमाएं हैं। रेपो रेट में विराम बाहरी दबावों में कमी के कारण उचित है, परंतु समिति गैर-मुद्रास्फीति जोखिमों को कम आंक सकती है, जो विकास और वित्तीय स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं। शीर्ष मुद्रास्फीति के अलावा भविष्यसूचक संकेतकों को शामिल कर नीति की संवेदनशीलता बढ़ाई जा सकती है। राजकोषीय अधिकारियों के साथ बेहतर समन्वय मांग पक्ष के दबावों को नियंत्रित करने में मदद करेगा बिना मुद्रास्फीति को बिगाड़े।
महत्त्व और आगे का रास्ता
- रेपो रेट को बनाए रखना विकास की गति को पुनर्जीवित करता है और मुद्रास्फीति की उम्मीदों को स्थिर रखता है।
- भू-राजनीतिक शांति से आयातित मुद्रास्फीति के जोखिम कम हुए हैं, जिससे MPC की सतर्क नीति को तर्क मिलता है।
- आपूर्ति श्रृंखला और भू-राजनीतिक जोखिमों की बेहतर निगरानी से समय पर नीति समायोजन संभव होगा।
- मजबूत राजकोषीय-मौद्रिक समन्वय से मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता बेहतर होगी।
- भविष्य में MPC के फैसले वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच मुद्रास्फीति नियंत्रण और विकास के बीच संतुलन बनाए रखें।
- MPC की स्थापना RBI अधिनियम, 1934 की धारा 45ZB के तहत हुई है।
- MPC स्वतंत्र रूप से रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट दोनों निर्धारित करता है।
- MPC का प्राथमिक उद्देश्य मूल्य स्थिरता बनाए रखना और विकास का समर्थन करना है।
- भू-राजनीतिक शांति आयातित मुद्रास्फीति के जोखिम को कम करती है।
- भू-राजनीतिक तनावों का केंद्रीय बैंक निर्णयों पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं होता।
- स्थिर भू-राजनीतिक माहौल केंद्रीय बैंकों को प्रतीक्षा और देख-रेख नीति अपनाने की अनुमति देता है।
मुख्य प्रश्न
मौद्रिक नीति समिति के अप्रैल 2024 में रेपो रेट अपरिवर्तित रखने के फैसले को प्रभावित करने वाले कारकों की समीक्षा करें। भारत की मौद्रिक नीति रुख और आर्थिक दृष्टिकोण पर भू-राजनीतिक शांति के प्रभावों पर चर्चा करें। (250 शब्द)
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 (भारतीय अर्थव्यवस्था और विकास)
- झारखंड का पक्ष: झारखंड का औद्योगिक विकास कोर सेक्टर की स्थिति पर निर्भर है; MPC का विराम राज्य के खनन और विनिर्माण क्षेत्रों के लिए ऋण उपलब्धता को प्रभावित करता है।
- मुख्य बिंदु: MPC की नीतिगत परिणति को राज्य स्तरीय औद्योगिक विकास, ग्रामीण झारखंड में मुद्रास्फीति के प्रभाव और राजकोषीय-मौद्रिक समन्वय से जोड़ना।
मौद्रिक नीति समिति (MPC) का मुख्य दायित्व क्या है?
MPC का मुख्य दायित्व RBI अधिनियम, 1934 की धारा 45ZB के अनुसार मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, साथ ही विकास के उद्देश्य को ध्यान में रखना। यह मुद्रास्फीति लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए रेपो रेट निर्धारित करता है।
भू-राजनीतिक घटनाएं भारत की मौद्रिक नीति को कैसे प्रभावित करती हैं?
भू-राजनीतिक घटनाओं का असर वस्तु मूल्यों, आपूर्ति श्रृंखलाओं और बाहरी क्षेत्र की स्थिरता पर पड़ता है, जो मुद्रास्फीति और विकास के दृष्टिकोण को प्रभावित करता है। MPC इन कारकों को ध्यान में रखकर नीति दरें तय करता है, जिससे मुद्रास्फीति नियंत्रण और विकास समर्थन में संतुलन बना रहे।
रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में क्या अंतर है?
रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को ऋण देता है, जबकि रिवर्स रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों से धन उधार लेता है। MPC केवल रेपो रेट तय करता है, जबकि रिवर्स रेपो रेट RBI के मौद्रिक नीति विभाग द्वारा निर्धारित होती है।
अप्रैल 2024 में MPC ने रेपो रेट अपरिवर्तित क्यों रखा?
MPC ने शांति प्रयासों से भू-राजनीतिक जोखिम कम होने, मुद्रास्फीति के मामूली ऊपर जाने, कोर सेक्टर की धीमी वृद्धि और विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिरता को देखते हुए रेपो रेट अपरिवर्तित रखा।
संविधान के अनुच्छेद 292 का मौद्रिक नीति में क्या महत्व है?
अनुच्छेद 292 केंद्र सरकार को भारत की ओर से उधार लेने का अधिकार देता है, जो राजकोषीय नीति के फैसलों को प्रभावित करता है। चूंकि राजकोषीय और मौद्रिक नीतियां जुड़ी होती हैं, सरकार का उधार लेना MPC के तरलता और ब्याज दर निर्णयों को प्रभावित करता है।
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