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हालिया घटना और पृष्ठभूमि

अप्रैल 2024 में मणिपुर में कुकि और नागा समुदायों के बीच बढ़ती झड़पों के दौरान तीन लोगों की मौत हुई। यह हिंसा मुख्य रूप से पहाड़ी जिलों में बसे जनजातीय इलाकों से 10,000 से अधिक लोगों को विस्थापित कर चुकी है। यह संघर्ष मणिपुर के जटिल सामाजिक ताने-बाने में जमीन, पहचान और राजनीतिक स्वायत्तता को लेकर गहरे जातीय तनाव को दर्शाता है।

कुकि और नागा दोनों जनजातीय समुदाय हैं जो मणिपुर की आबादी का लगभग 35% हिस्सा बनाते हैं (2011 की जनगणना), और दोनों के बीच क्षेत्रीय अधिकारों और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर विवाद गहरा रहा है, जिससे मौजूदा प्रशासनिक ढांचे में तनाव बढ़ा है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: प्रशासन – जातीय संघवाद, आंतरिक सुरक्षा, AFSPA, जनजातीय स्वायत्तता
  • GS पेपर 3: आर्थिक विकास – क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर संघर्ष का प्रभाव
  • निबंध: पूर्वोत्तर भारत में जातीय संघर्ष और प्रशासनिक चुनौतियाँ

मणिपुर के संवैधानिक और कानूनी ढांचे

मणिपुर में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 371C के तहत विशेष प्रावधान लागू हैं, जो पहाड़ी क्षेत्रों के प्रशासन के लिए बनाए गए हैं। इसके तहत मणिपुर (हिल एरियाज) डिस्ट्रिक्ट काउंसिल एक्ट, 1971 के अंतर्गत स्वायत्त जिला परिषदों (ADCs) की स्थापना की गई है। ये परिषदें जनजातीय समूहों को स्वशासन प्रदान करने के लिए हैं, लेकिन इनके अधिकार सीमित हैं और अक्सर जनजातीय विवादों का समाधान करने में असमर्थ रहती हैं।

आर्म्ड फोर्सेज (स्पेशल पावर्स) एक्ट, 1958 (AFSPA) मणिपुर में 1980 से लागू है, जो सुरक्षा बलों को व्यापक अधिकार देता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के फैसलों जैसे नागा पीपुल्स मूवमेंट ऑफ ह्यूमन राइट्स बनाम भारत संघ (1997) ने AFSPA के क्रियान्वयन से उत्पन्न मानवाधिकार संबंधी चिंताओं को रेखांकित किया है, जिससे इसकी वैधता और प्रभावशीलता पर सवाल उठे हैं।

  • शेड्यूल्ड ट्राइब्स एंड अदर ट्रैडिशनल फॉरेस्ट ड्वेलर्स (रिकॉग्निशन ऑफ फॉरेस्ट राइट्स) एक्ट, 2006 जनजातीय भूमि अधिकारों से जुड़ा है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में असमानता के कारण कुकि और नागा समुदायों के बीच भूमि विवाद बढ़े हैं।
  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की न्यायिक निगरानी और मानवाधिकार मॉनिटरिंग सुरक्षा माहौल और राजनीतिक संवेदनशीलताओं के कारण सीमित रही है।

संघर्ष का आर्थिक प्रभाव

मणिपुर का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) 2022-23 में लगभग 19,000 करोड़ रुपये था, लेकिन संघर्ष के कारण विकास दर घटकर 3.5% रह गई (मणिपुर आर्थिक सर्वेक्षण 2023)। लगभग 40% आबादी कृषि पर निर्भर है, जो हिंसा और विस्थापन के चलते बुरी तरह प्रभावित हुई है।

जातीय झड़पों ने स्थानीय बाजारों, कृषि चक्रों और मणिपुर को पूर्वोत्तर भारत और म्यांमार से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण व्यापार मार्गों को बाधित किया है। 10,000 से अधिक लोगों के विस्थापन (मणिपुर स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी, 2024) से श्रम उत्पादकता कम हुई है और सामाजिक कल्याण प्रणालियों पर दबाव बढ़ा है।

  • केंद्र सरकार के 2023-24 के बजट में पूर्वोत्तर के लिए आंतरिक सुरक्षा आवंटन 12% बढ़ाकर 3,500 करोड़ रुपये किया गया, जो सुरक्षा पर जोर दिखाता है लेकिन संघर्ष-संवेदनशील विकास पर कम ध्यान देता है।
  • संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में आर्थिक ठहराव दीर्घकालीन शांति के लिए खतरा है क्योंकि इससे संसाधनों की पहुंच और प्रशासनिक बहिष्कार से जुड़ी नाराजगी बढ़ती है।

