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IN–SLN DIVEX 2026 का परिचय

IN–SLN DIVEX 2026 भारत और श्रीलंका के नौसेनाओं के बीच होने वाली द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास श्रृंखला का तीसरा संस्करण है। यह अभ्यास 2026 की शुरुआत में श्रीलंकाई जलक्षेत्र में आयोजित किया गया, जिसमें दोनों नौसेनाओं के 1,000 से अधिक कर्मी शामिल थे। इसमें पनडुब्बी रोधी युद्ध, खोज एवं बचाव अभियान, और बेड़े के समन्वित संचालन जैसे जटिल समुद्री अभियानों का अभ्यास किया गया (प्रेस सूचना ब्यूरो, 2024)। यह अभ्यास भारतीय महासागर क्षेत्र (IOR) में समुद्री सुरक्षा और कार्यसामर्थ्य बढ़ाने के लिए भारत और श्रीलंका के बीच गहरे रणनीतिक साझेदारी को दर्शाता है, जो क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: भारतीय महासागर क्षेत्र की सुरक्षा चुनौतियां, द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास, समुद्री सुरक्षा ढांचे।
  • GS पेपर 2: भारत के दक्षिण एशियाई पड़ोसियों के साथ विदेश संबंध, रणनीतिक साझेदारी।
  • निबंध: क्षेत्रीय सुरक्षा में भारत की समुद्री कूटनीति की भूमिका।

IN–SLN DIVEX 2026 के कानूनी और संवैधानिक ढांचे

यह अभ्यास भारत के समुद्री कानूनी ढांचे के अंतर्गत संचालित होता है, विशेषकर Maritime Zones of India Act, 1981 के तहत, जो भारत के क्षेत्रीय जल, आसन्न क्षेत्र और विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) को परिभाषित करता है। Indian Navy Act, 1957 नौसैनिक ऑपरेशनों और अभ्यासों के लिए कानूनी अधिकार प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, IN–SLN DIVEX 2026 भारत की संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS), 1982 के पालन को भी सुनिश्चित करता है, जिसमें समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता और EEZ की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण पहलू शामिल हैं, जो समुद्री डकैती और अवैध तस्करी जैसे खतरों से रक्षा करते हैं।

  • Maritime Zones of India Act, 1981: समुद्री सीमाओं को परिभाषित करता है, जिससे EEZ में संयुक्त गश्त की अनुमति मिलती है।
  • Indian Navy Act, 1957: भारतीय नौसेना को विदेशी नौसेनाओं के साथ संयुक्त अभ्यास और ऑपरेशन करने का अधिकार देता है।
  • UNCLOS, 1982: समुद्री अधिकारों और जिम्मेदारियों का ढांचा; IOR में सहयोगी सुरक्षा प्रयासों का आधार।

IN–SLN DIVEX 2026 के पीछे आर्थिक कारण

भारत का रक्षा बजट 2023-24 में नौसेना के लिए लगभग ₹1.44 लाख करोड़ (~USD 18 बिलियन) था, जो नौसेना के आधुनिकीकरण और परिचालन तत्परता पर विशेष जोर दर्शाता है (रक्षा मंत्रालय वार्षिक रिपोर्ट, 2023)। IN–SLN DIVEX 2026 इस निवेश को व्यावहारिक रूप देता है, जिससे सामरिक क्षमताओं और कार्यसामर्थ्य में वृद्धि होती है। भारतीय महासागर क्षेत्र भारत के व्यापार का 90% से अधिक हिस्सा संभालता है, जिसका वार्षिक मूल्य USD 1.2 ट्रिलियन है (वाणिज्य मंत्रालय, 2023)। DIVEX जैसे अभ्यास समुद्री मार्गों की सुरक्षा करते हैं, जो समुद्री डकैती, तस्करी और अन्य असममित खतरों से भारत के आर्थिक हितों की रक्षा करते हैं।

  • भारत का नौसैनिक बेड़ा: 150 से अधिक जहाज और पनडुब्बियां, विश्व में चौथे स्थान पर (SIPRI Military Balance, 2024)।
  • श्रीलंका का EEZ: लगभग 517,000 वर्ग किलोमीटर, संसाधन संरक्षण और सुरक्षा सहयोग के लिए रणनीतिक क्षेत्र (Sri Lanka Navy वार्षिक रिपोर्ट, 2023)।
  • भारतीय महासागर क्षेत्र में समुद्री डकैती के 75% मामले, संयुक्त समुद्री सुरक्षा प्रयासों की जरूरत (International Maritime Bureau, 2023)।

