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परिचय: जलवायु सहयोग और ऊर्जा मूल्य स्थिरता

अंतरराष्ट्रीय जलवायु सहयोग, खासकर पेरिस समझौता 2015 जैसे फ्रेमवर्क के तहत, नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देकर और कार्बन बाजार तंत्र के माध्यम से वैश्विक जीवाश्म ईंधन निर्भरता को कम करने का लक्ष्य रखता है। हाल के वैश्विक ऊर्जा मूल्य अस्थिरता के कारण यह सहयोग और भी जरूरी हो गया है, जिसने वित्तीय वर्ष 2023 में भारत के जीवाश्म ईंधन आयात बिल में 30% की वृद्धि कर इसे 180 अरब डॉलर तक पहुंचा दिया है (वाणिज्य मंत्रालय, 2023)। समन्वित निवेश और नीतिगत तालमेल आपूर्ति झटकों को कम करके कीमतों को स्थिर करने में मदद कर सकते हैं, जिससे ऊर्जा बाजार की अनिश्चितता से बाहर निकलने का रास्ता मिल सके।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: पर्यावरण और पारिस्थितिकी – अंतरराष्ट्रीय संधियां, जलवायु परिवर्तन नीतियां, ऊर्जा सुरक्षा
  • GS पेपर 3: अर्थव्यवस्था – ऊर्जा अर्थशास्त्र, नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश, कार्बन बाजार
  • निबंध विषय – जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा संक्रमण, अंतरराष्ट्रीय सहयोग

भारत में जलवायु सहयोग के लिए संवैधानिक और कानूनी ढांचा

भारतीय संविधान का Article 253 संसद को पेरिस समझौते जैसे अंतरराष्ट्रीय संधियों को लागू करने के लिए कानून बनाने का अधिकार देता है, जो भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं की आधारशिला है। Energy Conservation Act, 2001 (जिसमें 2010 में संशोधन हुआ) की धारा 14 और 15 के तहत ऊर्जा दक्षता अनिवार्य की गई है, जबकि Environment Protection Act, 1986 पर्यावरण मानकों के नियंत्रण का अधिकार प्रदान करता है। National Action Plan on Climate Change (NAPCC) 2008 के तहत राष्ट्रीय सौर मिशन जैसी योजनाएं स्थापित की गई हैं, जो नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देती हैं।

  • Article 253: अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संधियों को लागू करने के लिए संसद को विधायी अधिकार देता है।
  • Energy Conservation Act: ऊर्जा दक्षता के नियम और मानक स्थापित करता है।
  • Environment Protection Act: पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण का कानूनी ढांचा प्रदान करता है।
  • NAPCC: जलवायु कार्रवाई के लिए नीति रोडमैप, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य शामिल हैं।

जलवायु सहयोग और ऊर्जा मूल्य अस्थिरता के आर्थिक पहलू

भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 2023 में 20 अरब डॉलर का निवेश हुआ (MNRE वार्षिक रिपोर्ट 2023), जिससे मार्च 2024 तक इसकी क्षमता 126 GW तक पहुंच गई है (CEA रिपोर्ट 2024), जो कुल स्थापित विद्युत क्षमता का 42% है। इस प्रगति के बावजूद, वैश्विक जीवाश्म ईंधन की कीमतों में अस्थिरता ने भारत के आयात बिल को तेजी से बढ़ाया है। International Energy Agency (IEA) के अनुसार, समन्वित जलवायु नीतियां 2030 तक वैश्विक ऊर्जा मूल्य अस्थिरता को 25% तक कम कर सकती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय सहयोग के आर्थिक लाभों को दर्शाता है।

  • भारत में नवीकरणीय क्षमता: मार्च 2024 तक 126 GW (CEA रिपोर्ट 2024)।
  • जीवाश्म ईंधन आयात बिल: वित्तीय वर्ष 2023 में 180 अरब डॉलर, 30% वृद्धि (वाणिज्य मंत्रालय, 2023)।
  • निवेश प्रवाह: 2023 में नवीकरणीय ऊर्जा में 20 अरब डॉलर (MNRE वार्षिक रिपोर्ट 2023)।
  • IEA का अनुमान: 2030 तक जलवायु सहयोग से वैश्विक ऊर्जा मूल्य अस्थिरता में 25% कमी।
  • भारत का लक्ष्य: 2030 तक 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता (राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन, 2021)।
  • कार्बन बाजार की संभावना: Article 6 के तहत 2030 तक वार्षिक 100 अरब डॉलर की वित्तीय व्यवस्था (UNFCCC रिपोर्ट 2023)।

