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2023-24 में रुपया कमजोर होने का परिप्रेक्ष्य और महत्व

वित्त वर्ष 2023-24 में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 6% कमजोर हुआ है, जिससे 2013 के 'फ्रैजाइल फाइव' संकट की यादें ताजा हो गई हैं, जब उभरती बाजार की मुद्राओं में तेज गिरावट आई थी। यह कमजोरी चालू खाता घाटे (CAD) के बढ़ने के साथ आई है, जो वित्त वर्ष 24 की तीसरी तिमाही में GDP के 2.9% तक पहुंच गया है। इसका कारण बढ़ती आयात लागत और वैश्विक वस्तु मूल्यों का दबाव है (RBI Bulletin, मार्च 2024)। हालांकि, 2013 के विपरीत, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार मई 2024 तक $580 बिलियन के मजबूत स्तर पर हैं, जो बाहरी झटकों से सुरक्षा का काम करते हैं। वित्त मंत्रालय की वित्तीय नीति और RBI की मौद्रिक नीति, जो Reserve Bank of India Act, 1934 के तहत संचालित होती है, मुद्रा स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं।

UPSC से प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था — मुद्रा और विनिमय दर प्रबंधन, भुगतान संतुलन, मौद्रिक नीति
  • GS पेपर 3: आर्थिक विकास — प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, व्यापार और वाणिज्य
  • निबंध: उभरती बाजारों में आर्थिक स्थिरता और मुद्रा अस्थिरता

मुद्रा और विदेशी विनिमय प्रबंधन का कानूनी ढांचा

Foreign Exchange Management Act, 1999 (FEMA) विदेशी मुद्रा लेनदेन को नियंत्रित करता है, खासकर धारा 3 और 4 के तहत, जिससे RBI को विदेशी मुद्रा प्रवाह पर निगरानी और नियंत्रण का अधिकार मिलता है। Reserve Bank of India Act, 1934 की धारा 17 और 18 RBI को मुद्रा जारी करने और मौद्रिक नीति के जरिए विनिमय दर प्रबंधन का अधिकार देती है। Finance Act, 2023 वित्तीय घाटे के लक्ष्यों को प्रभावित करता है, जो निवेशकों के भरोसे और व्यापक आर्थिक स्थिरता पर असर डालता है। सुप्रीम कोर्ट के RBI बनाम भारत संघ (2020) फैसले ने RBI की मौद्रिक नीति स्वतंत्रता को पुनः स्थापित किया, जो मुद्रा अस्थिरता से निपटने में संस्थागत मजबूती का परिचायक है।

रुपया कमजोर होने के आर्थिक संकेतक

  • रुपया कमजोरी: 2023-24 में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 6% गिरावट (RBI Bulletin, मार्च 2024)।
  • चालू खाता घाटा: वित्त वर्ष 24 की तीसरी तिमाही में GDP का 2.9%, बढ़े हुए आयात खर्च और व्यापार असंतुलन के कारण।
  • विदेशी मुद्रा भंडार: मई 2024 तक $580 बिलियन, जो बाहरी झटकों से रक्षा करता है।
  • माल निर्यात: वित्त वर्ष 23 में 15% की वार्षिक वृद्धि के साथ $450 बिलियन तक पहुंचा, निर्यात में मजबूती का संकेत (वाणिज्य मंत्रालय)।
  • FDI प्रवाह: वित्त वर्ष 23 में 18% की वृद्धि के साथ $83 बिलियन, निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है (DPIIT)।
  • महंगाई: वित्त वर्ष 23 में औसतन 5.7%, जो आयात लागत और मौद्रिक सख्ती के माध्यम से मुद्रा पर दबाव डालता है (Economic Survey 2024)।

तुलना: भारत बनाम इंडोनेशिया (2013-2024)