संस्थागत भूमिकाएँ और चुनौतियाँ

मणिपुर राज्य सरकार स्थानीय प्रशासन और कानून व्यवस्था के लिए जिम्मेदार है, लेकिन जातीय तनावों को संभालने में संसाधन और राजनीतिक दबावों से जूझ रही है। असम राइफल्स और CRPF जैसे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल AFSPA के तहत काम करते हैं, लेकिन समुदाय का भरोसा हासिल नहीं कर पाए हैं।

गृह मंत्रालय (MHA) आंतरिक सुरक्षा नीति और AFSPA के क्रियान्वयन की देखरेख करता है। नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल (NEC) क्षेत्रीय विकास का समन्वय करती है, परंतु संघर्ष समाधान के लिए इसके पास सीमित अधिकार हैं।

  • 1971 के अधिनियम के तहत स्वायत्त जिला परिषदें स्थानीय स्वशासन प्रदान करती हैं, पर वित्तीय और प्रशासनिक स्वतंत्रता की कमी के कारण प्रभावी विवाद समाधान में असमर्थ हैं।
  • NHRC की निगरानी सुरक्षा प्रतिबंधों और राजनीतिक संवेदनशीलताओं के कारण सीमित है, जिससे मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जवाबदेही कम हो पाती है।

तुलनात्मक विश्लेषण: मणिपुर और इथियोपिया का तिग्राय संघर्ष

पहलूमणिपुर (कुकि-नागा संघर्ष)तिग्राय क्षेत्र (इथियोपिया)
जातीय संरचनाकई जनजातीय समूह (कुकि, नागा, मेitei)मुख्य रूप से तिग्राय जातीय समूह बनाम संघीय सरकार
प्रशासनिक ढांचाअनुच्छेद 371C के साथ स्वायत्त जिला परिषदें; AFSPA लागूजातीय आधारित राज्यों के साथ संघीय प्रणाली; कमजोर संस्थागत मध्यस्थता
संघर्ष के कारणक्षेत्रीय दावे, भूमि अधिकार, राजनीतिक स्वायत्तताराजनीतिक बहिष्कार, जातीय संघवाद विवाद
संघर्ष समाधान उपायसीमित शांति ढांचे; सुरक्षा बलों पर निर्भरता2021 में शांति समझौता, संवैधानिक सुधार और विकेंद्रीकरण
परिणामहिंसा और विस्थापन जारी; आर्थिक बाधासमझौते के बाद एक साल में हिंसा में 60% कमी (इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप, 2023)

नीतिगत खामियां और चुनौतियां

मणिपुर के पास जातीय विविधता के अनुरूप संवैधानिक स्वायत्तता, आर्थिक विकास और संघर्ष समाधान को एकीकृत करने वाला व्यापक शांति ढांचा नहीं है। नागालैंड और मिजोरम की तुलना में, जहां समझौते और सशक्त स्वायत्त परिषदों ने हिंसा को कम किया है, मणिपुर की ADCs के अधिकार सीमित हैं।

वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन में खामियां भूमि विवादों को बढ़ावा देती हैं। AFSPA का लंबा समय तक बिना राजनीतिक संवाद के लागू रहना भरोसे को कमजोर करता है और मानवाधिकार चिंताओं को बढ़ाता है। आर्थिक नीतियां मुख्यतः सुरक्षा केंद्रित हैं, जबकि संघर्ष-संवेदनशील विकास और विस्थापितों के पुनर्वास पर कम ध्यान दिया गया है।

