परिचय: मतदान से मतगणना तक EVM की यात्रा
इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (EVM) भारत के चुनावी तंत्र का अहम हिस्सा हैं और 1999 से व्यापक रूप से इस्तेमाल हो रही हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में 13 लाख से अधिक EVM लगाए गए थे, जिनका प्रबंधन भारत निर्वाचन आयोग (ECI) करता है, जिसे संविधान के Article 324 के तहत अधिकार प्राप्त हैं। मतदान केंद्र से मतगणना केंद्र तक EVM की यात्रा कई चरणों से गुजरती है, जिसमें कड़ी सुरक्षा, पारदर्शिता और जिम्मेदारी की व्यवस्था होती है ताकि चुनाव की विश्वसनीयता बनी रहे।
यह प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि EVM की सुरक्षा या पारदर्शिता में कोई चूक जनता के विश्वास और चुनाव परिणामों की वैधता को प्रभावित कर सकती है। यह प्रक्रिया Representation of the People Act, 1951, ECI के दिशा-निर्देशों और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत संचालित होती है, जो हर कदम पर जवाबदेही सुनिश्चित करती है।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 2: भारतीय संविधान—Article 324, चुनाव आयोग के अधिकार
- GS पेपर 2: शासन—चुनाव प्रबंधन, पारदर्शिता और जवाबदेही
- GS पेपर 3: शासन में तकनीक—EVM तकनीक और सुरक्षा प्रोटोकॉल
- निबंध: भारत में चुनाव सुधार और लोकतांत्रिक अखंडता
संवैधानिक और कानूनी ढांचा जो EVM के प्रबंधन को नियंत्रित करता है
Article 324 निर्वाचन आयोग को चुनाव की देखरेख का अधिकार देता है, जिसमें EVM की तैनाती और सुरक्षा भी शामिल है। Representation of the People Act, 1951 चुनावी प्रक्रिया का कानूनी आधार है, लेकिन यह EVM के प्रबंधन का विस्तार से उल्लेख नहीं करता। इसके बजाय, ECI ने EVM ऑपरेशनल गाइडलाइंस (2019) जारी की हैं और मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू किया है, जो EVM की सुरक्षा और परिवहन के नियम निर्धारित करता है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों, विशेषकर PUCL बनाम भारत संघ (2013) और PUCL बनाम भारत संघ (2018), ने EVM की विश्वसनीयता को मान्यता दी है और Voter Verifiable Paper Audit Trail (VVPAT) के उपयोग को अनिवार्य किया है ताकि पारदर्शिता बढ़े। इन आदेशों के तहत यादृच्छिक VVPAT काउंटिंग और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाती है ताकि छेड़छाड़ रोकी जा सके।
- Article 324: चुनाव आयोग को चुनावों पर संवैधानिक अधिकार
- Representation of the People Act, 1951: चुनावी आचरण का कानून
- EVM ऑपरेशनल गाइडलाइंस (2019): सीलिंग, भंडारण और ट्रांसपोर्ट के नियम
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश: VVPAT का अनिवार्य उपयोग और पारदर्शिता
EVM की सुरक्षा और रखरखाव में संस्थागत भूमिकाएं
ECI EVM की तैनाती, सुरक्षा और निष्पक्षता की सर्वोच्च संस्था है। EVM और VVPAT का निर्माण भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) करते हैं। मतदान के बाद EVM को सील किया जाता है और ड्यूल कस्टडी में रखा जाता है—पहले पोलिंग अधिकारी और फिर जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) इसकी जिम्मेदारी लेते हैं।
परिवहन के दौरान सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (CAPF) GPS-निगरानी वाली गाड़ियों के साथ EVM को मतगणना केंद्र तक सुरक्षित पहुंचाते हैं। DEO स्थानीय स्तर पर सुरक्षित कमरे में EVM का भंडारण करते हैं। इस कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के कारण पिछले तीन आम चुनावों में किसी भी छेड़छाड़ की सूचना नहीं मिली है, जैसा कि ECI सुरक्षा रिपोर्ट 2021 में उल्लेख है।
- ECI: समग्र निरीक्षण और प्रक्रिया प्राधिकरण
- BEL और ECIL: EVM और VVPAT का निर्माण और गुणवत्ता नियंत्रण
- CAPF: सुरक्षित परिवहन और सुरक्षा गश्त
