परिचय: तीन राज्यों में पीएम-श्री और राजनीतिक संदर्भ
आवास और शहरी मामलों का मंत्रालय (MoHUA) पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में हाल के राजनीतिक बदलावों के बाद प्रधानमंत्री सतत आवास रेटिंग इंडेक्स (PM-SHRI) पहल को पुनः शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इस नए फोकस का मकसद शहरी स्थिरता के लक्ष्यों को बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के साथ तालमेल बिठाकर निर्बाध क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। पीएम-श्री, जो 2023-24 में ₹500 करोड़ के बजट के साथ एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुआ था, ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण के अनुकूल शहरी आवास को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखता है, जो भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं और शहरी विकास के लिए अहम है।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 2: शहरी शासन, स्थानीय निकायों के लिए संवैधानिक प्रावधान, पर्यावरण नीतियां
- GS पेपर 3: शहरी विकास, ऊर्जा दक्षता, जलवायु परिवर्तन शमन
- निबंध: भारत में सतत शहरीकरण और शासन की चुनौतियां
PM-SHRI के लिए संवैधानिक और कानूनी आधार
संविधान के अनुच्छेद 243W के तहत शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) को शहरी विकास योजनाएं लागू करने का अधिकार दिया गया है, जो पीएम-श्री के विकेंद्रीकृत क्रियान्वयन के लिए संवैधानिक आधार प्रदान करता है। पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 सतत शहरी आवास के लिए आवश्यक पर्यावरणीय सुरक्षा नियमों को सुनिश्चित करता है। पीएम-श्री राष्ट्रीय शहरी आवास और आवास नीति, 2007 के अनुरूप है और इसे ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 (2010 में संशोधित) की ऊर्जा दक्षता मानकों से तकनीकी वैधता मिलती है। स्मार्ट सिटी मिशन दिशानिर्देश, 2015 शहरी स्थिरता के लिए पूरक रूप में कार्य करते हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट के एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ (1987) जैसे फैसले पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारियों को मजबूत करते हैं।
- अनुच्छेद 243W: ULBs को शहरी विकास योजनाओं के लिए अधिकार देता है
- पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986: पर्यावरणीय नियमों का कानूनी आधार
- ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 (संशोधित 2010): शहरी आवास में ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देता है
- स्मार्ट सिटी मिशन दिशानिर्देश, 2015: शहरी स्थिरता के लिए ढांचा
- राष्ट्रीय शहरी आवास और आवास नीति, 2007: पीएम-श्री के उद्देश्यों के अनुरूप
लक्षित राज्यों में पीएम-श्री के आर्थिक पहलू
शहरी क्षेत्र भारत के GDP में लगभग 63% का योगदान देते हैं (इकोनॉमिक सर्वे 2023), जो सतत शहरी विकास की आर्थिक आवश्यकता को दर्शाता है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल भारत की शहरी आबादी का 15% से अधिक हिस्सा हैं (जनगणना 2011), जो आने वाले दशक में ₹1.2 लाख करोड़ के सतत शहरी अवसंरचना बाजार का प्रतिनिधित्व करते हैं (नीति आयोग, 2023)। पीएम-श्री के तहत ऊर्जा-कुशल शहरी आवास ऊर्जा खपत को 30% तक कम कर सकते हैं (BEE रिपोर्ट, 2022), और शहरी कार्बन उत्सर्जन को 20-25% तक घटाने की संभावना है (TERI विश्लेषण, 2023)। ₹500 करोड़ के पायलट बजट का उद्देश्य हरित निवेश को बढ़ावा देना और आर्थिक व पर्यावरणीय लाभ उत्पन्न करना है।
