IIT दिल्ली के 2024 के एक महामारी विज्ञान अध्ययन से पता चलता है कि भारत के कोयला आधारित विद्युत संयंत्रों से निकलने वाले सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) उत्सर्जन को कम करने से हर साल 1.24 लाख से अधिक समयपूर्व मौतों को रोका जा सकता है। अध्ययन में यह भी बताया गया है कि भारत की लगभग 70% बिजली कोयला संयंत्रों से आती है, जो वायुमंडलीय SO2 प्रदूषण के मुख्य स्रोत हैं। इन संयंत्रों के आसपास SO2 का स्तर WHO द्वारा सुझाए गए मानकों से 2-3 गुना अधिक पाया गया है (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), 2023)। यह मृत्यु दर प्रदूषण नियंत्रण के लिए कड़े कदम उठाने और फ्लू गैस डीसल्फराइजेशन (FGD) जैसी स्वच्छ तकनीकों को अपनाने की तत्काल जरूरत को दर्शाती है।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 3: पर्यावरण (वायु प्रदूषण, ऊर्जा क्षेत्र, स्वास्थ्य प्रभाव)
- GS पेपर 2: शासन (पर्यावरण कानून और न्यायिक हस्तक्षेप)
- निबंध: विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलन
SO2 उत्सर्जन पर कानूनी और संवैधानिक ढांचा
संविधान के अनुच्छेद 48A में राज्य को पर्यावरण की रक्षा और सुधार का दायित्व सौंपा गया है। वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के तहत केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को धारा 21 और 22 के अंतर्गत SO2 सहित प्रदूषकों के लिए उत्सर्जन मानक निर्धारित करने और लागू करने का अधिकार प्राप्त है। इसके अलावा, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 3 केंद्र सरकार को पर्यावरण प्रदूषकों को नियंत्रित करने और अनुपालन सुनिश्चित करने के व्यापक अधिकार देती है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 पर्यावरण संबंधी विवादों, विशेषकर औद्योगिक प्रदूषण पर विशेष न्यायिक निगरानी प्रदान करता है। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में, विशेषकर M.C. Mehta बनाम भारत संघ (1987), कोयला विद्युत संयंत्रों सहित औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण की अनिवार्यता पर जोर दिया गया है, जिससे उत्सर्जन कम करने का कानूनी आधार मजबूत हुआ है।
कोयला विद्युत क्षेत्र में SO2 उत्सर्जन नियंत्रण के आर्थिक पहलू
कोयला आधारित विद्युत संयंत्र भारत की लगभग 70% बिजली उत्पादन में योगदान देते हैं, जिसका वार्षिक मूल्य 50 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है (CEA, 2023)। लगभग 210 GW कोयला क्षमता वाले संयंत्रों को FGD तकनीक से लैस करने के लिए लगभग INR 70,000 करोड़ (~9.3 अरब अमेरिकी डॉलर) का निवेश आवश्यक है (CEA, 2023)।
वायु प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य संबंधी आर्थिक नुकसान भारत के GDP का लगभग 3% है, जो लगभग INR 7 लाख करोड़ (~93 अरब अमेरिकी डॉलर) के बराबर है, जैसा कि विश्व बैंक (2016) ने बताया है। SO2 उत्सर्जन में कमी से स्वास्थ्य सेवा पर खर्च घटेगा और श्रम उत्पादकता बढ़ेगी, जिससे आर्थिक लाभ होंगे जो निवेश की लागत को संतुलित कर सकते हैं।
SO2 उत्सर्जन घटाने में तकनीकी और संस्थागत भूमिका
FGD तकनीक से प्रति संयंत्र SO2 उत्सर्जन को 90% तक कम किया जा सकता है (अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी, 2022)। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) विद्युत क्षेत्र में क्षमता विस्तार और तकनीक अपनाने की निगरानी करता है, जबकि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) पर्यावरण नीतियां बनाता और लागू करता है।
राष्ट्रीय तापीय विद्युत निगम (NTPC), भारत का सबसे बड़ा कोयला विद्युत उत्पादक, कई संयंत्रों में FGD स्थापना कर चुका है। CPCB वायु गुणवत्ता की निगरानी करता है और उत्सर्जन मानकों को लागू करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) वायु गुणवत्ता के लिए दिशानिर्देश देता है जो राष्ट्रीय मानकों के लिए आधार होते हैं।
भारत और चीन के बीच SO2 उत्सर्जन नियंत्रण की तुलना
| पहलू | भारत | चीन |
|---|---|---|
| विद्युत में कोयले का हिस्सा | लगभग 70% (CEA, 2023) | लगभग 60% (IEA, 2020) |
| SO2 उत्सर्जन नियंत्रण नीति | नियम तो हैं, पर क्रियान्वयन असंगत | 2017 तक देशव्यापी FGD अनिवार्य |
| SO2 उत्सर्जन में कमी | सीमित कमी; वायुमंडलीय स्तर WHO मानकों से 2-3 गुना अधिक (CPCB, 2023) | 2010-2020 के बीच 60% कमी (IEA, 2022) |
| स्वास्थ्य प्रभाव में कमी | 1.24 लाख वार्षिक समयपूर्व मौतें (IIT दिल्ली, 2024) | SO2 से जुड़ी मृत्यु दर में 30% कमी (2010-2020) |
| FGD में निवेश | INR 70,000 करोड़ अनुमानित आवश्यकता (CEA, 2023) | सरकार समर्थित वित्तपोषण और कड़ा क्रियान्वयन |
