कपास उत्पादकता मिशन (2026–31): परिचय और महत्व
कपास उत्पादकता मिशन (2026–31) केंद्र सरकार द्वारा 2024 में मंजूर की गई एक केन्द्रीय योजना है, जिसके लिए 5659.22 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इसे कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (MoA&FW) और वस्त्र मंत्रालय (MoT) के संयुक्त प्रयास से लागू किया जा रहा है, जिसमें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) जैसे अनुसंधान संस्थान भी सहयोग कर रहे हैं। यह योजना 14 राज्यों के 140 कपास उगाने वाले जिलों को कवर करती है और इसका लक्ष्य कपास की लिंट उपज को 440 किग्रा प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 755 किग्रा प्रति हेक्टेयर तक पहुंचाना तथा 2031 तक सालाना 498 लाख बॉल उत्पादन करना है। यह मिशन स्थिर उपज, कीटों की समस्या, गुणवत्ता की कमी और खासकर एक्स्ट्रा लॉन्ग स्टेपल (ELS) कपास की आयात निर्भरता को कम करने पर केंद्रित है, ताकि भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को 5F विजन (Farm to Fibre to Factory to Fashion to Foreign) के तहत बढ़ाया जा सके।
UPSC से प्रासंगिकता
- GS पेपर 3: कृषि (फसल उत्पादकता, कृषि विपणन), अर्थव्यवस्था (वस्त्र उद्योग, निर्यात-आयात)
- GS पेपर 2: सरकारी योजनाएं, संस्थागत ढांचा (मंत्रालय, ICAR)
- निबंध: कृषि उत्पादकता को औद्योगिक विकास और निर्यात क्षमता से जोड़ना
संस्थागत ढांचा और कानूनी संदर्भ
यह मिशन MoA&FW और MoT के प्रशासनिक ढांचे के अंतर्गत काम करता है। कपास व्यापार को नियंत्रित करने के लिए यह Essential Commodities Act, 1955 के अनुरूप है और कृषि अनुसंधान समन्वय के लिए ICAR Act, 1966 के तहत आता है। सीधे तौर पर इसका कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है, लेकिन यह Article 48 के निर्देशक सिद्धांतों से जुड़ा है, जो राज्य को कृषि और पशुपालन सुधारने का निर्देश देता है। मिशन की सफलता के लिए अनुसंधान, विस्तार सेवाओं और उद्योग के बीच तालमेल जरूरी है, जो पारंपरिक रूप से कृषि अनुसंधान और वस्त्र निर्माण क्षेत्रों के बीच मौजूद विखंडन को दूर करने की चुनौती है।
आर्थिक पहलू और लक्ष्य
5659.22 करोड़ रुपये के बजट आवंटन से सरकार ने कपास उत्पादकता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की प्रतिबद्धता दिखाई है। कपास भारत के GDP में लगभग 2.5% का योगदान देता है और छह मिलियन से अधिक किसानों का सहारा है। मिशन का लक्ष्य लिंट उपज को 440 किग्रा प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 755 किग्रा प्रति हेक्टेयर करना है, जिससे 2031 तक 498 लाख बॉल (प्रत्येक 170 किग्रा लिंट) का उत्पादन संभव हो सकेगा। फिलहाल भारत बड़ी मात्रा में Extra Long Staple (ELS) कपास, जिसकी स्टेपल लंबाई 30 मिमी या उससे अधिक होती है, मिस्र और अमेरिका से आयात करता है, जो व्यापार संतुलन और घरेलू वस्त्र उद्योग की प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करता है। घरेलू ELS कपास उत्पादन बढ़ाना आयात निर्भरता कम करने और निर्यात बढ़ाने के लिए रणनीतिक प्राथमिकता है।
5F विजन के मुख्य तत्व
- Farm: ICAR और CSIR के सहयोग से जलवायु और कीट प्रतिरोधी कपास किस्मों का विकास और प्रचार।
- Fibre: कपास की गुणवत्ता सुधारने के लिए जिनिंग और प्रसंस्करण तकनीकों का उन्नयन, कचरे की मात्रा 2% से कम करना, साथ ही कस्तूरी कॉटन भारत के जरिए ट्रेसबिलिटी और प्रमाणन को बढ़ावा।
- Factory: वस्त्र निर्माण के साथ समन्वय कर मूल्य संवर्धन और गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित करना।
- Fashion: घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उच्च मूल्य वाले वस्त्र क्षेत्रों में प्रीमियम कपास के उपयोग को प्रोत्साहित करना।
- Foreign: वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक कपास उत्पादन के माध्यम से निर्यात बाजारों का विस्तार करना, खासकर ELS कपास के मामले में आयात निर्भरता कम करना।
भारत और मिस्र के कपास क्षेत्र की तुलना
| पहलू | भारत | मिस्र |
|---|---|---|
| उपज (किग्रा/हेक्टेयर) | 440 (मूल स्तर), लक्ष्य 755 (2031 तक) | लगभग 800 (वर्तमान) |
| मुख्य कपास प्रकार | अधिकतर मीडियम स्टेपल; ELS कपास आयात करता है | प्रीमियम एक्स्ट्रा लॉन्ग स्टेपल (Gossypium barbadense) |
| सरकारी समर्थन | कपास उत्पादकता मिशन (2026–31) और 5F विजन | लंबे समय से लक्षित अनुसंधान और निर्यात प्रोत्साहन |