पहलूभारत (2023-24)इंडोनेशिया (2022-23)
रुपया/रुपिआह का रुखUSD के मुकाबले 6% कमजोरीUSD के मुकाबले 3% मजबूती
चालू खाता घाटाGDP का 2.9% (Q3 FY24)लगभग 1.5% (2023)
विदेशी मुद्रा भंडार$580 बिलियनलगभग $140 बिलियन
नीति प्रतिक्रियासीमित पूंजी नियंत्रण, मध्यम ब्याज दर वृद्धिआक्रामक ब्याज दर वृद्धि, पूंजी नियंत्रण
FDI और पोर्टफोलियो प्रवाहFDI 18% बढ़ा, अस्थिर पोर्टफोलियो निवेश पर निर्भरतामजबूत FDI, कम पोर्टफोलियो अस्थिरता

संरचनात्मक कमजोरियां और नीतिगत कमियां

भारत की अस्थिर पोर्टफोलियो निवेश प्रवाह पर निर्भरता उसे अचानक पूंजी पलायन के जोखिम के प्रति संवेदनशील बनाती है, जबकि इंडोनेशिया ने 2022 में पूंजी नियंत्रण और सख्त मौद्रिक नीति से अपनी मुद्रा को स्थिर रखा। भारत में कठोर पूंजी नियंत्रण के अभाव से सट्टा प्रवाह को रोकने के लिए सीमित नीति विकल्प उपलब्ध हैं। इसके अलावा, Finance Act, 2023 के प्रभाव से वित्तीय घाटा नियंत्रित नहीं हो पाने से निवेशकों का भरोसा कमजोर हो सकता है, जो मुद्रा स्थिरता के लिए चिंता का विषय है। वित्त वर्ष 23 में 5.7% की महंगाई को देखते हुए RBI को विकास और मुद्रा स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए सावधानीपूर्वक हस्तक्षेप करना होगा।

मुद्रा प्रबंधन में संस्थागत भूमिकाएं

  • Reserve Bank of India (RBI): मौद्रिक नीति लागू करता है, विदेशी मुद्रा भंडार का प्रबंधन करता है और RBI Act, 1934 के तहत मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करता है।
  • वित्त मंत्रालय (MoF): वित्तीय नीति और बजट निर्धारण करता है, जो आर्थिक स्थिरता को प्रभावित करता है।
  • Department for Promotion of Industry and Internal Trade (DPIIT): FDI प्रवाह को ट्रैक और प्रोत्साहित करता है, जो विदेशी मुद्रा के लिए जरूरी है।
  • वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय: व्यापार संतुलन, निर्यात वृद्धि और आयात निर्भरता पर नजर रखता है।

आगे का रास्ता: रुपया मजबूती बढ़ाने के उपाय

  • अस्थिर पोर्टफोलियो निवेश प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए सूक्ष्म पूंजी प्रवाह प्रबंधन उपाय लागू करें।
  • वित्तीय अनुशासन बनाए रखें ताकि वित्तीय घाटा न बढ़े और मुद्रा स्थिरता बनी रहे।
  • निर्यात विविधीकरण को मजबूत करें ताकि व्यापार संतुलन सुधरे और CAD पर दबाव कम हो।
  • RBI की मौद्रिक नीति में लचीलापन बढ़ाएं ताकि महंगाई और बाहरी झटकों पर तेजी से प्रतिक्रिया दी जा सके।
  • विदेशी मुद्रा भंडार का रणनीतिक उपयोग करें ताकि आवश्यकतानुसार बाजार में हस्तक्षेप किया जा सके।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
Foreign Exchange Management Act (FEMA), 1999 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. FEMA भारत में विदेशी मुद्रा लेनदेन को नियंत्रित करता है ताकि बाहरी व्यापार और भुगतान सुगम हो सकें।
  2. FEMA ने Foreign Exchange Regulation Act (FERA) को प्रतिस्थापित किया ताकि विदेशी मुद्रा नियंत्रणों में उदारीकरण हो सके।
  3. FEMA, RBI को मुद्रा नोट जारी करने का अधिकार देता है।

