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परिचय: छठी नीलगिरी-क्लास फ्रिगेट भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल

मई 2024 में भारतीय नौसेना ने छठी नीलगिरी-क्लास फ्रिगेट, INS तरागिरी को नौसेना में शामिल किया, जो बेड़े के आधुनिकीकरण में एक महत्वपूर्ण कदम है। मजागॉन डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा निर्मित यह फ्रिगेट नौसेना की फ्रिगेट संख्या को 16 तक पहुंचाता है, जिससे भारत की समुद्री सुरक्षा में मजबूती आती है। यह शामिल होना रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) 2020 और रक्षा मंत्रालय (MoD) की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप है, जो स्वदेशी युद्धपोत निर्माण और रणनीतिक स्वायत्तता पर जोर देता है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: शासन – रक्षा खरीद और नीति
  • GS पेपर 3: सुरक्षा – समुद्री सुरक्षा और रक्षा आधुनिकीकरण
  • निबंध: भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और स्वदेशी रक्षा उत्पादन

नौसेना अधिग्रहणों का कानूनी और संवैधानिक ढांचा

केंद्र सरकार को रक्षा मामलों में अधिकार अनुच्छेद 246(1) और सूची I (संघ सूची) के प्रविष्टि 2 से प्राप्त है, जो नौसेना बलों पर कानून बनाने का अधिकार देता है। नौसेना अधिनियम, 1957 भारतीय नौसेना के कानूनी ढांचे को स्थापित करता है, जिसमें धारा 3 के तहत कमान भारत के राष्ट्रपति के अधीन होती है। खरीद और अधिग्रहण रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 के तहत होते हैं, जो पूर्व की रक्षा खरीद प्रक्रिया की जगह लेकर स्वदेशी निर्माण और पारदर्शिता को बढ़ावा देता है।

  • अनुच्छेद 246(1): रक्षा पर केंद्र का विधायी अधिकार
  • नौसेना अधिनियम, 1957: नौसेना की संगठनात्मक संरचना और कमान
  • रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020: मेक इन इंडिया पर जोर देते हुए खरीद का ढांचा

आर्थिक प्रभाव और स्वदेशी रक्षा निर्माण

नीलगिरी-क्लास फ्रिगेट कार्यक्रम ₹45,000 करोड़ के स्वदेशी युद्धपोत निर्माण योजना का हिस्सा है, जो मेक इन इंडिया नीति के तहत आयात निर्भरता कम करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। इन फ्रिगेट्स में 70% से अधिक स्वदेशी सामग्री होती है, जो पहले के तलवार-क्लास फ्रिगेट्स के 40% की तुलना में काफी ज्यादा है, जिससे घरेलू रक्षा निर्माण और MSME की भागीदारी बढ़ी है। जहाज निर्माण क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था में लगभग ₹50,000 करोड़ का वार्षिक योगदान देता है, जो 12% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है, और सीधे 50,000 से अधिक कुशल श्रमिकों को रोजगार देता है।

  • स्वदेशी युद्धपोत निर्माण के लिए ₹45,000 करोड़ का आवंटन (MoD बजट 2023-24)
  • नीलगिरी-क्लास में 72% स्वदेशी सामग्री, तलवार-क्लास में 40% (MoD रिपोर्ट 2023)
  • जहाज निर्माण क्षेत्र का ₹50,000 करोड़ वार्षिक योगदान और 12% CAGR (पोर्ट्स, शिपिंग और वाटरवे मंत्रालय, 2023)
  • 50,000 से अधिक कुशल श्रमिकों को रोजगार और 2025 तक $1 बिलियन निर्यात क्षमता

