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Syllabus: GS2/IR

परिप्रेक्ष्य

  • मार्च 2024 में, ईरान की संसद (मजलिस) ने यह घोषणा की है कि वह न्यूक्लियर नॉन-प्रोलिफेरेशन ट्रिटी (NPT) से वापसी के लिए कानून पर विचार कर रही है, जो परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने वाला एक वैश्विक समझौता है।

ईरान के परमाणु प्रतिबद्धताओं का कानूनी ढांचा

NPT 1968 में हस्ताक्षरित और 1970 से लागू है, जो ईरान को गैर-परमाणु हथियार राज्य (NNWS) के रूप में बांधता है कि वह परमाणु हथियार विकसित न करे और शांतिपूर्ण परमाणु गतिविधियों के लिए अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी स्वीकार करे। NPT के अनुच्छेद X के तहत, कोई भी राज्य तीन महीने की नोटिस देकर असाधारण परिस्थितियों में अपनी सर्वोच्च हितों को खतरे में पाते हुए इस समझौते से बाहर निकल सकता है।

जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (JCPOA) 2015, जिसे यूएन सिक्योरिटी काउंसिल रेजोल्यूशन 2231 (2015) ने मंजूरी दी है, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को और सीमित करता है। इसमें यूरेनियम संवर्धन को 3.67% U-235 तक सीमित करने और सेंट्रीफ्यूज की संख्या लगभग 5,060 IR-1 मॉडल तक घटाने का प्रावधान है। यह एक राजनीतिक समझौता है, लेकिन NPT के साथ मिलकर अतिरिक्त प्रतिबंध और जांच के तरीके लागू करता है।

NPT से संभावित वापसी के प्रभाव

अगर ईरान NPT से वापस निकलता है, तो वह हथियार निरस्तीकरण की जिम्मेदारियों और IAEA की निगरानी से कानूनी तौर पर मुक्त हो जाएगा, जिससे परमाणु हथियार विकास का खतरा बढ़ जाएगा। यह कदम वैश्विक गैर-प्रसार व्यवस्था को कमजोर करेगा और समझौते की विश्वसनीयता तथा लागू करने की क्षमता पर असर डालेगा।

  • ईरान को JCPOA की सीमाओं से ऊपर यूरेनियम संवर्धन करने की अनुमति मिल जाएगी।
  • इससे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और अलगाव की संभावना बढ़ेगी, जो मध्य पूर्व की सुरक्षा को अस्थिर कर सकता है।
  • खाड़ी देशों और इज़राइल के बीच हथियारों की दौड़ को बढ़ावा मिल सकता है।

परमाणु प्रतिबंधों और समझौता उल्लंघनों का आर्थिक असर

ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े प्रतिबंधों ने 2012 से 2020 के बीच देश को लगभग 200 अरब डॉलर के तेल राजस्व की हानि पहुंचाई है (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के आंकड़े)। प्रतिबंधों से पहले, ईरान लगभग 2.5 मिलियन बैरल प्रति दिन कच्चा तेल निर्यात करता था (OPEC मासिक तेल बाजार रिपोर्ट 2018)।

समझौते से बाहर निकलने के बाद नए प्रतिबंधों से ईरान की GDP वृद्धि 2023 में 3.5% से गिरकर नकारात्मक हो सकती है (विश्व बैंक), जिससे क्षेत्रीय व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित होगी। वैश्विक तेल बाजारों में अस्थिरता आ सकती है क्योंकि ईरान की निर्यात क्षमता कम हो जाएगी।

प्रमुख संस्थान और उनकी भूमिका

  • अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA): NPT और JCPOA के तहत ईरान की परमाणु गतिविधियों की निगरानी करती है।
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC): प्रतिबंधों और रेजोल्यूशन जैसे UNSC रेजोल्यूशन 2231 को लागू करती है।
  • ईरानी संसद (मजलिस): NPT से वापसी संबंधी प्रस्तावित कानून की समीक्षा करती है।
  • JCPOA की संयुक्त आयोग: परमाणु समझौते के क्रियान्वयन और अनुपालन की देखरेख करती है।