जलवायु सहयोग और ऊर्जा संक्रमण के लिए प्रमुख संस्थान

भारत में जलवायु और ऊर्जा नीतियों को कई संस्थान लागू और मॉनिटर करते हैं। Ministry of New and Renewable Energy (MNRE) नवीकरणीय ऊर्जा योजनाएं बनाता है, जबकि Central Electricity Authority (CEA) विद्युत क्षेत्र के आंकड़े एकत्र करता है। Central Electricity Regulatory Commission (CERC) टैरिफ और बाजार संचालन का नियमन करता है। वैश्विक स्तर पर, International Energy Agency (IEA) ऊर्जा बाजारों का विश्लेषण प्रदान करता है और United Nations Framework Convention on Climate Change (UNFCCC) जलवायु समझौतों और कार्बन बाजारों की देखरेख करता है। NITI Aayog राष्ट्रीय स्तर पर जलवायु और ऊर्जा नीति समन्वय करता है।

  • MNRE: नवीकरणीय ऊर्जा नीति और कार्यान्वयन।
  • CEA: विद्युत क्षमता और उत्पादन की निगरानी।
  • CERC: बिजली बाजार का नियमन।
  • IEA: वैश्विक ऊर्जा बाजार का पूर्वानुमान।
  • UNFCCC: अंतरराष्ट्रीय जलवायु संधियों की देखरेख।
  • NITI Aayog: नीति समन्वय और रणनीतिक योजना।

कार्बन बाजार और पेरिस समझौते का Article 6

पेरिस समझौते के Article 6 के तहत अंतरराष्ट्रीय कार्बन ट्रेडिंग तंत्र स्थापित किए गए हैं, जो सीमाओं के पार उत्सर्जन कटौती को प्रोत्साहित करते हैं। UNFCCC के अनुसार, ये बाजार 2030 तक सालाना 100 अरब डॉलर तक वित्तीय संसाधन जुटा सकते हैं, जो स्वच्छ ऊर्जा निवेश के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारत में फिलहाल कोई पूरी तरह से संचालित राष्ट्रीय कार्बन बाजार नहीं है जो अंतरराष्ट्रीय तंत्रों से जुड़ा हो, जिससे कार्बन ट्रेडिंग के जरिए ऊर्जा मूल्य स्थिर करने की क्षमता सीमित है।

  • Article 6: अंतरराष्ट्रीय कार्बन बाजार सहयोग के लिए ढांचा।
  • 2030 तक वार्षिक 100 अरब डॉलर की वित्तीय व्यवस्था का अनुमान (UNFCCC रिपोर्ट 2023)।
  • भारत की कमी: वैश्विक बाजारों से जुड़ा पूर्णत: संचालित राष्ट्रीय कार्बन बाजार नहीं।

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत और यूरोपीय संघ

पैरामीटरभारतयूरोपीय संघ (EU)
नवीकरणीय ऊर्जा का हिस्सा (2023-24)स्थापित विद्युत क्षमता का 42% (CEA रिपोर्ट 2024)कुल ऊर्जा खपत का 38% (European Commission रिपोर्ट 2023)
ऊर्जा मूल्य अस्थिरता में कमी2030 तक 25% कमी का अनुमान (IEA पूर्वानुमान)2020-2023 के बीच 15% कमी (EU ग्रीन डील प्रभाव)
कार्बन बाजार की स्थितिपूर्णत: संचालित नहीं, Article 6 के साथ सीमित एकीकरणस्थापित EU Emissions Trading System (ETS), अन्य बाजारों से जुड़ा हुआ
नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश (2023)20 अरब डॉलर (MNRE वार्षिक रिपोर्ट 2023)150 अरब यूरो से अधिक (European Commission रिपोर्ट 2023)

