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अप्रैल 2024 में मणिपुर में कूकी और नागा जातीय समूहों के बीच फिर से हिंसक झड़पें हुईं, जिनमें तीन लोगों की जान गई। यह हिंसा मुख्य रूप से पहाड़ी जिलों में केंद्रित रही है और 2023 से अब तक 10,000 से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं, जिससे क्षेत्र की पुरानी जातीय दरारें और गहरी हो गई हैं। यह संघर्ष मणिपुर में जनजातीय स्वायत्तता और जातीय शिकायतों को संबोधित करने में मौजूदा संवैधानिक प्रावधानों और शासन तंत्र की सीमाओं को उजागर करता है।

कूकी-नागा संघर्ष यह दर्शाता है कि Article 371C और Manipur (Hill Areas) District Councils Act, 1971 के तहत विशेष संवैधानिक सुरक्षा पहाड़ी जनजातियों को पर्याप्त स्वायत्तता देने में असफल रहे हैं। असम और मेघालय की तरह मणिपुर को Sixth Schedule के दायरे में शामिल नहीं किया गया है, जो जनजातीय क्षेत्रों को अधिक स्वशासन प्रदान करता है। इससे शासन में खामियां पैदा होती हैं जो तनावों को बढ़ावा देती हैं। Armed Forces (Special Powers) Act, 1958 (AFSPA) के तहत सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद संघर्ष का समाधान नहीं हो पाया है, जिससे सुरक्षा, विकास और राजनीतिक संवाद का संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत स्पष्ट होती है।

UPSC Relevance

  • GS Paper 2: शासन, संविधान (Article 371C, Sixth Schedule), आंतरिक सुरक्षा (AFSPA)
  • GS Paper 3: आर्थिक विकास (जातीय संघर्ष का व्यापार और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव)
  • Essay: पूर्वोत्तर भारत में जातीय संघर्ष और स्वायत्तता की मांगें

मणिपुर के संवैधानिक और कानूनी ढांचे का अवलोकन

मणिपुर पर Article 371C लागू है, जो विशेष प्रावधानों के साथ-साथ Manipur (Hill Areas) District Councils Act, 1971 के तहत स्वायत्त जिला परिषदों की स्थापना करता है। ये परिषदें मुख्य रूप से कूकी और नागा जैसे जनजातीय समुदायों द्वारा आबाद पहाड़ी इलाकों का प्रशासन करती हैं। लेकिन असम और मेघालय के विपरीत, मणिपुर को Sixth Schedule के अंतर्गत नहीं लाया गया है, जो जनजातीय परिषदों को संवैधानिक सुरक्षा और अधिक स्वायत्तता देता है।

  • Sixth Schedule का अभाव मणिपुर के पहाड़ी जनजातियों के लिए संस्थागत स्वायत्तता और स्वशासन की शक्तियों को सीमित करता है।
  • AFSPA 1980 से सेक्शन 4 के तहत लागू है ताकि उग्रवाद और जातीय हिंसा के बीच कानून व्यवस्था बनाए रखी जा सके।
  • सुप्रीम कोर्ट के फैसलों, विशेषकर Naga People’s Movement of Human Rights v. Union of India (1997), में जातीय संघर्षों में सैन्य कार्रवाई की बजाय राजनीतिक संवाद पर जोर दिया गया है।

कूकी-नागा संघर्ष का आर्थिक प्रभाव

मणिपुर की अर्थव्यवस्था, जिसका 2022-23 में सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) लगभग ₹19,000 करोड़ था (Economic Survey of Manipur, 2023), बार-बार होने वाली जातीय हिंसा से काफी प्रभावित हो रही है। यह संघर्ष स्थानीय बाजारों और म्यांमार के साथ महत्वपूर्ण इम्फाल-मोरेह व्यापार मार्ग को बाधित करता है, जो सालाना ₹2,000 करोड़ से अधिक के व्यापार का संचालन करता है (Ministry of Commerce, 2023)।

  • बार-बार होने वाली झड़पें सीमा पार व्यापार को प्रभावित करती हैं, जिससे लोगों की आजीविका और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बाधित होती है।
  • राज्य का आंतरिक सुरक्षा बजट 2023-24 में 15% बढ़कर ₹450 करोड़ हो गया है, ताकि उग्रवाद से निपटा जा सके और कानून व्यवस्था बनाए रखी जा सके।
  • पर्यटन, जो मणिपुर की अर्थव्यवस्था में लगभग 3% का योगदान देता है, 2023 में अस्थिरता के कारण सिर्फ 1.2% की वृद्धि दर्ज कर पाया (Ministry of Tourism, 2023)।

