अपडेट

पृष्ठभूमि और वर्तमान विवाद

2024 की शुरुआत में भारत में परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) और विद्युत मंत्रालय के बीच नागरिक परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं की निगरानी को लेकर विवाद उभरा है। Atomic Energy Act, 1962 के तहत स्थापित DAE के पास परमाणु ऊर्जा विकास की कानूनी जिम्मेदारी है, जिसमें परमाणु ऊर्जा उत्पादन की देखरेख भी शामिल है। वहीं, Electricity Act, 2003 के तहत विद्युत मंत्रालय बिजली उत्पादन, संचरण और वितरण का प्रबंधन करता है, जिसमें परमाणु ऊर्जा को ग्रिड में शामिल करना भी आता है। इस संस्थागत टकराव के बीच भारत के महत्वाकांक्षी परमाणु ऊर्जा विस्तार योजनाएं प्रभावित हो रही हैं, जिससे परियोजनाओं की कार्यकुशलता और नीति समन्वय पर संकट मंडरा रहा है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS Paper 2: शासन - ऊर्जा क्षेत्र में संस्थागत भूमिकाएं, DAE और विद्युत मंत्रालय का विधिक अधिकार
  • GS Paper 3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी - परमाणु ऊर्जा नीति, परियोजना क्रियान्वयन की चुनौतियां
  • निबंध: भारत में ऊर्जा सुरक्षा और शासन की चुनौतियां

परमाणु ऊर्जा पर कानूनी और संवैधानिक ढांचा

Atomic Energy Act, 1962 की धारा 3 और 4 के तहत DAE को परमाणु ऊर्जा विकास और नियंत्रण का विशेष अधिकार प्राप्त है। इसमें अनुसंधान, विकास और परमाणु ऊर्जा संयंत्रों का संचालन शामिल है। वहीं, Electricity Act, 2003 के अंतर्गत विद्युत उत्पादन, संचरण और वितरण का नियमन विद्युत मंत्रालय के अधीन है, जो समग्र बिजली क्षेत्र की नीतियों और समन्वय का प्रभार संभालता है। परमाणु परियोजनाओं के पर्यावरणीय अनुमोदन Environment Protection Act, 1986 के तहत होते हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों, विशेष रूप से Bhabha Atomic Research Centre बनाम भारत संघ (2015) ने परमाणु दायित्व और नियामक अधिकारों को स्पष्ट किया है। इनमें तकनीकी और सुरक्षा मामलों में DAE की प्राथमिकता को स्वीकार किया गया है, जबकि विद्युत मंत्रालय की बिजली क्षेत्रीय शासन में भूमिका को भी मान्यता दी गई है।

  • Atomic Energy Act, 1962: DAE को परमाणु ऊर्जा विकास और नियंत्रण का अधिकार देता है।
  • Electricity Act, 2003: बिजली क्षेत्र की नीतियों और नियमन का प्रावधान।
  • Environment Protection Act, 1986: परमाणु परियोजनाओं के पर्यावरणीय अनुमोदन।
  • Bhabha Atomic Research Centre बनाम भारत संघ (2015): परमाणु दायित्व और नियामक अधिकारों की व्याख्या।

आर्थिक पहलू और परियोजना क्रियान्वयन में चुनौतियां

भारत मार्च 2024 तक 7,380 मेगावाट की परमाणु ऊर्जा क्षमता से बढ़कर 2031 तक 22,480 मेगावाट क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखता है (CEA वार्षिक रिपोर्ट 2023-24; ड्राफ्ट नेशनल इलेक्ट्रिसिटी प्लान 2022)। नागरिक परमाणु परियोजनाओं के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी निवेश आवश्यक है (CEA 2023 रिपोर्ट), जबकि DAE का बजट आवंटन 2023-24 के लिए 12,000 करोड़ रुपये है (संसद बजट 2023-24)। भारत की कुल बिजली उत्पादन में परमाणु ऊर्जा का योगदान 3.22% है (CEA 2023)। हालांकि, निगरानी विवादों के कारण परियोजनाओं में औसतन 2-3 वर्षों की देरी और 20% तक लागत वृद्धि हुई है, उदाहरण के तौर पर कूदानकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र के दूसरे चरण में लगभग 18% लागत वृद्धि दर्ज की गई है (Indian Express, 2024)। ये कमियां भारत की ऊर्जा सुरक्षा और निवेश आकर्षण को कमजोर कर रही हैं।

