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परिचय: IN–SLN DIVEX 2026 का संक्षिप्त परिचय

IN–SLN DIVEX 2026 भारत और श्रीलंका के बीच होने वाला पांचवां द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास है, जो मार्च 2026 में श्रीलंका के समुद्री क्षेत्र में आयोजित किया जाएगा। इस अभ्यास में दोनों देशों की नौसेनाओं के पांच से अधिक युद्धपोत और दो समुद्री गश्ती विमान हिस्सा लेंगे। इसका मुख्य मकसद नौसेनाओं के बीच आपसी तालमेल, समुद्री क्षेत्र की जागरूकता और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा को मजबूत करना है। यह अभ्यास भारत-श्रीलंका के रणनीतिक साझेदारी को भी दर्शाता है, खासकर भारतीय महासागर क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – भारत की समुद्री कूटनीति, द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास, इंडो-पैसिफिक रणनीति।
  • GS पेपर 3: सुरक्षा – समुद्री सुरक्षा, नौसेना की क्षमताएं, क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे।
  • निबंध: भारत की भूमिका इंडो-पैसिफिक सुरक्षा वास्तुकला और क्षेत्रीय सहयोग में।

IN–SLN DIVEX के कानूनी और संवैधानिक आधार

यह अभ्यास भारतीय नौसेना के अधिकारों के तहत आता है, जो Navy Act, 1957 के अंतर्गत राष्ट्रीय समुद्री हितों की रक्षा के लिए संचालन करने का प्रावधान देता है। साथ ही यह Maritime Zones of India (Regulation of Fishing by Foreign Vessels) Act, 1981 के तहत विदेशी मछली पकड़ने को नियंत्रित करता है और समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। इसके अलावा, IN–SLN DIVEX भारत की संयुक्त राष्ट्र समुद्र कानून सम्मेलन (UNCLOS), 1982 के प्रति प्रतिबद्धता को भी सुदृढ़ करता है, जो समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता, सुरक्षा और शांति बनाए रखने में सहायक है।

  • Navy Act, 1957: नौसेना संचालन और अभ्यासों के लिए कानूनी आधार।
  • Maritime Zones Act, 1981: विदेशी मछली पकड़ने को नियंत्रित कर EEZ की संप्रभुता की रक्षा।
  • UNCLOS, 1982: समुद्री अधिकार, सुरक्षा और विवाद समाधान का ढांचा।

IN–SLN DIVEX 2026 के आर्थिक पहलू

वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए भारत का रक्षा बजट लगभग ₹1.35 लाख करोड़ है, जिसमें नौसेना को करीब 15% (~₹20,250 करोड़) आवंटित किया गया है। यह राशि नौसेना के आधुनिकीकरण और IN–SLN DIVEX जैसे संयुक्त अभ्यासों को समर्थन देती है। भारतीय महासागर विश्व के लगभग 75% समुद्री व्यापार और 50% तेल परिवहन का मार्ग है (International Maritime Organization, 2023), इसलिए समुद्री सुरक्षा व्यापारिक मार्गों की रक्षा के लिए बेहद जरूरी है। भारत का समुद्री मार्गों से व्यापार मूल्य $1.7 ट्रिलियन से अधिक है (वाणिज्य मंत्रालय, 2023), जो आर्थिक हितों की सुरक्षा में समुद्री सुरक्षा की अहमियत को दर्शाता है।

  • वित्तीय वर्ष 2023-24 में नौसेना को ₹20,250 करोड़ आवंटित।
  • भारत के 80% से अधिक व्यापार की मात्रा समुद्री मार्गों से होती है, जिन्हें नौसेना सुरक्षा प्रदान करती है।
  • भारतीय महासागर का वैश्विक ऊर्जा और व्यापार धारा में रणनीतिक महत्व।

IN–SLN DIVEX 2026 में संस्थागत भूमिकाएँ

भारतीय नौसेना इस अभ्यास की योजना बनाकर संचालन करती है, जबकि श्रीलंका नौसेना मेजबानी और सह-नेतृत्व करती है। भारत सरकार का रक्षा मंत्रालय नीतिगत दिशा और बजट आवंटन करता है। इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (IDS) संयुक्त अभ्यासों का समन्वय करता है। इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन (IORA) क्षेत्रीय समुद्री सहयोग के लिए व्यापक मंच प्रदान करता है, हालांकि IN–SLN DIVEX द्विपक्षीय अभ्यास ही रहता है।