आगे का रास्ता

  • स्वायत्त जिला परिषदों को वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार देकर स्थानीय स्तर पर विवाद प्रबंधन मजबूत करें।
  • कुकि, नागा और मेitei हितधारकों को शामिल करते हुए समावेशी शांति वार्ता शुरू करें, जिसमें क्षेत्रीय और राजनीतिक समझौते पर चर्चा हो।
  • सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार AFSPA के लागू होने में सुधार करें, स्पष्ट समाप्ति प्रावधान और मानवाधिकार सुरक्षा बढ़ाएं।
  • वन अधिकार अधिनियम को पूरी तरह लागू कर भूमि संबंधी विवादों का पारदर्शी और भागीदारीपूर्ण समाधान सुनिश्चित करें।
  • संघर्ष-संवेदनशील विकास नीतियों को अपनाएं, जिसमें विस्थापन की पुनर्वास, आजीविका बहाली और बुनियादी ढांचे का विकास शामिल हो।
  • NHRC और नागरिक समाज की निगरानी क्षमता बढ़ाएं, ताकि संघर्ष क्षेत्रों में बिना प्रतिबंध के पहुंच संभव हो सके।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
मणिपुर में AFSPA के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. AFSPA 1980 से मणिपुर में सेक्शन 3 के तहत लागू है।
  2. AFSPA सुरक्षा बलों को बिना किसी न्यायिक निगरानी के असीमित अधिकार देता है।
  3. सुप्रीम कोर्ट ने नागा पीपुल्स मूवमेंट ऑफ ह्यूमन राइट्स बनाम भारत संघ (1997) में AFSPA से जुड़े मानवाधिकार मुद्दों को स्वीकार किया था।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि AFSPA 1980 से मणिपुर में सेक्शन 3 के तहत लागू है। कथन 2 गलत है क्योंकि AFSPA असीमित अधिकार नहीं देता और न्यायालयों ने दुरुपयोग के मामलों में हस्तक्षेप किया है। कथन 3 सही है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने 1997 में AFSPA से जुड़े मानवाधिकार मुद्दों को स्वीकार किया था।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
मणिपुर में स्वायत्त जिला परिषदों (ADCs) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. ADCs मणिपुर (हिल एरियाज) डिस्ट्रिक्ट काउंसिल एक्ट, 1971 के तहत स्थापित हैं।
  2. ADCs के पास पहाड़ी क्षेत्रों में सभी मामलों पर पूर्ण विधायी अधिकार हैं।
  3. ADCs का उद्देश्य जनजातीय समुदायों को स्वशासन प्रदान करना है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 3
  • bकेवल 2
  • cकेवल 1 और 2
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि ADCs 1971 के अधिनियम के तहत बनाए गए हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि ADCs के पास पूर्ण विधायी अधिकार नहीं हैं, बल्कि सीमित प्रशासनिक अधिकार हैं। कथन 3 सही है क्योंकि ADCs का मकसद जनजातीय स्वशासन को बढ़ावा देना है।

मुख्य प्रश्न

मणिपुर में कुकि-नागा संघर्ष भारत के पूर्वोत्तर में जातीय संघवाद और प्रशासनिक चुनौतियों को कैसे उजागर करता है? इन चुनौतियों से निपटने के लिए संवैधानिक और नीतिगत उपाय सुझाएं।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – प्रशासन और आंतरिक सुरक्षा
  • झारखंड दृष्टिकोण: झारखंड में भी जनजातीय आबादी अधिक है और वहां अंतर-जनजातीय संघर्ष होते हैं; मणिपुर के संघर्ष प्रबंधन से प्राप्त सबक विकेंद्रीकृत प्रशासन और जनजातीय स्वायत्तता के लिए उपयोगी हैं।
  • मुख्य बिंदु: मणिपुर और झारखंड में जनजातीय स्वायत्तता के तंत्रों की तुलना करते हुए उत्तर तैयार करें, संवैधानिक प्रावधानों और संघर्ष समाधान पर ध्यान केंद्रित करें।
अनुच्छेद 371C क्या है और मणिपुर पर इसका क्या असर है?

अनुच्छेद 371C मणिपुर के पहाड़ी इलाकों के लिए विशेष प्रावधान देता है, जिसमें स्वायत्त जिला परिषदों की स्थापना शामिल है जो जनजातीय हितों की रक्षा और स्थानीय स्वशासन प्रदान करती हैं।

मणिपुर में AFSPA सुरक्षा बलों को कौन-कौन से अधिकार देता है?

AFSPA सुरक्षा बलों को बिना वारंट के गिरफ्तारी, आवश्यकतानुसार बल प्रयोग (जिसमें घातक बल भी शामिल है), और बिना पूर्व अनुमति तलाशी लेने का अधिकार देता है, ताकि अशांत इलाकों में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखी जा सके।

कुकि-नागा संघर्ष ने मणिपुर की अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित किया है?

संघर्ष के कारण मणिपुर की GSDP विकास दर 2022-23 में 3.5% रह गई, कृषि और व्यापार बाधित हुए, जो 40% आबादी पर असर डालते हैं, और 10,000 से अधिक लोगों का विस्थापन हुआ, जिससे श्रम उत्पादकता कम हुई।

मणिपुर में स्वायत्त जिला परिषदों की भूमिका क्या है?

स्वायत्त जिला परिषदें मणिपुर (हिल एरियाज) डिस्ट्रिक्ट काउंसिल एक्ट, 1971 के तहत जनजातीय इलाकों को सीमित प्रशासनिक स्वायत्तता प्रदान करती हैं, जिससे जनजातीय अधिकारों की रक्षा और स्थानीय प्रशासन संभव होता है।

मणिपुर के संघर्ष की तुलना इथियोपिया के तिग्राय संघर्ष से कैसे की जा सकती है?

दोनों ही जातीय संघवाद और क्षेत्रीय विवादों से जुड़े हैं। इथियोपिया में 2021 के शांति समझौते में संवैधानिक सुधार और विकेंद्रीकरण शामिल था, जिससे हिंसा में 60% कमी आई, जबकि मणिपुर में व्यापक शांति ढांचा नहीं है।

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