इनमें से कौन सा/से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि FEMA विदेशी मुद्रा लेनदेन को नियंत्रित करता है ताकि व्यापार और भुगतान सुगम हो सकें। कथन 2 भी सही है क्योंकि FEMA ने FERA की जगह लेकर विदेशी मुद्रा नियंत्रणों को उदार बनाया। कथन 3 गलत है क्योंकि मुद्रा नोट जारी करने का अधिकार RBI को Reserve Bank of India Act, 1934 के तहत प्राप्त है, न कि FEMA के तहत।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
चालू खाता घाटा (CAD) और वित्तीय घाटे के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. CAD किसी देश की बचत और निवेश के बीच अंतर को दर्शाता है।
  2. वित्तीय घाटा सरकार के व्यय का राजस्व से अधिक होना है, जिसमें उधार शामिल नहीं होता।
  3. CAD और वित्तीय घाटा दोनों सीधे महंगाई का कारण होते हैं।

इनमें से कौन सा/से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (a)
कथन 1 और 2 CAD और वित्तीय घाटे की सही परिभाषाएं हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि CAD और वित्तीय घाटा सीधे महंगाई का कारण नहीं होते; महंगाई कई कारणों से होती है, जैसे मांग और आपूर्ति का असंतुलन और मौद्रिक नीति।

मुख्य प्रश्न

2023-24 में भारतीय रुपया कमजोर होने के पीछे के कारणों का आलोचनात्मक विश्लेषण करें। चर्चा करें कि वर्तमान आर्थिक और संस्थागत ढांचा इस दौर को 2013 के 'फ्रैजाइल फाइव' संकट से किस प्रकार अलग बनाता है। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC से प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (अर्थव्यवस्था और विकास) — मुद्रा और विनिमय दर प्रबंधन
  • झारखंड का नजरिया: झारखंड के खनिज निर्यात से विदेशी मुद्रा आय होती है; रुपया अस्थिरता से निर्यात प्रतिस्पर्धा और स्थानीय उद्योग प्रभावित होते हैं।
  • मुख्य बिंदु: रुपया कमजोरी का झारखंड के खनन निर्यात और औद्योगिक विकास पर प्रभाव; मुद्रा उतार-चढ़ाव के राज्य स्तर पर निहितार्थ।
2013 में 'फ्रैजाइल फाइव' मुद्रा संकट की वजह क्या थी?

2013 में 'फ्रैजाइल फाइव' संकट की शुरुआत अमेरिकी फेडरल रिजर्व के क्वांटिटेटिव ईजिंग में कटौती से हुई, जिससे उभरती बाजारों जैसे भारत, ब्राजील, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका और तुर्की से पूंजी निकासी हुई। इससे इन देशों की मुद्राओं में तेज गिरावट और वित्तीय अस्थिरता आई।

RBI, RBI Act, 1934 के तहत मुद्रा कमजोरी को कैसे नियंत्रित करता है?

RBI Act, 1934 की धारा 17 और 18 के तहत RBI ओपन मार्केट ऑपरेशन करता है, ब्याज दरों को समायोजित करता है और विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करके मुद्रा स्थिरता बनाए रखता है।

चालू खाता घाटा और वित्तीय घाटे में क्या अंतर है?

चालू खाता घाटा देश के आयात, निर्यात, सेवाओं और ट्रांसफर के बीच अंतर को दर्शाता है, जो बाहरी क्षेत्र का संतुलन है। वित्तीय घाटा सरकार के व्यय का राजस्व से अधिक होना है (उधार को छोड़कर), जो आंतरिक बजट असंतुलन को दर्शाता है।

भारत में पोर्टफोलियो निवेश पर निर्भरता मुद्रा स्थिरता के लिए क्यों चिंता का विषय है?

पोर्टफोलियो निवेश अस्थिर होते हैं और वैश्विक जोखिम भावना में बदलाव के कारण तेजी से पलट सकते हैं, जिससे अचानक पूंजी पलायन और मुद्रा में तेज गिरावट हो सकती है, जो रुपया को बाहरी झटकों के प्रति संवेदनशील बनाता है।

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