  • भारतीय नौसेना: संचालन और क्षमता प्रदर्शन।
  • श्रीलंका नौसेना: मेजबान और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने वाला।
  • रक्षा मंत्रालय: नीति निर्धारण और संसाधन आवंटन।
  • इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ: संयुक्त अभ्यासों का समन्वय।
  • IORA: क्षेत्रीय समुद्री सहयोग का ढांचा।

IN–SLN DIVEX का रणनीतिक और सुरक्षा महत्व

IN–SLN DIVEX 2026 भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री क्षेत्र की जागरूकता और आपसी तालमेल को बढ़ाता है, जो समुद्री डकैती, तस्करी और आतंकवाद जैसे गैर-पारंपरिक खतरों से निपटने के लिए जरूरी है। यह अभ्यास इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के नौसैनिक विस्तार के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करता है। श्रीलंका का 517,000 वर्ग किलोमीटर का विशेष आर्थिक क्षेत्र (Sri Lanka Navy Annual Report, 2023) समुद्री मार्गों की निगरानी और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। यह अभ्यास भारत के SAGAR (Security and Growth for All in the Region) नीति के अनुरूप एक सुरक्षित और स्थिर भारतीय महासागर का विजन साकार करता है।

  • संयुक्त संचालन और समुद्री निगरानी क्षमता को बढ़ावा।
  • डकैती, तस्करी रोधी और मानवीय सहायता अभियानों में सहयोग।
  • भारतीय महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति को मजबूत करना।
  • श्रीलंका की समुद्री सुरक्षा क्षमता को सशक्त बनाना।

अन्य क्षेत्रीय नौसैनिक अभ्यासों से तुलना

पहलूIN–SLN DIVEXUS–Japan Malabar अभ्यास
मुख्य फोकसक्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा, मानवीय सहायता, क्षमता निर्माणशक्ति प्रदर्शन, उन्नत युद्ध समन्वय, संयुक्त युद्ध तैयारी
पैमाना5+ जहाज, 2 गश्ती विमान; द्विपक्षीयकई कैरियर स्ट्राइक समूह, उन्नत प्लेटफॉर्म; बहुपक्षीय जिसमें भारत, ऑस्ट्रेलिया भी शामिल
रणनीतिक प्राथमिकताएंसमुद्री क्षेत्र की जागरूकता, क्षेत्रीय स्थिरताचीन के विरुद्ध प्रतिरोध, उच्च स्तरीय नौसैनिक युद्ध
संसाधन प्रतिबद्धतामध्यम, व्यावहारिक सहयोग पर केंद्रितउच्च, अत्याधुनिक तकनीक और बड़ी सेनाओं के साथ
भू-राजनीतिक रुखभारत-श्रीलंका द्विपक्षीय साझेदारी, IORअमेरिका नेतृत्व वाली इंडो-पैसिफिक गठबंधन

भारत-श्रीलंका समुद्री सुरक्षा सहयोग में चुनौतियां

हालांकि नौसैनिक अभ्यास बढ़े हैं, भारत और श्रीलंका के बीच ASEAN के Maritime Forum जैसे औपचारिक समुद्री सुरक्षा ढांचे का अभाव है, जो सतत बहुपक्षीय सहयोग और त्वरित संकट प्रबंधन में बाधा बनता है। इससे अवैध मछली पकड़ने, समुद्री प्रदूषण और सीमा पार अपराध जैसी नई चुनौतियों से निपटने में समन्वित कार्रवाई सीमित होती है। इसके अलावा, बाध्यकारी तंत्र के अभाव में संयुक्त संचालन की पूर्वानुमान और संस्थागत स्मृति कमजोर होती है।

  • भारत और श्रीलंका के बीच औपचारिक बहुपक्षीय समुद्री सुरक्षा ढांचे का अभाव।
  • त्वरित संकट प्रबंधन और सूचना साझा करने के सीमित साधन।
  • IORA जैसे क्षेत्रीय मंचों का पूरी तरह उपयोग न होना।

