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परिचय: भारतीय चुनावों में EVM का महत्व

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) प्रणाली भारत में 1998 में पहली बार लागू हुई और तब से यह चुनाव प्रक्रिया की रीढ़ बन गई है। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) जैसी दो सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों ने 1.5 मिलियन से अधिक EVM बनाए हैं, जो 543 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में उपलब्ध हैं (ECI वार्षिक रिपोर्ट 2023)। मतदान से मतगणना तक EVM की यात्रा Representation of the People Act, 1951 और चुनाव आयोग के विस्तृत दिशा-निर्देशों के तहत सख्त नियमों से नियंत्रित होती है, ताकि चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा और ईमानदारी बनी रहे।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: शासन — चुनाव सुधार, चुनाव आयोग की भूमिका
  • GS पेपर 3: आंतरिक सुरक्षा — चुनावों में सुरक्षा प्रोटोकॉल
  • निबंध: भारत में चुनावी ईमानदारी और लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं

EVM संचालन के लिए संवैधानिक और कानूनी ढांचा

भारत के संविधान के Article 324 के तहत चुनाव आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने का अधिकार दिया गया है, जिसमें EVM का प्रबंधन भी शामिल है। Representation of the People Act, 1951 चुनाव संचालन का कानूनी आधार प्रदान करता है, जिसमें Section 128 मतगणना के दौरान चुनाव आयोग की निगरानी अनिवार्य करता है। चुनाव आयोग की Manual on Electronic Voting Machines and Voter Verifiable Paper Audit Trail (VVPAT) (2023 संस्करण) में EVM की सुरक्षा, परिवहन, भंडारण और मतगणना के विस्तृत निर्देश दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों जैसे PUCL बनाम भारत संघ (2013) ने EVM के इस्तेमाल में पारदर्शिता और सुरक्षा की आवश्यकता को और मजबूत किया है।

  • Article 324: चुनाव आयोग को चुनाव संचालन और EVM प्रोटोकॉल की निगरानी का अधिकार देता है।
  • Representation of the People Act, 1951: चुनाव संचालन और मतगणना (Section 128) को नियंत्रित करता है।
  • ECI Manual 2023: EVM और VVPAT की सुरक्षा, कस्टडी, सीलिंग और प्रक्रिया का विस्तृत विवरण है।
  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले: पारदर्शिता को बढ़ावा देते हैं, जैसे VVPAT का अनिवार्य होना।

EVM के परिवहन और भंडारण में सुरक्षा प्रोटोकॉल

मतदान के बाद EVM को मतदान केंद्र से मजबूत कक्षों तक कई स्तरों की सुरक्षा के तहत पहुंचाया जाता है। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) सुरक्षा काफिले के रूप में तैनात रहते हैं, जबकि GPS ट्रैकिंग से वास्तविक समय में मशीनों की हरकत पर नजर रखी जाती है (ECI Manual 2023)। मजबूत कक्षों को कई सुरक्षा सीलों से बंद किया जाता है और केवल अधिकृत अधिकारियों जैसे जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) और रिटर्निंग अधिकारी (RO) को ही पहुंच की अनुमति होती है। हर चरण पर कस्टडी लॉग बनाए जाते हैं, ताकि मशीनों को संभालने वाले कर्मियों का रिकॉर्ड रखा जा सके और अनधिकृत पहुंच रोकी जा सके।

  • परिवहन के दौरान CAPF की सशस्त्र सुरक्षा और GPS ट्रैकिंग होती है।
  • मजबूत कक्षों को कई सीलों और CCTV निगरानी से सुरक्षित रखा जाता है।
  • कस्टडी लॉग हर हस्तांतरण और पहुंच को दस्तावेजीकृत करते हैं।
  • पहुँच केवल अधिकृत ECI अधिकारी और सुरक्षा कर्मियों तक सीमित है।

वोटर वेरीफियेबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) की भूमिका

2019 से पूरे देश में VVPAT मशीनें लागू की गई हैं, जो मतदाता द्वारा डाले गए वोट की एक कागजी पर्ची प्रदान करती हैं, जिससे पारदर्शिता और मतदाता विश्वास बढ़ता है। अब 543 लोकसभा क्षेत्रों में EVM के साथ VVPAT का उपयोग होता है (ECI प्रेस रिलीज, 2019)। हालांकि VVPAT के कारण चुनाव खर्च में लगभग 15% की वृद्धि हुई है, यह मतगणना के दौरान इलेक्ट्रॉनिक परिणामों की क्रॉस-चेकिंग के लिए एक विश्वसनीय ऑडिट तंत्र के रूप में काम करता है।