महत्व और आगे का रास्ता

  • Article 6 के अनुरूप राष्ट्रीय कार्बन बाजार को सक्रिय करने से अंतरराष्ट्रीय वित्त पोषण खुल सकता है और ऊर्जा कीमतों में स्थिरता आ सकती है।
  • 2030 तक 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य को पूरा करने के लिए निवेश बढ़ाना जीवाश्म ईंधन आयात निर्भरता और मूल्य झटकों को कम करेगा।
  • MNRE, CEA, NITI Aayog और CERC के बीच समन्वय को मजबूत करना नीति के एकीकृत कार्यान्वयन के लिए आवश्यक है।
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग तकनीकी हस्तांतरण, संयुक्त निवेश और कार्बन मूल्य निर्धारण के समन्वय पर केंद्रित होना चाहिए ताकि प्रभाव अधिकतम हो सके।
  • भारत की नीति रूपरेखा को बाजार तंत्रों और सीमा पार कार्बन ट्रेडिंग को शामिल करते हुए विकसित करना होगा ताकि जलवायु और ऊर्जा सुरक्षा के लक्ष्य हासिल हो सकें।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारतीय संविधान के Article 253 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. यह संसद को अंतरराष्ट्रीय संधियों को लागू करने वाले कानून बनाने का अधिकार देता है।
  2. यह राज्यों को ऐसी संधियों के विपरीत कानून बनाने से रोकता है।
  3. यह पर्यावरण मामलों में राष्ट्रपति को राज्य विधानसभाओं पर अधिकार देता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि Article 253 संसद को अंतरराष्ट्रीय संधियों को लागू करने के लिए कानून बनाने का अधिकार देता है। कथन 2 भी सही है क्योंकि राज्य ऐसी संधियों के विरुद्ध कानून नहीं बना सकते। कथन 3 गलत है; Article 253 के तहत राष्ट्रपति को राज्य विधानसभाओं पर कोई अधिकार नहीं है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
पेरिस समझौते के तहत कार्बन बाजारों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. Article 6 अंतरराष्ट्रीय कार्बन ट्रेडिंग तंत्र को सक्षम करता है।
  2. भारत वर्तमान में एक पूरी तरह से एकीकृत राष्ट्रीय कार्बन बाजार संचालित करता है जो वैश्विक बाजारों से जुड़ा है।
  3. कार्बन बाजार जलवायु कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय संसाधन जुटा सकते हैं।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि Article 6 कार्बन बाजार सहयोग के लिए ढांचा प्रदान करता है। कथन 3 भी सही है; UNFCCC के अनुसार 2030 तक 100 अरब डॉलर वार्षिक वित्तीय संसाधन जुटाए जा सकते हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि भारत का राष्ट्रीय कार्बन बाजार अभी पूरी तरह से संचालित और अंतरराष्ट्रीय स्तर से जुड़ा नहीं है।

मेन प्रश्न

आलोचनात्मक रूप से विश्लेषण करें कि अंतरराष्ट्रीय जलवायु सहयोग वैश्विक ऊर्जा कीमतों को स्थिर करने में कैसे मदद कर सकता है। इस संदर्भ में नवीकरणीय ऊर्जा निवेश और कार्बन बाजार तंत्र की भूमिका पर चर्चा करें, साथ ही भारत की नीति रूपरेखा और संस्थागत व्यवस्था का उल्लेख करें।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 3 – पर्यावरण और पारिस्थितिकी, ऊर्जा क्षेत्र
  • झारखंड की स्थिति: झारखंड की कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वैश्विक जीवाश्म ईंधन मूल्य अस्थिरता से प्रभावित होती है; सौर और बायोमास में नवीकरणीय ऊर्जा की संभावनाएं क्षेत्रीय ऊर्जा असुरक्षा को कम कर सकती हैं।
  • मेन पॉइंटर: झारखंड के संक्रमण की चुनौतियों, नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार की संभावनाओं और राष्ट्रीय जलवायु सहयोग ढांचे के साथ मेल को उजागर करते हुए उत्तर तैयार करें।
Article 253 का भारत की जलवायु नीति में क्या महत्व है?

Article 253 संसद को पेरिस समझौते जैसी अंतरराष्ट्रीय संधियों को लागू करने के लिए कानून बनाने का अधिकार देता है, जिससे भारत अपनी जलवायु प्रतिबद्धताओं को घरेलू कानूनों के माध्यम से पूरा कर सकता है।

राष्ट्रीय जलवायु कार्रवाई योजना नवीकरणीय ऊर्जा को कैसे समर्थन देती है?

NAPCC (2008) के तहत राष्ट्रीय सौर मिशन जैसी योजनाएं नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार को बढ़ावा देती हैं और जीवाश्म ईंधन निर्भरता कम करने के लिए क्षमता लक्ष्य निर्धारित करती हैं।

वैश्विक ऊर्जा मूल्य स्थिरता में International Energy Agency की क्या भूमिका है?

IEA ऊर्जा बाजारों का डेटा, पूर्वानुमान और नीति सिफारिशें प्रदान करता है, और अनुमान लगाता है कि समन्वित जलवायु नीतियां 2030 तक ऊर्जा मूल्य अस्थिरता को 25% तक कम कर सकती हैं।

भारत का Article 6 के तहत कार्बन बाजार क्यों सीमित है?

भारत के पास अभी तक एक पूरी तरह से सक्रिय और अंतरराष्ट्रीय तंत्रों के साथ जुड़ा हुआ राष्ट्रीय कार्बन बाजार नहीं है, जिससे वह सीमा पार कार्बन ट्रेडिंग के जरिए जलवायु वित्त और ऊर्जा मूल्य स्थिरता का पूरा लाभ नहीं उठा पा रहा है।

EU के ग्रीन डील ने ऊर्जा मूल्य अस्थिरता को कैसे प्रभावित किया?

EU का ग्रीन डील (2019) नवीकरणीय ऊर्जा और कार्बन मूल्य निर्धारण तंत्रों को एकीकृत करके 2020-2023 के बीच ऊर्जा मूल्य अस्थिरता में 15% की कमी लाया है।

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