महत्व और आगे का रास्ता

  • स्थायी सहयोग के लिए औपचारिक समुद्री सुरक्षा सहयोग ढांचे को संस्थागत बनाना।
  • अभ्यासों के दायरे को बढ़ाकर बहुपक्षीय भागीदारों को शामिल करना।
  • समय-समय पर समुद्री क्षेत्र की जागरूकता और खुफिया साझा करने के लिए तकनीक का बेहतर उपयोग।
  • श्रीलंका में समुद्री कानून प्रवर्तन और खोज एवं बचाव क्षमताओं का विकास।
  • भारत की SAGAR नीति के अनुरूप नियम आधारित समुद्री व्यवस्था को बढ़ावा देना।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
IN–SLN DIVEX 2026 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. IN–SLN DIVEX एक बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास है जिसमें भारत, श्रीलंका और ASEAN देश शामिल हैं।
  2. यह अभ्यास Navy Act, 1957 और UNCLOS, 1982 के कानूनी ढांचे के तहत होता है।
  3. IN–SLN DIVEX मुख्य रूप से मानवीय सहायता और क्षमता निर्माण पर केंद्रित है, शक्ति प्रदर्शन पर नहीं।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि IN–SLN DIVEX द्विपक्षीय अभ्यास है, बहुपक्षीय नहीं। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि यह Navy Act और UNCLOS के अंतर्गत होता है और मुख्य रूप से समुद्री सुरक्षा, मानवीय सहायता और क्षमता निर्माण पर केंद्रित है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत के साथ श्रीलंका के समुद्री सुरक्षा सहयोग के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. भारत और श्रीलंका के बीच ASEAN के Maritime Forum जैसा औपचारिक समुद्री सुरक्षा ढांचा है।
  2. IN–SLN DIVEX भारतीय महासागर क्षेत्र में समुद्री क्षेत्र की जागरूकता बढ़ाने में योगदान देता है।
  3. भारत अपने रक्षा बजट का लगभग 15% नौसेना को देता है, जो IN–SLN DIVEX जैसे अभ्यासों को समर्थन देता है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि भारत और श्रीलंका के बीच ASEAN जैसे औपचारिक समुद्री सुरक्षा ढांचे का अभाव है। कथन 2 और 3 आधिकारिक आंकड़ों और रिपोर्टों के अनुसार सही हैं।

मुख्य प्रश्न

भारतीय महासागर क्षेत्र में भारत के समुद्री सुरक्षा उद्देश्यों के संदर्भ में IN–SLN DIVEX 2026 अभ्यास के रणनीतिक महत्व पर चर्चा करें। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – अंतरराष्ट्रीय संबंध और सुरक्षा अध्ययन।
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड भौगोलिक रूप से स्थलीय राज्य है, लेकिन इसकी औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियां भारतीय बंदरगाहों के माध्यम से समुद्री सुरक्षा पर निर्भर हैं।
  • मुख्य बिंदु: उत्तरों में भारत की समग्र समुद्री सुरक्षा रणनीति और झारखंड जैसे राज्यों पर इसके अप्रत्यक्ष प्रभाव को व्यापार सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के संदर्भ में उजागर करें।
IN–SLN DIVEX अभ्यास का मुख्य उद्देश्य क्या है?

मुख्य उद्देश्य भारत और श्रीलंका के बीच द्विपक्षीय नौसेनिक आपसी समन्वय, समुद्री क्षेत्र की जागरूकता और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना है, जिसमें मानवीय सहायता, समुद्री डकैती रोधी और क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।

IN–SLN DIVEX भारत के कानूनी समुद्री ढांचे से कैसे जुड़ा है?

यह अभ्यास Navy Act, 1957 और Maritime Zones of India Act, 1981 के तहत किया जाता है, जो UNCLOS के तहत भारत की समुद्री सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता की प्रतिबद्धताओं का समर्थन करता है।

IN–SLN DIVEX के संदर्भ में भारत के लिए समुद्री सुरक्षा का आर्थिक महत्व क्या है?

समुद्री सुरक्षा उन समुद्री मार्गों की रक्षा करती है, जिनसे भारत के 80% से अधिक व्यापार की मात्रा गुजरती है, जिसका मूल्य $1.7 ट्रिलियन है, इसलिए इस तरह के अभ्यास आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं।

IN–SLN DIVEX US–Japan Malabar अभ्यास से कैसे अलग है?

IN–SLN DIVEX क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और क्षमता निर्माण पर केंद्रित द्विपक्षीय अभ्यास है, जबकि Malabar शक्ति प्रदर्शन, उन्नत युद्ध समन्वय और बहुपक्षीय सहयोग पर जोर देता है।

IN–SLN DIVEX का समन्वय कौन-कौन से संस्थान करते हैं?

भारतीय और श्रीलंका नौसेना अभ्यास का संचालन करती हैं, नीति और बजट रक्षा मंत्रालय देखता है, इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ समन्वय करता है और क्षेत्रीय संदर्भ में IORA भूमिका निभाता है।

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