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कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2023 को भारत में कीटनाशक नियमन को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से 1968 के कीटनाशक अधिनियम की जगह लाया गया है। यह विधेयक कीटनाशकों की श्रेणियों को पुनः परिभाषित करके (धारा 2), पंजीकरण प्रक्रिया को सख्त करते हुए (धारा 7-12), और उल्लंघनों पर दंड बढ़ाकर (धारा 20-25) नियामक दायरे का विस्तार करता है। इसके साथ ही, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 और खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धाराओं को भी शामिल किया गया है ताकि कीटनाशक अवशेष और पर्यावरण सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं का समाधान हो सके। यह विधेयक अनुच्छेद 246 के तहत संघ सूची (प्रविष्टि 14) में आता है और अनुच्छेद 253 के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय समझौतों को लागू करने के लिए संसद को अधिकार देता है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था (कृषि, उद्योग), पर्यावरण (प्रदूषण नियंत्रण, खाद्य सुरक्षा)
  • GS पेपर 2: राजनीति (संघ-राज्य विधायी संबंध, विधायी शक्तियां)
  • निबंध: कृषि विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलन

कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2023 में प्रावधान और नियामक बदलाव

विधेयक कीटनाशकों की परिभाषा में जैव-कीटनाशक और पौध वृद्धि नियंत्रकों को शामिल कर नियामक दायरे का विस्तार करता है, जो अब केवल रासायनिक कीटनाशकों तक सीमित नहीं रहेगा। पंजीकरण की वैधता 5 वर्ष से घटाकर 3 वर्ष कर दी गई है (धारा 10), जिससे अनुपालन जांच की आवृत्ति बढ़ेगी। दंडात्मक प्रावधान भी कड़े किए गए हैं, जिसमें 10 लाख रुपये तक का जुर्माना और 5 वर्ष तक की जेल की सजा शामिल है (धारा 24), जो सख्त प्रवर्तन की दिशा में है। क्षेत्रीय भाषाओं में अनिवार्य लेबलिंग (धारा 15) से किसानों की जागरूकता और सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।

  • धारा 2 के तहत जैव-कीटनाशक और पौध वृद्धि नियंत्रकों को शामिल किया गया।
  • पंजीकरण नवीनीकरण अवधि को 5 वर्ष से घटाकर 3 वर्ष किया गया (धारा 10)।
  • दंड बढ़ाए गए: 10 लाख रुपये तक जुर्माना, 5 वर्ष तक कैद (धारा 24)।
  • किसानों की समझ बढ़ाने के लिए स्थानीय भाषाओं में अनिवार्य लेबलिंग (धारा 15)।

आर्थिक प्रभाव और उद्योग की चिंताएं

भारत का कीटनाशक बाजार 2023 में 4.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर का था, जो 6.5% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है (इंडियन एग्रोकेमिकल एसोसिएशन रिपोर्ट, 2023)। यह क्षेत्र सीधे 50,000 से अधिक लोगों को रोजगार देता है और कृषि व संबद्ध उद्योगों के माध्यम से लाखों लोगों का सहारा है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में भारत ने 1.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर के कीटनाशक निर्यात किए (DGFT डेटा)। उद्योग जगत का कहना है कि विधेयक में कड़े पंजीकरण नियम और बढ़े हुए दंड आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकते हैं, अनुपालन लागत बढ़ा सकते हैं और नवाचार, खासकर लघु और मध्यम उद्यमों के लिए बाधा बन सकते हैं।

  • 2022 में भारत कीटनाशक खपत 76,000 मीट्रिक टन थी; इसमें 45% हर्बिसाइड्स शामिल हैं।
  • 2023-24 के लिए कीटनाशक अवशेष निगरानी का बजट 15% बढ़ाकर 150 करोड़ रुपये किया गया (संघ बजट)।
  • उद्योग को डर है कि कड़े नियम आयात, निर्यात और घरेलू उत्पादन पर असर डाल सकते हैं।
  • कड़े नियंत्रण और कम पंजीकरण अवधि से एग्रोकेमिकल नवाचार धीमा पड़ने का खतरा।

सांस्थानिक ढांचा और अंतर-एजेंसी समन्वय

केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड और पंजीकरण समिति (CIBRC) कीटनाशक पंजीकरण और सुरक्षा मूल्यांकन की मुख्य संस्था बनी रहेगी। कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय नीति निर्धारण और कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार होगा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) एग्रोकेमिकल्स पर शोध करता है, जबकि खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) खाद्य उत्पादों में कीटनाशक अवशेषों की निगरानी करता है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) आयात-निर्यात अनुपालन को नियंत्रित करता है। विधेयक इन संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय को अनिवार्य बनाता है ताकि व्यापक कीटनाशक प्रबंधन सुनिश्चित हो सके।