| निर्यात प्रतिस्पर्धा | विकासशील, ELS कपास आयात निर्भरता से बाधित | प्रीमियम कपास का स्थापित वैश्विक निर्यातक |
| अनुसंधान संस्थान | मिशन के तहत ICAR और CSIR संस्थान सहयोग में | विशेष कपास अनुसंधान केंद्र, निर्यात से जुड़े प्रोजेक्ट |
चुनौतियां और संरचनात्मक कमियां
मिशन को कृषि अनुसंधान, वस्त्र निर्माण और निर्यात प्रोत्साहन एजेंसियों के बीच विखंडित समन्वय जैसी जमीनी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इस विखंडन के कारण नवाचारों को अपनाने और मूल्य श्रृंखला के एकीकरण में देरी होती रही है। मिशन की सफलता के लिए कड़े निगरानी तंत्र और निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी जरूरी है ताकि इन कमियों को दूर किया जा सके। इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन और कीट संक्रमण जैसी समस्याएं भी जोखिम हैं, जिनके लिए जलवायु-स्मार्ट तकनीकों का विकास आवश्यक है। किसानों की भागीदारी और मूल्य श्रृंखला में लाभ का न्यायसंगत वितरण भी उत्पादकता बढ़ाने के लिए जरूरी है।
महत्व और आगे की राह
- उत्पादकता लक्ष्य हासिल करने से किसानों की आय बढ़ेगी और ग्रामीण आजीविका बेहतर होगी।
- आयातित ELS कपास पर निर्भरता कम होने से भारत का व्यापार संतुलन सुधरेगा और घरेलू वस्त्र उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी।
- 5F विजन कृषि उत्पादकता को औद्योगिक और निर्यात विकास से जोड़ने का मॉडल साबित हो सकता है।
- संस्थागत समन्वय मजबूत करना और निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना तकनीकी प्रसार और मूल्य श्रृंखला विकास के लिए अहम है।
- सतत और जलवायु-सहिष्णु कपास खेती को बढ़ावा देकर जलवायु और कीटों से जुड़ी चुनौतियों का मुकाबला किया जा सकेगा।
- मिशन का लक्ष्य 2031 तक कपास लिंट उत्पादकता को 755 किग्रा प्रति हेक्टेयर तक बढ़ाना है।
- मिशन केवल कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा लागू किया जाता है।
- भारत मुख्य रूप से मिस्र और अमेरिका से एक्स्ट्रा लॉन्ग स्टेपल कपास आयात करता है।
- इसमें 'Farm to Fibre to Factory to Fashion to Foreign' के तत्व शामिल हैं।
- यह केवल कपास उपज बढ़ाने पर केंद्रित है और मूल्य श्रृंखला एकीकरण को शामिल नहीं करता।
- ट्रेसबिलिटी के लिए कस्तूरी कॉटन भारत का प्रचार इस विजन का हिस्सा है।
मेन प्रश्न
कपास उत्पादकता मिशन (2026–31) के उद्देश्य और संस्थागत ढांचे का आलोचनात्मक विश्लेषण करें। यह मिशन भारत के कपास क्षेत्र की चुनौतियों को कैसे संबोधित करता है और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सुधार कैसे लाता है?
झारखंड और JPSC से प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 (कृषि और ग्रामीण विकास), पेपर 3 (आर्थिक विकास)
- झारखंड का नजरिया: यद्यपि झारखंड कपास उत्पादन में बड़ा राज्य नहीं है, पर जलवायु-स्मार्ट कृषि और मूल्य श्रृंखला समेकन के इस मिशन के अनुभव राज्य में फाइबर फसलों के विविधीकरण के लिए उपयोगी हो सकते हैं।
- मेन पॉइंटर: उत्तर देते समय कपास उत्पादकता सुधार को ग्रामीण आजीविका, कृषि-औद्योगिक संबंध और निर्यात क्षमता से जोड़ें, साथ ही संस्थागत समन्वय की चुनौतियों का उल्लेख करें।
कपास उत्पादकता मिशन (2026–31) के लिए बजट आवंटन कितना है?
केंद्र सरकार ने 2026–27 से 2030–31 तक के लिए इस मिशन के लिए 5659.22 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।
कौन से मंत्रालय कपास उत्पादकता मिशन को लागू करते हैं?
यह मिशन कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और वस्त्र मंत्रालय के संयुक्त प्रयास से लागू किया जा रहा है।
कपास उत्पादकता मिशन में 5F विजन क्या है?
5F विजन का मतलब है Farm to Fibre to Factory to Fashion to Foreign, जो कपास की खेती, प्रसंस्करण, निर्माण, विपणन और निर्यात को एकीकृत करता है।
भारत के लिए एक्स्ट्रा लॉन्ग स्टेपल (ELS) कपास क्यों महत्वपूर्ण है?
ELS कपास, जिसकी स्टेपल लंबाई 30 मिमी या अधिक होती है, प्रीमियम गुणवत्ता वाली होती है और उच्च मूल्य वाले वस्त्रों में उपयोग होती है। भारत इसे मुख्यतः मिस्र और अमेरिका से आयात करता है, और मिशन इसका घरेलू उत्पादन बढ़ाकर आयात निर्भरता कम करना चाहता है।
कपास उत्पादकता मिशन के तहत अनुसंधान का समर्थन कौन-कौन से संस्थान करते हैं?
अनुसंधान का समन्वय ICAR के 10 विशेष संस्थानों द्वारा किया जाता है, और CSIR की वैज्ञानिक शोध सहायता से कीट-प्रतिरोधी किस्मों के विकास में मदद मिलती है।
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