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2023 के अंत से जारी ईरान संघर्ष ने इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। ईरान, जो तांबे की पन्नी का एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता है और विश्व बाजार में इसकी हिस्सेदारी लगभग 8% है, को प्रतिबंधों, निर्यात सीमाओं और लॉजिस्टिक समस्याओं के कारण भारी नुकसान हुआ है। इस व्यवधान की वजह से Q4 2023 से PCB की कीमतों में वैश्विक स्तर पर 12% की वृद्धि हुई है, जिससे सेमीकंडक्टर आधारित उद्योगों पर व्यापक प्रभाव पड़ा है। भारत में भी इसका असर साफ दिखा है, जहां इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण की वृद्धि दर 2023 में 12% से घटकर 2024 की पहली तिमाही में 5% रह गई (इकोनॉमिक सर्वे 2024)। यह संकट भारत की महत्वपूर्ण कच्ची सामग्री पर आयात निर्भरता और घरेलू उत्पादन की सीमाओं को उजागर करता है, साथ ही विविध आपूर्ति स्रोतों और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला नीतियों की जरूरत को रेखांकित करता है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – भू-राजनीतिक संघर्षों का वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला पर प्रभाव
  • GS पेपर 3: अर्थव्यवस्था – इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं, और PLI जैसी सरकारी नीतियाँ
  • निबंध: भारत की औद्योगिक और व्यापार नीतियों में भू-राजनीति की भूमिका

वैश्विक सर्किट बोर्ड आपूर्ति श्रृंखला में ईरान की भूमिका

ईरान तांबे की पन्नी का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता है, जो PCB के लिए एक जरूरी कच्चा माल है और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में इसका व्यापक उपयोग होता है। US Geological Survey (2023) के अनुसार, ईरान विश्व तांबे की पन्नी की लगभग 8% आपूर्ति करता है। तांबे की पन्नी PCB में विद्युत चालकता और संरचनात्मक मजबूती प्रदान करती है, इसलिए सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों के लिए यह अनिवार्य है। संघर्ष और प्रतिबंधों के कारण ईरान की निर्यात क्षमता बाधित हो गई है, जिससे कच्चे माल की कमी और PCB की कीमतों में वृद्धि हुई है।

  • वैश्विक PCB बाजार का मूल्य 2023 में 62 बिलियन USD था, और 2028 तक 4.5% की CAGR अनुमानित है (Statista, 2024)
  • Q4 2023 से PCB की कीमतों में 12% की वृद्धि हुई है (The Hindu, 2024)
  • ईरान के तांबे की पन्नी निर्यात प्रतिबंधों के कारण कच्चे माल की उपलब्धता में बाधाएं आई हैं

भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र पर प्रभाव

भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स आयात बिल वित्त वर्ष 2022-23 में लगभग 76 बिलियन USD था, जिसमें सर्किट बोर्ड का हिस्सा करीब 15% था (मंत्रालय इलेक्ट्रॉनिक्स और IT, 2023)। PCB आपूर्ति में बाधा ने सीधे भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण वृद्धि दर को प्रभावित किया है, जो 2023 में 12% से घटकर 2024 की पहली तिमाही में 5% रह गई (इकोनॉमिक सर्वे, 2024)। PCB की बढ़ती कीमतों ने घरेलू निर्माताओं की उत्पादन लागत बढ़ा दी है, जिससे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में उनकी स्थिति कमजोर हुई है।

  • PCB और तांबे की पन्नी जैसे कच्चे माल पर आयात निर्भरता अधिक है
  • घरेलू PCB निर्माण क्षमता सीमित और आपूर्ति श्रृंखला नीतियाँ विखंडित हैं
  • PLI योजना के तहत 2023-24 में 76,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसका उद्देश्य घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देना है (वित्त मंत्रालय बजट दस्तावेज)

आपूर्ति श्रृंखला मजबूती के लिए कानूनी और नीतिगत ढांचा

आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (धारा 3) भारत सरकार को संकट के दौरान आवश्यक वस्तुओं समेत इलेक्ट्रॉनिक घटकों की आपूर्ति और वितरण नियंत्रित करने का अधिकार देता है। विदेश व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992 आयात-निर्यात नियंत्रण से संबंधित है, जो सर्किट बोर्ड घटकों पर लागू होता है। इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट के सीधे मामले नहीं हैं, लेकिन वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय और विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के तहत नीतिगत उपाय व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती सुनिश्चित करते हैं।

  • मंत्रालय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी (MeitY) इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण नीतियों का निर्माण और कार्यान्वयन करता है
  • DGFT इलेक्ट्रॉनिक घटकों के आयात-निर्यात नियंत्रण का प्रबंधन करता है
  • इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर सॉफ्टवेयर निर्यात संवर्धन परिषद (ESC) उद्योग के साथ निर्यात संवर्धन के लिए संपर्क साधता है
  • नीति आयोग आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण और तकनीकी नवाचार की रणनीति बनाता है

भारत और दक्षिण कोरिया की आपूर्ति श्रृंखला मजबूती की तुलना

पहलू भारत दक्षिण कोरिया
घरेलू PCB निर्माण क्षमता सीमित और विखंडित मजबूत, वर्टिकल इंटीग्रेटेड सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम
कच्चे माल की आपूर्ति आयात पर अधिक निर्भर, जिसमें ईरान से 8% तांबे की पन्नी शामिल है रणनीतिक भंडारण और विविध वैश्विक आपूर्तिकर्ता
सरकारी समर्थन PLI योजना के तहत 76,000 करोड़ रुपये आवंटन (2023-24) सेमीकंडक्टर उद्योग संघ (SIA) द्वारा समर्थित नीतियाँ और सब्सिडी
2023-24 के भू-राजनीतिक तनाव का प्रभाव इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण वृद्धि दर घटकर 5% हुई इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में 7% वृद्धि बनी रही

