अपडेट

भारत ने 2023 में पेरिस समझौते के तहत अपने राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDC) को अपडेट किया, जिसमें 2021 के COP26 में दिए गए वादों को दोहराया गया। नए लक्ष्यों में 2030 तक कुल विद्युत उत्पादन क्षमता का 50% गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त करना और 2005 के स्तर की तुलना में GDP की उत्सर्जन तीव्रता में 45% की कमी शामिल है। सरकार ने 2070 तक शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है, जो विकास की प्राथमिकताओं के साथ नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार का संतुलित दृष्टिकोण दर्शाता है।

UPSC Relevance

  • GS Paper 3: पर्यावरण और पारिस्थितिकी – जलवायु परिवर्तन, अंतरराष्ट्रीय समझौते, ऊर्जा क्षेत्र
  • GS Paper 2: राजनीति और शासन – पर्यावरण से जुड़ी संवैधानिक प्रावधान, अंतरराष्ट्रीय संधियाँ
  • निबंध: जलवायु परिवर्तन और सतत विकास

जलवायु कार्रवाई के लिए कानूनी और संवैधानिक ढांचा

भारतीय संविधान के Article 253 के तहत संसद को पेरिस समझौते जैसे अंतरराष्ट्रीय संधियों को लागू करने के लिए कानून बनाने का अधिकार प्राप्त है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 पर्यावरणीय नियमों के लिए मुख्य कानूनी आधार है। ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 (जिसमें 2010 में संशोधन हुआ) ऊर्जा दक्षता मानकों को अनिवार्य करता है। 2008 में शुरू हुआ राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC) राष्ट्रीय सौर मिशन जैसे अभियानों के माध्यम से जलवायु नीति को संस्थागत किया। फिलहाल जलवायु परिवर्तन अधिनियम पर चर्चा जारी है, लेकिन वह पारित नहीं हुआ है, जिससे जलवायु प्रतिबद्धताओं का कानूनी पालन सीमित है।

  • भारत पेरिस समझौते (2015) का हस्ताक्षरकर्ता है और UNFCCC को समय-समय पर NDC प्रस्तुत करता है।
  • राष्ट्रीय कार्बन मूल्य निर्धारण तंत्र या कानूनी रूप से बाध्यकारी उत्सर्जन सीमा का अभाव निजी क्षेत्र की भागीदारी में बाधा है।
  • राज्यों की भूमिका सीमित लेकिन बढ़ रही है, खासकर नवीकरणीय ऊर्जा और उत्सर्जन कटौती नीतियों के कार्यान्वयन में।

भारत के जलवायु वादों के आर्थिक पहलू

भारत 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित विद्युत क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य रखता है, जबकि मार्च 2024 तक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 175 GW तक पहुंच चुकी है (CEA डेटा)। नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश 2023 में $20 बिलियन रहा (IEA रिपोर्ट), जिसे 2023-24 के बजट में ₹19,500 करोड़ आवंटन से समर्थन मिला। नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 12 लाख से अधिक लोग रोजगार पा रहे हैं, जो रोजगार सृजन की संभावना दिखाता है। हालांकि, कोयला अभी भी लगभग 70% बिजली उत्पादन का हिस्सा है, जो संक्रमण की चुनौतियों को दर्शाता है। ग्रीन बॉन्ड बाजार 2023 में $12 बिलियन तक बढ़ा (SEBI), जो स्वच्छ ऊर्जा के लिए वित्तपोषण में वृद्धि का संकेत है लेकिन पर्याप्त नहीं है।

  • ऊर्जा मांग 2030 तक 4.5% वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ने का अनुमान है (IEA India Energy Outlook 2023), जिससे ऊर्जा अवसंरचना पर दबाव बढ़ेगा।
  • बजटीय आवंटन चीन के ट्रिलियन-डॉलर ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं की तुलना में सीमित है।
  • वित्तपोषण की कमी और तकनीकी बाधाएं ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण समाधानों के तेजी से विस्तार में रुकावट हैं।

जलवायु नीति और कार्यान्वयन के प्रमुख संस्थान

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) नवीकरणीय ऊर्जा नीतियों का निर्माण और कार्यान्वयन करता है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) विद्युत क्षेत्र की योजना और डेटा विश्लेषण प्रदान करता है। नीति आयोग जलवायु नीति को सतत विकास लक्ष्यों के साथ समन्वयित करता है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ग्रीन बॉन्ड जैसे हरित वित्त उपकरणों का नियमन करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत UNFCCC के साथ जुड़ा है और नीति निर्धारण के लिए IPCC के वैज्ञानिक आकलनों पर भरोसा करता है।

  • केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय की कमी जलवायु लक्ष्यों के कार्यान्वयन को धीमा करती है।
  • संस्थागत क्षमता की कमी ऊर्जा दक्षता और उत्सर्जन मानकों के पालन को सीमित करती है।
  • नियमों की अनिश्चितता के कारण निजी क्षेत्र की भागीदारी कम है।

मात्रात्मक लक्ष्य और वर्तमान स्थिति

पैरामीटरलक्ष्यवर्तमान स्थिति (2024)स्रोत
गैर-जीवाश्म ईंधन स्थापित क्षमता2030 तक 500 GW175 GWCEA रिपोर्ट 2024
उत्सर्जन तीव्रता में कमी2030 तक 2005 के स्तर से 45% कमीताजा आंकड़े प्रतीक्षितUNFCCC 2023
शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन2070COP26 में घोषितCOP26 घोषणा 2021
बिजली उत्पादन में कोयले का हिस्सा2030 तक काफी कम करनालगभग 70%CEA 2023
नवीकरणीय ऊर्जा निवेशवार्षिक वृद्धि2023 में $20 बिलियनIEA रिपोर्ट 2024

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत बनाम चीन

पहलूभारतचीन
शुद्ध-शून्य लक्ष्य वर्ष20702060
नवीकरणीय क्षमता (2024)175 GW1,200 GW
वार्षिक स्वच्छ ऊर्जा निवेश$20 बिलियन$500+ बिलियन
कार्बन मूल्य निर्धारण तंत्रअभावराष्ट्रीय ETS सक्रिय
ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर बजट₹19,500 करोड़ (~$2.5 बिलियन)$1 ट्रिलियन से अधिक (14वां पंचवर्षीय योजना)

चीन का जल्दी शुद्ध-शून्य लक्ष्य और विशाल निवेश उसकी अधिक वित्तीय क्षमता और औद्योगिक आधार को दर्शाते हैं। भारत का बाद में लक्ष्य विकास संबंधी बाधाओं को मान्यता देता है, लेकिन वैश्विक उत्सर्जन कटौती प्रयासों में पीछे रहने का खतरा है। भारत में कार्बन मूल्य निर्धारण तंत्र का अभाव चीन के सक्रिय उत्सर्जन व्यापार प्रणाली से अलग है, जो उत्सर्जन कम करने के लिए प्रोत्साहन देता है।

कार्यान्वयन चुनौतियां और महत्वपूर्ण अंतर

भारत के जलवायु वादों के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी ढांचे का अभाव उनकी पालना और जवाबदेही को सीमित करता है। कार्बन मूल्य निर्धारण तंत्र की अनुपस्थिति बाज़ार आधारित उत्सर्जन कटौती में देरी करती है। वित्तपोषण की कमी और तकनीकी बाधाएं नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार और ग्रिड एकीकरण को धीमा करती हैं। केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय असमान है, जिससे नीति संगति प्रभावित होती है। ऊर्जा सुरक्षा और रोजगार की वजह से कोयले पर निर्भरता बनी हुई है, जो संक्रमण को जटिल बनाती है।

  • नियमों की अनिश्चितता और स्पष्ट कार्बन लागत संकेतों के अभाव में निजी निवेश सीमित है।
  • नवीकरणीय ऊर्जा की अनियमितता और ऊर्जा भंडारण समाधानों के लिए तेज नवाचार और तैनाती जरूरी है।
  • कोयला आधारित क्षेत्रों में रोजगार हानि से सामाजिक न्याय की चिंताएं उत्पन्न होती हैं।

