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भारत–वियतनाम उन्नत समग्र रणनीतिक साझेदारी 2026 का अवलोकन

2026 में वियतनामी राष्ट्रपति के भारत के आधिकारिक दौरे के दौरान भारत और वियतनाम ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को उन्नत समग्र रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर पहुंचाया। यह कदम 2007 में स्थापित रणनीतिक साझेदारी और 2016 की समग्र रणनीतिक साझेदारी पर आधारित है, जो भू-राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा क्षेत्रों में गहरे संबंधों को दर्शाता है। यह साझेदारी खासकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में, दक्षिण चीन सागर के तनाव और बदलते क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे के बीच, साझा हितों की ओर इशारा करती है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS II: अंतरराष्ट्रीय संबंध – भारत के ASEAN देशों के साथ द्विपक्षीय संबंध, एक्ट ईस्ट नीति, इंडो-पैसिफिक रणनीति
  • GS III: सुरक्षा – समुद्री सुरक्षा सहयोग, रक्षा साझेदारी
  • निबंध: दक्षिण पूर्व एशिया में भारत की रणनीतिक साझेदारियां

भारत–वियतनाम संबंधों का ऐतिहासिक और राजनयिक सफर

भारत और वियतनाम के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध हैं, जिनमें बौद्ध धर्म और हिंदू प्रभाव खास तौर पर चंपा सभ्यता के माध्यम से देखे जा सकते हैं। आधुनिक राजनयिक संबंध 1972 में स्थापित हुए, जब वियतनाम ने भारत के औपनिवेशिक विरोध का समर्थन किया और भारत ने वियतनाम के युद्धोत्तर पुनर्निर्माण में मदद की। भारत पहला ASEAN देश था जिसने 2007 में वियतनाम के साथ रणनीतिक साझेदारी शुरू की, जिसे 2016 में समग्र रणनीतिक साझेदारी और 2026 में उन्नत समग्र रणनीतिक साझेदारी में बढ़ाया गया।

  • 1972: राजनयिक संबंध स्थापित
  • 2007: रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत
  • 2016: समग्र रणनीतिक साझेदारी में उन्नयन
  • 2026: उन्नत समग्र रणनीतिक साझेदारी का निर्माण

द्विपक्षीय संबंधों का कानूनी और संवैधानिक ढांचा

भारत–वियतनाम संबंधों का संचालन विदेश मंत्रालय (MEA) के तहत राजनयिक प्रोटोकॉल के अनुसार होता है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों के अनुरूप है। भारतीय संविधान में विदेश नीति का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, लेकिन Article 246 और संघ सूची की Entry 10 संसद को विदेश मामलों पर विधायी अधिकार प्रदान करती है। द्विपक्षीय व्यापार और सहयोग को सुगम बनाने वाले प्रमुख कानूनी उपकरणों में Foreign Trade (Development and Regulation) Act, 1992, Customs Act, 1962, और Double Taxation Avoidance Agreement (2008) शामिल हैं।

  • MEA राजनयिक और रणनीतिक संवाद की देखरेख करता है
  • विदेश व्यापार अधिनियम द्विपक्षीय वाणिज्य को नियंत्रित करता है
  • कस्टम्स अधिनियम आयात-निर्यात प्रक्रिया संभालता है
  • डबल टैक्सेशन टालने वाला समझौता निवेश और व्यापार को प्रोत्साहित करता है

आर्थिक एकीकरण और व्यापार की दिशा

भारत और वियतनाम के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2015 में $8 बिलियन से बढ़कर 2025 में लगभग $16 बिलियन हो गया है (MEA, 2025)। दोनों देश 2030 तक व्यापार को $25 बिलियन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखते हैं, जो उनके पूरक निर्यात उत्पादों से संभव होगा। भारत दवाइयां, इंजीनियरिंग उत्पाद, अंगूर और अनार निर्यात करता है, जबकि वियतनाम इलेक्ट्रॉनिक्स, वस्त्र, और उष्णकटिबंधीय फल जैसे ड्यूरियन और पोमेलो निर्यात करता है। वियतनाम भारत का सिंगापुर के बाद सबसे बड़ा ASEAN व्यापारिक साझेदार है, और पिछले पांच वर्षों में औसत वार्षिक व्यापार वृद्धि दर 10% रही है (India Economic Survey 2024)।

