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तमिलनाडु के कल्पक्कम में स्थित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने 21 अगस्त 2024 को क्रिटिकलिटी हासिल कर ली है। इसे इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR) ने परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) के तहत विकसित किया है (Indian Express, 2024)। यह भारत के लिए पहली बार है जब फास्ट ब्रीडर रिएक्टर में निरंतर परमाणु श्रृंखला प्रतिक्रिया सफलतापूर्वक संचालित हुई है, जो देश के 3-स्तरीय स्वदेशी परमाणु कार्यक्रम को लागू करने में एक अहम मील का पत्थर है। PFBR का डिजाइन ऐसा है कि यह जितनी फिसाइल सामग्री खर्च करता है, उससे कहीं अधिक उत्पन्न करता है, जिससे यूरेनियम और थोरियम संसाधनों का कुशल उपयोग संभव होता है। यह उपलब्धि भारत के लंबे समय तक ऊर्जा सुरक्षा के लक्ष्य को बंद ईंधन चक्र प्रौद्योगिकी और थोरियम उपयोग के माध्यम से आगे बढ़ाती है।

UPSC Relevance

  • GS Paper 3: विज्ञान और तकनीक – परमाणु ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा
  • GS Paper 3: पर्यावरण – सतत ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन में कमी
  • GS Paper 2: राजनीति – परमाणु ऊर्जा अधिनियम, पर्यावरणीय नियम
  • निबंध: भारत की ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास

भारत का 3-स्तरीय परमाणु कार्यक्रम और फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की भूमिका

1950 के दशक में होमी भाभा द्वारा परिकल्पित भारत का 3-स्तरीय परमाणु कार्यक्रम देश के थोरियम भंडार (जो विश्व के लगभग 25% हैं) का अधिकतम लाभ उठाने के लिए क्रमबद्ध रिएक्टर तकनीकों के विकास पर केंद्रित है। पहला चरण प्राकृतिक यूरेनियम जलाने और प्लूटोनियम उत्पादन के लिए प्रेसराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर (PHWR) का उपयोग करता है। दूसरा चरण फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR) जैसे PFBR का उपयोग करता है, जो यूरेनियम-238 से प्लूटोनियम पैदा करके फिसाइल सामग्री की उपलब्धता को बढ़ाता है। तीसरा चरण थोरियम आधारित रिएक्टरों का है, जो दूसरे चरण में उत्पन्न यूरेनियम-233 का उपयोग करते हैं, जिससे ईंधन चक्र बंद होता है और स्थायी परमाणु ऊर्जा सुनिश्चित होती है (DAE वार्षिक रिपोर्ट, 2023)।

  • PFBR अपनी खपत से 1.5 से 2 गुना अधिक फिसाइल सामग्री पैदा करता है (IGCAR तकनीकी रिपोर्ट, 2023)।
  • थोरियम रिएक्टर 2050 तक भारत की बिजली का 30-40% उत्पादन कर सकते हैं (NITI आयोग रिपोर्ट, 2023)।
  • भारत अपनी यूरेनियम की करीब 85% जरूरत आयात करता है (World Nuclear Association, 2023), इसलिए ब्रीडर तकनीक निर्भरता कम करने के लिए महत्वपूर्ण है।

कल्पक्कम PFBR की क्रिटिकलिटी के आर्थिक मायने

कल्पक्कम PFBR परियोजना के लिए वित्तीय वर्ष 2023-24 में लगभग ₹3,000 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है, जो उन्नत परमाणु तकनीक में सरकार की बड़ी निवेश प्रतिबद्धता दर्शाता है। फास्ट ब्रीडर रिएक्टर यूरेनियम संसाधनों का उपयोग 60-70 गुना बढ़ा देते हैं, जिससे भारत के परमाणु ईंधन आयात बिल में कमी आ सकती है, जो वित्त वर्ष 2022-23 में लगभग 2.5 अरब डॉलर था (वाणिज्य विभाग, भारत)। कोयला आधारित बिजली, जो 2022 में भारत की कुल बिजली उत्पादन का 70% थी (CEA रिपोर्ट, 2023), की जगह FBR से उत्पन्न बिजली जलवायु प्रदूषण कम करने और ऊर्जा मिश्रण को स्थायी बनाने में मदद करती है। वैश्विक फास्ट ब्रीडर रिएक्टर बाजार 2023 से 2030 तक 5.8% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ने का अनुमान है, जो इस तकनीक के आर्थिक महत्व को दर्शाता है।

