परिचय: आधुनिक संघर्षों में ईरान के ड्रोन अभियानों का महत्व
2023 में, ईरान ने मध्य पूर्व के कई संघर्ष क्षेत्रों में 200 से अधिक ड्रोन तैनात किए, जो राज्य संचालित अनमैन्ड एयरक्राफ्ट व्हीकल (UAV) के इस्तेमाल में एक बड़ा इजाफा है (Indian Express, 2024)। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इन अभियानों का संचालन किया, जिसमें कम लागत वाले, स्वार्म-क्षमता वाले ड्रोन जैसे Shahed-136 का उपयोग किया गया, जिसकी रेंज लगभग 2,000 किलोमीटर और प्रति यूनिट लागत लगभग 20,000 अमेरिकी डॉलर है (Defense News, 2023)। इस व्यापक इस्तेमाल से असममित युद्ध की दिशा में बदलाव दिखाई देता है, जहां तकनीक-संचालित और किफायती प्लेटफॉर्म पारंपरिक मानव संचालित विमान और भारी तोपखाने की जगह ले रहे हैं।
- 2021-2023 के बीच ईरान के हमलावर अभियानों में लगभग 40% हिस्सेदारी ड्रोन हमलों की रही (Jane’s Defence Analysis, 2023)।
- Shahed-136 की किफायती कीमत अमेरिकी MQ-9 Reaper जैसे ड्रोन की तुलना में बहुत कम है, जो प्रति यूनिट 1 मिलियन डॉलर से अधिक खर्चीला है, जिससे ईरान लंबी ड्रोन अभियानों को जारी रख सकता है।
- वैश्विक सैन्य ड्रोन बाजार 2023 में 22.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर का था, और 2030 तक 12.5% की वार्षिक वृद्धि दर की उम्मीद है (MarketsandMarkets, 2023)।
ड्रोन युद्ध से जुड़ी कानूनी और संवैधानिक व्यवस्थाएं
भारत में ड्रोन युद्ध पर स्पष्ट कानूनी प्रावधान नहीं हैं, लेकिन संबंधित पहलुओं को Arms Act, 1959 के तहत नियंत्रित किया जाता है, जो हथियारों और सैन्य उपकरणों को नियमबद्ध करता है। ड्रोन ऑपरेशनों के साइबर आयाम Information Technology Act, 2000 की धारा 66F के अंतर्गत आ सकते हैं, जो साइबर आतंकवाद से संबंधित है और ड्रोन हैकिंग के खतरे को भी कवर करता है। अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेषकर UN Charter के Article 2(4) में बल प्रयोग या बल की धमकी को प्रतिबंधित किया गया है, लेकिन इसमें अनमैन्ड सिस्टम के लिए स्पष्ट नियम नहीं हैं, जिससे ड्रोन युद्ध के लिए एक नियामक शून्य बना हुआ है।
- स्वायत्त हथियार प्रणालियों पर बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय मानकों का अभाव जवाबदेही और संघर्ष नियंत्रण को जटिल बनाता है।
- भारत में ड्रोन विरोधी उपायों पर कानूनी अस्पष्टता व्यापक नीति निर्माण में बाधा है।
- UNODA (United Nations Office for Disarmament Affairs) स्वायत्त हथियारों पर चर्चा में सक्रिय है, लेकिन लागू होने वाले संधि नहीं हैं।
ड्रोन के आर्थिक पहलू
वैश्विक सैन्य ड्रोन बाजार तेजी से बढ़ रहा है, जो 2023 में 22.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर का था और 2030 तक 42 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना है (MarketsandMarkets, 2023)। ईरान ने पिछले दशक में ड्रोन तकनीक में लगभग 1 बिलियन डॉलर का निवेश किया है (Jane’s Defence Weekly, 2023), जो कम लागत वाले प्लेटफॉर्म पर केंद्रित है, जिससे मानव संचालित विमानों की तुलना में संचालन खर्च में 70% तक की बचत होती है। यह आर्थिक दृष्टिकोण छोटे देशों और गैर-राज्य अभिनेताओं को उन्नत युद्ध कौशल तक पहुंच प्रदान करता है और पारंपरिक सैन्य पदानुक्रम को चुनौती देता है।
- किफायती होने के कारण ड्रोन की संख्या तेजी से बढ़ी: Shahed-136 की कीमत 20,000 डॉलर प्रति यूनिट है, जबकि MQ-9 Reaper 1 मिलियन डॉलर से अधिक महंगा है।
