परिचय: अनुच्छेद 51A(g) और CSR पर न्यायिक हस्तक्षेप
भारतीय न्यायपालिका ने अनुच्छेद 51A(g) — प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार का मौलिक कर्तव्य — को कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) से जोड़कर व्यवसायों के लिए पर्यावरण संरक्षण को कानूनी अनिवार्यता बनाया है। कंपनी अधिनियम, 2013 और उसकी धारा 135 के लागू होने के बाद, जो न्यूनतम 2% CSR खर्च को अनिवार्य करती है, न्यायालयों और ट्रिब्यूनलों ने इन प्रावधानों की व्याख्या करते हुए कॉर्पोरेट व्यवहार को सतत विकास के लक्ष्यों से जोड़ा है। M.C. मेहता बनाम भारत संघ (1987) जैसे अहम फैसलों और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के आदेशों ने कॉर्पोरेट जिम्मेदारी को केवल परोपकार तक सीमित न रखकर पारिस्थितिक पुनर्निर्माण और प्रदूषण नियंत्रण तक बढ़ा दिया है।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 3: पर्यावरण और पारिस्थितिकी (पर्यावरणीय शासन, CSR नियम)
- GS पेपर 2: भारतीय संविधान (मौलिक कर्तव्य, न्यायिक सक्रियता)
- निबंध विषय: कॉर्पोरेट जवाबदेही और सतत विकास
पर्यावरणीय CSR का कानूनी ढांचा
- अनुच्छेद 51A(g) (42वें संशोधन, 1976 द्वारा जोड़ा गया) नागरिकों पर जंगल, झील, नदियाँ और वन्यजीवों की रक्षा का मौलिक कर्तव्य थोपता है, जिसे न्यायालयों ने कॉर्पोरेट संस्थाओं के लिए भी लागू माना है।
- कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 उन कंपनियों पर लागू होती है जो वित्तीय मापदंड (नेट वर्थ, टर्नओवर, या नेट प्रॉफिट) पूरी करती हैं, और उन्हें पिछले तीन वर्षों के औसत नेट प्रॉफिट का कम से कम 2% CSR गतिविधियों पर खर्च करना होता है।
- कारपोरेट मामले मंत्रालय (MCA) ने 2014 में CSR नियम जारी किए, जिनमें पात्र गतिविधियाँ, रिपोर्टिंग मानक और बोर्ड की जिम्मेदारी स्पष्ट की गई है।
- न्यायिक निर्णय: सुप्रीम कोर्ट ने M.C. मेहता बनाम भारत संघ मामले में अनुच्छेद 21 के तहत पर्यावरणीय अधिकारों को विस्तारित करते हुए CSR को पर्यावरण संरक्षण का उपकरण माना; 2010 के बाद से NGT ने कंपनियों को पर्यावरणीय नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया और CSR खर्च के जरिए सुधार अनिवार्य किया।
भारत में पर्यावरणीय CSR के आर्थिक पहलू
- MCA के आंकड़ों के अनुसार (2023), वित्तीय वर्ष 2022-23 में 3,000 से अधिक कंपनियों ने लगभग 15,000 करोड़ रुपये CSR खर्च की सूचना दी, जिसमें 30-40% पर्यावरणीय परियोजनाओं जैसे वृक्षारोपण, जल संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण पर खर्च हुआ।
- भारत का CSR बाजार 2023 से 2028 के बीच 12% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ने का अनुमान है (Frost & Sullivan, 2023), जो कॉर्पोरेट निवेश में सततता की बढ़ती रुचि दर्शाता है।
- पर्यावरणीय CSR पहलों से प्रदूषण नियंत्रण और कचरा प्रबंधन से जुड़े अनुपालन लागत कम होती है, जिससे कंपनियां सक्रिय पर्यावरण प्रबंधन के जरिए संचालन लागत में 15% तक बचत कर सकती हैं।
- वैश्विक स्तर पर, ESG (पर्यावरण, सामाजिक, और शासन) परिसंपत्तियां 2023 में 35 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई हैं (Global Sustainable Investment Alliance), जो सतत कॉर्पोरेट रणनीतियों की आर्थिक महत्ता को दर्शाता है।
पर्यावरणीय CSR प्रवर्तन के लिए संस्थागत संरचना
- कारपोरेट मामले मंत्रालय (MCA): CSR अनुपालन का नियंत्रण, रिपोर्टिंग की निगरानी और गैर-अनुपालन पर दंड लगाना।
- राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT): पर्यावरणीय मामलों के लिए विशेष न्यायाधिकरण, 2010 से 200 से अधिक आदेश जारी कर कंपनियों को पर्यावरणीय नुकसान के लिए जवाबदेह ठहराना और CSR के माध्यम से सुधार अनिवार्य करना।
- भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI): सूचीबद्ध कंपनियों से ESG प्रकटीकरण की मांग, जिससे पर्यावरणीय प्रदर्शन में पारदर्शिता और निवेशकों की जागरूकता बढ़ी।
- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB): पर्यावरणीय मानकों और कॉर्पोरेट प्रदूषण स्तर की निगरानी, प्रवर्तन कार्रवाई के लिए डेटा उपलब्ध कराना।
- भारत का सुप्रीम कोर्ट: मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों की व्यापक व्याख्या के जरिए पर्यावरणीय दायित्वों को मजबूती देना।
- पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC): पर्यावरणीय नीतियां बनाना जो CSR प्राथमिकताओं को प्रभावित करती हैं।
भारत और यूरोपीय संघ के पर्यावरणीय CSR की तुलना
| पहलू | भारत | यूरोपीय संघ (EU) |
|---|---|---|
| कानूनी अनिवार्यता | कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 के तहत न्यूनतम 2% CSR खर्च अनिवार्य | 2014/95/EU गैर-वित्तीय रिपोर्टिंग निर्देश, ESG प्रकटीकरण अनिवार्य लेकिन खर्च की कोई तय सीमा नहीं |
| CSR/ESG का दायरा | पर्यावरणीय परियोजनाओं के साथ-साथ सामाजिक और परोपकारी गतिविधियां भी शामिल | पर्यावरणीय प्रभाव मेट्रिक्स, सामाजिक और शासन पहलुओं पर केंद्रित, विस्तृत रिपोर्टिंग मानक |
| अनुपालन और प्रवर्तन | कमजोर प्रवर्तन, प्रभाव आकलन ढांचे की कमी, असंगत कार्यान्वयन | नियामक एजेंसियों के माध्यम से कड़ा प्रवर्तन; 90% से अधिक बड़ी कंपनियां पर्यावरणीय मेट्रिक्स रिपोर्ट करती हैं |
| परिणाम | पर्यावरणीय परियोजनाओं पर CSR खर्च का 30-40%; प्रदूषण में मापन योग्य कमी सीमित | 2015-2022 के बीच कार्बन उत्सर्जन में 25% की कमी (यूरोपीय पर्यावरण एजेंसी, 2023) |
| बाजार आकार और वृद्धि | FY 2022-23 में 15,000 करोड़ रुपये CSR खर्च; 2023-28 के लिए 12% CAGR अनुमानित | वैश्विक ESG निवेश 35 ट्रिलियन USD से अधिक; EU सततता समेकन में प्रमुख योगदानकर्ता |
भारत के पर्यावरणीय CSR ढांचे में प्रमुख खामियां
- अनिवार्य खर्च के बावजूद, कड़े प्रवर्तन तंत्र की कमी के कारण कई कंपनियां CSR को रणनीतिक पर्यावरण निवेश की बजाय केवल अनुपालन का काम मानती हैं।
- मानकीकृत प्रभाव आकलन ढांचे का अभाव पर्यावरणीय परिणामों के असंगत मापन और कमजोर जवाबदेही का कारण है।
- न्यायिक सक्रियता ने पर्यावरणीय CSR को बढ़ावा दिया है, लेकिन न्यायालय के आदेशों को कॉर्पोरेट व्यवहार में स्थायी बदलाव में पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका।
- CSR का मुख्य व्यवसाय रणनीतियों के साथ सीमित एकीकरण दीर्घकालिक सततता और पारिस्थितिक पुनर्निर्माण की संभावनाओं को कम करता है।
आगे का रास्ता: न्यायिक और नियामक निगरानी को मजबूत बनाना
- CSR परियोजनाओं के लिए मानकीकृत पर्यावरणीय प्रभाव आकलन ढांचे विकसित कर अनिवार्य करें ताकि परिणाम मापनीय हों।
- MCA और NGT के समन्वय को बढ़ाकर पर्यावरणीय CSR नियमों के उल्लंघन पर दंड और सुधारात्मक कार्रवाई लागू करें।
- CSR को कॉर्पोरेट शासन और जोखिम प्रबंधन के साथ जोड़कर व्यवसाय मॉडल को सतत विकास के अनुरूप बनाएं।
- SEBI को ESG प्रकटीकरण आवश्यकताओं का विस्तार कर विस्तृत पर्यावरणीय प्रभाव मेट्रिक्स और सुधार योजनाओं को शामिल करने के लिए प्रोत्साहित करें।
- न्यायपालिका अनुच्छेद 51A(g) की व्यापक व्याख्या जारी रखें ताकि कंपनियों को पर्यावरणीय नुकसान के लिए जवाबदेह ठहराया जा सके और पुनरुद्धारात्मक CSR अनिवार्य किया जा सके।
प्रश्न अभ्यास
- अनुच्छेद 51A(g) नागरिकों पर पर्यावरण की रक्षा का मौलिक कर्तव्य लगाता है, जिसे न्यायपालिका ने कॉर्पोरेशनों तक बढ़ाया है।
- कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 केवल स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कंपनियों के लिए न्यूनतम 2% CSR खर्च अनिवार्य करती है।
- राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने 2010 से पर्यावरणीय CSR दायित्वों के प्रवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- भारत CSR खर्च के लिए नेट प्रॉफिट का निश्चित प्रतिशत अनिवार्य करता है, जबकि EU ESG प्रकटीकरण अनिवार्य करता है पर खर्च की कोई तय सीमा नहीं।
- EU ने 2015 से 2022 के बीच विभिन्न क्षेत्रों में कार्बन उत्सर्जन में 25% की कमी हासिल की है।
- भारत के CSR प्रवर्तन तंत्र EU की तुलना में अधिक सख्त हैं।
मुख्य प्रश्न
भारत में न्यायपालिका ने पर्यावरणीय कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) के प्रवर्तन के लिए अनुच्छेद 51A(g) का कैसे उपयोग किया है, इसका विश्लेषण करें। कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत अनिवार्य पर्यावरणीय CSR खर्च के आर्थिक प्रभावों पर चर्चा करें और कार्यान्वयन में प्रमुख खामियों की पहचान करें।
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 (शासन और पर्यावरण), पेपर 3 (अर्थव्यवस्था और सतत विकास)
- झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड के खनन और औद्योगिक क्षेत्र पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रहे हैं; पर्यावरणीय CSR का न्यायिक प्रवर्तन स्थानीय पारिस्थितिक पुनर्निर्माण और कॉर्पोरेट जवाबदेही को प्रभावित कर सकता है।
- मुख्य बिंदु: न्यायपालिका की भूमिका को उजागर करते हुए उत्तर तैयार करें, जो संवैधानिक कर्तव्यों को कॉर्पोरेट जवाबदेही से जोड़ती है और राज्य-विशिष्ट पर्यावरणीय मुद्दों को संबोधित करती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अनुच्छेद 51A(g) क्या है और पर्यावरणीय CSR में इसकी क्या भूमिका है?
अनुच्छेद 51A(g) 42वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया एक मौलिक कर्तव्य है, जो नागरिकों को पर्यावरण की रक्षा और सुधार का दायित्व देता है। भारतीय न्यायालयों ने इसे कॉर्पोरेशनों तक बढ़ाकर पर्यावरणीय CSR को कानूनी जिम्मेदारी बना दिया है।
कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 CSR के संबंध में क्या अनिवार्य करती है?
धारा 135 उन कंपनियों को अनिवार्य करती है जो वित्तीय मापदंड पूरे करती हैं, कि वे पिछले तीन वर्षों के औसत नेट प्रॉफिट का कम से कम 2% CSR गतिविधियों पर खर्च करें, जिसमें पर्यावरणीय परियोजनाएं भी शामिल हैं।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने पर्यावरणीय CSR प्रवर्तन में क्या योगदान दिया है?
2010 से NGT ने 200 से अधिक आदेश जारी कर कंपनियों को पर्यावरणीय नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया है और CSR खर्च के जरिए सुधार और पारिस्थितिक पुनर्निर्माण को अनिवार्य किया है।
भारत के पर्यावरणीय CSR ढांचे में मुख्य कमियां क्या हैं?
भारत में कड़े प्रवर्तन तंत्र और मानकीकृत प्रभाव आकलन ढांचे की कमी है, जिससे कार्यान्वयन असंगत होता है और पर्यावरणीय परिणामों का मापन सीमित रहता है।
भारत का अनिवार्य CSR खर्च EU के ESG ढांचे से कैसे अलग है?
भारत में लाभ का निश्चित 2% CSR खर्च अनिवार्य है, जबकि EU में ESG प्रकटीकरण अनिवार्य है लेकिन खर्च की कोई तय सीमा नहीं है, जिससे पारदर्शिता और उत्सर्जन में कमी अधिक मापनीय हुई है।
आधिकारिक स्रोत और आगे पढ़ाई
स्रोत: LearnPro Editorial | सामान्य अध्ययन | प्रकाशित: 25 March 2026 | अंतिम अपडेट: 26 April 2026
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