नियमन में चुनौतियां और नीति की खामियां
मौजूदा कानूनी ढांचे के बावजूद भारत में SO2 उत्सर्जन मानकों का पालन असंगत है। निगरानी के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे की कमी, FGD स्थापना में देरी, और स्वच्छ तकनीक अपनाने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन का अभाव मुख्य कारण हैं। कई संयंत्र MoEFCC के चरणबद्ध FGD स्थापना कार्यक्रम की समयसीमा से चूक गए हैं।
नीति में अक्सर समय पर अनुपालन सुनिश्चित करने या उल्लंघन पर प्रभावी दंड लगाने के लिए मजबूत प्रावधान नहीं हैं। वास्तविक समय उत्सर्जन निगरानी प्रणाली का अभाव और केंद्र व राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के बीच समन्वय की कमी भी क्रियान्वयन में बाधा डालती है।
महत्व और आगे का रास्ता
- FGD स्थापना को अनिवार्य करते हुए कड़े समयसीमा और उल्लंघन पर दंड का प्रावधान करें।
- निरंतर उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (CEMS) को CPCB के डेटाबेस से जोड़कर निगरानी बुनियादी ढांचे को मजबूत करें।
- स्वच्छ तकनीक अपनाने के लिए संयंत्रों को कम ब्याज दर वाले ऋण या सब्सिडी जैसी वित्तीय मदद दें।
- पर्यावरणीय मंजूरी और नीति निर्माण में स्वास्थ्य प्रभाव आकलन को शामिल करें।
- MoEFCC, CEA, CPCB और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करें।
- कोयला पर निर्भरता कम करने और SO2 उत्सर्जन घटाने के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा दें।
- संविधान का अनुच्छेद 48A राज्य को पर्यावरण की रक्षा और सुधार का दायित्व देता है।
- पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 3 केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को उत्सर्जन मानक तय करने का अधिकार देती है।
- फ्लू गैस डीसल्फराइजेशन तकनीक प्रति संयंत्र SO2 उत्सर्जन को 90% तक कम कर सकती है।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
- चीन ने 2017 तक देशव्यापी FGD स्थापना अनिवार्य की, जिससे SO2 उत्सर्जन में 60% कमी आई।
- भारत ने FGD तकनीक के जरिए कोयला विद्युत संयंत्रों से SO2 उत्सर्जन पूरी तरह खत्म कर दिया है।
- भारत में वायु प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य संबंधी आर्थिक नुकसान GDP का लगभग 3% है।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
मुख्य प्रश्न
भारत में कोयला आधारित विद्युत संयंत्रों से SO2 उत्सर्जन के स्वास्थ्य और आर्थिक प्रभावों का गंभीरता से विश्लेषण करें। मौजूदा कानूनी ढांचे और क्रियान्वयन में चुनौतियों पर चर्चा करें, तथा विद्युत क्षेत्र में SO2 प्रदूषण को प्रभावी ढंग से कम करने के उपाय सुझाएं। (250 शब्द)
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 3 (पर्यावरण और पारिस्थितिकी), पेपर 4 (आर्थिक विकास)
- झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड में कई कोयला आधारित विद्युत संयंत्र और कोयला खदानें हैं, जो स्थानीय और क्षेत्रीय स्तर पर SO2 उत्सर्जन में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।
- मुख्य बिंदु: झारखंड की कोयला निर्भरता, स्थानीय वायु गुणवत्ता की समस्याएं, आदिवासी आबादी पर स्वास्थ्य प्रभाव, और राज्य स्तर पर उत्सर्जन मानकों के क्रियान्वयन की आवश्यकता को उजागर करें।
भारत में SO2 उत्सर्जन का मुख्य स्रोत क्या है?
भारत में SO2 उत्सर्जन का मुख्य स्रोत कोयला आधारित विद्युत संयंत्र हैं, जो वायुमंडलीय SO2 प्रदूषण में महत्वपूर्ण हिस्सा रखते हैं।
फ्लू गैस डीसल्फराइजेशन (FGD) तकनीक SO2 उत्सर्जन कैसे कम करती है?
FGD तकनीक फ्लू गैस से SO2 को रासायनिक अवशोषण के माध्यम से हटाती है, आमतौर पर चूना पत्थर के घोल का उपयोग करते हुए, जिससे प्रति संयंत्र उत्सर्जन में 90% तक कमी आती है।
भारत में पर्यावरण संरक्षण का संवैधानिक प्रावधान कौन सा है?
अनुच्छेद 48A राज्य को पर्यावरण की रक्षा और सुधार तथा वन और वन्य जीव की सुरक्षा का निर्देश देता है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) प्रदूषण नियंत्रण में क्या भूमिका निभाता है?
NGT पर्यावरणीय विवादों के लिए विशेष न्यायिक निगरानी प्रदान करता है, जिससे SO2 उत्सर्जन सहित प्रदूषण नियंत्रण कानूनों का पालन सुनिश्चित होता है।
भारत में वायु प्रदूषण के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान कितने हैं?
विश्व बैंक (2016) के अनुसार, वायु प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य संबंधी आर्थिक नुकसान भारत के GDP का लगभग 3% है, जो करीब INR 7 लाख करोड़ वार्षिक है।
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