भारत में मातृ मृत्यु की स्थिति का अवलोकन
लैंसेट अध्ययन (2024) के अनुसार, भारत की मातृ मृत्यु दर (MMR) 2030 तक 100,000 जीवित जन्मों पर 85 तक कम होने का अनुमान है, जो सतत विकास लक्ष्य (SDG) 3.1 के 70 के लक्ष्य से कम है। Registrar General of India (RGI) के Sample Registration System (SRS) के आंकड़ों के मुताबिक भारत की MMR 2014-16 में 130 से घटकर 2017-19 में 103 हो चुकी है। हालांकि सुधार हुआ है, लेकिन राज्यों के बीच बड़ी असमानताएं बनी हुई हैं, जहां केरल की MMR 46 है और असम की 215 (NFHS-5, 2019-21) दर्ज की गई है। अध्ययन में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, सामाजिक-आर्थिक कारणों और देखभाल की गुणवत्ता में बाधाओं को प्रमुख चुनौती बताया गया है, जो भारत को SDG लक्ष्यों तक पहुंचने से रोक रही हैं।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 2: शासन - स्वास्थ्य नीतियां, SDG, स्वास्थ्य से जुड़े संवैधानिक अधिकार (Article 21)
- GS पेपर 3: आर्थिक विकास - स्वास्थ्य व्यय, मातृ मृत्यु के आर्थिक प्रभाव
- निबंध: सार्वजनिक स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, सतत विकास
मातृ स्वास्थ्य से जुड़ा संवैधानिक और कानूनी ढांचा
संविधान का Article 21 जीवन के अधिकार की गारंटी देता है, जिसमें मातृ स्वास्थ्य भी शामिल है। Ministry of Health and Family Welfare (MoHFW) के अंतर्गत National Health Mission (NHM) मातृ स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाएं जैसे जननी सुरक्षा योजना लागू करता है। Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques (PCPNDT) Act, 1994 (संशोधित 2003) महिला भ्रूण हत्या को रोकने के लिए है, जो लिंग भेदभाव को कम कर मातृ स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर डालता है। सुप्रीम कोर्ट ने Common Cause बनाम Union of India (2018) मामले में प्रजनन अधिकारों को निजता और गरिमा के अधिकार के हिस्से के रूप में मान्यता दी, जिससे मातृ स्वास्थ्य की सुरक्षा मजबूत हुई।
भारत में मातृ मृत्यु के आर्थिक पहलू
वित्त वर्ष 2023-24 में भारत ने NHM के लिए ₹34,932 करोड़ (~USD 4.7 बिलियन) आवंटित किए, जिसमें मातृ और बाल स्वास्थ्य पर खास ध्यान है। World Bank (2022) का अनुमान है कि मातृ मृत्यु और बीमारी से उच्च बोझ वाले राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश और बिहार में GDP विकास दर 1-2% कम होती है। WHO (2019) के अनुसार मातृ स्वास्थ्य में निवेश से 9:1 का लाभ होता है, जिससे उत्पादकता बढ़ती है और स्वास्थ्य व्यय घटता है। फिर भी, NITI Aayog 2023 की रिपोर्ट बताती है कि 62% खर्च जेब से होता है, जो गुणवत्तापूर्ण मातृ देखभाल तक पहुंच में बाधा है।
संस्थागत भूमिकाएं और आंकड़ों की निगरानी
- MoHFW: मातृ स्वास्थ्य योजनाओं की नीति बनाना और लागू करना।
- NITI Aayog: SDG प्रगति की निगरानी, जिसमें MMR लक्ष्य भी शामिल हैं।
- NHSRC: स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने में तकनीकी सहयोग।
- WHO: वैश्विक मानक और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करना।
- RGI: SRS के जरिए MMR डेटा संग्रह।
- UNICEF: मातृ और बाल स्वास्थ्य कार्यक्रमों का समर्थन।
मातृ मृत्यु और देखभाल के प्रमुख आंकड़े
- MMR 2014-16 में 130 से घटकर 2017-19 में 103 हो गई (SRS, RGI)।
- 2030 में MMR का अनुमान 85 है, जो SDG लक्ष्य 70 से कम है (Lancet 2024)।
- राज्यों में अंतर: केरल 46 बनाम असम 215 (NFHS-5, 2019-21)।
- केवल 58% गर्भवती महिलाओं को पूर्ण एंटीनेटल केयर (ANC) मिला (NFHS-5)।
- राष्ट्रीय स्तर पर संस्थागत प्रसव दर 89% तक बढ़ी (NFHS-5)।
- मातृ मृत्यु के 40% मामले एनीमिया और उच्च रक्तचाप जैसे अप्रत्यक्ष कारणों से होते हैं (Lancet 2024)।
तुलनात्मक अध्ययन: भारत बनाम इथियोपिया की मातृ मृत्यु दर में कमी
इथियोपिया ने 2000 में 871 से घटाकर 2017 में 401 तक MMR कम की, जो 17 वर्षों में 54% की गिरावट है, मुख्य रूप से सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता कार्यक्रम और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा विस्तार के कारण। वहीं भारत की इसी अवधि में 21% की गिरावट धीमी रही, जिसका कारण कमजोर आधारभूत स्वास्थ्य संरचना और सामाजिक-आर्थिक असमानताएं मानी जाती हैं।
| सूचकांक | भारत (2017-19) | इथियोपिया (2017) | मुख्य हस्तक्षेप |