  • PFBR के संचालन से भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होती है और यूरेनियम आयात कम होता है।
  • यह कम कार्बन परमाणु ऊर्जा विस्तार के जरिए जलवायु लक्ष्यों का समर्थन करता है।
  • भारत की वैश्विक परमाणु तकनीक बाजार में स्थिति मजबूत होती है।

भारत में परमाणु ऊर्जा पर कानूनी और नियामक ढांचा

परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 परमाणु ऊर्जा विकास और अनुसंधान को नियंत्रित करता है, जो Department of Atomic Energy (DAE) और इसके अंतर्गत BARC, IGCAR जैसी इकाइयों को केंद्रीकृत प्राधिकार देता है। संविधान के अनुच्छेद 51A(ह) के तहत नागरिकों को प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार का दायित्व दिया गया है, जो परमाणु ऊर्जा जैसी सतत ऊर्जा पहलों का अप्रत्यक्ष समर्थन करता है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 (धारा 3) परमाणु प्रतिष्ठानों के लिए पर्यावरणीय मंजूरी अनिवार्य करता है, जिससे पारिस्थितिक सुरक्षा सुनिश्चित होती है। हालांकि, परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) की पूर्ण विधिक स्वतंत्रता न होना एक चुनौती है, जो परियोजना समयसीमा और जनविश्वास को प्रभावित कर सकता है।

  • परमाणु ऊर्जा अधिनियम के तहत DAE के अधीन परमाणु अनुसंधान केंद्रीकृत है।
  • पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत पर्यावरण मंजूरी अनिवार्य है।
  • AERB की सीमित स्वतंत्रता शासन की चुनौती है।

भारत के PFBR और फ्रांस के फास्ट ब्रीडर रिएक्टर का तुलनात्मक अध्ययन

पहलूभारत का PFBR (कल्पक्कम)फ्रांस के फेनिक्स और सुपरफेनिक्स
तकनीकी फोकसस्वदेशी डिजाइन, थोरियम ईंधन चक्र शामिलयूरेनियम-प्लूटोनियम चक्र, आयातित तकनीक
संचालन स्थिति2024 में क्रिटिकलिटी प्राप्त, संचालन मेंलागत और सुरक्षा कारणों से बंद
ईंधन चक्र रणनीति3-स्तरीय कार्यक्रम, थोरियम भंडार पर आधारितमुख्य रूप से यूरेनियम-प्लूटोनियम प्रजनन
सुरक्षा प्रोटोकॉलआधुनिक मानकों के साथ उन्नत सुरक्षा उपायसुरक्षा और अपशिष्ट को लेकर जनता का विरोध
दीर्घकालिक लक्ष्यथोरियम उपयोग के जरिए ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरतावाणिज्यिक व्यवहार्यता में चुनौतियां, चरणबद्ध बंद

महत्व और आगे की राह

कल्पक्कम PFBR की क्रिटिकलिटी हासिल करना भारत के 3-स्तरीय परमाणु कार्यक्रम को लागू करने में एक निर्णायक कदम है, जो फास्ट ब्रीडर तकनीक में स्वदेशी क्षमता को प्रदर्शित करता है। यह भारत के परमाणु ईंधन चक्र प्रबंधन को स्थायी बनाता है, यूरेनियम आयात निर्भरता कम करता है और कम कार्बन बिजली उत्पादन के जरिए जलवायु परिवर्तन से लड़ने में मदद करता है। नियामक सुधारों के तहत AERB को पूर्ण विधिक स्वतंत्रता देने से शासन और जनविश्वास बेहतर होगा। FBR की सफलता के बाद थोरियम आधारित तीसरे चरण के रिएक्टरों के विकास को तेज करना भारत को 2031 तक 22,480 मेगावाट परमाणु क्षमता लक्ष्य प्राप्त करने और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करेगा (ड्राफ्ट नेशनल इलेक्ट्रिसिटी प्लान, 2023)।