- भारत ने 2023-24 में UAVs के लिए रक्षा बजट में 15% की वृद्धि कर INR 3,000 करोड़ आवंटित किए, जो रणनीतिक प्राथमिकता को दर्शाता है (Union Budget 2023-24)।
- 2023 तक 60 से अधिक देश सैन्य ड्रोन कार्यक्रम संचालित कर रहे हैं, जो 2010 की तुलना में दोगुना है (SIPRI, 2023)।
ड्रोन युद्ध और मुकाबला: संस्थागत भूमिका
ईरान में IRGC ड्रोन अभियानों का नेतृत्व करता है, जो स्वदेशी तकनीक को असममित रणनीतियों के साथ जोड़ता है। भारत में Indian Air Force (IAF) वायु रक्षा और ड्रोन विरोधी रणनीतियों के विकास के लिए जिम्मेदार है, जबकि Defence Research and Development Organisation (DRDO) स्वदेशी UAV विकास पर काम कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर UNODA स्वायत्त हथियारों के नियम बनाने के लिए संवाद स्थापित करता है, लेकिन इसके पास लागू करने की शक्ति नहीं है।
- IRGC के ड्रोन स्वार्म रणनीति से रक्षा प्रणालियों पर दबाव बनता है।
- IAF की मौजूदा ड्रोन विरोधी क्षमताएं खंडित हैं और एकीकृत काइनेटिक एवं इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली का अभाव है।
- DRDO स्वदेशी UAV विकसित कर आयात पर निर्भरता कम करने और निगरानी तथा हमले की क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
तुलनात्मक विश्लेषण: ईरान बनाम अमेरिका की ड्रोन रणनीतियां
| पहलू | ईरान | अमेरिका |
|---|---|---|
| ड्रोन प्रकार | कम लागत वाले, स्वार्म-क्षम (जैसे Shahed-136) | उच्च तकनीकी, बहु-कार्य (जैसे MQ-9 Reaper) |
| रणनीतिक सिद्धांत | असममित युद्ध, सैचुरेशन अटैक | सटीक हमले, खुफिया, निगरानी और टोही (ISR) |
| प्रति यूनिट लागत | लगभग 20,000 डॉलर | 1 मिलियन डॉलर से अधिक |
| तकनीकी फोकस | मास प्रोडक्शन, सस्ती कीमत, लंबी रेंज | उन्नत सेंसर, लंबी उड़ान क्षमता, बहु-कार्य क्षमता |
| संचालन उपयोग | स्वार्म हमले से रक्षा प्रणाली को दबाना | लक्षित हमले, ISR मिशन, लंबी अवधि की निगरानी |
ड्रोन विरोधी नीतियों में महत्वपूर्ण खामियां
अधिकांश देशों में, भारत सहित, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, काइनेटिक इंटरसेप्शन और कानूनी नियमों को एकीकृत करने वाली व्यापक ड्रोन विरोधी नीतियां नहीं हैं। ईरान की स्वार्म ड्रोन रणनीति वायु क्षेत्र सुरक्षा में कमजोरियां उजागर करती है, क्योंकि पारंपरिक वायु रक्षा प्रणालियां बड़े पैमाने पर सस्ते UAV हमलों का सामना करने में सक्षम नहीं हैं। यह खामी महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और सैन्य संपत्तियों के लिए खतरा पैदा करती है, इसलिए तत्काल नीति और क्षमता सुधार आवश्यक हैं।
- खंडित ड्रोन विरोधी उपाय स्वार्म रणनीतियों के खिलाफ प्रतिक्रिया की प्रभावशीलता कम करते हैं।
- कानूनी अस्पष्टताएं नागरिक वायु क्षेत्र में काइनेटिक और इलेक्ट्रॉनिक उपायों की तैनाती में बाधा हैं।
- राडार, जैमिंग और इंटरसेप्टर ड्रोन को मिलाकर बहु-स्तरीय रक्षा प्रणाली की जरूरत है।
UPSC से संबंधित
- GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – उभरती युद्ध तकनीक, ड्रोन विस्तार के रणनीतिक प्रभाव
- GS पेपर 3: सुरक्षा – रक्षा तैयारियां, युद्ध में तकनीक, साइबर सुरक्षा
- निबंध: आधुनिक युद्ध और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर तकनीक का प्रभाव
आगे का रास्ता: ड्रोन-आधारित युद्ध के लिए अनुकूलन
- काइनेटिक, इलेक्ट्रॉनिक और साइबर क्षमताओं को मिलाकर व्यापक ड्रोन विरोधी सिद्धांत विकसित करें।
