सैन्य अभ्यास दोस्ती का परिचय
अभ्यास दोस्ती भारत और उज़्बेकिस्तान की सेनाओं के बीच होने वाला द्विपक्षीय संयुक्त सैन्य अभ्यास है। यह अभ्यास 2018 में शुरू हुआ और भारत तथा उज़्बेकिस्तान में बारी-बारी से आयोजित किया जाता है। इसका मुख्य फोकस आतंकवाद विरोधी अभियानों और पर्वतीय युद्ध कौशल पर होता है। 2023 के संस्करण में दोनों देशों की 300 से अधिक टुकड़ियाँ शामिल थीं, जिनका उद्देश्य जटिल भू-भाग में तालमेल और सामरिक समन्वय को बढ़ाना था (प्रेस सूचना ब्यूरो, रक्षा मंत्रालय, 2023)। यह अभ्यास भारत की मध्य एशिया में बढ़ती रक्षा कूटनीति का प्रतीक है, जो क्षेत्रीय भू-राजनीतिक बदलावों के बीच महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 3: सुरक्षा चुनौतियाँ, रक्षा सहयोग, अंतर्राष्ट्रीय संबंध
- GS पेपर 2: भारत की विदेश नीति, मध्य एशिया संबंध, रक्षा कूटनीति
- निबंध: मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक साझेदारियाँ और क्षेत्रीय सुरक्षा पर उनका प्रभाव
अभ्यास दोस्ती के कानूनी और संस्थागत ढांचे
द्विपक्षीय सैन्य अभ्यासों के लिए कोई विशेष संवैधानिक प्रावधान नहीं है, लेकिन भारतीय सशस्त्र बल Defence of India Act, 1917 और Indian Army Act, 1950 के तहत संचालित होते हैं, जो उनके संचालन की कानूनी आधारशिला प्रदान करते हैं। अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग, जिसमें अभ्यास दोस्ती भी शामिल है, रक्षा सहयोग समझौतों के माध्यम से रक्षा मंत्रालय द्वारा विनियमित होता है। रक्षा से जुड़ी सीमा पार वित्तीय लेनदेन Foreign Exchange Management Act (FEMA), 1999 के तहत नियंत्रित होती हैं।
- भारतीय सेना: अभ्यास दोस्ती के लिए संचालन योजना और टुकड़ी तैनाती का कार्य करती है।
- उज़्बेकिस्तान रक्षा मंत्रालय: उज़्बेक टुकड़ी की भागीदारी और लॉजिस्टिक्स का समन्वय करता है।
- भारत का रक्षा मंत्रालय: द्विपक्षीय रक्षा सहयोग नीति की निगरानी करता है।
- Integrated Defence Staff (IDS): संयुक्त संचालन योजना और तालमेल के ढांचे को सुविधाजनक बनाता है।
- विदेश मंत्रालय (MEA): कूटनीतिक पहलुओं का प्रबंधन करता है।
- SIPRI: रक्षा व्यय के रुझानों पर डेटा प्रदान करता है।
अभ्यास दोस्ती के आर्थिक पहलू
भारत का रक्षा बजट 2023-24 में ₹5.94 लाख करोड़ (लगभग 79 अरब अमेरिकी डॉलर) है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.4% अधिक है और इसमें संयुक्त सैन्य अभ्यासों व रक्षा कूटनीति के लिए आवंटन बढ़ाया गया है (संघीय बजट 2023)। उज़्बेकिस्तान का रक्षा व्यय 2023 में लगभग 1.2 अरब अमेरिकी डॉलर है, जो 2019 से प्रति वर्ष 5% की दर से बढ़ रहा है (SIPRI 2023)। ऐसे अभ्यास रक्षा निर्माण और प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान को बढ़ावा देते हैं, जो भारत के Make in India अभियान को मजबूती देते हैं और स्वदेशी रक्षा उत्पादन का समर्थन करते हैं।
- अभ्यास दोस्ती रक्षा प्रौद्योगिकी सहयोग और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देता है।
- रक्षा कूटनीति व्यापक आर्थिक संबंधों का उत्प्रेरक होती है; द्विपक्षीय व्यापार 2022 में 1.3 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचा (MEA भारत, 2023)।
