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परिचय: मेहर बाबा प्रतियोगिता-3 का परिचय

मेहर बाबा प्रतियोगिता-3 को 2023 में रक्षा नवाचार संगठन (DIO) ने रक्षा मंत्रालय (MoD) के अंतर्गत शुरू किया, जिसका उद्देश्य भारतीय स्टार्टअप, अकादमिक संस्थान और उद्योग से उन्नत रक्षा तकनीकों की पहचान और विकास करना है। यह प्रतियोगिता स्वदेशी रक्षा तकनीक के विकास को तेज करने के लिए आयोजित की गई तीसरी बार है। पिछले संस्करण की तुलना में 25% अधिक, 500 से अधिक स्टार्टअप्स ने भाग लिया, जो रक्षा नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में बढ़ती रुचि को दर्शाता है (MoD वार्षिक रिपोर्ट 2023)। यह पहल आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के अनुरूप है, जो रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता और आयात पर निर्भरता कम करने पर जोर देती है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: रक्षा उत्पादन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास
  • GS पेपर 2: रक्षा नवाचार में सरकारी नीतियों की भूमिका
  • निबंध: आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी रक्षा क्षमताएं

रक्षा नवाचार के लिए कानूनी और संवैधानिक ढांचा

मेहर बाबा प्रतियोगिता-3 रक्षा खरीद प्रक्रिया (DPP) 2020 और रक्षा उत्पादन नीति 2018 के तहत संचालित होती है, जो स्वदेशीकरण और नवाचार को प्राथमिकता देती हैं। रक्षा अधिनियम, 1962 की धारा 18 केंद्र सरकार को रक्षा उत्पादन और खरीद को नियंत्रित करने का अधिकार देती है। संविधान के अनुच्छेद 246 और 248 के तहत रक्षा से जुड़े मामलों में संघ को विशेष विधायी अधिकार प्राप्त हैं, जिससे रक्षा मंत्रालय के माध्यम से केंद्रीय नीति निर्धारण संभव होता है। रक्षा मंत्रालय की गाइडलाइंस नवाचार चुनौतियों और सार्वजनिक-निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करती हैं ताकि स्वदेशी तकनीक विकास को बढ़ावा मिले।

  • DPP 2020 में खरीद में मेक इन इंडिया और स्वदेशी सामग्री को प्राथमिकता देना अनिवार्य है।
  • रक्षा उत्पादन नीति 2018 का लक्ष्य 2025 तक स्वदेशी रक्षा निर्माण को 70% तक बढ़ाना है।
  • रक्षा अधिनियम की धारा 18 सरकार को रक्षा नवाचार और उत्पादन पर नियंत्रण देती है।
  • रक्षा मंत्रालय की गाइडलाइंस मेहर बाबा प्रतियोगिता जैसी नवाचार चुनौतियों को संस्थागत बनाती हैं।

आर्थिक पहलू: बजट, स्वदेशी उत्पादन और निर्यात

भारत का रक्षा बजट 2023-24 लगभग INR 5.94 लाख करोड़ (~USD 80 बिलियन) है, जो आधुनिकीकरण और नवाचार को समर्थन देने के लिए निरंतर बढ़ रहा है (संघीय बजट 2023-24)। स्वदेशी रक्षा उत्पादन 2015 में 40% से बढ़कर 2023 में 55% हो चुका है, और 2025 तक इसे 70% तक पहुंचाने का लक्ष्य है (MoD वार्षिक रिपोर्ट 2023)। रक्षा निर्यात वित्तीय वर्ष 2022-23 में USD 1.5 बिलियन तक पहुंच गया, जो पिछले पांच वर्षों में 20% की CAGR से बढ़ा है, और 2025 तक USD 25 बिलियन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है (रक्षा निर्यात संवर्धन नीति 2020)। मेहर बाबा प्रतियोगिता-3 इस दिशा में स्टार्टअप्स और अकादमिक संस्थानों को नवाचारों को व्यावसायिक और निर्यात योग्य उत्पादों में बदलने का अवसर देती है।

  • DRDO का R&D बजट 2023-24 में 15% बढ़कर INR 12,000 करोड़ हो गया, जिससे स्वदेशी नवाचार को अधिक वित्तीय समर्थन मिला।
  • रक्षा क्षेत्र के स्टार्टअप्स 2018 में 50 से बढ़कर 2023 में 300 से अधिक हो गए, जो पारिस्थितिकी तंत्र की परिपक्वता दर्शाता है (DPIIT Startup India रिपोर्ट 2023)।
  • भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम मिसाइल प्रणालियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो स्वदेशी R&D से विकसित होती हैं।

