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परिचय: पीएम-श्री का क्रियान्वयन और राजनीतिक संदर्भ

आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में प्रधानमंत्री सतत आवास रेटिंग सूचकांक (PM-SHRI) को तेजी से लागू करने के लिए नई पहल की घोषणा की है। यह कदम इन राज्यों में हाल के राजनीतिक बदलावों के कारण हुई देरी को दूर करने और शहरी स्थिरता प्रयासों को फिर से गति देने के उद्देश्य से उठाया गया है। ये तीनों राज्य मिलकर लगभग 70 मिलियन से अधिक शहरी आबादी (जनगणना 2011, अनुमान 2024) को समेटे हुए हैं। यह पहल राजनीतिक स्थिरता और केंद्र सरकार की शहरी पर्यावरण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के बीच गहरे संबंध को दर्शाती है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: शासन - शहरी स्थानीय निकाय, पर्यावरणीय शासन, केंद्र-राज्य संबंध
  • GS पेपर 3: पर्यावरण - शहरी स्थिरता, ऊर्जा और जल प्रबंधन
  • निबंध: भारत में शहरीकरण और सतत विकास

PM-SHRI के लिए कानूनी और संवैधानिक आधार

PM-SHRI का आधार पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 3 है, जो केंद्र सरकार को पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय कदम उठाने का अधिकार देता है। इसके अलावा, यह संविधान के अनुच्छेद 243W से भी जुड़ा है, जिसे 73वें संशोधन के तहत शामिल किया गया था, जो शहरी स्थानीय निकायों को शहरी विकास योजनाओं को योजना बनाने और लागू करने का अधिकार देता है। प्रक्रिया के लिहाज से, PM-SHRI स्मार्ट सिटी मिशन गाइडलाइंस (2015) का पूरक है, जो शहरी आवास की स्थिरता के लिए एक रेटिंग फ्रेमवर्क प्रदान करता है।

  • पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986: पर्यावरण संरक्षण के लिए केंद्र सरकार के हस्तक्षेप को सक्षम बनाता है।
  • अनुच्छेद 243W: शहरी स्थानीय निकायों को शहरी योजना और विकास का अधिकार देता है।
  • स्मार्ट सिटी मिशन गाइडलाइंस: सतत शहरी विकास के लिए प्रक्रिया संबंधी आधार।

लक्षित राज्यों में PM-SHRI के आर्थिक पहलू

संघीय बजट 2023-24 में PM-SHRI के क्रियान्वयन के लिए ₹200 करोड़ का विशेष आवंटन किया गया है, जो सतत शहरी आवासों को आर्थिक प्राथमिकता देता है। शहरी क्षेत्र भारत के GDP में लगभग 63% योगदान करते हैं (इकोनॉमिक सर्वे 2023), जबकि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में रियल एस्टेट सेक्टर उनके राज्य GDP का लगभग 7% हिस्सा है। PM-SHRI के पायलट प्रोजेक्ट्स ने शहरी ऊर्जा खपत में 15% और जल उपयोग में 20% तक की कमी दिखायी है, जो तमिलनाडु और केरल जैसे संसाधन-संकट वाले राज्यों के लिए महत्वपूर्ण है।

  • 2023-24 के बजट में PM-SHRI के लिए ₹200 करोड़ का आवंटन।
  • शहरी क्षेत्र राष्ट्रीय GDP में 63% का योगदान देते हैं।
  • बंगाल, तमिलनाडु और केरल में रियल एस्टेट सेक्टर राज्य GDP का लगभग 7%।
  • पायलट शहरों में ऊर्जा की बचत 15% और जल की बचत 20% का अनुमान (MoHUA रिपोर्ट 2023)।

संस्थागत संरचना और हितधारक

PM-SHRI के लिए आवास और शहरी मामलों का मंत्रालय मुख्य एजेंसी है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) स्थिरता मानकों का विकास करता है, जबकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) आवास रेटिंग के लिए आवश्यक पर्यावरणीय डेटा प्रदान करता है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल के राज्य शहरी विकास प्राधिकरण स्थानीय स्तर पर क्रियान्वयन के जिम्मेदार हैं। नीति आयोग नीति सलाह देता है और प्रगति की निगरानी करता है, जिससे राष्ट्रीय स्थिरता लक्ष्यों के साथ तालमेल सुनिश्चित होता है।

  • MoHUA: PM-SHRI के क्रियान्वयन के लिए मुख्य एजेंसी।
  • BIS: स्थिरता मानकों का विकास।
  • CPCB: पर्यावरणीय डेटा प्रदान करता है।
  • राज्य शहरी विकास प्राधिकरण: बंगाल, तमिलनाडु, केरल में स्थानीय क्रियान्वयन।
  • नीति आयोग: नीति सलाह और निगरानी।