नीलगिरी-क्लास फ्रिगेट कार्यक्रम में शामिल प्रमुख संस्थान

भारतीय नौसेना इस बेड़े की संचालन और रणनीतिक योजना बनाने वाली मुख्य संस्था है। रक्षा मंत्रालय नीति बनाता है और खरीद की निगरानी करता है। मजागॉन डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) निर्माण का नेतृत्व करता है, जिसमें रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित स्वदेशी हथियार और सेंसर सिस्टम शामिल हैं। नौसेना डिजाइन महानिदेशालय (DGND) युद्धपोत डिजाइन और नवाचार के लिए जिम्मेदार है। भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) रक्षा व्यय और खरीद प्रक्रियाओं का लेखा-जोखा सुनिश्चित करता है।

  • भारतीय नौसेना: संचालन और रणनीतिक योजना
  • रक्षा मंत्रालय: नीति और खरीद प्राधिकारी
  • मजागॉन डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड: मुख्य निर्माताः
  • DRDO: स्वदेशी हथियार और सेंसर प्रणाली प्रदाता
  • DGND: युद्धपोत डिजाइन और नवाचार
  • CAG: रक्षा व्यय का लेखा-जोखा

तकनीकी विशेषताएं और परिचालन क्षमता

नीलगिरी-क्लास फ्रिगेट्स में उन्नत स्टील्थ तकनीक है, जो रडार क्रॉस-सेक्शन को 30% तक कम करती है, जिससे दुश्मन की निगरानी में कमी आती है और सुरक्षा बढ़ती है। ये फ्रिगेट ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों से लैस हैं, जिनकी मारक क्षमता 400 किलोमीटर है, जो भारत की आक्रामक शक्ति को बढ़ाती है। इस वर्ग में स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और सेंसर सिस्टम भी शामिल हैं, हालांकि उन्नत सोनार जैसे महत्वपूर्ण घटक अभी भी आंशिक रूप से आयातित हैं, जो आपूर्ति श्रृंखला में कमजोरियां दिखाते हैं।

  • स्टील्थ डिजाइन से रडार क्रॉस-सेक्शन में 30% कमी (भारतीय नौसेना तकनीकी रिपोर्ट 2023)
  • 400 किमी रेंज वाली ब्रह्मोस मिसाइलें (DRDO वार्षिक रिपोर्ट 2023)
  • 72% स्वदेशी सामग्री, लेकिन सोनार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों में आयात निर्भरता

तुलनात्मक विश्लेषण: नीलगिरी-क्लास बनाम चीन की टाइप 054A फ्रिगेट

पैरामीटर नीलगिरी-क्लास फ्रिगेट (भारत) टाइप 054A फ्रिगेट (चीन)
डिस्प्लेसमेंट ~6,670 टन ~4,000 टन
रेंज 7,500 नौटिकल मील 8,000 नौटिकल मील
स्टील्थ फीचर्स उन्नत स्टील्थ, रडार क्रॉस-सेक्शन में 30% कमी मध्यम स्टील्थ फीचर्स
मिसाइल सिस्टम ब्रहमोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल (400 किमी रेंज) YJ-83 एंटी-शिप मिसाइल (सबसोनिक)
स्वदेशी सामग्री 72% उच्च स्वदेशी सामग्री, लेकिन विदेशी तकनीक निर्भरता अधिक

रणनीतिक महत्ता और आगे का रास्ता

INS तरागिरी के शामिल होने से भारत की ब्लू-वाटर नौसेना क्षमता मजबूत हुई है, जिससे भारतीय महासागर क्षेत्र और उससे आगे निरंतर संचालन संभव होगा। यह कदम DAP 2020 के तहत स्वदेशी निर्माण के माध्यम से रणनीतिक स्वायत्तता बढ़ाने की रणनीति को दर्शाता है। सोनार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों में आत्मनिर्भरता की कमी को दूर करना आवश्यक है ताकि कमजोरियों को कम किया जा सके। नौसैनिक आधुनिकीकरण की गति बनाए रखने के लिए अनुसंधान एवं विकास और MSME एकीकरण में निरंतर निवेश जरूरी होगा।