आगे का रास्ता: नीति समन्वय और वित्तपोषण को मजबूत बनाना

  • जलवायु परिवर्तन अधिनियम पारित कर NDC प्रतिबद्धताओं और उत्सर्जन लक्ष्यों को कानूनी मजबूती देना।
  • चरणबद्ध कार्बन मूल्य निर्धारण तंत्र लागू कर निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना।
  • बजटीय आवंटन बढ़ाना और ग्रीन बॉन्ड के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा निवेश को बढ़ाना।
  • केंद्र-राज्य समन्वय के लिए संस्थागत तंत्र और क्षमता निर्माण को मजबूत करना।
  • ग्रीन हाइड्रोजन, ऊर्जा भंडारण और ग्रिड आधुनिकीकरण में तकनीकी हस्तांतरण को बढ़ावा देना।
  • कोयला आधारित क्षेत्रों में लक्षित सामाजिक सुरक्षा और पुनः कौशल विकास कार्यक्रम लागू करना।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत के जलवायु प्रतिबद्धताओं के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. भारत 2050 तक शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन हासिल करना चाहता है।
  2. राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना पेरिस समझौते से पहले शुरू हुई थी।
  3. Article 253 संसद को अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संधियों को लागू करने का अधिकार देता है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि भारत का शुद्ध-शून्य लक्ष्य वर्ष 2070 है, 2050 नहीं। कथन 2 सही है; NAPCC 2008 में शुरू हुई थी, जो 2015 के पेरिस समझौते से पहले था। कथन 3 सही है; Article 253 संसद को अंतरराष्ट्रीय संधियाँ लागू करने का अधिकार देता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. भारत की बिजली उत्पादन में कोयले का हिस्सा 50% से कम है।
  2. मार्च 2024 तक भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 175 GW पहुंच चुकी है।
  3. नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ग्रीन बॉन्ड बाजार का नियमन करता है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (a)
कथन 1 गलत है; कोयले का हिस्सा लगभग 70% है। कथन 2 सही है, CEA 2024 के अनुसार। कथन 3 गलत है; ग्रीन बॉन्ड बाजार का नियमन SEBI करता है, MNRE नहीं।

मुख्य प्रश्न

भारत के नए जलवायु लक्ष्यों का उसकी विकास प्राथमिकताओं और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के संदर्भ में आलोचनात्मक विश्लेषण करें। प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा करें और 2070 तक शुद्ध-शून्य लक्ष्य को प्रभावी ढंग से प्राप्त करने के लिए उपाय सुझाएं।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 3 – पर्यावरण और पारिस्थितिकी, ऊर्जा क्षेत्र
  • झारखंड का नजरिया: राष्ट्रीय कोयला चरण-डाउन प्रतिबद्धताओं के कारण झारखंड के कोयला खनन उद्योग पर संक्रमण का दबाव; राज्य में सौर और जल परियोजनाओं सहित नवीकरणीय ऊर्जा की संभावनाएं।
  • मुख्य बिंदु: कोयला संक्रमण के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव, नवीकरणीय ऊर्जा में अवसर और राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप राज्य नीतियों की भूमिका पर उत्तर तैयार करें।
भारत के पेरिस समझौते के तहत मुख्य नए जलवायु लक्ष्य क्या हैं?

भारत के नए लक्ष्य 2030 तक कुल विद्युत क्षमता का 50% गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त करना, 2005 के स्तर से GDP की उत्सर्जन तीव्रता में 45% कमी और 2070 तक शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन हासिल करना शामिल हैं।

भारत को अंतरराष्ट्रीय जलवायु संधियाँ लागू करने का संवैधानिक अधिकार कौन देता है?

Article 253 भारतीय संसद को पेरिस समझौते जैसे अंतरराष्ट्रीय संधियाँ लागू करने के लिए कानून बनाने का अधिकार देता है।

भारत की जलवायु कार्रवाई में MNRE की क्या भूमिका है?

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) नवीकरणीय ऊर्जा विकास को बढ़ावा देने और संबंधित जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने के लिए नीतियां बनाता और कार्यक्रम लागू करता है।

भारत का शुद्ध-शून्य लक्ष्य 2070 क्यों है?

भारत का 2070 का लक्ष्य उसके विकास प्राथमिकताओं, ऊर्जा सुरक्षा चिंताओं और विकसित देशों की तुलना में लंबी संक्रमण अवधि की जरूरत को दर्शाता है।

भारत के जलवायु लक्ष्यों को लागू करने में प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं?

मुख्य चुनौतियों में कानूनी बाध्यता का अभाव, कार्बन मूल्य निर्धारण न होना, वित्तपोषण की कमी, कोयले पर निर्भरता और केंद्र-राज्य समन्वय की समस्याएं शामिल हैं।

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