शहरी स्थिरता चुनौतियों और प्रगति पर डेटा अंतर्दृष्टि

PM-SHRI के पायलट चरण में 10 शहरों ने औसतन 12% स्थिरता स्कोर सुधार दर्ज किया है (MoHUA वार्षिक रिपोर्ट 2023)। हालांकि, तीनों लक्ष्य राज्य अलग-अलग चुनौतियों का सामना कर रहे हैं: केरल में शहरी ऊर्जा खपत 5.2% की CAGR से बढ़ी है (2015-2022), जो राष्ट्रीय औसत 4.1% से अधिक है (CEA रिपोर्ट 2023); तमिलनाडु का जल तनाव सूचकांक 0.6 है, जो उच्च संवेदनशीलता दर्शाता है (नीति आयोग जल प्रबंधन सूचकांक 2023); पश्चिम बंगाल में प्रतिदिन लगभग 6,000 टन शहरी ठोस कचरा उत्पन्न होता है, जिसमें से केवल 40% का वैज्ञानिक तरीके से निपटान होता है (CPCB 2023)। राजनीतिक बदलावों के कारण शहरी नीतियों को अपनाने में औसतन 18 महीने की देरी हुई है, जिससे PM-SHRI के समयबद्ध क्रियान्वयन में बाधा आई है (इंडियन एक्सप्रेस विश्लेषण 2024)।

  • पायलट शहरों में 12% औसत स्थिरता स्कोर सुधार।
  • केरल की शहरी ऊर्जा खपत CAGR: 5.2% (2015-22) बनाम राष्ट्रीय 4.1%।
  • तमिलनाडु का जल तनाव सूचकांक: 0.6 (उच्च संवेदनशीलता)।
  • पश्चिम बंगाल का शहरी ठोस कचरा: 6,000 टन/दिन; 40% वैज्ञानिक रूप से निपटाया जाता है।
  • राजनीतिक बदलावों के कारण शहरी नीतियों को अपनाने में लगभग 18 महीने की देरी।

तुलनात्मक अध्ययन: PM-SHRI और सिंगापुर के ग्रीन मार्क योजना

सिंगापुर की ग्रीन मार्क सर्टिफिकेशन योजना, जो 2005 में शुरू हुई, शहरी स्थिरता में निरंतर राजनीतिक प्रतिबद्धता और संस्थागत स्पष्टता का उदाहरण है। 15 वर्षों में इस योजना ने भवनों की ऊर्जा खपत में 25% की कमी की है, जो लगातार नीति के लागू होने का परिणाम है। इसके विपरीत, भारत में राजनीतिक अस्थिरता के कारण PM-SHRI का कार्यान्वयन खंडित रहा है, जिससे बेहतर समन्वय तंत्र की आवश्यकता उजागर होती है।

पहलूPM-SHRI (भारत)ग्रीन मार्क (सिंगापुर)
शुरुआत वर्ष2021 (पायलट चरण)2005
ऊर्जा खपत में कमीपायलट शहरों में अनुमानित 15%15 वर्षों में 25%
राजनीतिक स्थिरतापरिवर्तनशील; बदलावों के कारण देरीउच्च, लगातार प्रतिबद्धता
संस्थागत समन्वयकेंद्र-राज्य के बीच खंडितकेन्द्रीयकृत और सुव्यवस्थित

संरचनात्मक चुनौतियां और समन्वय की कमी

PM-SHRI की सफलता में सबसे बड़ी बाधा राज्य शहरी विकास प्राधिकरणों और केंद्र सरकार की एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी है। राजनीतिक बदलाव इस खंडन को और बढ़ाते हैं, जिससे देरी होती है और स्थिरता मानकों का असंगत पालन होता है। यह संरचनात्मक कमजोरी योजना के पर्यावरणीय और आर्थिक लाभों को समय पर देने की क्षमता को कमजोर करती है, खासकर बंगाल, तमिलनाडु और केरल जैसे राजनीतिक रूप से गतिशील राज्यों में।

  • केंद्र और राज्य शहरी निकायों के बीच समन्वय की कमी।
  • राजनीतिक अस्थिरता के कारण योजना अपनाने में लगभग 18 महीने की देरी।
  • खंडित क्रियान्वयन से स्थिरता परिणाम कमजोर।

महत्त्व और आगे का रास्ता

मंत्रालय की बंगाल, तमिलनाडु और केरल में PM-SHRI को लेकर नयी पहल शहरी स्थिरता प्रयासों को शासन की वास्तविकताओं के साथ फिर से जोड़ने की रणनीतिक कोशिश है। सफलता सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत समन्वय को मजबूत करना, शहरी नीतियों को राजनीतिक उतार-चढ़ाव से बचाना और राज्यों को प्रदर्शन आधारित वित्तीय प्रोत्साहन देना जरूरी है। नीति आयोग द्वारा डेटा आधारित निगरानी और नागरिक सहभागिता को बढ़ावा देना भी उपलब्धियों को मजबूत कर सकता है।