|---|---|---|---|
| MMR (100,000 जीवित जन्मों पर) | 103 | 401 | सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता, प्राथमिक देखभाल विस्तार |
| संस्थागत प्रसव दर | 89% | 28% | प्रोत्साहन और अवसंरचना |
| पूर्ण एंटीनेटल केयर कवरेज | 58% | 32% | प्रसार और शिक्षा |
| स्वास्थ्य व्यय (% GDP) | 1.3% | 1.2% | मातृ स्वास्थ्य में केंद्रित निवेश |
भारत की मातृ स्वास्थ्य रणनीति में प्रमुख कमियां
- केवल संस्थागत प्रसव पर जोर देने से देखभाल की गुणवत्ता और प्रसवोत्तर देखभाल की अनदेखी होती है।
- कुपोषण और एनीमिया जैसे सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाएं पर्याप्त रूप से नहीं सुलझाई गई हैं।
- एनीमिया और उच्च रक्तचाप जैसे अप्रत्यक्ष कारण मातृ मृत्यु के 40% मामलों के लिए जिम्मेदार हैं, लेकिन नीति में इन पर कम ध्यान दिया जाता है।
- उच्च जेब से खर्च मातृ स्वास्थ्य सेवा तक समान पहुंच को सीमित करता है।
- स्वास्थ्य सुविधाओं और सामाजिक-आर्थिक स्थिति में क्षेत्रीय असमानताएं बनी हुई हैं।
आगे का रास्ता: 2030 के लक्ष्य हासिल करने के लिए ठोस कदम
- गर्भावस्था, प्रसव और प्रसवोत्तर काल में देखभाल की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए प्रोटोकॉल मजबूत करें।
- अल्पसंसाधित क्षेत्रों में पहुंच बढ़ाने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता कार्यक्रम का विस्तार करें।
- मातृ स्वास्थ्य पहलों के साथ पोषण और एनीमिया नियंत्रण कार्यक्रमों को जोड़ें।
- स्वास्थ्य व्यय में सार्वजनिक निवेश बढ़ाकर जेब से खर्च कम करें।
- जिला स्तर पर मातृ स्वास्थ्य संकेतकों की रियल-टाइम निगरानी के लिए डेटा सिस्टम को बेहतर बनाएं।
- MMR को 100,000 जीवित जन्मों पर मातृ मृत्यु की संख्या के रूप में परिभाषित किया जाता है।
- MMR में गर्भावस्था के दौरान एनीमिया और उच्च रक्तचाप जैसे अप्रत्यक्ष कारणों से हुई मौतें शामिल होती हैं।
- MMR और शिशु मृत्यु दर (IMR) एक जैसे स्वास्थ्य परिणाम मापते हैं।
- PCPNDT Act का उद्देश्य प्रीनेटल डायग्नोस्टिक तकनीकों को नियंत्रित कर महिला भ्रूण हत्या रोकना है।
- यह अधिनियम सीधे मातृ मृत्यु दर कम करने के लिए संस्थागत प्रसव को अनिवार्य करता है।
- इस अधिनियम में 2003 में संशोधन किया गया था ताकि इसके प्रावधानों को मजबूत किया जा सके।
इनमें से कौन सा/से कथन सही हैं?
प्रश्न (Mains)
2030 तक मातृ मृत्यु दर के सतत विकास लक्ष्य को पूरा करने में भारत को किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है? इन चुनौतियों से निपटने के लिए आप कौन-कौन से नीतिगत उपाय सुझाएंगे, इसका समालोचनात्मक विश्लेषण करें।
भारत की मातृ मृत्यु दर की वर्तमान स्थिति क्या है?
Registrar General of India के Sample Registration System (SRS) के आंकड़ों के अनुसार, भारत की MMR 2017-19 में 100,000 जीवित जन्मों पर 103 हो गई है, जो 2014-16 में 130 थी।
भारत में मातृ स्वास्थ्य को कौन सा संवैधानिक प्रावधान अप्रत्यक्ष रूप से कवर करता है?
भारतीय संविधान का Article 21, जो जीवन के अधिकार की गारंटी देता है, अप्रत्यक्ष रूप से मातृ स्वास्थ्य और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को भी शामिल करता है।
मातृ स्वास्थ्य में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की क्या भूमिका है?
National Health Mission (NHM), Ministry of Health and Family Welfare के अंतर्गत, गर्भावस्था देखभाल, संस्थागत प्रसव और प्रसवोत्तर सेवाओं सहित मातृ मृत्यु दर कम करने के कार्यक्रम लागू करता है।
सामाजिक-आर्थिक असमानता भारत में मातृ मृत्यु दर को कैसे प्रभावित करती है?
सामाजिक-आर्थिक असमानताएं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा, पोषण और शिक्षा तक समान पहुंच में बाधा डालती हैं, जिसके कारण बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे गरीब राज्यों में मातृ मृत्यु दर केरल जैसे बेहतर राज्यों की तुलना में अधिक होती है।
लैंसेट अध्ययन में मातृ मृत्यु के अप्रत्यक्ष कारण कौन-कौन से बताए गए हैं?
लैंसेट अध्ययन के अनुसार, मातृ मृत्यु के 40% मामले एनीमिया और उच्च रक्तचाप जैसे अप्रत्यक्ष कारणों से होते हैं, जिन्हें वर्तमान मातृ स्वास्थ्य नीतियों में पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है।
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