- शहरी GDP हिस्सा: 63% (इकोनॉमिक सर्वे 2023)
- बंगाल, तमिलनाडु, केरल की शहरी आबादी: >15% (जनगणना 2011)
- सतत शहरी अवसंरचना का बाजार: ₹1.2 लाख करोड़ (नीति आयोग 2023)
- ऊर्जा बचत क्षमता: 30% तक (BEE रिपोर्ट 2022)
- कार्बन उत्सर्जन में कमी का अनुमान: 20-25% (TERI 2023)
PM-SHRI क्रियान्वयन के लिए संस्थागत ढांचा
MoHUA पीएम-श्री का मुख्य समन्वय एजेंसी है, जो कई संस्थाओं के साथ मिलकर काम करता है। ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) ऊर्जा मानकों के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करता है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल के राज्य शहरी विकास प्राधिकरण स्थानीय स्तर पर कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार हैं। नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (NIUA) शोध और क्षमता निर्माण में योगदान देता है, जबकि सेंट्रल पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) पर्यावरणीय अनुपालन की निगरानी करता है। नीति आयोग नीतिगत सलाह और प्रगति की समीक्षा करता है ताकि राष्ट्रीय लक्ष्यों के साथ तालमेल बना रहे।
- MoHUA: पीएम-श्री के लिए समन्वय एजेंसी
- BEE: ऊर्जा दक्षता पर तकनीकी सहायता
- राज्य शहरी विकास प्राधिकरण: स्थानीय कार्यान्वयन
- NIUA: शोध और क्षमता विकास
- CPCB: पर्यावरण निगरानी
- नीति आयोग: नीति सलाह और निगरानी
राजनीतिक बदलाव और पीएम-श्री पर प्रभाव
बंगाल, तमिलनाडु और केरल में राजनीतिक बदलावों ने शहरी स्थिरता परियोजनाओं की निरंतरता में बाधा डाली है, जिससे पीएम-श्री के क्रियान्वयन में देरी हुई है। राज्यों के नेतृत्व में परिवर्तन अक्सर प्राथमिकताओं को बदल देता है, जिसका असर बजट आवंटन और प्रशासनिक ध्यान पर पड़ता है। इस तरह की अस्थिरता पीएम-श्री के दीर्घकालिक पर्यावरणीय और आर्थिक लाभों को कमजोर कर सकती है, इसलिए ऐसी नीतिगत रूपरेखाओं की जरूरत है जो राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बावजूद परियोजनाओं को टिकाऊ बनाए रखें।
- राजनीतिक बदलावों से पीएम-श्री के कार्यान्वयन में देरी होती है
- प्राथमिकताओं में बदलाव बजट और परियोजना केंद्रितता को प्रभावित करता है
- निरंतरता का अभाव दीर्घकालिक स्थिरता लाभों को खतरे में डालता है
- परियोजना निरंतरता के लिए संस्थागत उपाय आवश्यक हैं
तुलनात्मक अध्ययन: पीएम-श्री और सिंगापुर की ग्रीन मार्क सर्टिफिकेशन
| पहलू | PM-SHRI (भारत) | ग्रीन मार्क सर्टिफिकेशन (सिंगापुर) |
|---|---|---|
| शुरुआत का वर्ष | 2023 (पायलट) | 2005 |
| क्षेत्र | कई राज्यों में शहरी आवास | राष्ट्रीय स्तर पर ग्रीन बिल्डिंग सर्टिफिकेशन |
| ऊर्जा में कमी | 20-25% कार्बन उत्सर्जन में कमी का अनुमान | 2020 तक भवन ऊर्जा खपत में 40% कमी |
| कानूनी आधार | ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम | बिल्डिंग कंट्रोल एक्ट के तहत अनिवार्य ग्रीन बिल्डिंग मानक |
| क्रियान्वयन मॉडल | स्वैच्छिक रेटिंग के साथ सरकारी प्रोत्साहन | नई परियोजनाओं के लिए अनिवार्य प्रमाणन |
महत्व और आगे की राह
- राजनीतिक बदलावों को ध्यान में रखकर पीएम-श्री के क्रियान्वयन में निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए प्रबंधन आवश्यक है।