- संयुक्त अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के आधुनिकीकरण और तालमेल में मदद करते हैं।
क्षेत्रीय सुरक्षा संरचना में रणनीतिक महत्व
अभ्यास दोस्ती भारत-उज़्बेकिस्तान सैन्य संबंधों को मजबूत करता है, जो मध्य एशिया में स्थिरता के लिए अहम है। यह क्षेत्र आतंकवाद, उग्रवाद और महाशक्तियों की प्रतिस्पर्धा जैसी जटिल सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है। यह अभ्यास दोनों सेनाओं की तालमेल क्षमता और सामरिक समन्वय को बढ़ाकर ट्रांसनेशनल खतरों का त्वरित मुकाबला संभव बनाता है। यह भारत की Connect Central Asia नीति के अनुरूप भी है, जो भारत को दक्षिण एशिया से बाहर एक सुरक्षा भागीदार के रूप में स्थापित करता है।
- आतंकवाद विरोधी और पर्वतीय युद्धकला पर केंद्रित, जो क्षेत्रीय सुरक्षा खतरों का समाधान करता है।
- रूस-चीन के प्रभाव के बीच भारत की मध्य एशिया में रणनीतिक उपस्थिति को मजबूत करता है।
- शंघाई सहयोग संगठन जैसे बहुपक्षीय सुरक्षा ढांचे का अप्रत्यक्ष समर्थन करता है।
अभ्यास दोस्ती और SCO के पीस मिशन की तुलना
| पैरामीटर | अभ्यास दोस्ती (भारत-उज़्बेकिस्तान) | पीस मिशन (SCO) |
|---|---|---|
| प्रकृति | द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास | SCO सदस्य देशों का बहुपक्षीय अभ्यास |
| पैमाना | लगभग 300 सैनिक (2023 संस्करण) | 10,000 से अधिक सैनिक |
| मुख्य क्षेत्र | आतंकवाद विरोधी, पर्वतीय युद्धकला | आतंकवाद विरोधी, संयुक्त संचालन तत्परता |
| भू-राजनीतिक प्रभाव | द्विपक्षीय रणनीतिक संबंध और मध्य एशिया में क्षेत्रीय सुरक्षा को बढ़ावा | SCO सदस्यों की सामूहिक सुरक्षा और शक्ति प्रदर्शन को प्रदर्शित करता है |
| संचालन क्षेत्र | द्विपक्षीय समन्वय और सामरिक तालमेल तक सीमित | बड़े पैमाने पर बहुपक्षीय समन्वय और जटिल संयुक्त संचालन |
भारत-उज़्बेकिस्तान सैन्य सहयोग में चुनौतियाँ
सहयोग बढ़ने के बावजूद, अभ्यास दोस्ती के पास कोई दीर्घकालिक रणनीतिक ढांचा या रक्षा संधि नहीं है। इससे संचालन की पूर्वानुमानिता कम होती है और संयुक्त अभियानों का दायरा मुख्यतः आतंकवाद विरोधी और पारंपरिक अभ्यासों तक सीमित रहता है। खुफिया जानकारी साझा करने या लॉजिस्टिक्स समर्थन के लिए संस्थागत व्यवस्था न होने से गहन एकीकरण में बाधा आती है। इसके अलावा, मध्य एशिया में रूस के पारंपरिक प्रभाव के कारण सैन्य संबंधों के विस्तार पर सीमाएं हैं।
- भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच कोई व्यापक रक्षा संधि या रणनीतिक साझेदारी समझौता नहीं है।
- संयुक्त अभ्यासों का दायरा सामरिक प्रशिक्षण तक सीमित है, न कि व्यापक संचालन तक।
- उज़्बेकिस्तान की भू-राजनीतिक संतुलन नीति गहरे सैन्य मेलजोल को सीमित करती है।
महत्व और आगे का रास्ता
- रणनीतिक रक्षा ढांचे को औपचारिक रूप देना संचालन की पूर्वानुमानिता और दायरे को बढ़ाएगा।
- साइबर युद्ध और खुफिया साझा करने जैसे क्षेत्रों में अभ्यास का विस्तार उभरती सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करेगा।
- रक्षा सहयोग का उपयोग स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किया जाना चाहिए, जो भारत के आर्थिक और रणनीतिक लक्ष्यों के अनुरूप होगा।
