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परिचय: आईआरजीसी का हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर बयान

2024 में एक हालिया अवसर पर, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने घोषणा की कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य "कभी भी अपने पुराने स्वरूप में वापस नहीं आएगा।" ईरान और ओमान के बीच स्थित यह संकरे समुद्री मार्ग विश्व ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जहाँ प्रतिदिन लगभग 21 मिलियन बैरल पेट्रोलियम तरल पदार्थ का परिवहन होता है, जो वैश्विक खपत का लगभग 21% है (यूएस एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन, 2023)। आईआरजीसी का यह बयान क्षेत्रीय समुद्री नियंत्रण और सुरक्षा के परिदृश्य में स्थायी बदलाव का संकेत देता है, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं और फारस की खाड़ी में भू-राजनीतिक स्थिरता पर पड़ेगा।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – समुद्री सुरक्षा, ईरान की रणनीतिक स्थिति, भारत की ऊर्जा कूटनीति
  • GS पेपर 3: अर्थव्यवस्था – वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, तेल व्यापार मार्ग, भारत के कच्चे तेल आयात पर प्रभाव
  • निबंध: वैश्विक व्यापार और सुरक्षा में समुद्री संकरे मार्गों का भू-राजनीतिक महत्व

हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर कानूनी ढांचा

हॉर्मुज जलडमरूमध्य मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत नियंत्रित है, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र समुद्र कानून सम्मेलन (UNCLOS) 1982 के अंतर्गत। UNCLOS के भाग III में क्षेत्रीय समुद्र और आसन्न क्षेत्र की परिभाषा दी गई है, जबकि भाग V में विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के अधिकारों का उल्लेख है, जो तटीय देशों के लिए प्रासंगिक हैं। 1958 का क्षेत्रीय समुद्र और आसन्न क्षेत्र सम्मेलन भी लागू होता है, जो नौवहन और संप्रभुता के लिए आधारभूत अधिकार स्थापित करता है।

ईरान के आंतरिक कानून में समुद्री पर्यावरण संरक्षण अधिनियम (1995) शामिल है, जो उसकी अधिकार क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों को नियंत्रित करता है। भारत के संविधान में सीधे हॉर्मुज जलडमरूमध्य के लिए प्रावधान नहीं हैं; फिर भी, अनुच्छेद 253 और 246 संघ सरकार को अंतरराष्ट्रीय संधियों और बाहरी मामलों पर कानून बनाने का अधिकार देते हैं, जिससे भारत समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा कूटनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकता है।

आर्थिक महत्व और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर प्रभाव

हॉर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा प्रवाह के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। यूएस एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) 2023 के अनुसार, लगभग 21 मिलियन बैरल प्रतिदिन इस जलडमरूमध्य से होकर गुजरते हैं, जो वैश्विक पेट्रोलियम तरल पदार्थ की खपत का लगभग 21% है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) का अनुमान है कि समुद्री तेल व्यापार का 30% हिस्सा इसी संकरे मार्ग से गुजरता है, जो इसकी रणनीतिक अहमियत को दर्शाता है।

इस जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार की बाधा वैश्विक तेल कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव ला सकती है, जहां बंदी या संघर्ष के दौरान कीमतों में 10-20% तक की वृद्धि हो सकती है। भारत के लिए, जिसने वित्तीय वर्ष 2023 में लगभग 180 बिलियन डॉलर के कच्चे तेल का आयात किया (वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय), ऐसी बाधाएं आयात लागत और मुद्रास्फीति को बढ़ा सकती हैं। इसके अलावा, खाड़ी क्षेत्र के समुद्री मार्गों के लिए बीमा प्रीमियम 2023 में 15% बढ़े हैं (लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस), जो जोखिम की बढ़ती धारणा को दर्शाता है।

आईआरजीसी का सैन्य नियंत्रण और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य

आईआरजीसी, जो ईरान की विशिष्ट सैन्य इकाई है, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक संचालन पर व्यापक नियंत्रण रखती है। 2021 से, आईआरजीसी की नौसैनिक गश्त और सैन्य अभ्यासों में 40% की वृद्धि हुई है (जेन की डिफेंस वीकली), जो तेहरान की क्षेत्रीय प्रभुत्व स्थापित करने और बाहरी हस्तक्षेप को रोकने की मंशा को दर्शाता है। यह सैन्य रुख पहले की तुलना में स्वतंत्र नौवहन की स्थिति को चुनौती देता है और अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा प्रयासों को जटिल बनाता है।