  • PM-SHRI के लिए केंद्र-राज्य समन्वय तंत्र को संस्थागत बनाना।
  • समय पर योजना अपनाने और स्थिरता परिणामों से फंडिंग को जोड़ना।
  • नीति आयोग के माध्यम से डेटा पारदर्शिता और निगरानी बढ़ाना।
  • शहरी स्थिरता पहलों में नागरिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
PM-SHRI और शहरी शासन के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. PM-SHRI पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के प्रावधानों के तहत लागू किया जाता है।
  2. संविधान के अनुच्छेद 243W शहरी स्थानीय निकायों को PM-SHRI लागू करने का अधिकार देते हैं।
  3. PM-SHRI AMRUT मिशन का एक हिस्सा है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि PM-SHRI पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 से जुड़ा है। कथन 2 भी सही है क्योंकि अनुच्छेद 243W शहरी स्थानीय निकायों को शहरी योजना और विकास का अधिकार देता है। कथन 3 गलत है; PM-SHRI AMRUT का हिस्सा नहीं है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
राजनीतिक बदलाव और शहरी नीति क्रियान्वयन के बारे में निम्नलिखित पर विचार करें:
  1. बंगाल, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में राजनीतिक बदलावों के कारण PM-SHRI के लागू होने में औसतन 18 महीने की देरी हुई है।
  2. ऐसी देरी का शहरी योजनाओं के स्थिरता परिणामों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
  3. मजबूत केंद्र-राज्य समन्वय राजनीतिक अस्थिरता से होने वाली देरी को कम कर सकता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है (इंडियन एक्सप्रेस विश्लेषण 2024)। कथन 2 गलत है क्योंकि देरी से स्थिरता परिणाम प्रभावित होते हैं। कथन 3 सही है क्योंकि बेहतर समन्वय देरी को कम कर सकता है।

मेन्स प्रश्न

पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में राजनीतिक बदलावों का केंद्र सरकार की शहरी स्थिरता योजनाओं, जैसे PM-SHRI, के क्रियान्वयन पर क्या प्रभाव पड़ता है? राजनीतिक रूप से गतिशील संदर्भों में योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए किन संस्थागत सुधारों की आवश्यकता है? (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 - शासन और शहरी विकास
  • झारखंड दृष्टिकोण: झारखंड के शहरी केंद्र PM-SHRI के स्थिरता मानकों से तेजी से हो रहे शहरीकरण और संसाधन सीमाओं को प्रबंधित करने में लाभान्वित हो सकते हैं।
  • मेन्स प्वाइंटर: केंद्र-राज्य समन्वय की चुनौतियों और अनुच्छेद 243W के तहत शहरी स्थानीय निकायों की भूमिका पर चर्चा करें, झारखंड के शहरी शासन अनुभव के संदर्भ में।
PM-SHRI का कानूनी आधार क्या है?

PM-SHRI पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 3 पर आधारित है, जो केंद्र सरकार को पर्यावरण संरक्षण के लिए कदम उठाने का अधिकार देता है। इसके अलावा, यह संविधान के अनुच्छेद 243W के अनुरूप है, जो शहरी स्थानीय निकायों को शहरी विकास योजनाओं को लागू करने का अधिकार देता है।

राजनीतिक बदलाव PM-SHRI के क्रियान्वयन को कैसे प्रभावित करते हैं?

पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में राजनीतिक बदलावों के कारण शहरी स्थिरता नीतियों को अपनाने में औसतन 18 महीने की देरी हुई है, जिससे PM-SHRI के समय पर लागू होने और प्रभावशीलता में बाधा आई है।

PM-SHRI में मुख्य संस्थागत खिलाड़ी कौन हैं?

मुख्य संस्थान हैं: MoHUA (मुख्य एजेंसी), BIS (स्थिरता मानकों का विकास), CPCB (पर्यावरणीय डेटा), राज्य शहरी विकास प्राधिकरण (स्थानीय क्रियान्वयन), और नीति आयोग (नीति सलाह और निगरानी)।

PM-SHRI से आर्थिक लाभ क्या हैं?

PM-SHRI का लक्ष्य पायलट शहरों में शहरी ऊर्जा खपत में 15% और जल उपयोग में 20% तक की कमी लाकर आर्थिक बचत और संसाधन दक्षता बढ़ाना है, खासकर उन राज्यों में जहां शहरी क्षेत्र GDP में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

PM-SHRI स्मार्ट सिटी मिशन से कैसे अलग है?

PM-SHRI एक स्थिरता रेटिंग फ्रेमवर्क है जो आवास पर्यावरणीय प्रदर्शन पर केंद्रित है, जबकि स्मार्ट सिटी मिशन एक व्यापक शहरी विकास कार्यक्रम है जिसमें कई बुनियादी ढांचा और शासन घटक शामिल हैं।

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