- उज़्बेकिस्तान को भारत की मध्य एशिया नीति में और मजबूती से शामिल करना क्षेत्रीय सुरक्षा संरचना को मजबूत करेगा।
- क्षेत्रीय भू-राजनीतिक दबावों का मुकाबला करने के लिए कूटनीतिक और सैन्य माध्यमों से निरंतर संवाद आवश्यक है।
- अभ्यास दोस्ती शंघाई सहयोग संगठन के तहत आयोजित एक बहुपक्षीय सैन्य अभ्यास है।
- इस अभ्यास का मुख्य फोकस आतंकवाद विरोधी और पर्वतीय युद्धकला पर है।
- यह 2018 में भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच द्विपक्षीय अभ्यास के रूप में शुरू हुआ था।
- Defence of India Act, 1917 द्विपक्षीय अभ्यासों के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों के संचालन को नियंत्रित करता है।
- Foreign Exchange Management Act, 1999 रक्षा से जुड़ी सीमा पार वित्तीय लेनदेन को विनियमित करता है।
- भारतीय संविधान विदेशी देशों के साथ द्विपक्षीय सैन्य अभ्यासों को स्पष्ट रूप से अनिवार्य करता है।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
मुख्य प्रश्न
भारत की मध्य एशिया नीति के संदर्भ में सैन्य अभ्यास दोस्ती के रणनीतिक महत्व पर चर्चा करें। यह क्षेत्रीय सुरक्षा और भारत की रक्षा कूटनीति में कैसे योगदान देता है? (250 शब्द)
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 (अंतर्राष्ट्रीय संबंध और सुरक्षा), पेपर 3 (रक्षा और रणनीतिक अध्ययन)
- झारखंड का पहलू: झारखंड में कई भारतीय सेना के प्रशिक्षण केंद्र और रक्षा निर्माण इकाइयाँ हैं जो संयुक्त अभ्यासों और स्वदेशी उत्पादन में योगदान देती हैं।
- मुख्य बिंदु: भारत की पड़ोसी देशों से परे रणनीतिक पहुंच को उजागर करते हुए रक्षा कूटनीति को झारखंड जैसे रक्षा निर्माण वाले राज्यों के आर्थिक लाभ से जोड़कर उत्तर तैयार करें।
अभ्यास दोस्ती का मुख्य फोकस क्या है?
अभ्यास दोस्ती का मुख्य फोकस भारतीय और उज़्बेक सेनाओं के बीच आतंकवाद विरोधी अभियानों और पर्वतीय युद्ध प्रशिक्षण पर है, जिससे कठिन भू-भाग में सामरिक तालमेल बढ़ता है।
अभ्यास दोस्ती कब शुरू हुआ था?
अभ्यास दोस्ती 2018 में भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास के रूप में शुरू हुआ था।
ऐसे द्विपक्षीय अभ्यासों के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों के संचालन के लिए कौन से कानून लागू होते हैं?
Defence of India Act, 1917 और Indian Army Act, 1950 भारतीय सशस्त्र बलों के संचालन के लिए कानूनी आधार प्रदान करते हैं।
अभ्यास दोस्ती और SCO के पीस मिशन में क्या अंतर है?
अभ्यास दोस्ती एक द्विपक्षीय अभ्यास है जिसमें लगभग 300 सैनिक शामिल होते हैं और इसका फोकस आतंकवाद विरोधी व पर्वतीय युद्धकला पर है, जबकि SCO का पीस मिशन एक बड़े पैमाने का बहुपक्षीय अभ्यास है जिसमें 10,000 से अधिक सैनिक शामिल होते हैं और संयुक्त संचालन तत्परता पर जोर देता है।
अभ्यास दोस्ती का भारत की मध्य एशिया नीति में क्या महत्व है?
अभ्यास दोस्ती भारत-उज़्बेकिस्तान के रक्षा संबंधों को मजबूत करता है, क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देता है और भारत की Connect Central Asia नीति के तहत भारत को मध्य एशिया में एक सुरक्षा भागीदार के रूप में स्थापित करता है।
आधिकारिक स्रोत एवं आगे पढ़ाई
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