IN–SLN DIVEX 2026 के प्रमुख संस्थान

इस अभ्यास की योजना और क्रियान्वयन की अगुवाई भारतीय नौसेना करती है, जबकि श्रीलंका नौसेना मेजबानी और सह-भागीदारी करती है, जिससे द्विपक्षीय नौसैनिक संबंध मजबूत होते हैं। भारत का रक्षा मंत्रालय (MoD) नीति निर्धारण और बजट स्वीकृति प्रदान करता है। Integrated Defence Staff (IDS) संयुक्त कार्यसामर्थ्य के लिए समन्वय करता है। इसके अलावा, Indian Ocean Naval Symposium (IONS) एक बहुपक्षीय मंच है जो क्षेत्रीय समुद्री सहयोग को बढ़ावा देता है, जिसमें भारत और श्रीलंका दोनों सक्रिय सदस्य हैं।

  • भारतीय नौसेना: अभ्यास का संचालन और क्रियान्वयन।
  • श्रीलंका नौसेना: मेजबान देश, द्विपक्षीय सहयोग को सुदृढ़ करता है।
  • भारत का रक्षा मंत्रालय: नीति और बजट प्राधिकरण।
  • Integrated Defence Staff: संयुक्त अभ्यास और कार्यसामर्थ्य का समन्वय।
  • Indian Ocean Naval Symposium: क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देने वाला मंच।

IN–SLN DIVEX 2026 और US-Japan Malabar अभ्यासों की तुलना

पहलूIN–SLN DIVEX 2026US-Japan Malabar अभ्यास
भागीदारभारत और श्रीलंका (द्विपक्षीय)प्रारंभ में अमेरिका और जापान; अब ऑस्ट्रेलिया सहित त्रिपक्षीय
भौगोलिक क्षेत्रभारतीय महासागर क्षेत्र, दक्षिण एशियाई जलक्षेत्रइंडो-पैसिफिक क्षेत्र, जिसमें पश्चिमी प्रशांत भी शामिल
रणनीतिक उद्देश्यक्षेत्रीय स्थिरता, क्षमता निर्माण, समुद्री सुरक्षा सहयोगशक्ति प्रदर्शन, चीन के विरुद्ध निवारण, गठबंधन कार्यसामर्थ्य बढ़ाना
अभ्यास की जटिलतापनडुब्बी रोधी युद्ध, खोज एवं बचाव, बेड़े के संचालनउन्नत संयुक्त युद्धाभ्यास, कैरियर स्ट्राइक ग्रुप ऑपरेशन
राजनीतिक महत्वपड़ोस नीति, पूर्व की ओर नीति के अनुरूपइंडो-पैसिफिक रणनीति, अमेरिकी गठबंधन मजबूत करना

भारत-श्रीलंका समुद्री सहयोग में महत्वपूर्ण कमियां

मजबूत नौसैनिक अभ्यासों के बावजूद, भारत और श्रीलंका के बीच Maritime Domain Awareness (MDA) का कोई औपचारिक डेटा साझा करने वाला तंत्र नहीं है। यह कमी समुद्री डकैती, तस्करी और अवैध मछली पकड़ने जैसे असममित खतरों के प्रति त्वरित और समन्वित प्रतिक्रिया को बाधित करती है। एक संयुक्त MDA तंत्र स्थापित करने से श्रीलंका के EEZ में स्थिति जागरूकता और परिचालन समन्वय बेहतर होगा।

  • IN और SLN के बीच औपचारिक MDA डेटा साझा करने का समझौता नहीं।
  • वास्तविक समय में खुफिया जानकारी का सीमित आदान-प्रदान।
  • क्षेत्र में असममित समुद्री खतरों के प्रति संभावित कमजोरियां।

