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INS तारागिरी के कमीशनिंग: तथ्य और रणनीतिक संदर्भ

देशी स्टेल्थ फ्रिगेट INS तारागिरी को अप्रैल 2024 में भारतीय नौसेना ने कमीशन किया, जो इस श्रेणी का सातवां जहाज है। यह युद्धपोत Mazagon Dock Shipbuilders Limited (MDL) द्वारा निर्मित है और इसमें Defence Research and Development Organisation (DRDO) द्वारा विकसित उन्नत स्टेल्थ तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। मुंबई में इस जहाज की कमीशनिंग ने भारत की मेक इन इंडिया पहल के तहत देशी रक्षा निर्माण को बढ़ावा देने के निरंतर प्रयासों को दर्शाया है। यह घटना भारत की समुद्री क्षमताओं में रणनीतिक मजबूती का प्रतीक है और नौसैनिक प्लेटफॉर्म्स में स्वावलंबन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

UPSC से प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: रक्षा - देशी रक्षा उत्पादन, नौसैनिक क्षमताएं, मेक इन इंडिया पहल
  • GS पेपर 2: राजनीति - रक्षा से संबंधित संवैधानिक प्रावधान (Article 246(1), Union List Entry 54)
  • GS पेपर 3: अर्थव्यवस्था - रक्षा बजट, विनिर्माण क्षेत्र पर प्रभाव
  • निबंध: देशी रक्षा उत्पादन के माध्यम से रणनीतिक स्वायत्तता

INS तारागिरी पर लागू कानूनी और संस्थागत ढांचा

रक्षा क्षेत्र में संसद की विधायी अधिकारिता Article 246(1) और Union List के Entry 54 से प्राप्त होती है। Defence Procurement Procedure (DPP) 2020 खरीद प्रक्रिया को नियंत्रित करता है, जिसमें देशी सामग्री और तकनीक हस्तांतरण को प्राथमिकता दी गई है। Defence Production Policy 2018 घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने का निर्देश देता है। Indian Navy Act, 1957 नौसेना के संचालन और कमीशनिंग प्रोटोकॉल को निर्धारित करता है। Defence Acquisition Council (DAC), जिसका नेतृत्व रक्षा मंत्री करते हैं, खरीद अनुमोदन की निगरानी करता है और रणनीतिक प्राथमिकताओं के अनुरूप निर्णय सुनिश्चित करता है।

  • रक्षा मंत्रालय (MoD): नीति निर्धारण, बजट आवंटन और खरीद की निगरानी।
  • भारतीय नौसेना: INS तारागिरी का अंतिम उपयोगकर्ता और ऑपरेटर, संचालन की जिम्मेदारी।
  • Mazagon Dock Shipbuilders Limited (MDL): डिजाइन सहयोग और निर्माण के लिए जिम्मेदार देशी शिपबिल्डर।
  • Defence Research and Development Organisation (DRDO): फ्रिगेट में शामिल स्टेल्थ और सेंसर तकनीक विकसित की।
  • Directorate of Naval Design (DND): नौसैनिक प्रणालियों के डिजाइन और एकीकरण की जिम्मेदारी।

INS तारागिरी के देशी निर्माण के आर्थिक पहलू

भारतीय नौसेना का 2023-24 का पूंजी बजट लगभग ₹1.4 लाख करोड़ है, जो आधुनिकीकरण में बढ़ती निवेश दर्शाता है (Economic Survey 2024)। देशी युद्धपोत निर्माण रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में प्रति वर्ष ₹15,000 करोड़ से अधिक योगदान देता है (MoD Annual Report 2023)। INS तारागिरी का निर्माण लागत लगभग ₹2,500 करोड़ आंकी गई है, जिसने MDL में स्थानीय नौसैनिक निर्माण रोजगार में 15% वृद्धि की है। मेक इन इंडिया पहल का लक्ष्य देशी रक्षा उत्पादन को 2020 के 60% से बढ़ाकर 2030 तक 75% तक पहुंचाना है, जिसमें तारागिरी जैसे प्रोजेक्ट प्रगति के उदाहरण हैं।

  • INS तारागिरी के 70% से अधिक घटक घरेलू स्रोतों से आते हैं, जिससे आयात निर्भरता कम होती है।
  • देशी उत्पादन के कारण आयातित जहाजों की तुलना में खरीद समय 20% कम होता है (MDL आंतरिक रिपोर्ट 2023)।
  • माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स और इस्पात निर्माण जैसे सहायक उद्योगों को बढ़ावा मिलता है।