  • भारत की समुद्री सुरक्षा और शक्ति प्रदर्शन को मजबूत करता है
  • रक्षा निर्माण में मेक इन इंडिया के लक्ष्यों को आगे बढ़ाता है
  • महत्वपूर्ण सोनार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों के स्वदेशीकरण की आवश्यकता को उजागर करता है
  • भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और क्षेत्रीय प्रभाव को समर्थन देता है
📝 प्रारंभिक अभ्यास
नीलगिरी-क्लास फ्रिगेट के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. इनमें 70% से अधिक स्वदेशी सामग्री होती है।
  2. ये YJ-83 एंटी-शिप मिसाइलों से लैस हैं।
  3. इनकी स्टील्थ तकनीक रडार क्रॉस-सेक्शन को लगभग 30% कम करती है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि स्वदेशी सामग्री 70% से अधिक है। कथन 2 गलत है क्योंकि नीलगिरी-क्लास ब्रह्मोस मिसाइलों का उपयोग करता है, YJ-83 नहीं। कथन 3 सही है क्योंकि स्टील्थ तकनीक रडार क्रॉस-सेक्शन को 30% तक कम करती है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) 2020 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. यह स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए रक्षा खरीद प्रक्रिया की जगह लेती है।
  2. यह सभी नौसेना अधिग्रहणों के लिए 100% स्वदेशी सामग्री अनिवार्य करती है।
  3. यह संविधान के अनुच्छेद 246(1) के तहत बनाए गए अधिकार के अंतर्गत है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि DAP 2020 ने मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के लिए DPP की जगह ली। कथन 2 गलत है क्योंकि 100% स्वदेशी सामग्री अनिवार्य नहीं है। कथन 3 सही है क्योंकि रक्षा अनुच्छेद 246(1) के अंतर्गत आती है।

मुख्य प्रश्न

छठी नीलगिरी-क्लास फ्रिगेट के शामिल होने से भारत की समुद्री सुरक्षा और स्वदेशी रक्षा निर्माण में रणनीतिक प्राथमिकताएँ कैसे प्रतिबिंबित होती हैं, इस पर चर्चा करें। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – शासन और रक्षा
  • झारखंड दृष्टिकोण: झारखंड के MSMEs नौसेना परियोजनाओं के लिए रक्षा निर्माण आपूर्ति श्रृंखलाओं में योगदान देते हैं।
  • मुख्य बिंदु: क्षेत्रीय आर्थिक विकास और रणनीतिक स्वायत्तता में स्वदेशी रक्षा उत्पादन की भूमिका पर जोर दें।
रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 क्या है?

रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 एक नीति ढांचा है जो रक्षा खरीद प्रक्रिया की जगह लेकर रक्षा अधिग्रहण को सरल, पारदर्शी और स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है।

नीलगिरी-क्लास फ्रिगेट की मुख्य विशेषताएं क्या हैं?

नीलगिरी-क्लास फ्रिगेट का डिस्प्लेसमेंट लगभग 6,670 टन है, इसमें 30% तक रडार क्रॉस-सेक्शन कम करने वाली उन्नत स्टील्थ तकनीक है, और यह 400 किमी रेंज वाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों से लैस है।

नीलगिरी-क्लास फ्रिगेट डिजाइन करने वाली संस्था कौन सी है?

नीलगिरी-क्लास फ्रिगेट के डिजाइन और नवाचार के लिए नौसेना डिजाइन महानिदेशालय (DGND) जिम्मेदार है।

नीलगिरी-क्लास फ्रिगेट में स्वदेशी सामग्री की प्रतिशतता कितनी है?

नीलगिरी-क्लास फ्रिगेट में स्वदेशी सामग्री लगभग 72% है, जो पहले के आयातित वर्गों की तुलना में काफी अधिक है।

भारत की नौसेना स्वदेशी निर्माण में कौन-कौन सी प्रमुख कमियां हैं?

उच्च स्वदेशी सामग्री के बावजूद, भारत अभी भी उन्नत सोनार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों के लिए आयात पर निर्भर है, जो तकनीकी आत्मनिर्भरता में कमजोरियां दिखाता है।

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