महत्व और आगे का रास्ता

  • समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना: IN–SLN DIVEX 2026 भारत के व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए संयुक्त क्षमताओं को बढ़ाता है।
  • रणनीतिक साझेदारी को गहरा करना: यह अभ्यास भारत की पड़ोस नीति को सुदृढ़ करता है और श्रीलंका के साथ विश्वास व कार्यसामर्थ्य बढ़ाता है।
  • MDA अंतर को पूरा करना: वास्तविक समय में समुद्री क्षेत्र की जानकारी साझा करने से खतरे का पता लगाने और समन्वित प्रतिक्रिया में सुधार होगा।
  • बहुपक्षीय सहभागिता बढ़ाना: IONS जैसे मंचों का उपयोग कर श्रीलंका को व्यापक क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा संरचनाओं में शामिल किया जा सकता है।
  • क्षमता निर्माण: लगातार संयुक्त अभ्यास श्रीलंका नौसेना की परिचालन दक्षता बढ़ाते हैं, जो क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान देता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
IN–SLN DIVEX 2026 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. यह भारत, श्रीलंका और मालदीव के बीच त्रिपक्षीय नौसैनिक अभ्यास है।
  2. अभ्यास में पनडुब्बी रोधी युद्ध और खोज एवं बचाव शामिल हैं।
  3. यह भारत की UNCLOS, 1982 के तहत प्रतिबद्धताओं का समर्थन करता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि IN–SLN DIVEX केवल भारत और श्रीलंका के बीच द्विपक्षीय अभ्यास है। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि अभ्यास में पनडुब्बी रोधी युद्ध और खोज एवं बचाव शामिल हैं, और यह भारत की UNCLOS प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत के नौसैनिक अभ्यासों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. IN–SLN DIVEX मुख्य रूप से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति प्रदर्शन पर केंद्रित है।
  2. US-Japan Malabar अभ्यास में अब ऑस्ट्रेलिया को भी शामिल किया गया है।
  3. IN–SLN DIVEX भारतीय महासागर क्षेत्र में द्विपक्षीय समुद्री सुरक्षा सहयोग को बढ़ाता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि IN–SLN DIVEX क्षेत्रीय स्थिरता और क्षमता निर्माण पर केंद्रित है, शक्ति प्रदर्शन पर नहीं। कथन 2 और 3 सही हैं।

मेन प्रश्न

चर्चा करें कि कैसे IN–SLN DIVEX 2026 भारत की भारतीय महासागर क्षेत्र में रणनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाता है और इसका क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा पर क्या प्रभाव पड़ता है। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – अंतरराष्ट्रीय संबंध और सुरक्षा अध्ययन।
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड भौगोलिक रूप से अंदरूनी राज्य है, लेकिन इसके औद्योगिक क्षेत्र समुद्री व्यापार मार्गों पर निर्भर हैं, जिनकी सुरक्षा भारतीय नौसेना द्वारा सुनिश्चित की जाती है।
  • मेन पॉइंटर: भारत के समुद्री सुरक्षा अभ्यासों को राष्ट्रीय आर्थिक हितों से जोड़कर उत्तर तैयार करें, विशेषकर झारखंड जैसे अंदरूनी राज्यों को अप्रत्यक्ष लाभ पर जोर देते हुए।
IN–SLN DIVEX 2026 का मुख्य उद्देश्य क्या है?

IN–SLN DIVEX 2026 का उद्देश्य भारत और श्रीलंका के बीच नौसैनिक कार्यसामर्थ्य और समुद्री सुरक्षा सहयोग को बढ़ाना है, जिसमें पनडुब्बी रोधी युद्ध, खोज एवं बचाव, और भारतीय महासागर क्षेत्र में समन्वित समुद्री संचालन शामिल हैं।

IN–SLN DIVEX 2026 भारत के कानूनी समुद्री ढांचे के साथ कैसे मेल खाता है?

यह अभ्यास Maritime Zones of India Act, 1981 और Indian Navy Act, 1957 के अंतर्गत आता है, जो नौसैनिक ऑपरेशनों के लिए कानूनी अधिकार प्रदान करते हैं, साथ ही UNCLOS, 1982 के तहत भारत की प्रतिबद्धताओं का समर्थन करता है, विशेषकर EEZ संरक्षण और समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता में।

भारत-श्रीलंका नौसैनिक सहयोग में समुद्री क्षेत्र जागरूकता (MDA) क्यों महत्वपूर्ण है?

MDA समुद्री गतिविधियों की वास्तविक समय निगरानी प्रदान करता है ताकि समुद्री डकैती और तस्करी जैसे खतरों का पता चल सके और त्वरित प्रतिक्रिया दी जा सके। वर्तमान में भारत और श्रीलंका के बीच कोई औपचारिक MDA डेटा साझा करने वाला तंत्र नहीं है, जिससे त्वरित समन्वय बाधित होता है।

IN–SLN DIVEX 2026 भारत की आर्थिक सुरक्षा में कैसे योगदान देता है?

यह अभ्यास उन समुद्री मार्गों की सुरक्षा करता है जो भारत के व्यापार का 90% से अधिक मालवाहक हैं, जिनका वार्षिक मूल्य USD 1.2 ट्रिलियन से अधिक है, इस प्रकार भारत के आर्थिक हितों की रक्षा करता है।

IN–SLN DIVEX US-Japan Malabar अभ्यासों से कैसे अलग है?

IN–SLN DIVEX एक द्विपक्षीय अभ्यास है जो दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय स्थिरता और क्षमता निर्माण पर केंद्रित है, जबकि Malabar त्रिपक्षीय अभ्यास है जिसमें ऑस्ट्रेलिया भी शामिल है और यह शक्ति प्रदर्शन तथा इंडो-पैसिफिक सुरक्षा पर जोर देता है।

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