- DEO: स्थानीय स्तर पर भंडारण और देखरेख
सुरक्षा प्रोटोकॉल और पारदर्शिता के उपाय
मतदान के दिन से लेकर मतगणना तक, EVM को छेड़छाड़-रोधी सील के साथ सील किया जाता है और ड्यूल कस्टडी में सुरक्षित कमरे में रखा जाता है, जैसा कि EVM ऑपरेशनल मैनुअल (2019) के सेक्शन 10 में निर्देशित है। परिवहन के लिए GPS-निगरानी वाली गाड़ियों का उपयोग होता है, जिनके साथ CAPF के जवान रहते हैं ताकि अनधिकृत पहुंच रोकी जा सके।
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए 2019 से VVPAT का अनिवार्य उपयोग किया जा रहा है। हर विधानसभा क्षेत्र के पांच मतदान केंद्रों में यादृच्छिक रूप से VVPAT की गिनती की जाती है, जिससे EVM की सटीकता की पुष्टि होती है। 2019 के चुनाव बाद किए गए ऑडिट में 99.99% सटीकता दर्ज हुई, जिसने इस प्रणाली पर विश्वास और मजबूत किया।
- मतदान से मतगणना तक सीलिंग और ड्यूल कस्टडी
- GPS-निगरानी और CAPF की सुरक्षा गश्त के साथ परिवहन
- VVPAT स्लिप की यादृच्छिक गिनती से सत्यापन
- चुनाव बाद ऑडिट में लगभग पूर्ण सटीकता
EVM तैनाती के आर्थिक पहलू
2019 के आम चुनावों में EVM खरीद के लिए लगभग INR 500 करोड़ का बजट रखा गया था, जो सार्वजनिक निवेश की बड़ी राशि है। BEL और ECIL देश में 1,000 से अधिक लोगों को रोजगार देते हैं। कागजी मतपत्रों की तुलना में EVM से चुनाव खर्च में लगभग 60% की बचत होती है, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होता है।
वैश्विक स्तर पर डिजिटल मतदान तकनीकों का बाजार 15% वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है (MarketsandMarkets 2023), जिससे भारत के EVM तंत्र में नवाचार और निर्यात के अवसर बढ़ सकते हैं।
- 2019 के लिए INR 500 करोड़ का EVM खरीद बजट
- 1,000 से अधिक रोजगार निर्माण
- कागजी मतपत्रों की तुलना में 60% लागत बचत
- वैश्विक डिजिटल मतदान बाजार में 15% वार्षिक वृद्धि
तुलनात्मक विश्लेषण: भारत का EVM सिस्टम बनाम अमेरिका के मतदान तंत्र
| पहलू | भारत (EVM सिस्टम) | अमेरिका (कागजी मतपत्र + इलेक्ट्रॉनिक गणना) |
|---|---|---|
| मतदान विधि | EVM के साथ VVPAT | कागजी मतपत्र, मेल-इन मतपत्र, इलेक्ट्रॉनिक गणना |
| गणना पारदर्शिता | यादृच्छिक VVPAT स्लिप काउंट, सील किए गए EVM | मैनुअल पुनर्गणना, अधिक पुनर्गणना दर |
| पुनर्गणना दर | लगभग शून्य | 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में लगभग 0.1% |
| छेड़छाड़ के आरोप | पिछले तीन आम चुनावों में कोई घटना नहीं | मेल-इन मतपत्रों में बार-बार आरोप और मुकदमे |
| सुरक्षा प्रोटोकॉल | ड्यूल कस्टडी, GPS-ट्रैकिंग, CAPF गश्त | राज्य अनुसार भिन्न; कम केंद्रीकृत सुरक्षा |
महत्वपूर्ण कमियां और चुनौतियां
शारीरिक सुरक्षा मजबूत होने के बावजूद, EVM का फर्मवेयर क्लोज्ड-सोर्स है, जिससे स्वतंत्र तृतीय पक्ष ऑडिट संभव नहीं हो पाता। इससे विपक्षी दल और नागरिक समाज में संदेह पैदा होता है, जो ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर की मांग करते हैं ताकि भरोसा बढ़े।
इसके अलावा, दूरदराज के इलाकों में लॉजिस्टिक चुनौतियां और कस्टडी हैंडओवर में कभी-कभार प्रक्रियात्मक चूक भी देखी गई है, हालांकि इससे चुनाव परिणाम प्रभावित नहीं हुए। सॉफ्टवेयर पारदर्शिता बढ़ाना और कस्टोडियन के प्रशिक्षण में सुधार प्राथमिकता के क्षेत्र हैं।
- क्लोज्ड-सोर्स फर्मवेयर स्वतंत्र सत्यापन में बाधा
- ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर ऑडिट की मांग पर अभी तक कार्रवाई नहीं
- दूरदराज मतदान केंद्रों में लॉजिस्टिक समस्याएं
- प्रशिक्षण और प्रक्रियात्मक अनुपालन में सुधार की जरूरत
महत्व और आगे का रास्ता
मतदान से मतगणना तक EVM की यात्रा भारत के चुनावी विश्वास का आधार है, जो संवैधानिक अधिकार और संस्थागत कड़ाई पर टिकी है। भौतिक सुरक्षा प्रोटोकॉल को बनाए रखना और सॉफ्टवेयर पारदर्शिता की चिंताओं को दूर करना सार्वजनिक विश्वास को कायम रखेगा।
