अपडेट

परिचय: भारत के परिवहन तंत्र में जलमार्गों का महत्व

भारत के जलमार्ग नदियों, नहरों और जल निकायों का एक विस्तृत नेटवर्क हैं, जो 14,500 किलोमीटर से अधिक फैला हुआ है। इनमें से 111 जलमार्गों को राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 (संशोधित 2021) के तहत राष्ट्रीय जलमार्गजल मार्ग विकास परियोजना शामिल है। जलमार्गों का बेहतर उपयोग करके लॉजिस्टिक्स लागत कम की जा सकती है, सड़क और रेलवे की भीड़ घटाई जा सकती है और टिकाऊ मल्टीमोडल परिवहन को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे भारत की सप्लाई चेन मजबूत होगी।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: इन्फ्रास्ट्रक्चर, परिवहन और लॉजिस्टिक्स; आर्थिक विकास; पर्यावरण और पारिस्थितिकी
  • निबंध: टिकाऊ परिवहन और सप्लाई चेन की मजबूती
  • मेनस: जलमार्गों का संस्थागत ढांचा, तुलनात्मक लॉजिस्टिक्स विश्लेषण, जल मार्ग विकास जैसी सरकारी योजनाएं

जलमार्गों के लिए कानूनी और संस्थागत ढांचा

जलमार्गों के नियमन के लिए मुख्य कानून इनलैंड वेसल्स एक्ट, 1917 है, जो पोत पंजीकरण और नेविगेशन नियमों को नियंत्रित करता है। राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 (संशोधित 2021) ने 111 राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किए हैं और इनके विकास व नियमन के लिए इनलैंड वाटरवेज़ अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IWAI) को अधिकार दिया है। संविधान के अनुच्छेद 243W के तहत राज्यों को इनलैंड वाटर ट्रांसपोर्ट पर अधिकार प्राप्त है, इसलिए केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय जरूरी है। मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 सड़क परिवहन को नियंत्रित कर मोडल प्रतियोगिता को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है, जबकि मर्चेंट शिपिंग एक्ट, 1958 जल परिवहन के कुछ पहलुओं को कवर करता है। सुप्रीम कोर्ट के M.C. Mehta बनाम भारत संघ (1987) मामले में पर्यावरण सुरक्षा के महत्व को रेखांकित किया गया।

  • पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW): नीति निर्धारण और इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग।
  • इनलैंड वाटरवेज़ अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IWAI): विकास, रखरखाव और नियमन के लिए वैधानिक संस्था।
  • सेंट्रल इनलैंड वाटर ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (CIWTC): पोत संचालन और लॉजिस्टिक्स सेवाओं का प्रबंधन।
  • राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI): सड़क नेटवर्क के साथ मल्टीमोडल कनेक्टिविटी को बढ़ावा।
  • सेंट्रल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB): पर्यावरण निगरानी और अनुपालन।

आर्थिक महत्व और वर्तमान स्थिति

भारत की लॉजिस्टिक्स लागत GDP का लगभग 13-14% है (आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24), जो विकसित देशों के 8-9% के मुकाबले काफी अधिक है। माल ढुलाई में सड़क का हिस्सा 60% है, रेल का 30%, जबकि जलमार्ग केवल 0.5% पर है (MoPSW वार्षिक रिपोर्ट 2023)। राष्ट्रीय जलमार्ग 1 पर सालाना लगभग 6 मिलियन टन माल परिवहन होता है, जिसे 2025 तक 18 मिलियन टन तक बढ़ाने का लक्ष्य है (IWAI डेटा)। जलमार्ग सड़क परिवहन की तुलना में 3-4 गुना अधिक ईंधन कुशल हैं, जिससे कार्बन उत्सर्जन और परिचालन लागत कम होती है (CIWTC, 2022)। सरकार की योजनाएं जैसे जल मार्ग विकास परियोजना, सागरमाला और भरतमाला जलमार्गों को मल्टीमोडल लॉजिस्टिक्स में शामिल कर सप्लाई चेन की बाधाओं को कम करने में मदद कर रही हैं।