  • स्थापित परमाणु क्षमता (मार्च 2024): 7,380 मेगावाट
  • लक्ष्य क्षमता (2031): 22,480 मेगावाट
  • निवेश आवश्यकता: 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक
  • DAE बजट (2023-24): 12,000 करोड़ रुपये
  • बिजली में परमाणु हिस्सेदारी: 3.22%
  • परियोजना में देरी: औसतन 2-3 वर्ष
  • लागत वृद्धि: 20% तक (कूदानकुलम चरण II लगभग 18%)

संस्थागत भूमिकाएं और ओवरलैप

DAE परमाणु अनुसंधान, विकास और परमाणु ऊर्जा उत्पादन की निगरानी की जिम्मेदारी संभालता है, जिसे यह अपनी कार्यान्वयन एजेंसी Nuclear Power Corporation of India Limited (NPCIL) के माध्यम से करता है। विद्युत मंत्रालय बिजली नीति, ग्रिड एकीकरण और विभिन्न ऊर्जा स्रोतों के समन्वय का प्रबंधन करता है। Central Electricity Authority (CEA) बिजली योजना और समन्वय की सलाह देता है, जबकि Atomic Energy Regulatory Board (AERB) परमाणु सुरक्षा का नियमन करता है। विवाद का मूल कारण निगरानी अधिकारों का ओवरलैप है: DAE तकनीकी और संचालन नियंत्रण का दावा करता है, जबकि विद्युत मंत्रालय नियामक निगरानी और ग्रिड एकीकरण की भूमिका चाहता है, जिससे शासन में खंडितता और निर्णय प्रक्रिया में देरी होती है।

संस्थामुख्य भूमिकाकानूनी अधिकारविवाद का पहलू
DAEपरमाणु ऊर्जा विकास, परियोजना क्रियान्वयनAtomic Energy Act, 1962परमाणु परियोजनाओं की विशेष निगरानी का दावा
विद्युत मंत्रालयबिजली नीति, ग्रिड एकीकरण, नियमनElectricity Act, 2003परमाणु परियोजनाओं में निगरानी भूमिका चाहता है
NPCILDAE के तहत परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं का क्रियान्वयनDAE प्रशासनिक नियंत्रणपरिचालन शाखा, निगरानी विवादों से प्रभावित
CEAबिजली योजना और समन्वयElectricity Act, 2003सलाहकार भूमिका, सीमित प्रवर्तन
AERBपरमाणु सुरक्षा नियमनAtomic Energy Act, 1962स्वतंत्र नियामक, निगरानी विवादों में शामिल नहीं

तुलनात्मक दृष्टिकोण: फ्रांस का परमाणु शासन मॉडल

फ्रांस में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र की निगरानी पर्यावरणीय संक्रमण मंत्रालय द्वारा की जाती है, जो ऊर्जा और पर्यावरण नीतियों को एकीकृत करता है। फ्रांसीसी परमाणु सुरक्षा प्राधिकरण (ASN) स्वतंत्र नियामक के रूप में कार्य करता है। इस स्पष्ट संस्थागत ढांचे के कारण फ्रांस की बिजली में लगभग 70% हिस्सेदारी परमाणु ऊर्जा की है, जिसमें परियोजनाएं समय पर और नियंत्रित लागत में पूरी होती हैं, बिना किसी मंत्रालयों के बीच विवाद के। यह तुलना भारत के खंडित शासन तंत्र की प्रमुख बाधा को उजागर करती है।