  • 2019 के लोकसभा चुनाव से देशव्यापी VVPAT लागू।
  • मतदाताओं और अधिकारियों को वोट की कागजी पुष्टि प्रदान करता है।
  • अतिरिक्त उपकरणों के कारण चुनाव खर्च में लगभग 15% की वृद्धि।
  • मतगणना के दौरान यादृच्छिक ऑडिट में EVM की सटीकता की पुष्टि करता है।

EVM की कस्टडी और मतगणना में संस्थागत भूमिकाएं

चुनाव आयोग EVM प्रोटोकॉल का सर्वोच्च जिम्मेदार है। BEL और ECIL मशीनों का निर्माण और रखरखाव करते हैं। CAPF परिवहन के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करता है, जबकि जिला निर्वाचन अधिकारी स्थानीय कस्टडी के प्रभारी होते हैं। रिटर्निंग अधिकारी मजबूत कक्षों में भंडारण और मतगणना की निगरानी करते हैं। इस समन्वय से पूरे देश में समान सुरक्षा मानक लागू होते हैं।

  • ECI: नीति निर्धारण, प्रोटोकॉल और निगरानी।
  • BEL & ECIL: निर्माण, रखरखाव और तकनीकी सहायता।
  • CAPF: परिवहन और भंडारण के दौरान सशस्त्र सुरक्षा।
  • DEOs & ROs: स्थानीय कस्टडी, सीलिंग और मतगणना की देखरेख।

तुलनात्मक अध्ययन: भारत की EVM प्रणाली बनाम अमेरिका के मतदान तंत्र

पहलूभारतसंयुक्त राज्य अमेरिका
मतदान प्रणालीकेन्द्रीयकृत EVM और VVPATराज्य-वार विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक और कागजी बैलेट
नियामक प्राधिकरणचुनाव आयोग (केन्द्रीयकृत)राज्य चुनाव बोर्ड (विभिन्न)
सुरक्षा प्रोटोकॉलECI के एकसमान दिशा-निर्देश, CAPF सुरक्षा, GPS ट्रैकिंगराज्य अनुसार भिन्न, कोई एकसमान संघीय मानक नहीं
ऑडिट तंत्रVVPAT कागजी ट्रेल, कस्टडी लॉगमतदाता-स्वीकृत पेपर ऑडिट ट्रेल (HAVA 2002), लेकिन असंगत कार्यान्वयन
टेम्परिंग की रिपोर्ट2004 से कोई परिणाम प्रभावित करने वाला मामला नहीं2020 चुनावों में आरोप और मुकदमेबाजी

महत्वपूर्ण कमी: स्वतंत्र तृतीय पक्ष ऑडिट का अभाव

चुनाव आयोग के मजबूत प्रोटोकॉल के बावजूद, मतदान से मतगणना के बीच EVM के लिए स्वतंत्र तृतीय पक्ष ऑडिट का अभाव एक कमजोर कड़ी है। गलत सूचना और पारदर्शिता की मांग के कारण सार्वजनिक संदेह बना हुआ है। यह कमी चुनावी विश्वास को चुनौती देती है और सुरक्षा बनाए रखते हुए निष्पक्ष ऑडिट को शामिल करने के लिए संस्थागत सुधारों की आवश्यकता को दर्शाती है।