  • CIBRC पंजीकरण, सुरक्षा मूल्यांकन और अनुपालन प्रवर्तन देखता है।
  • कृषि मंत्रालय नीति बनाता और विधेयक लागू करता है।
  • ICAR जैव-कीटनाशक और सुरक्षित विकल्पों पर शोध करता है।
  • FSSAI खाद्य में कीटनाशक अवशेषों की निगरानी करता है, 2022 में उल्लंघनों में 12% वृद्धि दर्ज की।
  • DGFT निर्यात-आयात नियमों को नियंत्रित करता है, जो 1.2 बिलियन डॉलर के निर्यात के लिए महत्वपूर्ण है।

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत बनाम चीन की कीटनाशक नियमन

पहलूभारत (प्रस्तावित विधेयक, 2023)चीन (कीटनाशक प्रशासन नियम, 2017)
पंजीकरण वैधता3 वर्ष (5 वर्ष से घटाई गई)5 वर्ष, कड़े नवीनीकरण नियमों के साथ
अवशेष निगरानीबढ़ाई गई निगरानी; बजट आवंटन में वृद्धिव्यापक अवशेष सीमा, 5 वर्षों में प्रतिबंधित कीटनाशकों में 20% कमी
दंड10 लाख रुपये तक जुर्माना, 5 वर्ष तक कैदकड़े दंड, अनुपालन और निर्यात मानकों पर जोर
उद्योग प्रभावनियामक बोझ और नवाचार में मंदी को लेकर चिंतानिर्यात और टिकाऊ उपयोग को बढ़ावा देने वाला संतुलित दृष्टिकोण
टिकाऊ विकल्पों का समर्थनजैव-कीटनाशकों और पर्यावरणीय विकल्पों के लिए सीमित प्रावधानजैव-कीटनाशक अनुसंधान और अपनाने के लिए स्पष्ट प्रोत्साहन

प्रस्तावित विधेयक में मुख्य कमियां

विधेयक में जैव-कीटनाशक और टिकाऊ कीट प्रबंधन विकल्पों के अनुसंधान व अपनाने के लिए स्पष्ट प्रोत्साहन या ढांचा नहीं है। इससे रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता बनी रहेगी, जो दीर्घकालिक कृषि स्थिरता और पर्यावरण सुरक्षा के लिए खतरा है। इसके अलावा, पंजीकरण नवीनीकरण की तेज़ अवधि नियामक संस्थाओं पर दबाव बढ़ा सकती है और निर्माताओं के लिए अनुपालन लागत बढ़ा सकती है, जिससे बाजार प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है।

  • जैव-कीटनाशक अनुसंधान के लिए समर्पित फंडिंग या प्रोत्साहन न होना।
  • छोटी पंजीकरण अवधि के कारण नियामक जाम की संभावना।
  • लघु और मध्यम उद्यमों के अनुपालन समर्थन के लिए कोई विशेष व्यवस्था नहीं।
  • पर्यावरणीय स्थिरता लक्ष्यों के साथ अपर्याप्त समन्वय।

महत्व और आगे का रास्ता

यह विधेयक कीटनाशक नियमन को अंतरराष्ट्रीय मानकों और पर्यावरण सुरक्षा नियमों के अनुरूप आधुनिक बनाने का प्रयास है। लेकिन कड़े नियामक नियंत्रण और उद्योग के विकास व नवाचार के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। टिकाऊ कीट प्रबंधन और जैव-कीटनाशकों के लिए स्पष्ट समर्थन शामिल करना भारत के कृषि और पर्यावरण के भविष्य के लिए अहम होगा। नियामक संस्थाओं में समन्वय और क्षमता विकास से अनुपालन बोझ कम होगा और प्रवर्तन प्रभावी होगा।

  • जैव-कीटनाशक अनुसंधान व अपनाने के लिए प्रोत्साहन और फंडिंग तंत्र लागू करें।
  • छोटी पंजीकरण अवधि को चरणबद्ध तरीके से लागू करने पर विचार करें।
  • नियामक एजेंसियों की क्षमता बढ़ाएं ताकि बढ़े हुए अनुपालन कार्यभार को संभाला जा सके।
  • अनिवार्य लेबलिंग के साथ किसानों के लिए जागरूकता कार्यक्रम भी चलाएं।
  • कीटनाशक नियमन को व्यापक पर्यावरण और खाद्य सुरक्षा नीतियों के साथ जोड़ें।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2023 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. विधेयक कीटनाशक पंजीकरण नवीनीकरण अवधि को 5 वर्ष से घटाकर 3 वर्ष करता है।
  2. इसमें उल्लंघनों पर 10 वर्ष तक की कैद का प्रावधान है।
  3. विधेयक में क्षेत्रीय भाषाओं में अनिवार्य कीटनाशक लेबलिंग शामिल है।