- ड्रोन उपयोग और मुकाबले के लिए कानूनी ढांचे मजबूत करें, जिसमें स्पष्ट नियम और साइबर सुरक्षा शामिल हों।
- स्वदेशी ड्रोन तकनीक में निवेश बढ़ाएं ताकि निर्भरता कम हो और रणनीतिक स्वायत्तता बढ़े (DRDO की पहल)।
- स्वायत्त हथियारों और ड्रोन युद्ध के नियम बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों (UNODA) में सक्रिय भागीदारी करें।
- सीमा पार ड्रोन खतरों की निगरानी और मुकाबले के लिए खुफिया साझेदारी और क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाएं।
- ईरान मुख्य रूप से अमेरिकी MQ-9 Reaper जैसे महंगे, बहु-कार्य ड्रोन का उपयोग करता है।
- ईरान का Shahed-136 ड्रोन लगभग 2,000 किलोमीटर की रेंज रखता है।
- पिछले दो वर्षों में ईरान के हमलावर अभियानों में ड्रोन हमलों की हिस्सेदारी लगभग 40% रही।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
- संयुक्त राष्ट्र चार्टर सीधे अनमैन्ड एयरक्राफ्ट के उपयोग को सशस्त्र संघर्ष में प्रतिबंधित करता है।
- भारत के Information Technology Act, 2000 की धारा 66F साइबर आतंकवाद को संबोधित करती है, जिसमें ड्रोन हैकिंग भी शामिल है।
- Arms Act, 1959 भारत में सैन्य ड्रोन के स्वामित्व और उपयोग को नियंत्रित करता है।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
मुख्य प्रश्न
ईरान के हाल के संघर्षों में ड्रोन के व्यापक उपयोग से आधुनिक युद्ध में किस प्रकार बदलाव आया है? पारंपरिक सैन्य सिद्धांतों के लिए यह क्या चुनौतियां लेकर आता है और भारत की रक्षा तैयारियों पर इसके क्या प्रभाव पड़ते हैं, इस पर चर्चा करें।
ईरान की ड्रोन रणनीति अमेरिका से किस प्रकार अलग है?
ईरान कम लागत वाले, स्वार्म-क्षम ड्रोन जैसे Shahed-136 पर केंद्रित है, जो सैचुरेशन हमलों और असममित युद्ध को सक्षम बनाते हैं। अमेरिका उच्च तकनीकी, बहु-कार्य ड्रोन जैसे MQ-9 Reaper का उपयोग करता है, जो सटीक हमले और ISR मिशनों पर जोर देते हैं (Defense News, 2023)।
क्या भारत के पास सैन्य ड्रोन उपयोग को नियंत्रित करने वाले विशिष्ट कानून हैं?
भारत के पास सैन्य ड्रोन के लिए स्पष्ट कानून नहीं हैं, लेकिन Arms Act, 1959 के तहत संबंधित पहलुओं को नियंत्रित किया जाता है और Information Technology Act, 2000 की धारा 66F साइबर आतंकवाद, जिसमें ड्रोन हैकिंग शामिल है, को कवर करती है।
ईरान जैसे देशों के लिए ड्रोन युद्ध के आर्थिक फायदे क्या हैं?
ड्रोन संचालन खर्च को मानव संचालित विमानों की तुलना में 70% तक कम कर देते हैं। ईरान ने लगभग 1 बिलियन डॉलर का निवेश कर बड़े पैमाने पर किफायती ड्रोन अभियानों को संभव बनाया है, जिससे पारंपरिक सैन्य ताकत के पदानुक्रम को चुनौती मिली है (Jane’s Defence Weekly, 2023)।
ड्रोन के बढ़ते महत्व के मद्देनजर भारत ने क्या कदम उठाए हैं?
भारत ने 2023-24 में UAVs के लिए रक्षा बजट में 15% की वृद्धि कर INR 3,000 करोड़ आवंटित किए, जो स्वदेशी ड्रोन विकास और ड्रोन विरोधी क्षमताओं को बढ़ावा देने की रणनीति को दर्शाता है (Union Budget 2023-24)।
वर्तमान ड्रोन विरोधी नीतियों में क्या कमियां हैं?
भारत समेत अधिकांश देशों में काइनेटिक, इलेक्ट्रॉनिक और साइबर रक्षा को एकीकृत करने वाली व्यापक ड्रोन विरोधी नीतियां नहीं हैं। कानूनी अस्पष्टताएं और खंडित क्षमताएं स्वार्म ड्रोन हमलों के खिलाफ सुरक्षा में कमजोरियां पैदा करती हैं, जैसा कि ईरान की रणनीति से पता चलता है।
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