सिफारिशों में ECI की निगरानी में ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर ऑडिट शुरू करना, VVPAT स्लिप काउंटिंग के दायरे को बढ़ाना और ब्लॉकचेन जैसी उभरती तकनीकों का इस्तेमाल कर ऑडिट ट्रेल मजबूत करना शामिल है। CAPF, DEO और निर्माताओं के बीच बेहतर समन्वय से प्रक्रियात्मक कमजोरियां कम हो सकती हैं।
- EVM फर्मवेयर का ओपन-सोर्स ऑडिट लागू करना
- VVPAT स्लिप काउंटिंग के नमूने बढ़ाना
- ब्लॉकचेन आधारित ऑडिट ट्रेल की खोज
- सभी हितधारकों के प्रशिक्षण और समन्वय को बेहतर बनाना
- EVM मतदान के दिन से मतगणना तक एकल कस्टडी में रखी जाती हैं।
- सुप्रीम कोर्ट ने 2019 से सभी चुनावों में VVPAT के उपयोग को अनिवार्य किया है।
- EVM को मतगणना केंद्रों तक ले जाने में GPS ट्रैकिंग का उपयोग होता है।
- संविधान का Article 324 निर्वाचन आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने का अधिकार देता है।
- Representation of the People Act, 1951 EVM प्रबंधन की प्रक्रियाओं का स्पष्ट विवरण देता है।
- सुप्रीम कोर्ट ने PUCL बनाम भारत संघ मामले में EVM की विश्वसनीयता को मान्यता दी और पारदर्शिता अनिवार्य की।
मुख्य प्रश्न
भारत में मतदान से मतगणना तक इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) की यात्रा के दौरान उनकी निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाले संस्थागत और प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों पर चर्चा करें। ये उपाय लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कैसे मजबूत करते हैं?
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 - शासन और चुनावी प्रक्रियाएं
- झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड में विधानसभा और स्थानीय चुनावों में EVM का व्यापक उपयोग होता है; DEO यहां CAPF के साथ मिलकर आदिवासी और दूरदराज इलाकों में EVM के सुरक्षित परिवहन का समन्वय करते हैं।
- मुख्य बिंदु: उत्तरों में ECI की भूमिका, झारखंड के कठिन इलाके में स्थानीय चुनौतियां और आदिवासी मतदाता भागीदारी के लिए सुरक्षित EVM प्रबंधन के महत्व को उजागर करें।
भारत निर्वाचन आयोग को EVM प्रबंधन का अधिकार संविधान के कौन से प्रावधान से मिलता है?
Article 324 भारत के संविधान का वह प्रावधान है जो निर्वाचन आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने का अधिकार देता है, जिसमें EVM की तैनाती और प्रबंधन भी शामिल है।
मतदान से मतगणना तक EVM की सुरक्षा के मुख्य उपाय क्या हैं?
EVM को छेड़छाड़-रोधी सील के साथ सील किया जाता है, ड्यूल कस्टडी में सुरक्षित कमरे में रखा जाता है, GPS-निगरानी वाली गाड़ियों में CAPF के जवानों के साथ ले जाया जाता है, जिससे छेड़छाड़ की कोई घटना नहीं होती।
EVM की पारदर्शिता सुनिश्चित करने में VVPAT की क्या भूमिका है?
VVPAT प्रत्येक वोट का कागजी प्रमाण प्रदान करता है, जिससे यादृच्छिक स्लिप काउंटिंग के माध्यम से EVM की सटीकता की पुष्टि होती है। सुप्रीम कोर्ट ने 2019 से इसके उपयोग को अनिवार्य किया है ताकि पारदर्शिता बढ़े।
भारत में EVM और VVPAT का निर्माण कौन-कौन से संस्थान करते हैं?
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) देश में EVM और VVPAT का निर्माण करते हैं, जो 1,000 से अधिक लोगों को रोजगार देते हैं।
EVM सॉफ्टवेयर पारदर्शिता को लेकर मुख्य आलोचना क्या है?
EVM का फर्मवेयर क्लोज्ड-सोर्स है, जिससे स्वतंत्र तृतीय पक्ष ऑडिट संभव नहीं होता और ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर की मांग उठती है ताकि भरोसा और जांच-पड़ताल बढ़ सके।
आधिकारिक स्रोत और आगे पढ़ाई के लिए
लर्नप्रो संपादकीय मानकों के बारे में
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