इनमें से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 3
  • bकेवल 2
  • cकेवल 1 और 2
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि विधेयक पंजीकरण अवधि 5 से 3 वर्ष करता है (धारा 10)। कथन 2 गलत है; कैद की अधिकतम अवधि 5 वर्ष है, 10 वर्ष नहीं (धारा 24)। कथन 3 सही है क्योंकि क्षेत्रीय भाषाओं में अनिवार्य लेबलिंग है (धारा 15)।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
कीटनाशक नियमन से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के बारे में निम्नलिखित पर विचार करें:
  1. अनुच्छेद 246 के तहत संघ सूची की प्रविष्टि 14 में कीटनाशक शामिल हैं।
  2. अनुच्छेद 253 संसद को अंतरराष्ट्रीय समझौतों को लागू करने के लिए विधेयक लाने का अधिकार देता है।
  3. कीटनाशक नियमन पूरी तरह से राज्य सूची के अंतर्गत आता है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है; कीटनाशक संघ सूची की प्रविष्टि 14 में आते हैं। कथन 2 भी सही है; अनुच्छेद 253 संसद को अंतरराष्ट्रीय समझौतों के लिए कानून बनाने का अधिकार देता है। कथन 3 गलत है क्योंकि कीटनाशक नियमन पूरी तरह से राज्य सूची में नहीं, बल्कि संघ सूची में आता है।

मुख्य प्रश्न

प्रस्तावित कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2023 के भारत की एग्रोकेमिकल उद्योग और कृषि स्थिरता पर प्रभावों का आलोचनात्मक विश्लेषण करें। विधेयक में मौजूद कमियों पर चर्चा करें और उन्हें दूर करने के उपाय सुझाएं।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 3 (कृषि और संबद्ध क्षेत्र), पेपर 2 (राजनीति और शासन)
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड की कृषि कीट प्रकोपों के प्रति संवेदनशील है; कीटनाशक नियमन स्थानीय कृषि प्रथाओं और कृषि आधारित उद्योगों को प्रभावित करता है।
  • मुख्य बिंदु: उत्तर में झारखंड के आदिवासी और लघु किसानों पर कीटनाशक नियमन के प्रभाव, राज्य स्तर पर प्रवर्तन की चुनौतियां, और क्षेत्रीय जागरूकता कार्यक्रमों की आवश्यकता को उजागर करें।
कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2023 का मुख्य उद्देश्य क्या है?

यह विधेयक पुराने कीटनाशक अधिनियम, 1968 को बदलकर जैव-कीटनाशक को शामिल करने, कड़े पंजीकरण नियम लागू करने, दंड बढ़ाने और खाद्य व पर्यावरण में कीटनाशक अवशेषों की बेहतर निगरानी सुनिश्चित करने का प्रयास करता है।

विधेयक कीटनाशक पंजीकरण की वैधता को कैसे प्रभावित करता है?

यह पंजीकरण की वैधता को 5 वर्ष से घटाकर 3 वर्ष कर देता है, जिससे नवीनीकरण और अनुपालन जांच की आवृत्ति बढ़ जाती है (धारा 10)।

नए विधेयक के तहत कीटनाशक नियमन के लिए कौन-कौन से संस्थान जिम्मेदार हैं?

केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड और पंजीकरण समिति (CIBRC) पंजीकरण का नियमन करती है; कृषि मंत्रालय नीति बनाता है; ICAR अनुसंधान करता है; FSSAI अवशेषों की निगरानी करता है; DGFT व्यापार अनुपालन नियंत्रित करता है।

उद्योग जगत ने विधेयक को लेकर कौन-सी मुख्य चिंताएं जताई हैं?

उद्योग को डर है कि कड़े नियम, बढ़ी हुई अनुपालन लागत, आपूर्ति श्रृंखला में बाधा, और नवाचार के लिए प्रोत्साहन की कमी विशेषकर लघु एवं मध्यम उद्यमों को प्रभावित कर सकती है।

क्या विधेयक जैव-कीटनाशक और टिकाऊ कीट प्रबंधन को बढ़ावा देता है?

विधेयक में जैव-कीटनाशक अनुसंधान और टिकाऊ विकल्पों के लिए स्पष्ट प्रोत्साहन या प्रावधान नहीं हैं, जो एक महत्वपूर्ण कमी है।

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