INS तारागिरी की तकनीकी विशेषताएं और परिचालन क्षमता

INS तारागिरी का विस्थापन लगभग 6,670 टन है और इसकी अधिकतम गति 30 नॉट्स है (भारतीय नौसेना विनिर्देश)। इसमें स्टेल्थ तकनीक शामिल है जो पिछले वर्गों की तुलना में रडार क्रॉस सेक्शन को 30% तक कम करती है (DRDO रिपोर्ट 2023)। यह फ्रिगेट 400 किलोमीटर रेंज वाले ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल से लैस है, जो हमले की क्षमता बढ़ाता है (BrahMos Aerospace डेटा)। इसका बहु-भूमिका डिजाइन वायु, सतह और पनडुब्बी रोधी युद्ध को समर्थन देता है, जो भारत की रणनीतिक प्राथमिकता को दर्शाता है।

  • उन्नत सेंसर सूट बेहतर स्थिति जागरूकता और लक्ष्य ट्रैकिंग सक्षम करता है।
  • स्टेल्थ विशेषताओं में रडार-शोषित सामग्री और जहाज के डिजाइन में सुधार शामिल हैं।
  • देशी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों का स्टेल्थ तकनीक के साथ समाकलन।

तुलनात्मक विश्लेषण: INS तारागिरी बनाम चीन का Type 054A फ्रिगेट

विशेषताINS तारागिरी (भारत)Type 054A (चीन)
विस्थापन6,670 टन4,000 टन
कमीशनिंग वर्ष20242008
प्राथमिक भूमिकाबहु-भूमिका (वायु, सतह, पनडुब्बी रोधी)मुख्य रूप से पनडुब्बी रोधी युद्ध
स्टेल्थ तकनीकरडार क्रॉस सेक्शन में 30% कमीमूलभूत स्टेल्थ विशेषताएं
मिसाइल क्षमताब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल (400 किमी रेंज)YJ-83 एंटी-शिप मिसाइल (सबसोनिक)
देशी सामग्री70% से अधिकउच्च, लेकिन कुछ विदेशी घटकों पर निर्भर

भारत के रक्षा शिपबिल्डिंग इकोसिस्टम की चुनौतियां

प्रगति के बावजूद, भारत को आपूर्ति श्रृंखला के टूटने और उन्नत माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स के घरेलू उत्पादन की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जो युद्धपोत प्रणालियों के लिए जरूरी हैं। इससे पूर्ण पैमाने पर देशी उत्पादन में बाधाएं आती हैं और तकनीक अवशोषण में देरी होती है, खासकर दक्षिण कोरिया और जापान जैसे वैश्विक नेताओं की तुलना में। रक्षा औद्योगिक आधार का विखंडित होना और प्रमुख घटकों के लिए आयात पर निर्भरता मुख्य अड़चन बनी हुई है। इन कमियों को दूर करना नौसैनिक आधुनिकीकरण और रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखने के लिए जरूरी है।

  • छोटे और मध्यम उद्यमों को रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाओं में शामिल करने की आवश्यकता।
  • देशी माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर के लिए अनुसंधान एवं विकास में निवेश।
  • विशेषीकृत नौसैनिक प्लेटफॉर्म निर्माण के लिए कौशल विकास को बढ़ावा।

महत्त्व और आगे का रास्ता

INS तारागिरी का कमीशनिंग भारत की रणनीतिक समुद्री स्वावलंबन और परिचालन तत्परता को मजबूत करता है। यह DPP 2020 और Defence Production Policy 2018 जैसे नीतिगत ढांचों की प्रभावशीलता को साबित करता है, जो देशी क्षमताओं को बढ़ावा देते हैं। इस परियोजना से रोजगार, तकनीकी विकास को बढ़ावा मिलता है और विदेशी निर्भरता कम होती है। भविष्य में आपूर्ति श्रृंखला समेकन, उन्नत तकनीक विकास और निर्यात संभावनाओं पर ध्यान देना होगा ताकि भारत को वैश्विक नौसैनिक शिपबिल्डिंग हब के रूप में स्थापित किया जा सके।