  • व्यापार मात्रा: $16 बिलियन (2025), लक्ष्य $25 बिलियन (2030)
  • भारत के प्रमुख निर्यात: दवाइयां, इंजीनियरिंग उत्पाद, अंगूर, अनार
  • वियतनाम के प्रमुख निर्यात: इलेक्ट्रॉनिक्स, वस्त्र, उष्णकटिबंधीय फल (ड्यूरियन, पोमेलो)
  • व्यापार वृद्धि दर: 10% वार्षिक (भारत–वियतनाम) बनाम 6% (भारत–इंडोनेशिया)

रक्षा और समुद्री सुरक्षा सहयोग

रक्षा सहयोग उन्नत समग्र रणनीतिक साझेदारी का मूल है। 2012 से भारत और वियतनाम वार्षिक नौसैनिक अभ्यास IN-VN CORPAT आयोजित कर रहे हैं, जो समुद्री क्षेत्र की जागरूकता और खोज एवं बचाव ऑपरेशनों पर केंद्रित हैं। सहयोग में संयुक्त सैन्य अभ्यास, हाइड्रोग्राफी, नौसैनिक बंदरगाह दौरे, वायुसेना सहभागिता और रक्षा उद्योग में संयुक्त अनुसंधान एवं सह-उत्पादन भी शामिल हैं। यह साझेदारी MAHASAGAR Vision (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) के तहत क्षेत्रीय सुरक्षा के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

  • 2012 से वार्षिक नौसैनिक अभ्यास IN-VN CORPAT
  • संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण और हाइड्रोग्राफी सहयोग
  • रक्षा उद्योग सहयोग: संयुक्त अनुसंधान, सह-उत्पादन
  • दक्षिण चीन सागर के तनाव के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत–वियतनाम बनाम भारत–इंडोनेशिया रणनीतिक साझेदारी

पहलूभारत–वियतनामभारत–इंडोनेशिया
रणनीतिक साझेदारी की स्थापना20072011
मुख्य क्षेत्ररक्षा, समुद्री सुरक्षा, इंडो-पैसिफिक रणनीतिआर्थिक सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, अवसंरचना
पिछले 5 वर्षों का व्यापार वृद्धि दरलगभग 10% वार्षिकलगभग 6% वार्षिक
2025 का व्यापार आयतन$16 बिलियनलगभग $20 बिलियन
मुक्त व्यापार समझौता (FTA) स्थितिकोई औपचारिक FTA नहींASEAN–India FTA में वस्तुएं शामिल, सीमित सेवाएं

महत्वपूर्ण कमी: औपचारिक मुक्त व्यापार समझौते का अभाव

मजबूत रणनीतिक और आर्थिक संबंधों के बावजूद भारत और वियतनाम के बीच कोई औपचारिक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) नहीं है। इससे खासकर सेवा, निवेश और बौद्धिक संपदा क्षेत्रों में द्विपक्षीय व्यापार की पूरी क्षमता का उपयोग नहीं हो पाता है। चीन ने ASEAN देशों के साथ व्यापक FTA कर आर्थिक एकीकरण को और मजबूत किया है, जो भारत के वियतनाम के साथ व्यापार के लक्ष्यों के लिए चुनौती है। इस कमी को दूर करना 2030 तक $25 बिलियन के व्यापार लक्ष्य को हासिल करने के लिए जरूरी है।

  • भारत–वियतनाम के बीच कोई द्विपक्षीय FTA नहीं
  • सेवा और निवेश क्षेत्रों में विस्तार सीमित
  • चीन के ASEAN के साथ FTA से प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त
  • Act East नीति के तहत समझौते की संभावना