संघर्ष प्रबंधन में शामिल प्रमुख संस्थाएं

मणिपुर के संघर्ष क्षेत्र में कई संस्थाएं सक्रिय हैं। मणिपुर पुलिस सामान्य कानून व्यवस्था संभालती है, जबकि भारतीय सेना AFSPA के तहत उग्रवाद के खिलाफ तैनात है। मणिपुर स्वायत्त जिला परिषदें पहाड़ी जनजातियों को सीमित स्वशासन देती हैं, लेकिन उनकी संवैधानिक मजबूती कम है।

  • गृह मंत्रालय (MHA) आंतरिक सुरक्षा और संघर्ष समाधान रणनीतियों की देखरेख करता है।
  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) हिंसा के दौरान मानवाधिकार उल्लंघनों की निगरानी करता है।
  • नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल (NEC) क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देता है, लेकिन जातीय शिकायतों को संबोधित करने में चुनौतियों का सामना करता है।

तुलनात्मक विश्लेषण: मणिपुर बनाम तुर्की में कुर्द संघर्ष

पहलूमणिपुर (कूकी-नागा संघर्ष)तुर्की (कुर्द संघर्ष)
स्वायत्तता ढांचाArticle 371C के तहत सीमित स्वायत्तता, Sixth Schedule नहींराजनीतिक सुधारों के जरिए सीमित सांस्कृतिक स्वायत्तता
सुरक्षा उपाय1980 से AFSPA, भारी सैन्य उपस्थितिसैन्य कार्रवाई के साथ राजनीतिक संवाद
संघर्ष समाधानमुख्य रूप से सुरक्षा-केंद्रित, सीमित राजनीतिक समायोजनसमेकित दृष्टिकोण से 2015-2020 के बीच हिंसा में 40% कमी
आर्थिक प्रभावमोरेह सीमा पर व्यापार बाधित, पर्यटन में गिरावटसुरक्षा प्रयासों के साथ आर्थिक विकास कार्यक्रम

तुर्की का उदाहरण दिखाता है कि सैन्य कार्रवाई के साथ राजनीतिक सुधार और सीमित स्वायत्तता देने से जातीय हिंसा को कम किया जा सकता है। मणिपुर में AFSPA पर अधिक निर्भरता और राजनीतिक समायोजन की कमी जनजातीय समुदायों में अलगाव को बढ़ाती है।

महत्वपूर्ण नीति अंतराल और चुनौतियां

मणिपुर में Sixth Schedule की सुरक्षा का अभाव एक बुनियादी शासन समस्या है। इससे पहाड़ी जनजातियों को संस्थागत स्वायत्तता नहीं मिल पाती, जो कूकी और नागा के बीच जातीय तनाव को बढ़ाती है। AFSPA के तहत सुरक्षा-केंद्रित रणनीति ने राजनीतिक और सामाजिक-आर्थिक शिकायतों का समाधान नहीं किया है।

  • स्वायत्त जिला परिषदों के सीमित अधिकार प्रभावी स्वशासन में बाधा हैं।
  • 2023 में 35 से अधिक हिंसक घटनाएं कानून व्यवस्था और राजनीतिक संवाद की विफलता को दर्शाती हैं।
  • 2023 से 10,000 से अधिक लोगों का विस्थापन मानवीय संकट को और गंभीर बनाता है (UNHCR India, 2024)।