संस्थागत संरचना: प्रतियोगिता और रक्षा नवाचार का संचालन

मेहर बाबा प्रतियोगिता-3 का समन्वय रक्षा नवाचार संगठन (DIO) करता है, जो रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), रक्षा मंत्रालय और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग को जोड़ता है। DRDO R&D और तकनीकी सत्यापन का नेतृत्व करता है, जबकि रक्षा मंत्रालय नीति निगरानी और खरीद में सुविधा देता है। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए वित्तीय और नियामक सहायता प्रदान करता है। भारतीय सेना अंतिम उपयोगकर्ता और मूल्यांकनकर्ता के रूप में कार्य करती है, यह सुनिश्चित करते हुए कि नवाचार परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करें।

  • DRDO: रक्षा R&D का प्रमुख एजेंसी, तकनीक विकास और परीक्षण जिम्मेदार।
  • MoD: नीति निर्धारण, खरीद और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का संचालन।
  • DPIIT: स्टार्टअप को सुविधा, वित्तपोषण और व्यवसाय में आसानी प्रदान करता है।
  • DIO: नवाचार चुनौतियों का समन्वय, खोज और इनक्यूबेशन।
  • भारतीय सेना: परिचालन मूल्यांकन और प्रोटोटाइप सुधार के लिए प्रतिक्रिया।

तुलनात्मक विश्लेषण: मेहर बाबा प्रतियोगिता-3 बनाम अमेरिकी रक्षा नवाचार इकाई (DIU)

पहुलुमेहर बाबा प्रतियोगिता-3 (भारत)डिफेंस इनोवेशन यूनिट (DIU) (यूएसए)
शुरुआत का वर्ष2023 (तीसरा संस्करण)2015
ध्यान केंद्रितघरेलू स्टार्टअप और अकादमी, स्वदेशी तकनीक विकासव्यावसायिक तकनीक अपनाना, वैश्विक तकनीक खोज
वित्त पोषण का पैमानाप्रारंभिक नवाचार अनुदान सीमित; DRDO R&D बजट INR 12,000 करोड़2015 से USD 1 बिलियन से अधिक अनुबंध
नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की परिपक्वतानवजात लेकिन तेजी से बढ़ रहा; 300+ रक्षा स्टार्टअप्स (2023)स्थापित और परिपक्व निजी क्षेत्र सहयोग
रणनीतिक उद्देश्यआत्मनिर्भर भारत, रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरतासैन्य उपयोग के लिए व्यावसायिक तकनीक का तेजी से अपनाना

मेहर बाबा प्रतियोगिता-3 पारिस्थितिकी तंत्र में प्रमुख चुनौतियां

भागीदारी बढ़ने के बावजूद, प्रोटोटाइप से परिचालन तैनाती तक का संक्रमण एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। प्रारंभिक नवाचार चरण के बाद वित्त पोषण सीमित है, जिससे उत्पादन और पैमाने पर विस्तार में बाधा आती है। तकनीक हस्तांतरण और रक्षा खरीद चक्र के साथ एकीकृत करने के लिए स्पष्ट मार्ग नहीं हैं। कई स्टार्टअप नवाचार निर्माण तक सीमित रह जाते हैं, जिससे पूर्ण क्षमता विकास में कमी रहती है और रक्षा तैयारियों पर प्रभाव सीमित होता है।

  • प्रोटोटाइप के बाद वित्त पोषण की कमी व्यावसायीकरण और बड़े पैमाने पर उत्पादन को रोकती है।
  • स्पष्ट तकनीकी संक्रमण ढांचे का अभाव तैनाती में देरी करता है।
  • प्रारंभिक चरणों के बाद उद्योग-अकादमी-सरकार समन्वय सीमित है।
  • खरीद प्रक्रियाएं तेज नवाचार अपनाने में बाधक हैं।

महत्व और आगे का रास्ता

मेहर बाबा प्रतियोगिता-3 भारत के आत्मनिर्भर भारत के तहत स्वदेशी रक्षा नवाचार की रणनीतिक दिशा को दर्शाती है। यह रक्षा नवाचार पाइपलाइन को मजबूत करती है, स्टार्टअप भागीदारी बढ़ाती है और स्वदेशी उत्पादन व निर्यात के राष्ट्रीय लक्ष्यों के साथ मेल खाती है। नवाचारों को परिचालन क्षमता में बदलने के लिए वित्त पोषण और तकनीकी संक्रमण की चुनौतियों को दूर करना आवश्यक है। DRDO, उद्योग और सशस्त्र बलों के बीच बेहतर सहयोग और खरीद नीतियों में सुधार इस गति को बनाए रखने के लिए जरूरी होंगे।