  • महत्वपूर्ण उपप्रणालियों और माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स के लिए देशी R&D निवेश का विस्तार।
  • उत्पादन और नवाचार के पैमाने के लिए सार्वजनिक-निजी साझेदारी को मजबूत करना।
  • INS तारागिरी के प्लेटफॉर्म का उपयोग निर्यातोन्मुख नौसैनिक शिपबिल्डिंग के लिए करना।
  • MoD, DRDO और शिपयार्ड्स के बीच समन्वय को बढ़ाना।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
INS तारागिरी के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. INS तारागिरी भारतीय नौसेना द्वारा कमीशन किया गया पहला देशी स्टेल्थ फ्रिगेट है।
  2. इसमें 400 किमी रेंज वाले ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल शामिल हैं।
  3. इसके 70% से अधिक घटक देशी स्रोतों से आते हैं।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि INS तारागिरी देशी स्टेल्थ फ्रिगेट वर्ग का सातवां जहाज है, पहला नहीं। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि इसमें ब्रह्मोस मिसाइलें हैं और 70% से अधिक घटक देशी हैं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
Defence Procurement Procedure (DPP) 2020 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. DPP 2020 सभी रक्षा खरीद के लिए न्यूनतम 75% देशी सामग्री अनिवार्य करता है।
  2. DPP 2020 तकनीक हस्तांतरण और देशी निर्माण पर जोर देता है।
  3. DPP 2020 का निर्माण Article 246(1) और Union List के Entry 54 के तहत किया गया है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि DPP 2020 सभी खरीद के लिए 75% देशी सामग्री अनिवार्य नहीं करता, बल्कि इसे प्रगतिशील रूप से बढ़ावा देता है। कथन 2 और 3 सही हैं।

मेन प्रश्न

देशी स्टेल्थ फ्रिगेट INS तारागिरी के कमीशनिंग से भारत की रणनीतिक समुद्री स्वावलंबन और रक्षा निर्माण में मेक इन इंडिया पहल की सफलता कैसे प्रदर्शित होती है, इस पर चर्चा करें। (250 शब्द)

INS तारागिरी का भारत की नौसैनिक क्षमताओं में क्या महत्व है?

INS तारागिरी उन्नत स्टेल्थ तकनीक, ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल और बहु-भूमिका संचालन लचीलापन के साथ भारत की नौसैनिक क्षमताओं को बढ़ाता है। यह समुद्री सुरक्षा को मजबूत करता है और देशी युद्धपोत निर्माण में प्रगति को दर्शाता है।

INS तारागिरी के निर्माण और कमीशनिंग में मुख्य संस्थान कौन-कौन से शामिल हैं?

मुख्य संस्थानों में Mazagon Dock Shipbuilders Limited (MDL) निर्माण के लिए, Defence Research and Development Organisation (DRDO) स्टेल्थ तकनीक के लिए, भारतीय नौसेना ऑपरेटर के रूप में, रक्षा मंत्रालय नीति और खरीद के लिए, और Directorate of Naval Design डिजाइन समाकलन के लिए शामिल हैं।

Defence Procurement Procedure (DPP) 2020 देशी रक्षा उत्पादन को कैसे समर्थन देता है?

DPP 2020 घरेलू स्रोतों से खरीद को प्राथमिकता देकर, तकनीक हस्तांतरण को प्रोत्साहित करके और रक्षा खरीद में देशी सामग्री के लिए प्रगतिशील लक्ष्य निर्धारित करके देशी निर्माण को बढ़ावा देता है।

देशी रक्षा शिपबिल्डिंग में भारत को मुख्य चुनौतियां क्या हैं?

चुनौतियों में आपूर्ति श्रृंखला का विखंडन, उन्नत माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स का सीमित घरेलू उत्पादन, तकनीक अवशोषण में देरी और SMEs को रक्षा निर्माण में बेहतर शामिल करने की आवश्यकता शामिल है।

INS तारागिरी की तुलना चीन के Type 054A फ्रिगेट से कैसे की जा सकती है?

INS तारागिरी का विस्थापन अधिक (6,670 टन बनाम 4,000 टन), बेहतर स्टेल्थ तकनीक, ब्रह्मोस मिसाइल और बहु-भूमिका क्षमता है, जबकि Type 054A मुख्य रूप से पनडुब्बी रोधी युद्ध पर केंद्रित है, कम उन्नत स्टेल्थ और सबसोनिक मिसाइलों के साथ।

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