महत्व और आगे का रास्ता

  • 2026 में उन्नयन भारत की रणनीतिक मंशा को दर्शाता है कि वह इंडो-पैसिफिक में चीन के प्रभाव को संतुलित करने के लिए वियतनाम के साथ अपने संबंध मजबूत करना चाहता है।
  • रक्षा सहयोग समुद्री क्षेत्र की जागरूकता और क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को बेहतर बनाता है।
  • आर्थिक एकीकरण के लिए FTA जैसे संस्थागत तंत्र आवश्यक हैं ताकि व्यापार और निवेश की संभावनाएं खुल सकें।
  • वियतनाम की ASEAN सदस्यता का लाभ लेकर भारत अपनी क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और बहुपक्षीय भागीदारी बढ़ा सकता है।
  • दुर्लभ पृथ्वी तत्वों, डिजिटल भुगतान और शहरी शासन में सहयोग पारंपरिक क्षेत्रों से आगे जाकर साझेदारी को विविधता प्रदान कर सकता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत–वियतनाम द्विपक्षीय संबंधों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. भारत पहला ASEAN देश था जिसने 2007 में वियतनाम के साथ रणनीतिक साझेदारी स्थापित की।
  2. उन्नत समग्र रणनीतिक साझेदारी 2016 में स्थापित हुई थी।
  3. भारत और वियतनाम के बीच एक औपचारिक मुक्त व्यापार समझौता है।
  • aकेवल 1
  • bकेवल 1 और 2
  • cकेवल 2 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि भारत पहला ASEAN देश था जिसने 2007 में वियतनाम के साथ रणनीतिक साझेदारी स्थापित की। कथन 2 गलत है क्योंकि उन्नत समग्र रणनीतिक साझेदारी 2016 में नहीं बल्कि 2026 में स्थापित हुई। कथन 3 गलत है क्योंकि भारत और वियतनाम के बीच कोई औपचारिक मुक्त व्यापार समझौता नहीं है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत–वियतनाम रक्षा सहयोग के बारे में निम्नलिखित पर विचार करें:
  1. वार्षिक नौसैनिक अभ्यास IN-VN CORPAT 2012 में शुरू हुए।
  2. रक्षा सहयोग में संयुक्त अनुसंधान और सह-उत्पादन शामिल है।
  3. भारत–वियतनाम रक्षा संबंध मुख्य रूप से आतंकवाद विरोधी अभियान पर केंद्रित हैं।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है; IN-VN CORPAT नौसैनिक अभ्यास 2012 में शुरू हुए। कथन 2 सही है; रक्षा सहयोग में संयुक्त अनुसंधान और सह-उत्पादन शामिल है। कथन 3 गलत है; रक्षा संबंध मुख्य रूप से समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक रणनीति पर केंद्रित हैं, न कि आतंकवाद विरोधी अभियानों पर।

मुख्य प्रश्न

2026 में स्थापित भारत–वियतनाम उन्नत समग्र रणनीतिक साझेदारी के रणनीतिक और आर्थिक महत्व पर चर्चा करें। यह साझेदारी भारत की एक्ट ईस्ट नीति और इंडो-पैसिफिक रणनीति के साथ कैसे मेल खाती है? (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: GS पेपर II – अंतरराष्ट्रीय संबंध और सुरक्षा
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड के खनिज संसाधन और औद्योगिक आधार वियतनाम के साथ बढ़ते व्यापार और तकनीकी सहयोग से लाभान्वित हो सकते हैं, खासकर दुर्लभ पृथ्वी तत्वों और डिजिटल शासन में।
  • मुख्य बिंदु: उत्तर तैयार करते समय भारत–वियतनाम संबंधों के क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक अवसरों पर झारखंड जैसे संसाधन-समृद्ध राज्यों पर प्रभाव को उजागर करें।
भारत और वियतनाम के बीच आर्थिक सहयोग के प्रमुख क्षेत्र कौन से हैं?

प्रमुख क्षेत्र हैं: दवाइयां, इंजीनियरिंग उत्पाद, कृषि (अंगूर, अनार), इलेक्ट्रॉनिक्स, वस्त्र, और उष्णकटिबंधीय फल (ड्यूरियन, पोमेलो)। सहयोग दुर्लभ पृथ्वी तत्वों, डिजिटल भुगतान और शहरी शासन तक भी फैला हुआ है।

भारत–वियतनाम रणनीतिक साझेदारी कब स्थापित हुई थी?

भारत–वियतनाम रणनीतिक साझेदारी पहली बार 2007 में स्थापित हुई थी, जो दोनों देशों के बीच औपचारिक रणनीतिक सहयोग की शुरुआत थी।

क्या भारत का वियतनाम के साथ मुक्त व्यापार समझौता है?

नहीं, भारत और वियतनाम के बीच फिलहाल कोई द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौता नहीं है, जो व्यापार वृद्धि को सीमित करता है।

IN-VN CORPAT नौसैनिक अभ्यास का महत्व क्या है?

IN-VN CORPAT वार्षिक नौसैनिक अभ्यास हैं जो 2012 में शुरू हुए, ये समुद्री सुरक्षा सहयोग, खोज और बचाव ऑपरेशनों को बढ़ावा देते हैं और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करते हैं।

भारतीय संविधान के कौन से प्रावधान संसद को विदेश मामलों पर अधिकार देते हैं?

भारतीय संविधान के Article 246 और संघ सूची की Entry 10 संसद को विदेश मामलों पर विधायी अधिकार प्रदान करती है।

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