आगे का रास्ता: सुरक्षा, विकास और संवाद का संतुलन

  • मणिपुर के पहाड़ी इलाकों में जनजातीय स्वायत्तता बढ़ाने के लिए Sixth Schedule या समान संवैधानिक सुरक्षा का विस्तार करने पर विचार करें।
  • AFSPA पर निर्भरता कम कर कूकी और नागा नेताओं को शामिल करते हुए निरंतर राजनीतिक संवाद शुरू करें।
  • स्वायत्त जिला परिषदों की प्रशासनिक और वित्तीय क्षमताओं को मजबूत करें।
  • इम्फाल-मोरेह जैसे व्यापार मार्गों की सुरक्षा कर आर्थिक विकास को बढ़ावा दें और स्थिरता से पर्यटन को पुनर्जीवित करें।
  • MHA, NEC, NHRC और राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाकर समग्र संघर्ष समाधान सुनिश्चित करें।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
मणिपुर में जनजातीय स्वायत्तता के संवैधानिक प्रावधानों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. मणिपुर भारतीय संविधान की Sixth Schedule के अंतर्गत आता है।
  2. Article 371C में मणिपुर के लिए स्वायत्त जिला परिषदों सहित विशेष प्रावधान हैं।
  3. Manipur (Hill Areas) District Councils Act, 1971 मणिपुर में स्वायत्त परिषदों को नियंत्रित करता है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि मणिपुर Sixth Schedule के अंतर्गत नहीं आता। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि Article 371C और 1971 का अधिनियम विशेष प्रावधान और स्वायत्त जिला परिषदें प्रदान करते हैं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
मणिपुर में Armed Forces (Special Powers) Act (AFSPA) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. AFSPA 1980 से सेक्शन 4 के तहत मणिपुर में लागू है।
  2. AFSPA सशस्त्र बलों को बिना किसी न्यायिक निगरानी के असीमित अधिकार देता है।
  3. सुप्रीम कोर्ट ने AFSPA के तहत जातीय संघर्षों में सैन्य कार्रवाई की बजाय राजनीतिक संवाद पर जोर दिया है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि AFSPA 1980 से लागू है। कथन 2 गलत है क्योंकि AFSPA बिना न्यायिक निगरानी के असीमित अधिकार नहीं देता। कथन 3 सुप्रीम कोर्ट के फैसलों, जैसे Naga People’s Movement of Human Rights v. Union of India के आधार पर सही है।

मुख्य प्रश्न

मणिपुर में कूकी-नागा जातीय संघर्ष को संबोधित करने में संवैधानिक और शासन संबंधी चुनौतियों पर चर्चा करें। स्थायी शांति के लिए सुरक्षा और राजनीतिक समायोजन के बीच संतुलन बनाने के उपाय सुझाएं।

झारखंड और JPSC Relevance

  • JPSC पेपर: पेपर 2 - शासन और आंतरिक सुरक्षा
  • झारखंड संदर्भ: झारखंड में भी जनजातीय स्वायत्तता के मुद्दे और कुछ क्षेत्रों में AFSPA की उपस्थिति है, जो मणिपुर के संघर्ष के तुलनात्मक अध्ययन के लिए प्रासंगिक बनाता है।
  • मुख्य बिंदु: झारखंड और मणिपुर में जनजातीय स्वायत्तता प्रावधानों और सुरक्षा चुनौतियों की तुलना करते हुए उत्तर तैयार करें, संवैधानिक सुरक्षा और विकास पर जोर देते हुए।
मणिपुर को संविधान की Sixth Schedule में क्यों शामिल नहीं किया गया?

मणिपुर को Sixth Schedule से इसलिए बाहर रखा गया है क्योंकि यह अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों पर लागू होती है। इसके बजाय मणिपुर के लिए Article 371C और Manipur (Hill Areas) District Councils Act, 1971 के तहत सीमित स्वायत्तता के विशेष प्रावधान बनाए गए हैं।

मणिपुर में AFSPA की भूमिका क्या है?

AFSPA 1980 से मणिपुर में लागू है, जो सशस्त्र बलों को उग्रवाद और जातीय हिंसा के बीच कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष अधिकार देता है। हालांकि, इस कानून की आलोचना मानवाधिकारों के उल्लंघन के कारण होती रही है और यह जड़ समस्याओं का समाधान नहीं कर पाया है।

कूकी-नागा संघर्ष मणिपुर की अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित करता है?

जातीय हिंसा व्यापार को बाधित करती है, खासकर इम्फाल-मोरेह सीमा के जरिए होने वाले ₹2,000 करोड़ के वार्षिक व्यापार को प्रभावित करती है। अस्थिरता के कारण पर्यटन विकास धीमा हुआ है और आंतरिक सुरक्षा पर खर्च बढ़ा है।

मणिपुर को तुर्की के कुर्द संघर्ष से क्या सीख मिल सकती है?

तुर्की ने सैन्य कार्रवाई के साथ राजनीतिक सुधार और सीमित सांस्कृतिक स्वायत्तता को जोड़ा, जिससे 2015-2020 के बीच हिंसा में 40% की कमी आई। मणिपुर भी सुरक्षा और राजनीतिक समायोजन के संतुलित दृष्टिकोण को अपना सकता है।

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