महत्व और आगे का रास्ता

  • सार्वजनिक विश्वास बढ़ाने के लिए स्वतंत्र ऑडिट तंत्र को संस्थागत बनाना।
  • EVM और VVPAT की कार्यप्रणाली पर मतदाता शिक्षा बढ़ाकर गलत सूचना का मुकाबला करना।
  • सुरक्षा प्रोटोकॉल को बनाए रखते हुए वास्तविक समय निगरानी के लिए तकनीक का उपयोग।
  • साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की सलाह से सुरक्षा प्रोटोकॉल की समय-समय पर समीक्षा।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
मतदान और मतगणना के बीच EVM की यात्रा को लेकर निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) EVM के परिवहन के दौरान सशस्त्र सुरक्षा प्रदान करते हैं।
  2. Representation of the People Act, 1951, EVM के साथ VVPAT के उपयोग को अनिवार्य करता है।
  3. चुनाव आयोग EVM संचालन के लिए कस्टडी लॉग बनाए रखता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 2 गलत है क्योंकि Representation of the People Act, 1951 VVPAT के उपयोग को अनिवार्य नहीं करता; इसे 2013 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों द्वारा लागू किया गया। कथन 1 और 3 सही हैं क्योंकि CAPF सशस्त्र सुरक्षा प्रदान करते हैं और चुनाव आयोग कस्टडी लॉग रखता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत में EVM की सुरक्षा को लेकर निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. EVM जहां संग्रहित होते हैं, वहां मजबूत कक्ष कई सुरक्षा सीलों से बंद और CCTV निगरानी में होते हैं।
  2. चुनाव आयोग स्थानीय पुलिस अधिकारियों को मजबूत कक्षों में सुरक्षा जांच के लिए पहुंच की अनुमति देता है।
  3. मतदान केंद्रों से मतगणना केंद्रों तक EVM के परिवहन में GPS ट्रैकिंग का उपयोग होता है।
  • aकेवल 1 और 3
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 2
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (a)
कथन 2 गलत है क्योंकि मजबूत कक्षों में पहुंच केवल अधिकृत ECI अधिकारियों तक सीमित होती है, स्थानीय पुलिस अधिकारियों को नहीं। कथन 1 और 3 ECI के दिशा-निर्देशों के अनुसार सही हैं।

मुख्य प्रश्न

भारत में मतदान से मतगणना तक इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) की यात्रा को नियंत्रित करने वाले प्रक्रिया संबंधी सुरक्षा उपायों और प्रोटोकॉल की समीक्षा करें। ये उपाय चुनावी ईमानदारी को कैसे सुनिश्चित करते हैं? वर्तमान प्रणाली में मौजूद कमियों का आलोचनात्मक विश्लेषण करें और सुधार के सुझाव दें।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (शासन और लोक प्रशासन) — चुनावी प्रक्रियाएं और सुधार
  • झारखंड परिप्रेक्ष्य: झारखंड में सभी विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों में EVM और VVPAT का उपयोग होता है, जहां DEOs और ROs स्थानीय कस्टडी और मतगणना के प्रभारी हैं।
  • मुख्य बिंदु: राज्य स्तर पर लागू करने की चुनौतियां, स्थानीय सुरक्षा बलों की भूमिका और मतदाता जागरूकता अभियान पर चर्चा करें।
चुनाव आयोग को EVM प्रबंधन का अधिकार कौन से कानूनी प्रावधान देते हैं?

संविधान के Article 324 के तहत चुनाव आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने का अधिकार मिलता है, जिसमें EVM प्रबंधन भी शामिल है। Representation of the People Act, 1951, विशेषकर Section 128, मतगणना प्रक्रिया को चुनाव आयोग की निगरानी में संचालित करने का प्रावधान करता है।

भारत में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें कौन बनाता है?

भारत में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) जैसी दो सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां EVM का निर्माण करती हैं, जिनकी वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 1.5 मिलियन यूनिट है।

EVM को परिवहन के दौरान कैसे सुरक्षित रखा जाता है?

EVM को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की सशस्त्र सुरक्षा के तहत परिवहन किया जाता है, GPS ट्रैकिंग से हर समय उनकी स्थिति पर नजर रखी जाती है, और अधिकृत चुनाव आयोग के अधिकारी उनके साथ होते हैं ताकि सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

भारतीय चुनावों में VVPAT की क्या भूमिका है?

VVPAT मशीन मतदाता द्वारा डाले गए वोट की कागजी पर्ची प्रदान करती है, जिससे पारदर्शिता बढ़ती है। 2019 से पूरे देश में लागू, यह मतगणना के दौरान इलेक्ट्रॉनिक परिणामों की जांच की सुविधा देता है और मतदाता विश्वास बढ़ाता है।

क्या भारत में EVM छेड़छाड़ के कारण चुनाव परिणाम प्रभावित हुए हैं?

चुनाव आयोग के अनुसार, 2004 से अब तक EVM छेड़छाड़ के कारण किसी भी चुनाव परिणाम को प्रभावित करने वाला कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है।

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