परिमाणभारत (2023)नीदरलैंड (मानक)
नाविगेबल जलमार्ग की लंबाईलगभग 14,500 किमी (111 राष्ट्रीय जलमार्ग)लगभग 6,000 किमी नहरें और नदियाँ
जलमार्ग के माध्यम से माल का हिस्सा0.5%40%
लॉजिस्टिक्स लागत (% GDP)13-14%लगभग 8%
ईंधन दक्षता (जलमार्ग बनाम सड़क)3-4 गुना बेहतरमल्टीमोडल इंटीग्रेशन के साथ तुलनीय
संस्थागत समन्वयMoPSW, IWAI, NHAI, राज्यों के बीच विखंडितइन्फ्रास्ट्रक्चर और वाटर मैनेजमेंट मंत्रालय के अधीन केंद्रीकृत

जलमार्गों के विकास में बाधाएं

नीतिगत जोर के बावजूद कई चुनौतियां जलमार्गों के विकास में बाधक हैं। अंतिम मील कनेक्टिविटी कमजोर है, जिससे औद्योगिक केंद्रों और बंदरगाहों से जुड़ाव कम है। उचित गहराई बनाए रखने के लिए ड्रेजिंग कम और आधुनिक नेविगेशन उपकरणों की कमी नेविगेशन को प्रभावित करती है, खासकर सूखे मौसम में। केंद्र और राज्यों के बीच तथा IWAI, CIWTC, NHAI जैसी एजेंसियों के बीच संस्थागत समन्वय की कमी मल्टीमोडल इंटीग्रेशन में रुकावट पैदा करती है। निजी क्षेत्र की भागीदारी सीमित है, जो नियमों की अनिश्चितता और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के कारण नवाचार और निवेश को रोकती है।

  • मौसमी जल स्तर में उतार-चढ़ाव विश्वसनीयता कम करता है।
  • टर्मिनलों पर अपर्याप्त माल संभालने और भंडारण की सुविधाएं।
  • पर्यावरणीय चिंताएं और अनुपालन लागत परियोजनाओं में देरी करती हैं।
  • लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों में जलमार्ग के लाभों के प्रति जागरूकता कम।

महत्व और आगे का रास्ता

जलमार्ग भारत की लॉजिस्टिक्स लागत और कार्बन उत्सर्जन को काफी हद तक कम कर सप्लाई चेन की मजबूती बढ़ा सकते हैं। अंतिम मील कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए सड़क और रेल लिंक पर विशेष ध्यान देना होगा। संस्थागत समन्वय को मजबूत करने के लिए एक एकीकृत नोडल एजेंसी या अंतर-मंत्रालयीय टास्क फोर्स बनाना जरूरी है। स्पष्ट नियम और प्रोत्साहन देकर निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाई जानी चाहिए, जिससे क्षमता और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। नीदरलैंड जैसे देशों के सफल मल्टीमोडल लॉजिस्टिक्स हब और डिजिटल नेविगेशन सिस्टम अपनाकर जलमार्गों की भूमिका बढ़ाई जा सकती है।

  • ड्रेजिंग और नेविगेशन इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार कर साल भर संचालन सुनिश्चित करें।
  • जलमार्गों को सागरमाला और भरतमाला परियोजनाओं के साथ जोड़कर मल्टीमोडल लॉजिस्टिक्स को सहज बनाएं।
  • पर्यावरण संरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप उपाय लागू करें।
  • लॉजिस्टिक्स कंपनियों और शिपर्स के लिए जलमार्ग के फायदों पर जागरूकता अभियान चलाएं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. यह धारा 3 और 4 के तहत राष्ट्रीय जलमार्गों की घोषणा और विकास करता है।
  2. यह सभी इनलैंड जल परिवहन के अधिकार केंद्र सरकार को देता है।
  3. 2021 में संशोधन के बाद राष्ट्रीय जलमार्गों की संख्या 111 हो गई।