  • प्रोटोटाइप के बाद विकास और पैमाने के लिए समर्पित वित्त पोषण व्यवस्था बनाएं।
  • स्टार्टअप्स के लिए तकनीकी संक्रमण और खरीद के सुगम मार्ग बनाएं।
  • प्रतियोगिताओं के बाहर उद्योग-अकादमी-सैन्य सहयोग मंचों को मजबूत करें।
  • तेजी से नवाचार अपनाने के लिए लचीली खरीद नीतियां अपनाएं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
मेहर बाबा प्रतियोगिता-3 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. यह रक्षा नवाचार संगठन के तहत स्वदेशी रक्षा तकनीकों को बढ़ावा देने की पहल है।
  2. यह प्रतियोगिता मुख्य रूप से वैश्विक रक्षा कंपनियों से तकनीक प्राप्त करती है ताकि तेजी से अपनाने को बढ़ावा मिले।
  3. इस प्रतियोगिता के नीति ढांचे की देखरेख रक्षा मंत्रालय करता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 2 गलत है क्योंकि मेहर बाबा प्रतियोगिता-3 घरेलू स्टार्टअप और अकादमी पर केंद्रित है, न कि वैश्विक कंपनियों पर। कथन 1 और 3 सही हैं क्योंकि यह प्रतियोगिता DIO के अंतर्गत है और रक्षा मंत्रालय की नीति द्वारा संचालित है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
रक्षा खरीद प्रक्रिया (DPP) 2020 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. DPP 2020 में 2025 तक रक्षा खरीद में न्यूनतम 70% स्वदेशी सामग्री अनिवार्य है।
  2. DPP 2020 रक्षा अनुबंधों में मेक इन इंडिया पहलों को प्राथमिकता देता है।
  3. DPP 2020 रक्षा अधिनियम, 1962 की धारा 18 के तहत विधायिका द्वारा पारित है।
  • aकेवल 1 और 3
  • bकेवल 2
  • cकेवल 2 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि 70% स्वदेशी सामग्री लक्ष्य है, DPP 2020 में अनिवार्य न्यूनतम नहीं। कथन 3 गलत है क्योंकि DPP नीति है, यह धारा 18 के तहत विधायिका द्वारा पारित नहीं। कथन 2 सही है।

मेन्स प्रश्न

मेहर बाबा प्रतियोगिता-3 कैसे भारत की स्वदेशी रक्षा नवाचार की रणनीतिक प्राथमिकता को दर्शाती है और इसका रक्षा तैयारियों तथा आर्थिक विकास पर क्या प्रभाव पड़ता है, इस पर चर्चा करें। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (शासन और सार्वजनिक नीति) – रक्षा नवाचार और औद्योगिक विकास
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड के उभरते स्टार्टअप और औद्योगिक क्लस्टर रक्षा नवाचार चुनौतियों में भाग लेकर राज्य के आर्थिक विकास में योगदान दे सकते हैं।
  • मेन्स संकेत: राज्य स्तरीय नवाचार केंद्रों और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों की भूमिका को उजागर करते हुए उत्तर तैयार करें जो आत्मनिर्भर भारत के रक्षा लक्ष्यों का समर्थन करते हैं।
मेहर बाबा प्रतियोगिता-3 का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय स्टार्टअप, अकादमी और उद्योग द्वारा विकसित स्वदेशी रक्षा तकनीकों की पहचान और संवर्धन करना है ताकि आत्मनिर्भर भारत के तहत आत्मनिर्भरता बढ़ाई जा सके।

मेहर बाबा प्रतियोगिता-3 का समन्वय कौन करता है?

रक्षा नवाचार संगठन (DIO), जो रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करता है, मेहर बाबा प्रतियोगिता-3 का समन्वय करता है।

भारतीय रक्षा निर्माण में स्वदेशी सामग्री में हाल ही में क्या बदलाव आया है?

स्वदेशी सामग्री 2015 में 40% से बढ़कर 2023 में 55% हो गई है, और 2025 तक इसे 70% तक पहुंचाने का लक्ष्य है (MoD वार्षिक रिपोर्ट 2023)।

मेहर बाबा प्रतियोगिता-3 से निकले नवाचारों को किन प्रमुख चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?

प्रमुख चुनौतियों में प्रारंभिक चरण के बाद सीमित वित्त पोषण, तकनीकी संक्रमण के लिए स्पष्ट मार्ग का अभाव, और रक्षा खरीद में नवाचारों के समावेशन में कठिनाई शामिल हैं।

मेहर बाबा प्रतियोगिता-3 अमेरिकी रक्षा नवाचार इकाई से कैसे भिन्न है?

मेहर बाबा प्रतियोगिता-3 नवजात है, घरेलू नवाचार और आत्मनिर्भरता पर केंद्रित है, जबकि अमेरिकी DIU एक परिपक्व पारिस्थितिकी तंत्र है, वैश्विक तकनीक खोज करता है और 2015 से USD 1 बिलियन से अधिक के अनुबंध कर चुका है।

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