तुलनात्मक दृष्टिकोण: उत्तर कोरिया का NPT से वापसी

उत्तर कोरिया ने 2003 में NPT से वापसी की, जिसके बाद उसने तेजी से परमाणु हथियार विकसित किए और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना किया, जिससे पूर्वी एशिया की सुरक्षा अस्थिर हुई। यह उदाहरण दिखाता है कि कैसे किसी देश की वापसी वैश्विक गैर-प्रसार प्रयासों को कमजोर कर सकती है और क्षेत्रीय हथियारों की दौड़ को बढ़ावा दे सकती है।

पहलू ईरान उत्तर कोरिया
NPT स्थिति 1970 से हस्ताक्षरकर्ता; 2024 में वापसी पर विचार 2003 में वापसी की
परमाणु विकास JCPOA के तहत सीमित संवर्धन; वापसी के बाद विस्तार की संभावना वापसी के बाद परमाणु हथियार विकसित किए
अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध परमाणु गतिविधियों से जुड़े प्रतिबंध लगाए/पुनः लगाए गए वापसी के बाद व्यापक प्रतिबंध
क्षेत्रीय सुरक्षा प्रभाव मध्य पूर्व में अस्थिरता; हथियारों की दौड़ का खतरा पूर्वी एशिया में अस्थिरता; अमेरिका, दक्षिण कोरिया, जापान के साथ तनाव बढ़ा

वैश्विक गैर-प्रसार व्यवस्था में महत्वपूर्ण कमी

NPT में ऐसी कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है जो वापसी को रोक सके या दंडित कर सके, जिससे सदस्य देश अनुच्छेद X के तहत बिना तत्काल परिणाम के वापसी कर सकते हैं। यह कानूनी खामी समझौते की विश्वसनीयता और वैश्विक गैर-प्रसार प्रवर्तन को कमजोर करती है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – परमाणु संधियां, वैश्विक गैर-प्रसार व्यवस्था, मध्य पूर्व की भू-राजनीति।
  • GS पेपर 3: सुरक्षा चुनौतियां, प्रतिबंधों का आर्थिक प्रभाव।
  • निबंध: परमाणु हथियारों का वैश्विक शासन और संधि अनुपालन।

आगे की राह

  • संविदानात्मक वापसी को रोकने और संतुलित प्रतिबंध लगाने के लिए अंतरराष्ट्रीय तंत्र को मजबूत करना।
  • ईरान से कूटनीतिक संवाद बढ़ाकर JCPOA अनुपालन बहाल करना और सुरक्षा चिंताओं को दूर करना।
  • मध्य पूर्व में हथियारों की दौड़ रोकने के लिए क्षेत्रीय सुरक्षा वार्ताओं को बढ़ावा देना।
  • NPT के ढांचे में सुधार कर वापसी से जुड़ी कानूनी खामियों को बंद करना।