इनमें से कौन सा/से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
धारा 3 और 4 के तहत राष्ट्रीय जलमार्गों की घोषणा और विकास होता है, इसलिए कथन 1 सही है। अनुच्छेद 243W के कारण राज्यों को भी अधिकार हैं, इसलिए कथन 2 गलत है। 2021 के संशोधन ने राष्ट्रीय जलमार्गों की संख्या 111 कर दी, इसलिए कथन 3 सही है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत में इनलैंड वाटर ट्रांसपोर्ट (IWT) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. IWT वर्तमान में भारत के कुल माल परिवहन का लगभग 10% हिस्सा है।
  2. राष्ट्रीय जलमार्ग 1 का लक्ष्य 2025 तक माल क्षमता 6 मिलियन टन से बढ़ाकर 18 मिलियन टन करना है।
  3. IWT सड़क परिवहन की तुलना में 3-4 गुना अधिक ईंधन कुशल है।

इनमें से कौन सा/से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि IWT का हिस्सा केवल 0.5% है। कथन 2 और 3 IWAI और CIWTC के अनुसार सही हैं।

मेनस प्रश्न

विवेचना करें कि कैसे इनलैंड जलमार्ग भारत की सप्लाई चेन को मजबूत कर सकते हैं, लॉजिस्टिक्स लागत कम कर और मल्टीमोडल कनेक्टिविटी बढ़ाकर। चुनौतियों का मूल्यांकन करें और भारत में इनलैंड जलमार्ग के freight परिवहन में योगदान बढ़ाने के उपाय सुझाएं।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (आर्थिक विकास और इन्फ्रास्ट्रक्चर)
  • झारखंड का दृष्टिकोण: दामोदर और सुबर्णरेखा जैसी नदियाँ इनलैंड जल परिवहन के लिए संभावनाएं रखती हैं, जो खनिज और औद्योगिक माल ढुलाई को बढ़ावा दे सकती हैं।
  • मेनस पॉइंटर: झारखंड के जलमार्गों की संभावनाएं, कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौतियां, तथा राज्य के औद्योगिक कॉरिडोर के साथ समन्वय को उजागर करें।
इनलैंड वाटरवेज़ अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IWAI) की भूमिका क्या है?

IWAI राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 के तहत स्थापित वैधानिक संस्था है, जो भारत के राष्ट्रीय जलमार्गों के विकास, रखरखाव और नियमन की जिम्मेदार है। यह इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं, नौवहन सुरक्षा और इनलैंड जल परिवहन के प्रचार-प्रसार का कार्य करती है।

ईंधन दक्षता के मामले में इनलैंड जल परिवहन और सड़क परिवहन की तुलना कैसे है?

सेंट्रल इनलैंड वाटर ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन के 2022 के आंकड़ों के अनुसार, इनलैंड जल परिवहन सड़क परिवहन की तुलना में 3-4 गुना अधिक ईंधन कुशल है, जिससे परिचालन लागत कम होती है और कार्बन उत्सर्जन घटता है।

भारत में इनलैंड जलमार्गों के सामने मुख्य चुनौतियां क्या हैं?

मुख्य चुनौतियों में अंतिम मील कनेक्टिविटी की कमी, अपर्याप्त ड्रेजिंग, संस्थागत समन्वय का अभाव, निजी क्षेत्र की सीमित भागीदारी और मौसमी जल स्तर में उतार-चढ़ाव शामिल हैं, जो नौवहन को प्रभावित करते हैं।

राष्ट्रीय जलमार्ग 1 के विकास पर केंद्रित कौन सी सरकारी योजना है?

जल मार्ग विकास परियोजना राष्ट्रीय जलमार्ग 1 (गंगा-भागीरथी-हुगली) के विकास पर केंद्रित प्रमुख योजना है, जो माल क्षमता बढ़ाने और नेविगेशन इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने का लक्ष्य रखती है।

भारत की लॉजिस्टिक्स लागत विकसित देशों की तुलना में कैसी है?

भारत की लॉजिस्टिक्स लागत GDP का लगभग 13-14% है (आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24), जो विकसित देशों के 8-9% के मुकाबले लगभग दोगुनी है, जिसका एक कारण सस्ते और कुशल जलमार्गों का कम उपयोग है।

हमारे कोर्स

72+ बैच

हमारे कोर्स
Contact Us