महत्व और आगे का रास्ता

  • भारत की PCB के लिए तांबे की पन्नी जैसे महत्वपूर्ण कच्चे माल पर अत्यधिक आयात निर्भरता भू-राजनीतिक जोखिमों के प्रति संवेदनशील बनाती है, जैसा कि ईरान संघर्ष में देखा गया।
  • घरेलू PCB निर्माण क्षमता का विस्तार, लक्षित निवेश और तकनीकी हस्तांतरण के माध्यम से आयात निर्भरता कम करना जरूरी है।
  • MeitY, DGFT और नीति आयोग के बीच बेहतर नीति समन्वय से आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और स्रोत विविधीकरण बढ़ाया जा सकता है।
  • महत्वपूर्ण कच्चे माल और घटकों का रणनीतिक भंडारण स्थापित करना भविष्य के संकटों से बचाव में मदद करेगा।
  • सेमीकंडक्टर और PCB निर्माण इकोसिस्टम का बेहतर एकीकरण प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाएगा और कमजोरियों को कम करेगा।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
ईरान संघर्ष के वैश्विक सर्किट बोर्ड आपूर्ति श्रृंखला पर प्रभाव के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. ईरान PCB निर्माण में प्रयुक्त तांबे की पन्नी की लगभग 8% वैश्विक आपूर्ति करता है।
  2. आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955, संकट के दौरान PCB की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार को अधिकार देता है।
  3. आपूर्ति श्रृंखला बाधाओं के बावजूद भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण वृद्धि Q1 2024 में 15% तक बढ़ गई।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि US Geological Survey (2023) के अनुसार ईरान वैश्विक तांबे की पन्नी की लगभग 8% आपूर्ति करता है। कथन 2 भी सही है, आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3 के तहत आवश्यक वस्तुओं सहित इलेक्ट्रॉनिक घटकों की आपूर्ति नियंत्रित की जा सकती है। कथन 3 गलत है, भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण वृद्धि Q1 2024 में घटकर 5% रह गई (इकोनॉमिक सर्वे, 2024)।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
PCB आपूर्ति श्रृंखला बाधाओं पर भारत की नीति प्रतिक्रिया के संबंध में विचार करें:
  1. PLI योजना ने 2023-24 में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए 76,000 करोड़ रुपये आवंटित किए।
  2. विदेश व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992, घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण मानकों को नियंत्रित करता है।
  3. मंत्रालय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी (MeitY) इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण नीतियों का निर्माण करता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है, वित्त मंत्रालय के बजट दस्तावेज (2023-24) के अनुसार। कथन 2 गलत है, क्योंकि यह अधिनियम आयात-निर्यात नियंत्रण से संबंधित है, घरेलू विनिर्माण मानकों से नहीं। कथन 3 सही है, MeitY इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण नीतियों का निर्माण करता है।

मुख्य प्रश्न

वर्तमान में ईरान संघर्ष ने वैश्विक सर्किट बोर्ड आपूर्ति श्रृंखला को कैसे प्रभावित किया है, इसका विश्लेषण करें और इसके भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र पर प्रभाव का मूल्यांकन करें। भारत को आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती के लिए किन नीतिगत कदमों को अपनाना चाहिए, सुझाव दें। (250 शब्द)

झारखंड एवं JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – आर्थिक विकास और औद्योगिक नीति
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड के खनिज संसाधन, खासकर तांबे के भंडार, PCB के लिए घरेलू कच्चे माल की आपूर्ति बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
  • मुख्य बिंदु: उत्तर तैयार करते समय झारखंड की भूमिका को उजागर करें जो भारत की कच्चे माल की आयात निर्भरता को कम करने में सहायक हो सकती है।
ईरान संघर्ष से वैश्विक PCB कीमतों पर क्या असर पड़ा है?

ईरान PCB निर्माण में आवश्यक तांबे की पन्नी की लगभग 8% वैश्विक आपूर्ति करता है। संघर्ष और प्रतिबंधों ने निर्यात बाधित किया है, जिससे Q4 2023 से वैश्विक PCB कीमतों में 12% की वृद्धि हुई है (The Hindu, 2024)।

भारत संकट के दौरान इलेक्ट्रॉनिक घटकों की आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए कौन से कानूनी प्रावधान रखता है?

आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (धारा 3) सरकार को आपातकालीन स्थिति में आवश्यक वस्तुओं सहित इलेक्ट्रॉनिक घटकों की आपूर्ति और वितरण नियंत्रित करने का अधिकार देता है।

PLI योजना का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में क्या महत्व है?

PLI योजना ने 2023-24 में घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षमता बढ़ाने और आयात निर्भरता कम करने के लिए 76,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।

भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला मजबूती के लिए कौन-से संस्थान जिम्मेदार हैं?

मुख्य संस्थान हैं: मंत्रालय इलेक्ट्रॉनिक्स और IT (नीति निर्माण), DGFT (आयात-निर्यात नियंत्रण), ESC (उद्योग संपर्क), वाणिज्य मंत्रालय, और नीति आयोग (रणनीतिक योजना)।

भारत और दक्षिण कोरिया की आपूर्ति श्रृंखला मजबूती में क्या अंतर है?

दक्षिण कोरिया का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम वर्टिकल इंटीग्रेटेड और रणनीतिक भंडारण पर आधारित है, जबकि भारत की घरेलू PCB क्षमता सीमित और नीतियाँ विखंडित हैं, जिससे वह भू-राजनीतिक झटकों के प्रति अधिक संवेदनशील है।

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