  • नियमित मंजूरी प्रक्रिया को तेज करने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नियामक ढांचे को मजबूत करें।
  • थोरियम आधारित तीसरे चरण के रिएक्टरों के विकास को तेजी से आगे बढ़ाएं।
  • सुरक्षा और पर्यावरणीय चिंताओं को दूर करने के लिए जनजागरूकता बढ़ाएं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. FBR अपनी खपत से अधिक फिसाइल सामग्री खर्च करते हैं।
  2. FBR यूरेनियम-238 से प्लूटोनियम-239 पैदा करने में सक्षम हैं।
  3. FBR तकनीक भारत के 3-स्तरीय परमाणु कार्यक्रम का हिस्सा है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
व्याख्या: कथन 1 गलत है क्योंकि FBR अपनी खपत से अधिक फिसाइल सामग्री उत्पन्न करते हैं। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि FBR यूरेनियम-238 से प्लूटोनियम-239 पैदा करते हैं और भारत के 3-स्तरीय परमाणु कार्यक्रम का दूसरा चरण हैं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत के परमाणु नियामक ढांचे के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) को पूर्ण विधिक स्वतंत्रता प्राप्त है।
  2. परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 के तहत परमाणु अनुसंधान Department of Atomic Energy के अधीन केंद्रीकृत है।
  3. पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत परमाणु प्रतिष्ठानों के लिए पर्यावरण मंजूरी अनिवार्य है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
व्याख्या: कथन 1 गलत है क्योंकि AERB को पूर्ण विधिक स्वतंत्रता नहीं मिली है। कथन 2 और 3 परमाणु ऊर्जा अधिनियम और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार सही हैं।

मुख्य प्रश्न

कल्पक्कम फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की क्रिटिकलिटी हासिल करने के महत्व का विश्लेषण करें, विशेषकर भारत के 3-स्तरीय परमाणु कार्यक्रम, ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता के संदर्भ में। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC से संबंधित

  • JPSC पेपर: पेपर 3 – विज्ञान और तकनीक, ऊर्जा क्षेत्र
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड के समृद्ध यूरेनियम भंडार (जैसे जादुगुड़ा खदानें) भारत की परमाणु ईंधन आपूर्ति श्रृंखला के लिए महत्वपूर्ण हैं, जो स्थानीय खनन को राष्ट्रीय ऊर्जा लक्ष्यों से जोड़ते हैं।
  • मुख्य बिंदु: कल्पक्कम में परमाणु तकनीक की प्रगति के कारण यूरेनियम की मांग और झारखंड में खनन गतिविधियों पर संभावित प्रभावों पर चर्चा करें, और राज्य की भूमिका को भारत की ऊर्जा सुरक्षा में समझाएं।
कल्पक्कम PFBR की क्रिटिकलिटी हासिल करने का क्या महत्व है?

यह भारत के फास्ट ब्रीडर रिएक्टर में पहली बार निरंतर परमाणु श्रृंखला प्रतिक्रिया का संकेत है, जो खर्च से अधिक फिसाइल सामग्री उत्पन्न करता है। यह भारत के 3-स्तरीय परमाणु कार्यक्रम में ईंधन उपयोग की स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

फास्ट ब्रीडर रिएक्टर और प्रेसराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर (PHWR) में क्या अंतर है?

FBR तेज न्यूट्रॉन का उपयोग कर यूरेनियम-238 जैसे उपजाऊ समस्थानिक से फिसाइल सामग्री उत्पन्न करता है, जिससे यह अपनी खपत से अधिक ईंधन पैदा करता है, जबकि PHWR हेवी वाटर मोडरेटर और प्राकृतिक यूरेनियम ईंधन का उपयोग करता है, जिसमें प्रजनन क्षमता नहीं होती।

भारत में परमाणु ऊर्जा विकास को कौन से कानूनी प्रावधान नियंत्रित करते हैं?

परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 के तहत परमाणु अनुसंधान और विकास Department of Atomic Energy के अधीन होता है, जबकि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत परमाणु प्रतिष्ठानों के लिए पर्यावरणीय मंजूरी अनिवार्य है।

भारत की परमाणु रणनीति में थोरियम का क्या महत्व है?

भारत के पास विश्व के लगभग 25% थोरियम भंडार हैं, और थोरियम आधारित रिएक्टर तीसरे चरण में स्थायी, दीर्घकालिक परमाणु ईंधन आपूर्ति का वादा करते हैं, जिससे यूरेनियम आयात निर्भरता कम होती है।

भारत के परमाणु नियामक ढांचे में क्या चुनौतियां हैं?

परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) को पूर्ण विधिक स्वतंत्रता नहीं मिली है, जो परियोजना अनुमोदन में देरी, पारदर्शिता की कमी और जनविश्वास को प्रभावित कर सकती है।

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