- केंद्र और राज्यों के बीच संस्थागत समन्वय को मजबूत किया जाए ताकि शहरी स्थिरता के लक्ष्य मेल खाएं।
- सिंगापुर जैसे सफल अंतरराष्ट्रीय मॉडलों से सीख लेकर अनिवार्य मानकों को अपनाया जाए।
- पायलट चरण के बाद बजट समर्थन बढ़ाकर सतत शहरी अवसंरचना का विस्तार किया जाए।
- स्थानीय निकायों में तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियों से निपटने के लिए क्षमता निर्माण को बढ़ावा दिया जाए।
- PM-SHRI पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत कानूनी रूप से अनिवार्य है।
- PM-SHRI का उद्देश्य शहरी आवास में ऊर्जा खपत को 30% तक कम करना है।
- अनुच्छेद 243W शहरी स्थानीय निकायों को PM-SHRI लागू करने का अधिकार देता है।
- राजनीतिक बदलावों का PM-SHRI के तहत शहरी स्थिरता परियोजनाओं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
- PM-SHRI के क्रियान्वयन में देरी संभावित कार्बन उत्सर्जन में कमी को कम कर सकती है।
- अनुकूल नीतिगत ढांचे राजनीतिक बदलावों से होने वाले व्यवधानों को कम कर सकते हैं।
मुख्य प्रश्न
पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में प्रधानमंत्री सतत आवास रेटिंग इंडेक्स (PM-SHRI) के क्रियान्वयन पर राजनीतिक बदलावों के प्रभावों की गंभीर समीक्षा करें। राजनीतिक अस्थिरता वाले माहौल में शहरी स्थिरता पहलों की निरंतरता और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत और नीतिगत उपाय सुझाएं।
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 - शहरी शासन और पर्यावरण प्रबंधन
- झारखंड का परिप्रेक्ष्य: रांची और जमशेदपुर जैसे झारखंड के शहरी केंद्र PM-SHRI के संभावित उम्मीदवार हैं, इसलिए बंगाल, तमिलनाडु और केरल के अनुभव उपयोगी हैं।
- मुख्य बिंदु: राजनीतिक स्थिरता के शहरी परियोजनाओं पर प्रभाव और झारखंड के संदर्भ में केंद्र-राज्य समन्वय की जरूरत पर जवाब तैयार करें।
PM-SHRI के क्रियान्वयन का संवैधानिक आधार क्या है?
संविधान के अनुच्छेद 243W के तहत शहरी स्थानीय निकायों को शहरी विकास योजनाएं लागू करने का अधिकार दिया गया है, जो PM-SHRI के विकेंद्रीकृत क्रियान्वयन का संवैधानिक आधार है।
PM-SHRI भारत के जलवायु लक्ष्यों में कैसे योगदान देता है?
यह ऊर्जा-कुशल शहरी आवास को बढ़ावा देकर ऊर्जा खपत को 30% तक और शहरी कार्बन उत्सर्जन को 20-25% तक कम कर सकता है, जिससे भारत के जलवायु शमन लक्ष्यों में मदद मिलती है।
PM-SHRI के क्रियान्वयन में कौन-कौन सी संस्थाएं शामिल हैं?
मुख्य संस्थाओं में MoHUA (मुख्य एजेंसी), BEE (तकनीकी सहायता), राज्य शहरी विकास प्राधिकरण (स्थानीय क्रियान्वयन), NIUA (शोध), CPCB (पर्यावरण निगरानी) और नीति आयोग (नीति सलाह) शामिल हैं।
बंगाल, तमिलनाडु और केरल के लिए PM-SHRI के आर्थिक फायदे क्या हैं?
ये राज्य भारत की शहरी आबादी का 15% से अधिक हिस्सा हैं, जिनका सतत शहरी अवसंरचना बाजार ₹1.2 लाख करोड़ अनुमानित है, PM-SHRI हरित निवेश आकर्षित करता है और ऊर्जा लागत कम करता है।
सिंगापुर की ग्रीन मार्क सर्टिफिकेशन और PM-SHRI में क्या अंतर है?
सिंगापुर की योजना 2005 में शुरू हुई, जिसमें ग्रीन बिल्डिंग मानक अनिवार्य हैं और 2020 तक भवन ऊर्जा उपयोग में 40% कमी लाई गई, जो PM-SHRI के स्वैच्छिक रेटिंग मॉडल के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है।
आधिकारिक स्रोत एवं आगे पढ़ाई
लर्नप्रो संपादकीय मानकों के बारे में
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