पहलूभारतफ्रांस
निगरानी मंत्रालयDAE और विद्युत मंत्रालय (विवादित भूमिकाएं)पर्यावरणीय संक्रमण मंत्रालय (एकीकृत)
नियामक संस्थाAERB (परमाणु सुरक्षा)ASN (परमाणु सुरक्षा)
बिजली में परमाणु हिस्सेदारी3.22%लगभग 70%
परियोजना क्रियान्वयन2-3 वर्षों की देरी, 20% तक लागत वृद्धिसमयबद्ध, लागत-कुशल
शासन चुनौतीअधिकारों का ओवरलैप, खंडित निगरानीस्पष्ट, एकीकृत ढांचा

शासन में खामियां और नीतिगत प्रभाव

Atomic Energy Act, 1962 और Electricity Act, 2003 दोनों में DAE और विद्युत मंत्रालय की नागरिक परमाणु परियोजनाओं की निगरानी भूमिकाओं का स्पष्ट समन्वय नहीं है। इस वैधानिक कमी के कारण अधिकारों का ओवरलैप, समन्वय विफलता और परियोजना में देरी होती है। एकीकृत शासन ढांचे के अभाव में भारत के परमाणु विस्तार लक्ष्यों और ऊर्जा सुरक्षा को नुकसान पहुंचता है। साथ ही, Civil Liability for Nuclear Damage Act, 2010 के तहत जटिल दायित्व व्यवस्था संस्थागत स्पष्टता को और जटिल बनाती है, हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों ने कुछ हद तक इन मुद्दों को सुलझाया है।

  • DAE और विद्युत मंत्रालय की भूमिकाओं का समेकित कानूनी ढांचा नहीं है।
  • अधिकारों के ओवरलैप से देरी और लागत वृद्धि होती है।
  • दायित्व व्यवस्था परियोजना क्रियान्वयन में जटिलता बढ़ाती है।
  • खंडित शासन नीति समन्वय और निवेशकों का विश्वास कमजोर करता है।

आगे का रास्ता

  • नागरिक परमाणु परियोजनाओं के लिए निगरानी भूमिकाओं को स्पष्ट करने और निर्णय प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने हेतु एक वैधानिक या अंतर-मंत्रालयीय समन्वय संस्था स्थापित करें।
  • मौजूदा कानूनों में संशोधन करें या एक समर्पित Nuclear Energy Governance Act बनाएं, जो परमाणु ऊर्जा विकास और बिजली क्षेत्र नियमन को एकीकृत करे।
  • AERB की स्वायत्तता और क्षमता बढ़ाएं ताकि वह सुरक्षा और परियोजना अनुमोदन के लिए एकल-खिड़की नियामक के रूप में कार्य कर सके।
  • फ्रांस के अनुभव से सीख लेकर परमाणु ऊर्जा की निगरानी एक ही मंत्रालय या एजेंसी के अधीन लाएं, जिससे संस्थागत टकराव कम हो।
  • परियोजना निगरानी में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाएं ताकि देरी और लागत वृद्धि को न्यूनतम किया जा सके।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत में परमाणु ऊर्जा शासन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. परमाणु ऊर्जा विभाग के पास Atomic Energy Act, 1962 के तहत परमाणु ऊर्जा उत्पादन के सभी पहलुओं पर विशेष अधिकार है।
  2. विद्युत मंत्रालय Electricity Act, 2003 के तहत बिजली उत्पादन, जिसमें परमाणु ऊर्जा भी शामिल है, का नियमन करता है।
  3. Atomic Energy Regulatory Board (AERB) DAE और विद्युत मंत्रालय से स्वतंत्र परमाणु सुरक्षा नियामक है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (d)
तीनों कथन सही हैं। DAE को Atomic Energy Act, 1962 के तहत अधिकार प्राप्त हैं; विद्युत मंत्रालय Electricity Act, 2003 के तहत बिजली सहित परमाणु ऊर्जा का नियमन करता है; AERB स्वतंत्र परमाणु सुरक्षा नियामक है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत के परमाणु दायित्व ढांचे के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. Civil Liability for Nuclear Damage Act, 2010 के तहत परमाणु संयंत्र संचालकों पर विशेष दायित्व होता है।
  2. सुप्रीम कोर्ट के Bhabha Atomic Research Centre बनाम भारत संघ (2015) मामले ने परमाणु दायित्व और नियामक भूमिकाओं को स्पष्ट किया।
  3. Atomic Energy Regulatory Board (AERB) परमाणु दायित्व दावों का निर्णय करता है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि संयंत्र संचालकों पर दायित्व है। कथन 2 भी सही है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने दायित्व और नियामक भूमिकाओं को स्पष्ट किया। कथन 3 गलत है क्योंकि AERB सुरक्षा नियमन करता है, लेकिन दायित्व दावों का निर्णय नहीं करता।