अभ्यास प्रश्न

📝 प्रारंभिक अभ्यास
न्यूक्लियर नॉन-प्रोलिफेरेशन ट्रिटी (NPT) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. NPT किसी भी राज्य को असाधारण घटनाओं का हवाला देते हुए तीन महीने की नोटिस देकर वापसी की अनुमति देता है।
  2. केवल परमाणु हथियार वाले राज्य ही NPT के तहत यूरेनियम संवर्धन कर सकते हैं।
  3. भारत, पाकिस्तान और इज़राइल NPT के गैर-हस्ताक्षरकर्ता हैं।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 1 NPT के अनुच्छेद X के अनुसार सही है। कथन 2 गलत है क्योंकि गैर-परमाणु हथियार राज्यों को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए निगरानी के तहत संवर्धन की अनुमति है। कथन 3 सही है; भारत, पाकिस्तान और इज़राइल ने NPT पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (JCPOA) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. JCPOA ईरान को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत यूएन सिक्योरिटी काउंसिल के रेजोल्यूशन के रूप में बाध्य करता है।
  2. JCPOA ईरान के यूरेनियम संवर्धन को 3.67% U-235 तक सीमित करता है।
  3. JCPOA के तहत ईरान को अपने सभी सेंट्रीफ्यूज तोड़ने होंगे।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2
  • cकेवल 1 और 3
  • dकेवल 2 और 3
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि JCPOA को UNSC रेजोल्यूशन 2231 ने मंजूरी दी है, जिससे इसे कानूनी मान्यता मिली है। कथन 2 भी सही है; संवर्धन सीमा 3.67% है। कथन 3 गलत है; ईरान ने सेंट्रीफ्यूज की संख्या कम करने पर सहमति दी है, पर सभी को तोड़ने पर नहीं।

मेन्स प्रश्न

ईरान की न्यूक्लियर नॉन-प्रोलिफेरेशन ट्रिटी (NPT) से प्रस्तावित वापसी के वैश्विक गैर-प्रसार प्रयासों और मध्य पूर्व की क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रभावों पर चर्चा करें। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – अंतरराष्ट्रीय संबंध और सुरक्षा मुद्दे।
  • झारखंड का नजरिया: झारखंड के रणनीतिक उद्योग और ऊर्जा सुरक्षा की चिंताएं मध्य पूर्व की भू-राजनीति से प्रभावित वैश्विक तेल बाजार की स्थिरता से जुड़ी हैं।
  • मेन्स पॉइंटर: वैश्विक परमाणु कूटनीति को भारत की ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता से जोड़ते हुए उत्तर तैयार करें, जिसमें भारत की NPT में गैर-हस्ताक्षरकर्ता स्थिति और उसकी कूटनीतिक संतुलन नीति पर प्रकाश डाला जाए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

NPT क्या है?

NPT एक बहुपक्षीय संधि है, जो 1968 में हस्ताक्षरित और 1970 से लागू है। इसका उद्देश्य परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना, हथियार निरस्तीकरण को बढ़ावा देना और IAEA की निगरानी में शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के उपयोग को सुनिश्चित करना है। यह देशों को परमाणु हथियार वाले और गैर-परमाणु हथियार वाले वर्गों में बांटता है।

कौन सा कानूनी प्रावधान किसी राज्य को NPT से बाहर निकलने की अनुमति देता है?

NPT का अनुच्छेद X किसी भी राज्य को तीन महीने की नोटिस देकर और असाधारण घटनाओं का हवाला देते हुए संधि से वापसी की अनुमति देता है, यदि वह अपनी सर्वोच्च हितों को खतरे में पाता है।

JCPOA का NPT से क्या संबंध है?

JCPOA एक राजनीतिक समझौता है जिसे UNSC रेजोल्यूशन 2231 ने मंजूरी दी है। यह ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर NPT से आगे अतिरिक्त प्रतिबंध लगाता है, जैसे यूरेनियम संवर्धन और सेंट्रीफ्यूज की संख्या सीमित करना, और निगरानी बढ़ाना।

कौन से देश NPT पर हस्ताक्षर नहीं करते?

भारत, पाकिस्तान, इज़राइल और उत्तर कोरिया प्रमुख गैर-हस्ताक्षरकर्ता देश हैं।

ईरान के परमाणु प्रतिबंधों के आर्थिक परिणाम क्या हैं?

प्रतिबंधों के कारण ईरान को 2012 से 2020 के बीच लगभग 200 अरब डॉलर के तेल राजस्व की हानि हुई है, जिससे GDP वृद्धि धीमी हुई और वैश्विक तेल बाजार तथा क्षेत्रीय व्यापार प्रभावित हुए।

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