इस जलडमरूमध्य में सभी तटीय देशों को शामिल करते हुए कोई बहुपक्षीय समुद्री सुरक्षा तंत्र नहीं है, जो अन्य रणनीतिक संकरे मार्गों से अलग है। ईरान का एकतरफा सैन्य प्रभुत्व संघर्ष के जोखिम को बढ़ाता है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता को खतरे में डालता है।

मलक्का जलडमरूमध्य के साथ तुलना

पहलूहॉर्मुज जलडमरूमध्यमलक्का जलडमरूमध्य
भौगोलिक स्थितिईरान और ओमान के बीचमलेशिया, सिंगापुर और इंडोनेशिया के बीच
रणनीतिक महत्व21 मिलियन बीपीडी तेल परिवहन (~21% वैश्विक खपत)प्रति वर्ष 50,000 से अधिक जहाज; एशिया-प्रशांत व्यापार के लिए महत्वपूर्ण
सुरक्षा तंत्रआईआरजीसी का एकतरफा नियंत्रण; कोई बहुपक्षीय गश्त नहींबहुपक्षीय मलक्का स्ट्रेट पेट्रोल्स समझौता; संयुक्त नौसैनिक अभ्यास
सुरक्षा परिणामसैन्य तनाव और संघर्ष का खतरा बढ़ापिछले दशक में समुद्री डकैती में 60% कमी (अंतरराष्ट्रीय समुद्री ब्यूरो)

नीतिगत खामियां और रणनीतिक चुनौतियां

हॉर्मुज जलडमरूमध्य में मलक्का जलडमरूमध्य जैसे बाध्यकारी बहुपक्षीय समुद्री सुरक्षा तंत्र का अभाव है। इस कमी के कारण ईरान का आईआरजीसी सैन्य रूप से प्रभुत्व स्थापित कर चुका है, जिससे भू-राजनीतिक अस्थिरता बढ़ती है। तटीय देशों और वैश्विक हितधारकों के बीच समन्वित निगरानी और संयुक्त गश्त की कमी मुक्त नौवहन और ऊर्जा सुरक्षा के लिए खतरा बढ़ाती है।

भारत के लिए चुनौती दोहरी है: निरंतर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना और ईरान, अमेरिका तथा खाड़ी देशों के साथ जटिल कूटनीतिक संबंधों को संभालना। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) और पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) को रणनीतिक साझेदारी मजबूत करनी होंगी और ऊर्जा मार्गों तथा स्रोतों में विविधता लानी होगी।

आगे का रास्ता: रणनीतिक और कूटनीतिक कदम

  • ईरान, ओमान, यूएई और अंतरराष्ट्रीय पक्षों को शामिल करते हुए बहुपक्षीय समुद्री सुरक्षा तंत्र को बढ़ावा देना ताकि नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित हो और एकतरफा सैन्य प्रभुत्व कम हो सके।
  • खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों के साथ भारत के ऊर्जा कूटनीति संबंधों को गहरा करना और अंतरराष्ट्रीय नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) जैसे वैकल्पिक ऊर्जा मार्गों में निवेश बढ़ाना।
  • क्षेत्रीय नौसेनाओं और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के साथ तकनीकी सहयोग और संयुक्त अभ्यास के माध्यम से समुद्री क्षेत्र की जागरूकता बढ़ाना।
  • रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार विकसित करना और कच्चे तेल के आयात स्रोतों को विविध बनाना ताकि आपूर्ति में व्यवधान के प्रभाव को कम किया जा सके।

निष्कर्ष

आईआरजीसी की यह घोषणा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य कभी अपने पुराने स्वरूप में वापस नहीं आएगा, समुद्री शक्ति और सुरक्षा के परिदृश्य में एक स्थायी बदलाव को दर्शाती है। यह बदलाव वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और भारत के आर्थिक हितों को प्रभावित करता है। इस महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए बहुपक्षीय सहयोग और मजबूत कूटनीति के माध्यम से रणनीतिक और कानूनी खामियों को दूर करना आवश्यक है।