मुख्य प्रश्न

भारत में नागरिक परमाणु परियोजनाओं की निगरानी को लेकर परमाणु ऊर्जा विभाग और विद्युत मंत्रालय के बीच संस्थागत टकराव की समीक्षा करें। यह विवाद भारत के परमाणु ऊर्जा विस्तार लक्ष्यों को कैसे प्रभावित करता है? इन शासन चुनौतियों को दूर करने के लिए क्या उपाय सुझाए जा सकते हैं?

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 - शासन और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
  • झारखंड परिप्रेक्ष्य: झारखंड में यूरेनियम खनन और परमाणु ईंधन प्रसंस्करण केंद्र स्थित हैं, जिससे परमाणु शासन स्थानीय ऊर्जा और पर्यावरण नीति के लिए महत्वपूर्ण है।
  • मुख्य बिंदु: परमाणु परियोजनाओं में संस्थागत समन्वय की चुनौतियां और इनके झारखंड के यूरेनियम क्षेत्र विकास तथा ऊर्जा सुरक्षा पर प्रभाव पर चर्चा करें।
भारत में परमाणु ऊर्जा विभाग का मुख्य कानूनी अधिकार क्या है?

परमाणु ऊर्जा विभाग को Atomic Energy Act, 1962 के तहत परमाणु ऊर्जा के विकास और नियंत्रण का अधिकार प्राप्त है, जिसमें परमाणु ऊर्जा उत्पादन और अनुसंधान शामिल है।

परमाणु ऊर्जा शासन में विद्युत मंत्रालय की भूमिका DAE से कैसे भिन्न है?

विद्युत मंत्रालय Electricity Act, 2003 के तहत बिजली उत्पादन, संचरण और वितरण का नियमन करता है, जिसमें परमाणु ऊर्जा को ग्रिड में शामिल करना भी शामिल है, जबकि DAE परमाणु ऊर्जा विकास और परियोजना क्रियान्वयन पर केंद्रित है।

भारत के परमाणु क्षेत्र में Atomic Energy Regulatory Board (AERB) की क्या भूमिका है?

AERB स्वतंत्र नियामक है जो परमाणु सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है, परमाणु संयंत्रों में सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करता है, लेकिन यह परियोजना क्रियान्वयन या बिजली नियमन में शामिल नहीं होता।

भारत में नागरिक परमाणु परियोजनाओं में देरी के आर्थिक प्रभाव क्या हैं?

परियोजनाओं में देरी से लागत में 20% तक की वृद्धि हुई है, पूंजी लागत बढ़ी है और क्षमता वृद्धि धीमी पड़ी है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और निवेश माहौल प्रभावित हुआ है।

फ्रांस का परमाणु शासन मॉडल भारत से कैसे अलग है?

फ्रांस में परमाणु ऊर्जा की निगरानी पर्यावरणीय संक्रमण मंत्रालय के अधीन होती है और ASN स्वतंत्र नियामक है, जिससे निगरानी एकीकृत, विवाद रहित और समयबद्ध होती है, जबकि भारत में शासन खंडित और विवादित है।

हमारे कोर्स

72+ बैच

हमारे कोर्स
Contact Us