📝 प्रारंभिक अभ्यास
हॉर्मुज जलडमरूमध्य की कानूनी स्थिति के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. जलडमरूमध्य को संयुक्त राष्ट्र समुद्र कानून सम्मेलन (UNCLOS) 1982 के तहत नियंत्रित किया जाता है।
  2. ईरान को पूरे हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर पूर्ण संप्रभुता प्राप्त है।
  3. अंतरराष्ट्रीय जहाजों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जलडमरूमध्य में ट्रांजिट पासेज का अधिकार है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि UNCLOS 1982 समुद्री क्षेत्रों सहित अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए जलडमरूमध्य को नियंत्रित करता है। कथन 2 गलत है; ईरान को पूरे जलडमरूमध्य पर पूर्ण संप्रभुता नहीं है क्योंकि यह एक अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य है जहाँ ट्रांजिट पासेज की अनुमति है। कथन 3 सही है क्योंकि UNCLOS के तहत अंतरराष्ट्रीय जहाजों को ट्रांजिट पासेज का अधिकार प्राप्त है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. IRGC ईरान की नियमित नौसेना है जो सभी नौसैनिक संचालन की जिम्मेदार है।
  2. 2021 से IRGC ने जलडमरूमध्य में नौसैनिक गश्त और सैन्य अभ्यासों में 40% की वृद्धि की है।
  3. IRGC फारस की खाड़ी में रणनीतिक संकरे मार्गों पर नियंत्रण रखता है, जो वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित करता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि IRGC ईरान की नियमित नौसेना से अलग एक विशिष्ट सैन्य बल है। कथन 2 और 3 जेन की डिफेंस वीकली और लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के अनुसार सही हैं।

मेन्स प्रश्न

आईआरजीसी के इस दावे के प्रभावों का विश्लेषण करें कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य कभी अपने पुराने स्वरूप में वापस नहीं आएगा, और इसका भारत की ऊर्जा सुरक्षा तथा विदेश नीति पर क्या असर होगा। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – अंतरराष्ट्रीय संबंध और आर्थिक विकास
  • झारखंड दृष्टिकोण: झारखंड के औद्योगिक क्षेत्र स्थिर ऊर्जा आपूर्ति पर निर्भर हैं; वैश्विक तेल व्यापार मार्गों में बाधाएं राज्य स्तर पर ऊर्जा मूल्य और औद्योगिक विकास को प्रभावित करती हैं।
  • मेन्स पॉइंटर: उत्तर तैयार करते समय भारत की खाड़ी ऊर्जा आयात निर्भरता, समुद्री संकरे मार्गों का रणनीतिक महत्व और ऊर्जा सुरक्षा के विविधीकरण की आवश्यकता को रेखांकित करें, जो झारखंड के आर्थिक विकास से जुड़ा है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य का रणनीतिक महत्व क्या है?

हॉर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक संकरा मार्ग है, जिसके माध्यम से लगभग 21 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल गुजरता है, जो वैश्विक पेट्रोलियम तरल पदार्थ की खपत का लगभग 21% है (EIA, 2023)। यह वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

अंतरराष्ट्रीय कानून हॉर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन को कैसे नियंत्रित करता है?

संयुक्त राष्ट्र समुद्र कानून सम्मेलन (UNCLOS) 1982 के तहत, हॉर्मुज जलडमरूमध्य एक अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य है जहाँ जहाजों को ट्रांजिट पासेज का अधिकार प्राप्त है। क्षेत्रीय संप्रभुता केवल आधाररेखा जल तक सीमित है, जिससे अंतरराष्ट्रीय नौवहन स्वतंत्र रहता है।

आईआरजीसी हॉर्मुज जलडमरूमध्य में क्या भूमिका निभाता है?

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) जलडमरूमध्य में नौसैनिक संचालन पर नियंत्रण रखता है, 2021 से गश्त और सैन्य अभ्यासों में वृद्धि कर ईरान की रणनीतिक प्रभुत्व स्थापित करने का प्रयास कर रहा है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान भारत को कैसे प्रभावित कर सकता है?

भारत अपनी कच्चे तेल की बड़ी हिस्सेदारी इसी जलडमरूमध्य के माध्यम से आयात करता है। व्यवधान के कारण वैश्विक तेल कीमतों में 10-20% तक वृद्धि हो सकती है, जिससे भारत का आयात बिल (जो FY2023 में 180 बिलियन डॉलर था) बढ़ेगा और मुद्रास्फीति तथा आर्थिक विकास पर असर पड़ेगा।

सुरक्षा के लिहाज से हॉर्मुज और मलक्का जलडमरूमध्य में क्या अंतर है?

मलक्का जलडमरूमध्य में तटीय देशों के बीच बहुपक्षीय सुरक्षा व्यवस्था है, जिससे समुद्री डकैती में 60% कमी आई है। इसके विपरीत, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है और IRGC का एकतरफा नियंत्रण भू-राजनीतिक तनाव और जोखिम बढ़ाता है।

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